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ज़्यादातर लोगों के लिए सभी तरह के मौसम में अलग अलग एलर्जी और इरिटेशन की समस्याएं होती हैं।

बसंत के मौसम में कई तरह की एलर्जी से परेशान होना पड़ता है। जबकि गर्मी के मौसम में अन्य एलर्जी की समस्याएं तेज़ी से बढ़ती रहती हैं। उसी प्रकार पतझड़ के मौसम में धूल मिटटी की वजह से एलर्जी होती हैं और सर्दियां आते आते प्रदूषण की वजह से एलर्जी की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। मौसम के अलावा एलर्जी के कई अन्य कारण हो सकते हैं।  

(और पढ़ें - एलर्जिक राइनाइटिस)

एलर्जी के सामान्य लक्षण हैं जैसे बहती हुई नाक, गले में खराश, कफ, आंखों  में खुजली और स्किन रैशेज। जो लोग मौसम के अनुसार एलर्जी से परेशान रहते हैं वो अपना बचाव ये समस्या शुरू होने से पहले कर सकते हैं। हालाँकि अगर आपको एलर्जी के लक्षण दिखाई देते हैं तो आप इस समस्या से बचने के लिए आसान और प्रभावी घरेलू उपाय को भी आजमा सकते हैं।

तो आइये आपको बताते हैं एलर्जी के घरेलू उपाय –

  1. एलर्जी का घरेलू उपाय है नमक का पानी - Allergy ka gharelu nuskha hai daline solution in Hindi
  2. एलर्जी का उपाय है पेपरमिंट - Allergy se bachne ka upay hai peppermint in Hindi
  3. एलर्जी खत्म करने का तरीका है भाप - Allergy ka desi nuskha hai steam in Hindi
  4. एलर्जी का घरेलू नुस्खा है सेब का सिरका - Allergy hone par kare apple vinegar ka upyog in Hindi
  5. एलर्जी का देसी उपाय है बिच्छू बूटी - Allergy khatam karne ka tarika hai nettle leaf in Hindi
  6. एलर्जी दूर करने के घरेलू उपाय है लहसुन - Allergy se bachne ke tarike me kare garlic ka upyog in Hindi
  7. एलर्जी के उपाय के लिए नींबू का करें उपयोग - Allergy dur karne ka gharelu upay hai lemon in Hindi
  8. एलर्जी से छुटकारा पाने के लिए हल्दी है फायदेमंद - Allergy se chutkara paye turmeric se in Hindi
  9. एलर्जी से बचने का तरीका है शहद - Allergy dur karne ka tarika hai honey in Hindi
  10. एलर्जी से बचने का उपाय है गर्म पानी - Allergy ko khatam kare hot shower se in Hindi

अपर-रेस्पिरेटरी एलर्जी (Upper-respiratory allergy) एक बहुत ही आम एलर्जी होती है। इस स्थिति को ठीक करने के लिए आप नाक को सलाइन सलूशन से धोकर एलर्जेंस और इरिटैंट्स को साफ़ कर सकते हैं। 2008 की एक रिसर्च के अनुसार रोज़ाना नाक को सलाइन से साफ़ करने से राइनाइटिस (rhinitis) एलर्जी के लक्षणों को सुधारने में मदद मिलती है।

सलाइन सलूशन का इस्तेमाल कैसे करें –

  1. सबसे पहले एक चम्मच बिना आयोडीन युक्त नमक लें और चुटकीभर बेकिंग सोडा लें और फिर इन्हे एक चौथाई गर्म पानी में मिला दें। फिर मिश्रण को ठंडा होने के लिए रख दें।
  2. अब सिंक की तरफ झुके और अपनी एक नाम में इस मिश्रण की दस बूँदें डालें। फिर इस मिश्रण को या तो नाक से निकाल लें या मुँह से निकालें।
  3. यही प्रक्रिया दूसरी नाक से भी करें।
  4. जब तक लक्षण चले नहीं जाते तब तक पूरे दिन में एक या दो बार इस प्रक्रिया को करें।
  5. अपना मिश्रण बनाने की बजाए आप बाहर से भी ये भी सलूशन ले सकते हैं।    

पेपरमिंट में मौजूद आवश्यक तेल डीकन्जेस्टन्ट (decongestant) की तरह काम करता है और एलर्जी के लक्षणों को कम करता है। पेपरमिंट में सूजनरोधी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टेरियल गुण होते हैं जो एलर्जी रिएक्शन को कम करते हैं। 

