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एपर्ट सिंड्रोम एक आनुवंशिक विकार है, जिसमें खोपड़ी का विकास असामान्य होने लगता है। एपर्ट सिंड्रोम से ग्रस्त बच्चे की सिर और चेहरे की बनावट असामान्य होती है। हालांकि, कुछ अन्य जन्म दोष भी हो सकते हैं। इसके अलावा, कुछ मामलों में हाथ-पैर की उंगलियां आपस में चिपक जाती हैं। एपर्ट सिंड्रोम का कोई इलाज नहीं है, लेकिन सर्जरी के जरिये कुछ समस्याओं को ठीक किया जा सकता है।

एपर्ट सिंड्रोम के लक्षण

एपर्ट सिंड्रोम से ग्रस्त शिशुओं में दोषपूर्ण जीन होने की वजह से खोपड़ी की हड्डियां असामान्य हो जाती हैं, एक प्रक्रिया को क्रानियोसिनेस्टोसिस कहते हैं। खोपड़ी के अंदर मस्तिष्क असामान्य रूप से बढ़ना जारी रखता है, जिससे खोपड़ी और चेहरे में हड्डियों पर दबाव पड़ता है। इसके मुख्य संकेतों और लक्षणों में शामिल हैं :

  • लंबा सिर, जिसमें माथा ऊंचा दिखाई देता है
  • दोनों आंखों के बीच की दूरी ज्यादा होना, उभरी हुई आंखें, पलकों का सही से बंद न हो पाना
  • चेहरे का मध्य हिस्सा धंसा हुआ

एपर्ट सिंड्रोम के कुछ अन्य लक्षण निम्नलिखित हैं जो खोपड़ी के असामान्य विकास के कारण होते हैं :

  • एपर्ट सिंड्रोम वाले कुछ बच्चों में सोचने और तर्क करने की क्षमता प्रभावित होना
  • ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया : एक ऐसी स्थिति है, जिसमें नींद के दौरान कुछ समय के लिए अनजाने में सांस रुक जाती है
  • बार-बार कान में संक्रमण
  • बहरापन
  • दांतों की संरचना सही न होना

(और पढ़ें - हड्डी बढ़ने के कारण)

एपर्ट सिंड्रोम के कारण

एपर्ट सिंड्रोम एक जन्मजात स्थिति है, जो एफजीएफआर2 नामक जीन में गड़बड़ी के कारण होती है। यह विकार ऐसे बच्चों में भी हो सकता है जिनके परिवार में कभी किसी को एपर्ट सिंड्रोम नहीं हुआ। इसके अलावा यह वंशानुगत भी हो सकता है।

एफजीएफआर2 'फाइब्रोब्लास्ट ग्रोथ फैक्टर रिसेप्टर 2' नामक एक प्रोटीन का उत्पादन करता है। यह प्रोटीन भ्रूण के विकास में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाता है।

जब इस जीन में गड़बड़ी हो जाती है, तो एफजीएफआर2 लगातार सामान्य से ज्यादा सिग्नल भेजने लगता है, जिस कारण खोपड़ी, चेहरे, हाथ-पैर की हड्डियों की संरचना बिगड़ने लगती है।

एफजीएफआर2 जीन में गड़बड़ी होने से कई अन्य संबंधित विकार भी हो सकते हैं :

  • फाइफर सिंड्रोम
  • क्राउजोन सिंड्रोम
  • जैक्सन-वाइज सिंड्रोम

एपर्ट सिंड्रोम का निदान

डॉक्टरों को अक्सर नवजात शिशु को देखकर एपर्ट सिंड्रोम या क्रानियोसिनेस्टोसिस सिंड्रोम का संदेह हो सकता है। हालांकि, यदि जन्म के समय निदान नहीं हो पाता तो शुरुआती कुछ वर्षों में एपर्ट सिंड्रोम की पुष्टि की जा सकती है। आमतौर पर जेनेटिक टेस्टिंग के जरिए एपर्ट सिंड्रोम या एब्नॉर्मल स्कल फॉर्मेशन (खोपड़ी की बनावट असामान्य होना) की पहचान की जाती है। इसके अलावा हड्डी की असामान्यताओं का प्रकार निर्धारण करने के लिए डॉक्टर सिर की खोपड़ी का रेडियोग्राफ या सीटी स्कैन भी कर सकते हैं।

एपर्ट सिंड्रोम का उपचार

एपर्ट सिंड्रोम का इलाज व्यक्तियों के लक्षणों पर निर्भर करता है। अक्सर डॉक्टर इलाज के लिए एक योजना बनाते हैं और पीड़ित व्यक्ति व उसके परिवार के सहयोग से अपना कार्य (इलाज) शुरू करते हैं।

कुछ मामलों में, डॉक्टर व्यक्ति के मस्तिष्क पर दबाव को कम करने के लिए सर्जरी कराने की सलाह दे सकते हैं।

एपर्ट सिंड्रोम वाले बच्चे को जीवनभर विशेष देखरेख और चेकअप की आवश्यकता होगी। डॉक्टर एपर्ट सिंड्रोम के कारण होने वाली अन्य जटिलताओं की भी जांच कर सकते हैं और उचित उपचार सुझा सकते हैं।

एपर्ट सिंड्रोम से संबंधित जटिलताओं के लिए सामान्य उपचार में शामिल हैं :

  • दृष्टि संबंधित समस्याओं को ठीक करना
  • विकास में देरी का पता लगाने के लिए थेरेपी
  • दांतों की संरचना सही न होने पर डेंटल ट्रीटमेंट

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