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जिमों और पार्कों में घंटों व्यायाम करने की बजाय धीरे-धीरे लोग अब कंपाउंड व्यायामों की तरफ बढ़ रहे हैं। शरीर के समग्र विकास के लिए कंपाउंड व्यायाम काफी फायदेमंद हैं। समय के साथ-साथ इसमें व्यायामों की नई-नई श्रंखला जुड़ती गई, जिससे यह लोगों के बीच खूब पसंद किया जाने वाला व्यायाम बन गया। क्रॉसफिट, एचआईआईटी, सर्किट ट्रेनिंग जैसे अभ्यासों ने कंपाउंड व्यायाम को और सरल और लोकप्रिय बना दिया है।

थ्रस्टर भी इसी तरह का एक व्यायाम है जो दो कंपाउंड व्यायामों को एक साथ शामिल करते हुए किया जाता है जिससे लगभग पूरे शरीर की मांसपेशियां सक्रिय रूप में आ जाती हैं। ओवरहेड या शोल्डर प्रेस और फ्रंट स्क्वाट को एक साथ मिलाकर किया जाने वाला यह व्यायाम एक ही समय में कई सारे लाभ देता है। इन दोनों व्यायामों को अलग अलग करने में अधिक वक्त लगता है, लेकिन जब आप इसे थ्रस्टर के रूप में करते हैं तो समय बचाने के साथ-साथ आप अधिक प्रभाव से अपने शरीर की मांसपेशियों का व्यायाम कर पाते हैं।

भले ही थ्रस्टर व्यायामों की लोकप्रियता हाल के वर्षों में बढ़ी हो, लेकिन यह व्यायाम नया नहीं है। यह दशकों से ओलंपिक भारोत्तोलन कार्यक्रमों का हिस्सा रहा है। थ्रस्टर व्यायामों के जरिए लोग अधिक कुशलता से स्वयं को प्रशिक्षित कर सकते हैं। इतना ही नहीं इस प्रक्रिया में कैलरी बर्न भी अधिक होता है, जिससे व्यायाम के अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। दो अभ्यासों के संयोजन वाला यह थ्रस्टर व्यायाम जोड़ों और बड़ी मांसपेशियों के लिए काफी फायदेमंद व्यायाम है। इस व्यायाम को एक बारबेल, डम्बल या केटलबेल की सहायता से किया जा सकता है। अगर आपके पास इनमें से कोई उपकरण मौजूद नहीं है तो भी आप इसे आसानी से कर सकते हैं।

  1. थ्रस्टर व्यायाम के लाभ - Thruster exercise ke fayde
  2. थ्रस्टर व्यायाम करने का सही तरीका - Thruster exercise karne ka sahi tareeka
  3. थ्रस्टर के वैकल्पिक व्यायाम - Thruster exercise ke Alternative

सिर्फ एक मांसपेशी पर ध्यान केंद्रित करने वाले अभ्यासों की तुलना में थ्रस्टर अपेक्षाकृत उच्च तीव्रता वाला व्यायाम है। इस व्यायाम के निम्नलिखित लाभ होते हैं।

कई मांसपेशियों पर एक साथ डालता है प्रभाव : इस व्यायाम के दौरान एक ही वक्त में कई सारी मांसपेशियां सक्रिय अवस्था में आ जाती हैं। क्वाड्रिसेप्स, हैमस्ट्रिंग और ग्लूट्स जैसी शरीर के बड़े मांसपेशियों के समूह हों या फिर ऊपरी शरीर में कंधे, पीठ और ट्राइसेप्स की मांसपेशियां, इस व्यायाम के जरिए सभी को लक्षित किया जा सकता है।

कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस को बढ़ाता है : जब इस व्यायाम को हल्के वजन के साथ किया जाता है, तो यह कार्डियोवैस्कुलर के लिए एक बेहतरीन व्यायाम साबित हो सकता है।

मांसपेशियों के निर्माण में सहायक : इस व्यायाम को भारी वजन के साथ करने से मांसपेशियों का तेजी से विकास होता है।

समय की बचत : थ्रस्टर व्यायाम के जरिए जिन लोगों के पास कम समय है, वे अभी भी अच्छा व्यायाम कर सकते हैं। चूंकि, इस व्यायाम में अधिक से अधिक मांसपेशियों पर प्रभाव पड़ता है ऐसे में यह समय बचाने के साथ कई मायनों में बेहतर है।

कोर मांसपेशियों की शक्ति को बढ़ाता है : फ्रंट स्क्वाट से लेकर ओवरहेड प्रेस जैसे व्यायामों में कोर मांसपेशियों की सक्रियता की आवश्यकता होती है, ऐसे में यह इन मांसपेशियों के विकास में भी काफी सहायक होता है।

नियंत्रण बढ़ाता है : भारी वजन के साथ नीचे और ऊपर की दिशाओं में तेजी से व्यायाम करने से कुछ ही वक्त में शरीर नियंत्रित होना शुरू हो जाता है।

