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दृष्टिवैषम्य (एस्टिग्मेटिज्म) क्या है?

दृष्टिवैषम्य या एस्टिग्मेटिज्म आपके कॉर्निया (आँख की पुतली की रक्षा करने वाला सफेद सख्त भाग) में होने वाली एक आम, कम प्रभाव डालने वाली कमी है, जिसका इलाज आसानी से हो जाता है। इससे आपको धुंधला दिखाई दे सकता है।

एस्टिग्मेटिज्म तब होता है जब आपकी आंख की ऊपरी सतह पर पाए जाने वाला कॉर्निया या अंदर की सतह पर पाए जाने वाला लेंस, किसी 1 साइड से साधारण से कम या अधिक गोल हो। ऐसे में सतह समतल और चिकनी होने की जगह ऊपर-नीचे हो जाती है।

एस्टिग्मेटिज्म में धुंधला दिखाई देने लगता है चाहें दूरी कितनी ही क्यों ना हो। आमतौर पर ये समस्या लोगो में बचपन से देखने को मिलती है और ये निकटदृष्टिदोष या दीर्घदृष्टिदोष में से, किसी के साथ भी आँख में हो सकता है।

इसके होने पर उपचार के लिए सुधारात्मक (corrective) लेंस का प्रयोग और सर्जरी की जाती है।

(और पढ़े - आखों की समस्याएँ)

  1. दृष्टिवैषम्य (एस्टिग्मेटिज्म) के लक्षण - Astigmatism Symptoms in Hindi
  2. दृष्टिवैषम्य के कारण और जोखिम कारक - Astigmatism Causes & Risk Factors in Hindi
  3. दृष्टिवैषम्य (एस्टिग्मेटिज्म) से बचाव - Prevention of Astigmatism in Hindi
  4. दृष्टिवैषम्य का परिक्षण - Diagnosis of Astigmatism in Hindi
  5. दृष्टिवैषम्य का इलाज - Astigmatism Treatment in Hindi
  6. दृष्टिवैषम्य (एस्टिग्मेटिज्म) के डॉक्टर

एस्टिग्मेटिज्म के लक्षण-

डॉक्टर को मिलने का सही समय -

यदि आपकी द्रष्टि में इतनी परेशानी हो कि आप अपने रोज़मर्रा के कामों में दिक्क़त महसूस करें, तो जल्द ही एक आँख के डॉक्टर से संपर्क करें। आंख के डॉक्टर आपकी जांच करने से यह पता कर सकते हैं कि कहीं आपको एस्टिग्मेटिज्म तो नहीं है और यदि है, तो किस स्तर का है। जिसके बाद डॉक्टर आपको उसका उपयुक्त इलाज करने के तरीको के बारें में बता सकते हैं।

यदि आप 40 साल से अधिक उम्र के स्वस्थ वयस्क हैं, तो आप अपनी आँखों की, 55 साल की उम्र तक, 2 से 4 साल के अन्तरकाल पर जांच करवाते रहें।

55 साल की उम्र के बाद, आंखों की बीमारी या समस्याओं का पता लगाने के लिए 65 साल की उम्र तक, हर 1 से 3 साल के अन्तरकाल पर जांच करवाते रहें।

यदि आपको आंखों की समस्याएं हैं, जैसे कि एस्टिग्मेटिज्म, तो आपको अपनी आँखों की अधिक बार जांच करवानी पड़ सकती है। यदि आपको ग्लूकोमा जैसी कुछ आंखों की बीमारियों का खतरा है, या आपको डायबिटीज है, तो आप अपने डॉक्टर से पूछें की कितनी बार जांच कराएं?

