कोविड-19 से निपटने के लिए एक कारगर वैक्सीन बनने का इंतजार कम होता दिख रहा है। दुनियाभर में दर्जनों वैक्सीन कैंडिडेट के सामने आने के बाद आखिरकार कुछ वैक्सीनों में कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 को खत्म करने की क्षमता दिखाई दे रही है। यह अब ज्यादातर वैज्ञानिकों और मेडिकल विशेषज्ञों को लगने लगा है कि कोविड-19 की कारगर वैक्सीन आने वाले कुछ महीनों में सामने आ सकती है और इसकी संख्या एक से ज्यादा भी हो सकती है। लेकिन इसी दौरान इस बहस ने भी जोर पकड़ा है कि क्या कोविड-19 वैक्सीन सभी आयु वर्गों के लोगों के साथ-साथ पहले से किसी बीमारी या बीमारियों से पीड़ित लोगों पर काम करेगी। इस सिलसिले में यह आशंका जताई जाती रही है कि कोरोना वायरस को रोकने वाली वैक्सीन शायद बुजुर्गों पर काम न करे। अब कहा जा रहा है कि संभवतः मोटापे या ज्यादा वजन की समस्या से गुजर रहे लोगों पर भी कोविड-19 वैक्सीन अपेक्षित असर न दिखा पाए।

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अमेरिका में मोटापा एक व्यापक और गंभीर समस्या है। शीर्ष अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी ने कहा है कि अमेरिका में हर तीन में से एक व्यक्ति मोटापे का शिकार है और कोविड-19 से उनके बीमार पड़ने और मरने का खतरा ज्यादा है। अब अमेरिकी हेल्थ एक्सपर्ट ने यह अंदेशा भी जताना शुरू कर दिया है कि शायद मोटापे से पीड़ित लोगों का शरीर कोविड-19 वैक्सीन दिए जाने के बाद भी कोरोना वायरस के खिलाफ अपेक्षित इम्यून रेस्पॉन्स न दे। अलग-अलग शोधों व अध्ययनों के आधार पर इन विशेषज्ञों का कहना है कि अतीत में इंफ्लूएंजा, टेटनस, रेबीज और हेपेटाइटिस बी जैसी बीमारियों के टीके मोटे लोगों पर उतना असर नहीं दिखा पाए हैं, जितना की सामान्य या पतले लोगों पर।

अमेरिका के साथ-साथ यह बात भारत जैसे देशों के लिए भी चिंता का विषय होनी चाहिए। अमेरिका के आंकड़े बताते हैं कि वहां की 42 प्रतिशत से ज्यादा आबादी को मोटापे की श्रेणी में रखा जाता है। वहीं, 2015 में हुई एक स्टडी के मुताबिक, भारत में भी 13 करोड़ से ज्यादा लोग मोटापा झेल रहे हैं। ऐसे में कोविड-19 से मोटापे के शिकार लोगों के ज्यादा बीमार होने और उन पर वैक्सीन के कम प्रभावी रहने की संभावना के चलते दुनियाभर के मेडिकल विशेषज्ञों की चिंता लाजमी है।

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जानकारों में इस चिंता के अलग-अलग कारण सामने आए हैं। मेडिकल विशेषज्ञों के हवाले से छपी एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट बताती है कि इम्यूनाइजेशन के लिए इस्तेमाल होने वाली एक सामान्य नीडल मोटापा झेल रहे लोगों के लिए पर्याप्त नहीं है। जानकार बताते हैं कि उनकी त्वचा के भीतर फैट की लेयर इतनी मोटी हो सकती है कि नीडल वहां तक पहुंच ही न सके जहां वैक्सीन लिक्विड को डिपॉजिट किया जा सके। एक थ्योरी यह भी कहती है कि शरीर में मांस ज्यादा होने की वजह से मोटे लोगों के इम्यून सिस्टम को वायरस के खिलाफ लड़ने को तैयार करने के लिए ज्यादा बड़े डोज की जरूरत पड़ सकती है। 

इसके अलावा, तीसरी थ्योरो यह भी कहती है कि वैक्सीन देने से पहले मोटे शरीर वाले मरीजों के इम्यून सिस्टम को समझना होगा। जानकार बताते हैं कि मोटापे के चलते लोगों में दीर्घकालिक सूजन की समस्या पैदा होती है, जो वैक्सीन के असर को ब्लॉक करने का काम कर सकती है। ऐसे में मेडिकल विशेषज्ञ कोरोना वायरस की वैक्सीन से उम्मीद लगा रहे हैं कि यह प्रभाव के मामले में अलग प्रकार की वैक्सीन होगी, जो सभी लोगों के इम्यून सिस्टम को समान रूप से वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार कर सकेगी। वे इसमें आधुनिक तकनीक की भूमिका अहम मानते हैं।

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हालांकि इसकी पुष्टि के लिए एकमात्र रास्ता यह बताया जाता है कि वैक्सीन को बड़ी संख्या में मोटापे के शिकार प्रतिभागियों को लगाया जाए। जानकारों का कहना है कि इसी से साफ होगा कि वैक्सीन मोटापा झेल रहे कोरोना संक्रमितों पर असर करेगी या नहीं। हालांकि इतिहास यह कहता है कि ऐसे लोगों को ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी समस्याओं के चलते वैक्सीन ट्रायलों से दूर रखा जाता रहा है।


उत्पाद या दवाइयाँ जिनमें कोविड-19: मोटापा झेल रहे लोगों पर शायद कोरोना वायरस की वैक्सीन काम न करे, जानें विशेषज्ञों के ऐसा कहने की वजह है

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