कोरोनावायरस का नया वेरिएंट ओमिक्रॉन इन दिनों संपूर्ण विश्व में लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. भारत सहित दुनियाभर के कई देशों में यह तेजी से फैल रहा है.
ओमिक्रॉन का पहला मामला दक्षिण अफ्रीका में आया था, जिसके बाद से इसे लेकर कई लोगों के मन में ढेर सारे सवाल उभर रहे हैं. खासतौर पर ओमिक्रॉन वेरिएंट से गंभीर बीमारी होती है या नहीं, यह सवाल कई लोगों के मन में है.
इस विषय पर ब्रिटेन की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने बीते गुरुवार को कहा कि प्रारंभिक आंकड़ों से पता चलता है कि कोरोनवायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट वाले लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 50% से 70% कम होती है.
आज इस लेख में जानेंगे कि क्या वाकई ओमिक्रॉन वेरिएंट से गंभीर बीमारी होती है?
(और पढ़ें - ओमीक्रॉन के लक्षण)
- क्या कहती है यूके की स्वास्थ्य एजेंसी?
- क्या कहता है विश्व स्वास्थ्य संगठन?
- क्या कहती है रिसर्च?
- सारांश
क्या कहती है यूके की स्वास्थ्य एजेंसी?
यू.के. स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी के निष्कर्ष सामने आए हैं कि ओमिक्रॉन डेल्टा वेरिएंट की तुलना में गंभीर नहीं है, इसमें लेकिन ध्यान रखें कि यह अन्य वेरिएंट की तुलना में तेजी से फैलता है और इससे इन्फेक्शन होने से रोकने में बिना बूस्टर डोज़ के वैक्सीन अधिक प्रभावी नहीं है.
एजेंसी ने कहा कि यूके में मामलों के आधार पर ओमिक्रॉन से ग्रसित लोग अस्पताल से आपातकालीन विभाग में जाने की संभावना 31% से 45% के बीच कम होने का अनुमान है. वहीं, डेल्टा से प्रभावित व्यक्ति की तुलना में 50 से 70% कम भर्ती होने की संभावना होती है.
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ओमिक्रॉन डेल्टा की तुलना में कम गंभीर है, लेकिन यह डेल्टा की तुलना में बहुत तेजी से फैलता है. एजेंसी के रिसर्च में कहा गया है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ लड़ने में टीके का बूस्टर शॉट लगभग 10 सप्ताह के बाद कम प्रभावित हो जाता है. हालांकि, अस्पताल में भर्ती होने और गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने में यह प्रभावी है.
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क्या कहता है विश्व स्वास्थ्य संगठन?
WHO के मुताबिक, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि डेल्टा सहित अन्य तरह के वेरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन वेरिएंट अधिक गंभीर बीमारी का कारण बनता है या नहीं. प्रारंभिक आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण अफ्रीका के अस्पतालों में भर्ती होने की दर बढ़ रही है, लेकिन यह ओमिक्रॉन के साथ विशिष्ट संक्रमण के परिणामस्वरूप संक्रमित होने वाले लोगों की कुल संख्या में वृद्धि के कारण हो सकता है.
वर्तमान में फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है कि ओमिक्रॉन से जुड़े लक्षण अन्य वेरिएंट से भिन्न है. प्रारंभिक रिपोर्ट में देखा गया है कि ओमिक्रॉन से ग्रसित मरीजों में हल्की बीमारी होती है, लेकिन ओमिक्रॉन वेरिएंट की गंभीरता के स्तर को समझने में अभी कई दिनों से लेकर कई सप्ताह तक का समय लग सकता है. COVID-19 के सभी तरह के वेरिएं’, डेल्टा संस्करण सहित, जो दुनिया भर में प्रमुख है, विशेष रूप से सबसे कमजोर लोगों के लिए गंभीर बीमारी या मृत्यु का कारण बन सकते हैं. ऐसे में कोरोना के प्रति सावधानी महत्वपूर्ण है.
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क्या कहती है रिसर्च?
यूके और दक्षिण अफ्रीका के दो बड़े नए अध्ययनों के मुताबिक, जिन लोगों को ओमिक्रॉन वेरिएंट की वजह से कोविड-19 संक्रमण होता है, उन्हें डेल्टा वेरिएंट से संक्रमित लोगों की तुलना में अस्पताल में देखभाल की आवश्यकता कम होती है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि ओमिक्रॉन में गंभीर बीमारी होने की संभावना काफी कम है. डेल्टा वेरिएंट की तुलना में यह कम गंभीर है. ओमिक्रॉन से संक्रमित लोगों को किसी भी अस्पताल में देखभाल की आवश्यकता लगभग 20% कम होती है. वहीं, डेल्टा से संक्रमित लोगों को 40% अधिक देखभाल की आवश्यकता है.
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सारांश
प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, ओमिक्रॉन वेरिएंट से गंभीर बीमारी नहीं होती है. हालांकि, अभी स्पष्ट रूप से कुछ भी कहना जल्दबाजी हो सकता है. कोरोना से बचने के लिए रोकथाम बहुत ही जरूरी है. किसी भी तरह के वेरिएंट से बचाव के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखें. बाहर जाते वक्त मास्क पहनना न भूलें. सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें. साथ ही कोरोना वैक्सीन जरूर लगवाएं. ताकि आप खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकें.
अस्वीकरण - इस लेख में दी गई जानकारी प्रकाशन के समय सटीक है। हालांकि, जैसे-जैसे COVID-19 और ओमीक्रॉन की स्थिति विकसित हो रही है, यह संभव है कि प्रकाशन के बाद से कुछ जानकारी और डेटा बदल गए हों। इसलिए, यदि आप इस लेख को इसके प्रकाशन के लंबे समय बाद पढ़ रहे हैं, तो हम आपको लेटेस्ट समाचार और जानकारी WHO और MoHFW से पाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
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