पेपरमिंट का इस्तेमाल दो तरीकों से करें –

पहला तरीका –

  1. पेपरमिंट चाय बनाने के लिए, सबसे पहले एक चम्मच सूखे पेपरमिंट की पत्तियों को एक कप पानी में पांच के लिए उबालने को रख दें।
  2. फिर इस मिश्रण को छान लें और ठंडा होने के लिए रख दें।
  3. अब इसे पीने से पहले इसमें एक चम्मच शहद भी मिला लें।
  4. जब तक आपको लक्षणों से निजात नहीं मिल जाता तब तक पूरे दिन में दो या तीन बार पेपरमिंट चाय का मज़ा लें।

दूसरा तरीका -

  1. इसके अलावा आप पेपरमिंट चाय के कप पर पांच से दस मिनट के लिए अपना चेहरे उसपर रख सकते हैं।
  2. ये आपके नाक और गले से बलगम को साफ़ करने में मदद करेगा।
  3. इस उपाय को अपनाएँ जब भी आपको इस तरह की समस्या हो।

(और पढ़ें - पुदीने के फायदे और नुकसान

भाप एलर्जी के कई लक्षणों से राहत दिलाने में मदद करता है। ये इरिटेटेड साइनस से राहत दिलाता है साथ ही नाक की नली से भी बलगम और अन्य इरिटैंट को भी साफ़ करता है।

भाप का इस्तेमाल कैसे करें -

  1. सबसे पहले ज़्यादा से ज़्यादा पानी को उबालने के लिए रख दें और तब तक उबालें जब तक उसमे से अच्छे से भाप न निकल जाए।
  2. अब इस पानी को किसी बड़े बर्तन में कर लें। अब उसमे तीन से चार बूँद नीलगिरी तेल, पेपरमिंट तेल, रोज़मेरी या टी ट्री तेल की डालें।
  3. अब अपने सिर पर तौलिये को रखें और बर्तन के पास ध्यान से झुक जाएँ। फिर दस मिनट तक गर्म पानी से भाप लें।
  4. जब तक आपके लक्षण ठीक नहीं हो जाते तब तक इस प्रक्रिया को पूरे दिन में एक या तीन बार ज़रूर करें।

नोट - उबलते पानी से अपना चेहरा थोड़ा दूर रखें।

(और पढ़ें - भाप लेने के फायदे)

सेब का सिरका एलर्जी के लिए बहुत ही पुराना उपाय है। इसके एंटीबायोटिक और एंटीहिस्टामिन गुण एलर्जी रिएक्शन का इलाज करने में मदद करते हैं। ये एलर्जी के कारणों का इलाज करता है और जल्दी जल्दी आने वाली छीकों, बंद नाक, खुजली, सिर दर्द और कफ के लक्षणों को भी ठीक करता है।

सेब के सिरका का इस्तेमाल कैसे करें -

  1. एक चम्मच सेब के सिरके को एक ग्लास पानी में मिलाएं।
  2. फिर इसमें एक चम्मच ताज़ा नींबू का जूस और एक या आधा चम्मच शहद मिलाकर पी जाएँ।
  3. जब तक आपको उसके लक्षणों और एलर्जी से राहत नहीं मिल जाती तब तक इस मिश्रण को पूरे दिन में तीन बार ज़रूर पियें।

(और पढ़ें - सेब के सिरके के फायदे

बिच्छू बूटी मौसम के अनुसार होने वाली क्रोनिक एलर्जी के लिए बेहद प्रभावी है। प्राकृतिक एंटी हिस्टामिन होने की वजह से बिच्छू बूटी शरीर के हिस्टामिन के उत्पादन को बंद कर देती है और फिर आखिर में कई एलर्जी के लक्षणों से आराम दिलाने में मदद करती है।

बिच्छू बूटी का इस्तेमाल दो तरीकों से करें -

पहला तरीका -

  1. सबसे पहले एक कप पानी में एक चम्मच सूखे बिच्छू बूटी की पत्तियों को डाल दें।
  2. पांच मिनट तक इस मिश्रण को उबलने के लिए रख दें।
  3. फिर इस मिश्रण को छान लें और अब इसमें थोड़ा शहद मिलाकर पी जाएँ।
  4. इस चाय को पूरे दिन में दो या तीन बार ज़रूर पियें।

दूसरा तरीका -

  1. इसके अलावा आप बिछो बूटी के कैप्सूल्स भी ले सकते हैं। लेकिन लेने से अपने डॉक्टर से डोसेज और कब तक लेने की बात ज़रूर करें।