(और पढ़ें - रतौंधी का इलाज)

एस्टिग्मेटिज़्म होने के कारण - 

आपकी आंख में पाए जाने वाले कॉर्निया और लेंस प्रकाश को केंद्रित करके एक छवि बनाते हैं। अगर आँख का आकार ठीक हो, तो इन दोनों की सतह एक चिकनी गेंद की सतह की तरह ही होती है। इस सतह की मदद से आपका कॉर्निया या लेंस आँख में आने वाली सारी रोशनी को एक दिशा में परिवर्तित कर देता है और आपकी आंख के पीछे पाए जाने वाले रेटिना पर एक स्पष्ट छवि बनाता है। 

हालांकि, यदि आपका कॉर्निया या लेंस समान रूप से घुमावदार और चिकनी सतह का नहीं है, तो यह प्रकाश किरणों को असमान रूप से केंद्रित करता है। इससे "रिफ्रेक्टिव एरर" (refractive error: अपवर्तक त्रुटि) होता है।  एस्टिग्मेटिज़्म, रिफ्रेक्टिव एरर का एक प्रकार है। 

एस्टिग्मेटिज़्म में, आपके कॉर्निया या लेंस, किसी एक साइड से ज़्यादा गोल होता है। इसके अनुसार यदि -

  • आपके कॉर्निया का आकार बिगड़ा हुआ है, तो आपको "कॉर्नियल एस्टिग्मेटिज़्म" (corneal astigmatism) है।
  • आपके लेंस का आकार बिगड़ा हुआ है, तो इसका अर्थ है कि आपको लेनटिक्युलर एस्टिग्मेटिज़्म (lenticular astigmatism) है। 

इन दोनों में से किसी भी प्रकार का एस्टिग्मेटिज़्म धुंधली दृष्टि का कारण बन सकता है। 

एस्टिग्मेटिज़्म अन्य रिफ्रेक्टिव एरर के साथ हो सकता है, जिसमें निम्न शामिल हैं: 

  • निकटदृष्टिदोष (Nearsightedness या myopia)
    निकटदृष्टिदोष तब होता है जब आपका कॉर्निया की गोलाई ज्यादा होती है या आपकी आंख सामान्य से अधिक लंबी होती है। प्रकाश आपके रेटिना पर केंद्रित होने के बजाय, आपके रेटिना के सामने केंद्रित होता है, जिसके परिणामस्वरूप दूर की वस्तु आपको धुँधली दिखाई पड़ती है।
     
  • दूरदृष्टिदोष (Farsightedness or hyperopia) - 
    दूरदृष्टिदोष तब होता है जब आपका कॉर्निया बहुत छोटा होता है या आपकी आंख सामान्य से छोटी होती है। इसका प्रभाव निकटदृष्टिदोष के प्रभाव के विपरीत होता है। इस केस में, प्रकाश रेटिना पर केंद्रित होने की बजाय आपकी आंख के पीछे केंद्रित होता है, जिससे आस-पास की वस्तुएँ धुंधली नज़र आती हैं।

दृष्टिवैषम्य​ (एस्टिग्मेटिज़्म) होने की संभावना किस वजह से बढ़ जाती है 

चाहें आप नियमित (आंखों के आकार में अनुवांशिक अनियमितता) या अनियमित (चोट या सर्जरी के कारण) एस्टिग्मेटिज़्म से पीड़ित हैं, एक बात निश्चित है:

आंखों पर ज़्यादा तनाव इस स्थिति को बढ़ा सकता है जिससे ये और भयंकर रूप ले सकती है। इसके अधिक स्पष्ट लक्षण होते हैं धुंधली दृष्टि, सिरदर्द और आखें मीचकर देखना।

(और पढ़ें - मोतियाबिंद की दवा)

आँख से जुड़े अन्य तनाव के सामान्य कारणों में शामिल हैं:

  • कंप्यूटर का उपयोग करना या लंबे समय तक टीवी देखना 
  • खराब या कम प्रकाश में पढ़ना
  • ऐसी नौकरी करना जहाँ बहुत बारीकी से काम करने की आवश्यकता होती है
  • पर्याप्त पानी नहीं पीना (आंखों को हाइड्रेटेड रखने के लिए) (और पढ़ें - कितना पानी पीना चाहिए)
  • आंखों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी पर्याप्त पोषक तत्व प्राप्त करने में विफलता

(और पढ़ें - आँखो में सूखापन)

एस्टिग्मेटिज़्म का प्रभाव और बढ़ने से रोकने के लिए सबसे अधिक फायदेमंद है, आँख से जुड़े तनाव से दूर रहना। यहां कुछ आसान तरीके दिए गई हैं जिन्हें आप आजमा सकते हैं:

