जोस्टर (शिंग्लस) शरीर में होने वाले रैशज हैं, जो मुख्य रूप से शरीर के एक हिस्से में ही होते हैं। सामान्यतः यह व्यक्ति के चेहरे और शरीर के ऊपरी हिस्से में होते हैं। इन रैश में फफोले हो जाते हैं, जो आमतौर पर सात से दस दिनों में ठीक हो जाते हैं। दो से चार सप्ताह के बाद त्वचा दोबारा पहले की सी अवस्था में आ जाती है। बच्चों में चिकन पॉक्स करने वाला वेरिसेला वायरस ही हर्पिस जोस्टर या शिंगल्स की वजह होता है। वयस्कों में वेरिसेला वायरस के दोबारा सक्रिय होने पर यह रोग होता है। जोस्टर का टीका एक सक्रिय वैक्सीन (live vaccine) है जो शिंग्लस रोग से व्यक्ति का बचाव करता है। माना जाता है हर तीन में से एक व्यक्ति को किसी न किसी समय इस रोग से संक्रमित होना ही पड़ता है।

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इस रोग की गंभीरता को देखते हुए, इस लेख में आपको जोस्टर वैक्सीन या शिंग्लस वैक्सीन के बारे में विस्तार से बताया गया है। साथ ही इस लेख में आपको जोस्टर वैक्सीन क्या है, जोस्टर वैक्सीन की खुराक, जोस्टर वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स और जोस्टर वैक्सीन किसे नहीं दी जानी चाहिए आदि को भी विस्तार से बताने के प्रयास किए है। 

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  1. जोस्टर (शिंग्लस) वैक्सीन क्या है - Zoster vaccine kya hai
  2. जोस्टर वैक्सीन की खुराक - Zoster vaccine ki khurak
  3. जोस्टर वैक्सीन के साइड इफेक्ट - Zoster vaccine side effects
  4. जोस्टर वैक्सीन किसे नहीं लेनी चाहिए - Zoster vaccine kise nahi leni chahiye

हर्पिस जोस्टर या शिंगल्स से बचाव के लिए जोस्टर वैक्सीन का उपयोग किया जाता है। चिकन पॉक्स रोग का मुख्य कारण वेरिसेला वायरस ही शिंग्लस की वजह होता है। चिकनपॉक्स ठीक होने के बाद भी वेरिसेला वायरस व्यक्ति के शरीर में मौजूद रह सकता है। यह वायरस कुछ वर्षों के बाद भी सक्रिय हो सकता है और यह शिंग्लस या हर्पिस जोस्टर की वजह बन सकता है।  

शिंग्ल्स या हर्पिस जोस्टर होने पर व्यक्ति के शरीर में निम्न तरह के लक्षण दिखाई देते हैं-

चिकन पॉक्स (छोटी माता) की तरह ही शिंग्लस भी एक संक्रामक रोग है, यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आसानी से फैल सकता है। जिस व्यक्ति को पहले कभी चिकन पॉक्स नहीं हुआ हो और ना ही उसने चिकन पॉक्स वैक्सीन लिया हो, तो ऐसे व्यक्ति को शिंग्लस से ग्रसित व्यक्ति से संक्रमण की संभावना अधिक होती है। इस तरह के मामले में स्वस्थ व्यक्ति को शिंग्लस की जगह पर चिकन पॉक्स रोग हो सकता है।   

हर्पिस जोस्टर या शिंग्लस मुख्य रूप से 50 से अधिक आयु के लोगों के प्रभावित करती हैं। शिंग्लस के कारण कई तरह की अन्य समस्याएं भी शुरू हो जाती है। शिंग्लस होने पर सामान्य रूप से पोस्ट हर्पेटिक न्यूरालगिया (post-herpetic neuralgia: पीएचएन)  होने की संभावना अधिक होती है। शिंग्लस में होने वाले रैश व फफोले ठीक होने के बाद पीएचएन की स्थिति सामने आती है। लेकिन जोस्टर वैक्सीन लेने से शिंग्लस और पीएचएन होने की संभावना बेहद कम हो जाती है।

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जोस्टर और शिंग्लस से बचाव के लिए जोस्टावैक्स (Zostavax) और शिंगरिक्स (Shingrix) नाम की दो वैक्सीन का इस्तेमाल किया जाता है।

जोस्टर वैक्सीन लेने की उम्र और खुराक

  • 50 साल या उससे अधिक आयु के लोगों को शिंगरिक्स की दो खुराक दी जाती है। इसकी पहली खुराक किसी भी समय दी जा सकती है, जबकि दूसरी खुराक को 2 से 6 महीने के बीच में दिया जाता है। (और पढ़ें - प्राथमिक चिकित्सा क्या है)
     
  • इसके अलावा 60 साल और उससे अधिक आयुवर्ग के बुजुर्गों को जोस्टावैक्स वैक्सीन दी जाती है।    

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सामान्यतः जोस्टर वैक्सीन के टीके से होने वाले साइड इफेक्ट बेहद हल्के होते हैं और यह कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं। इस इंजेक्शन से गंभीर साइड इफेक्ट बेहद कम मामलों में देखने को मिलते हैं। इस इंजेक्शन को लगाना सुरक्षित होता है, लेकिन कई मामले ऐसे भी सामने आते हैं, जिसमें इस टीके की प्रतिक्रियाएं गंभीर हो सकती हैं।

जोस्टर या शिंग्लस इंजेक्शन से होने वाले सामान्य साइड इफेक्ट को निम्न तरह से बताया गया है-

टीके से होने वाले कुछ दुर्लभ नुकसान

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कई बार जोस्टर वैक्सीन को कुछ विशेष परिस्थितियो में लेने की सलाह नहीं दी जाती है। किसी रोग या अन्य स्वास्थ्य स्थिति के कारण डॉक्टर इस वैक्सीन को देना उचित नहीं मानते है। आगे जानते हैं कि किन परिस्थितियों में जोस्टर वैक्सीन नहीं लेनी चाहिए या डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेनी चाहिए।

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