(और पढ़ें - बिच्छू बूटी के फायदे

लहसुन में प्राकृतिक एंटीबायोटिक होते हैं जो एलर्जी के लिए काफी प्रभावी है। लहसुन के एंटीवाइरल और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुण डॉक्टर से आपको दूर रखते हैं।

लहसुन का इस्तेमाल कैसे करें -

  1. एक या दो हफ्ते के लिए रोज़ाना दो या तीन लहसुन की फांकें खाएं।
  2. अगर आपको लहसुन की गंध अच्छी नहीं लगती तो आप डॉक्टर से पूछने के बाद लहसुन के सप्लीमेंट्स को ले सकते हैं।

(और पढ़ें - लहसुन के फायदे

नींबू एक प्राकृतिक एंटीहिस्टामिन है और विटामिन सी का एक एक अच्छा स्त्रोत भी है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट के गुण भी होते हैं। ये एन्टिटॉक्सिन की तरह भी काम करता है। नींबू एलर्जी की समस्या के लिए बेहद फायदेमंद है।

नींबू का इस्तेमाल दो तरीकों से कर सकते हैं -

पहला तरीका -

  1. मौसम के अनुसार एलर्जी शुरू होने से पहले रोज़ाना सुबह रोज़ एक कप पानी में ताज़ा नींबू का जूस निचोड़कर पीना शुरू कर दें।
  2. जब तक एलर्जी सीजन चला नहीं जाता तब तक रोज़ाना इस मिश्रण को पीते रहें।

दूसरा तरीका -

  1. इसके अलावा एक या आधा कप नींबू का जूस लें।
  2. फिर इसमें एक चम्मच शहद और एक चम्मच लाल मिर्च एक कप गर्म पानी में मिला दें।
  3. इस मिश्रण को रोज़ाना पियें जिससे आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ निकल सकें।

(और पढ़ें - नींबू के फायदे

हल्दी में करक्यूमिन होता है जो डीकन्जेस्टैंट की तरह काम करता है एलर्जी के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है। इसके साथ ही हल्दी में प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण होते हैं जो इसका इलाज जड़ से करते हैं।

हल्दी का इस्तेमाल कैसे करें -

  1. एक साफ़ कांच के जार में छः चम्मच हल्दी पाउडर और शहद डालें।
  2. अच्छे से इस मिश्रण को फिर चला लें।
  3. एलर्जी सीजन के दौरान पूरे दिन में दो बार इस मिश्रण को एक एक चम्मच ज़रूर खाएं।
  4. इसके साथ ही अपने खाने में हल्दी का प्रयोग ज़रूर करें और हल्दी से बने सप्लीमेन्स को भी डॉक्टर से पूछने के बाद लेते रहें।

(और पढ़ें - हल्दी के फायदे और नुकसान

ज़्यादातर लोगों ने ये कहा है कि लोकल शहद खाने से उन्हें एलर्जी सीजन के लक्षणों से राहत मिलती है। मधुमक्खियों द्वारा बनने वाला लोकल हनी एलर्जी को दूर करने में मदद करता है। एलर्जी सीजन के लक्षणों से राहत पाने के लिए पूरे दिन में तीन या चार बार एक या इससे ज़्यादा चम्मच शहद ज़रूर खाएं। अच्छा परिणाम पाने के लिए एलर्जी सीजन शुरू होने से एक महीना पहला आप ये लोकल शहद खाना शुरू कर दें।

(और पढ़ें - शहद के फायदे और नुकसान)

एलर्जी के लिए अन्य प्रभावी घरेलू उपाय है हॉट शावर। जब आप दिन भर बाहर रहते हैं और आपके बाल और त्वचा धूल मिटटी में मिल जाते हैं जो इससे एलर्जी और भी ज़्यादा बढ़ने लगती है। तो एलर्जी के स्त्रोत से छुटकारा पाने के लिए गर्म पानी से नहाएं और बाहर से आने के बाद अपने बालों को अच्छे से धो लें। इसके साथ ही गर्म पानी से नहाने से आपको साइनस को खोलने में भी मदद मिलती है जिससे आप आसानी से सांस ले पाते हैं। गर्म पानी आपको राहत देता है और सोने में भी मदद करता है।

तो ये है ड्रग फ्री तरीके जो आपकी एलर्जी का इलाज करने में मदद करेंगे। हालाँकि अगर लक्षण ज़्यादा बढ़ने लगे तो अपने डॉक्टर को ज़रूर दिखाएं।

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