  • 10-10-10 का नियम -
    चाहे आप पढ़ रहे हों, कंप्यूटर के सामने समय बिता रहे हो या कोई बारीकी वाला काम कर रहे हों, अपनी आंखों को आराम करने का समय दें। एक साधारण बात यह है कि आप पूरे दिन 10-10-10 के नियम का पालन करें: हर 10 मिनट में, कम से कम 10 सेकंड के लिए 10 फीट दूर तक देखें।

    यदि आप खिड़की के बगल में बैठे हैं, तो बाहर पेड़ों को देखें या किसी इमारत या बादलों पर नजर डालें। यदि आपकी नज़र में कोई बाहरी दृश्य नहीं है, तो कमरे में किसी भी दूर रखी हुई वास्तु को देखें जैसे कि कोई दीवार पर टंगी कलाकृति (पेंटिंग) या दूर रखी कोई भी वस्तु। 
     
  • आँख झपकते रहें -
    यह न केवल तनाव को राहत देता है, बल्कि यह आंखों को खुद लुब्रिकेट (गीला) करता है और सूखेपन को आने से रोकता है। यह महत्वपूर्ण है, खासकर तब, जब आप हमेशा कंप्यूटर से जुड़ा या पढ़ने जैसा काम करते हों
     
  • पर्याप्त रोशनी में काम करें -
    जहां आप काम करते हैं, वहाँ सही रोशनी होनी चाहिए। कम प्रकाश आपकी आंखों पर ज़्यादा तनाव डालता है, जिससे आप आँख मींचकर देखना शुरू कर देते हैं। जितना संभव हो सके, एलईडी बल्ब के बजाय नार्मल बल्ब का चयन करें (यदि आपको प्राकृतिक प्रकाश नहीं मिल रहा है)।
     
  • ह्यूमिडिफायर का प्रयोग करें -
    अपने घर या कार्यस्थल में एक ह्यूमिडिफायर (जिससे नमी बनी रहती है) रखें। हीटर या एयर कंडीशनर का उपयोग हवा में नमी कम कर देता है, जिससे आंखों में जलन और तनाव हो सकता है।

(और पढ़ें - आँख आने का इलाज)

अपनी हालत की जांच करने के लिए, आंख के डॉक्टर (नेत्र रोग विशेषज्ञ) आपके लक्षणों को सही से परखक़र, आँख का पूर्ण रूप से परीक्षण कर सकते हैं।

आपकी आंख की जांच में कई परीक्षण शामिल हो सकते हैं, जैसे कि:

  • दृष्टि परीक्षण (Vision Test) -
    एक "विज़ुअल ऐक्विटी परीक्षण" (visual acuity test) में आपकी दृष्टि का परीक्षण करने के लिए, आपके डॉक्टर आपको चार्ट पर लिखे अक्षरों को पढ़ने के लिए कह सकते हैं।
     
  • कॉर्निया की गोलाई को मापने के लिए परीक्षण -
    कॉर्निया की सतह से प्रतिबिंबित प्रकाश को मापकर, केराटोमीटर (keratometer) नामक एक उपकरण, आपके कॉर्निया की सतह की गोलाई को मापता है और एस्टिग्मेटिज़्म के होने की पुष्टि कर सकता है। इस परीक्षण को केराटोमेट्री कहा जाता है।

    कॉन्टैक्ट लेंस फिटिंग के लिए आपके कॉर्निया की गोलाई की जानकारी महत्वपूर्ण है। गोलाई एस्टिग्मेटिज़्म में अनियमित हो जाती है। 

    कॉर्नियल सतह में गोलाई भिन्नता को मापने के लिए, डॉक्टर कंप्यूटर की मदद से कॉर्नियल मैपिंग नामक प्रक्रिया का उपयोग कर सकते हैं। कंप्यूटराइज्ड कॉर्नियल मैपिंग, आपके कॉर्निया की सतह का नक्शा बनाने के लिए एक वीडियो कैमरा (videokeratoscope) के साथ लगाए गए केराटोस्कोप का उपयोग करता है।
     
  • आँखों की, प्रकाश को केंद्रित करने की क्षमता को मापने के लिए परीक्षण -
    आपकी आंखें कैसे प्रकाश केंद्रित करती हैं, ये मापने के लिए, आपके आंख डॉक्टर फोरोपटर नामक डिवाइस का उपयोग करके आपकी आंखों के सामने अलग-अलग लेंस लगा सकते हैं।

