चेहरे पर नजर आने वाली झुर्रियां बढ़ती उम्र की ओर इशारा करती है. अक्सर लोग झुर्रियों की परेशानियों को कम करने के लिए तरह-तरह की क्रीम और सीरम का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इससे अधिक समय तक झुर्रियों को छुपाना मुश्किल होता है. ऐसे में झुर्रियों को कम करने के लिए इसके बारे में जानना जरूरी है, ताकि इसके कारणों को जानकर सही इलाज किया जा सके. मुख्य रूप से झुर्रियों के 7 प्रकार माने गए हैं.
आज इस लेख में आप झुर्रियों के सभी प्रकार और उसके समाधान के बारे में विस्तार से जानेंगे -
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झुर्रियां क्या हैं?
झुर्रियां स्किन पर बनने वाली रेखाएं होती हैं. यह अक्सर बढ़ती उम्र के साथ स्किन पर स्वाभाविक रूप से नजर आने लगती हैं. यह स्किन पर सिलवटों, क्रीज और लकीरों के रूप में नजर आती हैं. अक्सर लोगों के चेहरे, गर्दन और बाहों पर झुर्रियां नजर आती हैं.
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झुर्रियों के प्रकार
चेहरे के अलग-अलग हिस्सों पर नजर आने वाली झुर्रियों को अलग-अलग नाम दिए गए हैं, जो मुख्य रूप से 7 तरह की होती हैं -
- माथे की झुर्रियां - माथे की झुर्रियां चेहरे के टी-जोन के ऊपर होरिजेंटल रूप में होती हैं. ये रेखाएं आमतौर पर माथे पर तनाव आने पर भी नजर आती हैं.
- वरी लाइन - यह लाइन आइब्रो के बीज में नजर आती हैं, जो देखने में 11 की तरह लगती हैं.
- बनीज - नाक के पुल से आंखों के बीच होरिजेंटल रूप में होने वाली झुर्रियां.
- क्रो फीट - आंखों के बाहरी कोनों पर निकलने वाली झुर्रियां.
- लाफ लाइन - इसे नसोलेबियल फोल्ड भी कहा जाता है. यह लिप्स के पास नजर आती हैं.
- लिप्स लाइन - यह मुंह के चारों ओर वर्टिकल हैच बनाती हैं, जिसे लिप्स पर बनने वाली झुर्रियां कहा जाता है.
- मैरीनेट लाइन - ठोड़ी के पास वर्टिकल रूप में बनने वाली झुर्रियों को मैरीनेट लाइन कहा जाता है.
इसके अलावा, स्किन की परत के हिसाब से झुर्रियों को दो भागों में बांटा गया है -
- डायनेमिक रिंकल्स - ऐसा बार-बार चेहरे की मुद्राओं को बदलने के कारण होता है. उदाहरण के लिए - हंसना या फिर आश्चर्य की मुद्रा में चेहरे पर झुर्रियां आने की स्थिति को डायनेमिक रिंकल्स कहा जाता है.
- स्टेटिक रिंकल्स - स्टेटिक रिंकल्स लंबे समय तक चेहरे की एक ही फेशियल एक्सप्रेशन की वजह से होते हैं. इसके अलावा, स्किन की लोच कम होने की वजह से आने वाली रिंकल्स की स्थिति को स्टेटिक रिंकल्स कहा जाता है.
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झुर्रियों को कम करने का इलाज
झुर्रियों को कम करने के लिए मार्केट में तरह-तरह के उपचार मौजूद हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में -
- एंटी-रिंकल्स क्रीम - एंटी-रिंकल्स क्रीम की मदद से झुर्रियों की परेशानियों को कम किया जा सकता है. इस क्रीम से स्किन में कोलेजन प्रोटीन के उत्पादन को बढ़ावा मिलता है, जिससे झुर्रियां कम हो सकती हैं.
- केमिकल पिल्स - समय से पहले चेहरे से बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करने के लिए माइक्रोडर्माब्रेशन, डर्माब्रेशन और केमिकल पिल्स इत्यादि की मदद ली जा सकती है, जिससे झुर्रियों को कम करने में मदद मिल सकती है.
- लेजर स्किन रीसर्फेसिंग - इसकी मदद से स्किन की झुर्रियों को कम किया जा सकता है. साथ ही यह एक्ने की समस्याओं से भी छुटकारा दिलाने में प्रभावी है.
- बोटुलिनम टॉक्सिन टाइप ए - इस इंजेक्शन थेरेपी की मदद से स्किन की झुर्रियों को कम करने में मदद मिल सकती है.
- हयालूरोनिक एसिड - चेहरे पर महीन रेखाओं और झुर्रियों को कम करने के लिए हयालूरोनिक एसिड का इस्तेमाल किया जा सकता है, इससे झुर्रियां कम होती हैं.
- फेसलिफ्ट सर्जरी - इसकी मदद से चेहरे पर मौजूद अतिरिक्त स्किन और फैट को हटाने में मदद मिलती है. साथ ही यह झुर्रियों को कम करके स्किन को जवां रखने में असरदार है.
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सारांश
स्किन पर झुर्रियों के कई प्रकार हैं. त्वचा की परत के आधार पर स्किन की झुर्रियों को दो भागों में विभाजित किया जाता है. इन झुर्रियों को कम करने के लिए कई तरह के ट्रीटमेंट का सहारा लिया जा सकता है. इसके अलावा, कुछ घरेलू उपायों और एसेंशियल ऑयल की मदद से भी चेहरे की झुर्रियों को कम किया जा सकता है. बस ध्यान रखें कि बढ़ती उम्र के साथ झुर्रियां होना सामान्य है. वहीं, अगर कम उम्र में स्किन पर झुर्रियां हो रही हैं, तो इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.
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झुर्रियां क्यूँ पड़ती हैं और कितने प्रकार की होती हैं? के डॉक्टर
Dr. Ashish Mishra.
डर्माटोलॉजी
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Dr. Divyanshu Srivastava
डर्माटोलॉजी
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Dr. G.ARUN
डर्माटोलॉजी
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