वैसे तो थ्रस्टर दो अलग-अलग अभ्यासों का संयोजक व्यायाम है, लेकिन दो तीव्र क्षमता वाले व्यायामों को एक साथ करने के लिए शरीर में नियंत्रण और स्थिरता की बहुत अधिक आवश्यकता होती है। अगर आप इस व्यायाम की शुरुआत करने के बारे में सोच रहे हैं तो बिना किसी वजन के ही कुछ दिनों के लिए इससे अभ्यस्त होने का प्रयास करें। इससे आप अच्छे से व्यायाम को समझ कर वजन के साथ इसकी शुरुआत कर सकते हैं।

किन उपकरणों की होगी आवश्यकता

वजन वाले प्लेटों के साथ एक बारबेल या डम्बल अथवा केटलबेल्स

किन मांसपेशियों पर होता है असर

  • शरीर का निचला हिस्सा : ग्लूट्स, क्वाड्रिसेप्स, हैमस्ट्रिंग और कोर
  • शरीर का ऊपरी हिस्सा : कंधे, पीठ और ट्राइसेप्स

सेट और रैप

10 रैप के 3 सेट के साथ शुरुआत कर सकते हैं।

कैसे करें व्यायाम

  • छाती को आगे करते हुए सीधे खड़े हो जाएं, घुटनों को थोड़ा झुकाकर रखें। कंधों पर बारबेल को रखते हुए स्क्वाट जैसी स्थिति बनाएं।
  • अब अपने घुटनों को झुकाते हुए फ्रंट स्क्वॉट की तरह कूल्हों को पीछे करें और पीठ को सीधा रखें। जांघों को फर्श के समानांतर रखें।
  • अब पैरों पर तेज बल का प्रयोग करते हुए घुटनों को सीधा करें और ऊपर की ओर आएं।
  • इसी व्यायाम के दौरान हाथों को सिर के ऊपर ले जाते हुए शोल्डर प्रेस व्यायाम भी करें। यह एक रैप है।

टिप्स : व्यायाम के तरीके पर विशेष ध्यान दें। अपनी क्षमता के अनुसार ही वजन उठाएं। एक बार वजन के साथ पूरी तरह से अभ्यस्त हो जाने पर ही वजन को बढ़ाएं।

थ्रस्टर व्यायाम उन लोगों के लिए है जो पहले से ही कंपाउंड व्यायामों से अभ्यस्त हैं। थ्रस्टर व्यायाम को करने के लिए शरीरिक क्षमता और कंपाउंड व्यायामों के बारे में पूरी तरह से जानकारी होना आवश्यक होता है। पूरी जानकारी और क्षमता होने पर ही आप व्यायाम को सही रूप में कर पाएंगे। यदि आप अभी नए-नए जिम में जा रहे हैं तो सबसे पहले विभिन्न व्यायामों की बारिकियों को समझ लेना महत्वपूर्ण है। थ्रस्टर व्यायाम की ओर बढ़ने से पहले निम्न व्यायामों में स्वयं को कुशल बना लेना बहुत आवश्यक होता है।

  • फ्रंट स्क्वाट
  • ओवरहेड या शोल्डर प्रेस
  • पुश प्रेस

निष्कर्ष :

शरीर की शक्ति को बढ़ाने के लिए थ्रस्टर एक बेहतरीन व्यायाम है। इस व्यायाम में पारंगत हो जाने के बाद आप स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के अभ्यासों को और आसानी से कर सकेंगे। थ्रस्टर्स के दौरान ओलंपिक भारोत्तोलन जैसे खेलों और उच्च तीव्रता वाले वर्कआउट की तरह अधिक से अधिक भार उठाना होता है। थ्रस्टर्स जैसा जटिल वर्कआउट करने के लिए सबसे पहले शरीर को शक्तिशाली और सक्षम बनाना अनिवार्य होता है। इसके लिए आपको अलग-अलग मांसपेशियों को लक्षित करने वाले व्यायामों के साथ-साथ आसान कंपाउंड व्यायामों में पारंगत होना आवश्यक होता है।

थ्रस्टर व्यायाम के दौरान सही तरीके और तकनीक का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। थोड़ी सी चूक व्यायाम के दौरान लगने वाली चोट के जोखिमों को बढ़ा देती है। वर्कआउट से पहले वार्मअप और बाद में स्ट्रेचिंग करना कभी भी न भूलें। प्रशिक्षक की निगरानी में व्यायाम करें, जिससे आपको व्यायाम का सही रूप और तकनीक पता चल सके। इसी आधार पर आप अपनी क्षमता के अनुसार वजन भी उठाएं।

और पढ़ें ...

References

  1. Eckert R and Snarr R. Kettlebell Thruster Strength and Conditioning Journal. 2014 Aug; 36(4):73-76.
  2. Tibana RA and de Sousa NMF. Are extreme conditioning programmes effective and safe? A narrative review of high-intensity functional training methods research paradigms and findings. BMJ Open Sport and Exercise Medicine. 2018; 4(1): e000435. PMID: 30498574.
  3. Meigh NJ et al. Kettlebell training in clinical practice: a scoping review.. BMC Sports Science, Medicine and Rehabilitation. 2019 Sep; 11(19).
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