    आपके डॉक्टर एक रेटिनास्कोप नामक डिवाइस का भी उपयोग कर सकते हैं, जो आपकी आंखों में प्रकाश की बीम (किरण) को निर्देशित करता है, यह निर्धारित करने के लिए कि, आपकी आंख प्रकाश कैसे केंद्रित करती है।

    ये प्रक्रियाएं आपकी रिफ्रैक्टिव एरर (refractive error) के स्तर का आकलन कर सकती हैं, जिससे आपको उपयुक्त लेंस और चश्मे की ज़रूरत होने या न होने का पता चलता है।

सुधारात्मक लेंस पहनने से आपके कॉर्निया की असमान गोलाई को समान किया जाता है।

सुधारात्मक लेंस के प्रकार हैं:

  • चश्मा -
    चश्मा विशेष लेंस के साथ बनाया जा सकता है जो आपकी आंख के असमान आकार की वजह से हुए दुष्प्रभावों को कम करने में मदद करता है। एस्टिग्मेटिज़्म को ठीक करने के अलावा, चश्मे अन्य रिफ्रैक्टिव एरर (refractive errors) को भी सही करता है।
     
  • कॉन्टेक्ट लेंस -
    चश्मे की तरह, कॉन्टेक्ट लेंस भी एस्टिग्मेटिज़्म को सही कर सकते हैं। कठोर, मुलायम, ज़्यादा समय तक पहने जाने वाले, डिस्पोजेबल, गैस परमीबल (प्रवेश के योग्य) और बायफोकल कॉन्टैक्ट लेंस सहित विभिन्न प्रकार के संपर्क लेंस उपलब्ध हैं। अपने आंखों के डॉक्टर से, हर तरह के चश्में के फायदे और नुकसान के बारे में पूछें, साथ ही अपने लिए सबसे अच्छे कॉन्टेक्ट लेंस के बारे में पता करें।

कॉन्टेक्ट लेंस का उपयोग ऑर्थोकरेटोलॉजी नामक प्रक्रिया से भी किया जाता है। इस प्रक्रिया में, आपको दिन में कई घंटों तक कठोर कॉन्टेक्ट लेंस पहनना होता है, जब तक आपकी आंखों की गोलाई में सुधार ना हो जाए। फिर, लेंस का प्रयोग पहले की तुलना में कम कर देना होता है। यदि आप इस उपचार को बंद कर देते हैं, तो आपकी आंखें अपने पहले के आकार में लौट आती हैं।

अधिक समय के लिए कॉन्टेक्ट लेंस पहनने से आंखों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

(और पढ़े - आँख का संक्रमण)

रिफ्रैक्टिव (Refractive) सर्जरी 

यह एस्टिग्मेटिज़्म-उपचार विधि, आपकी आंख की सतह का आकार बदलकर समस्या को ठीक करती है। सर्जरी से पहले, डॉक्टर आपकी जांच करके यह निर्धारित करते हैं कि आपकी रीफ्रेक्टिव सर्जरी होनी चाहिए या नहीं।

रीफ्रेक्टिव-सर्जरी विधियों में शामिल हैं:

  • LASIK सर्जरी -
    यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें डॉक्टर आपके कॉर्निया में एक पतला, गोलाकार कट बनाने के लिए केराटोम नामक एक उपकरण का उपयोग करते हैं। यह कट एक विशेष काटने वाले लेज़र के साथ भी बनाया जा सकता है।
     
  • फोटोरफ्रेक्टिव केराटेक्टोमी (पीआरके) -
    पीआरके में, आपका सर्जन कॉर्निया की गोलाई को ठीक करने के लिए एक्सीमर लेजर का उपयोग करने से पहले कॉर्निया की बाहरी सुरक्षात्मक परत को हटा देता है।
     
  • LASEK सर्जरी -
    इस प्रक्रिया में कॉर्निया की एक बहुत पतली परत मोड़ी जाती है, जिससे किसी तरह की हानि पहुँचने का खतरा कम हो जाता है। यदि आपका कॉर्निया पतला है या आप काम पर या खेल खेलने से आंखों की चोट का जोखिम उठाते हैं तो, LASEK बेहतर विकल्प हो सकता है।

(और पढ़ें - मायोसिस का इलाज)

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