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मां बनना हर महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। यह एक ऐसा सपना होता है, जिसका वह लंबे समय तक इंतजारर कर रही होती है और फिर एक समय आता है जब उसका सपना हकीकत में बदलने लगता है। हालांकि, हर महिला यह भी जानती हैं कि मां बनने का सफर इतना आसान नहीं है। उन नौ महीनों में कितनी तकलीफें झेलनी पड़ती हैं, बस एक मां ही समझ पाती है। लेकिन, मां बनने के सपने को पूरा करने की तकलीफ सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती है।

आजकल बढ़ती महंगाई और अस्पतालों के खर्च ने भी इस सफर को और मुश्किल बना दिया है। पहले के समय में महिलाएं घर पर ही बच्चे को जन्म दे देती थीं। लेकिन, अब हमारी जीवनशैली इतनी खराब हो गई है कि अस्पतालों के उपकरणों और डॉक्टर की सहायता के बिना प्रसव करने से मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है। ऐसे में अगर आपको मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान जैसी कोई सुविधा मिल जाए तो इस मुश्किल समय में काफी मदद मिल सकती है। 

मैटरनिटी इन्शुरन्स एक विशेष बीमा योजना है, जो गर्भवती महिला यानी मां और उसके बच्चे के स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को कवर करता है। इसमें नॉर्मल व सिजेरियन दोनों में होने वाले खर्च को शामिल किया जाता है। सरल भाषा में कहा जाए, तो इस बीमा में आपके मां बनने से संबंधित अधिकतर मेडिकल खर्चों को कवर किया जाता है। आज के समय में मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान बहुत जरूरी हो गया है। इस लेख में आप मैटरनिटी इन्शुरन्स क्या है, फायदे और इसमें क्या-क्या शामिल होता है आदि के बारे में पढ़ सकते हैं।

(और पढ़ें - myUpchar बीमा प्लस हेल्थ इन्शुरन्स के फायदे)

  1. मैटरनिटी इन्शुरन्स क्या है - What is Maternity Insurance in Hindi
  2. मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान के फायदे - What is the benefits of Maternity Insurance in Hindi
  3. मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान क्या-क्या कवर करता है - What does Maternity Insurance cover in Hindi
  4. मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान क्या-क्या कवर नहीं करता है - What does Maternity Insurance not cover in Hindi

मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान किसे कहते हैं?

मैटरनिटी इन्शुरन्स को आमतौर पर पहले से खरीदी हुई बीमा पॉलिसी के साथ एक अतरिक्त विकल्प के रूप में जोड़ने के लिए लिया जाता है। मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान में नॉर्मल या सिजेरियन दोनों डिलीवरी प्रोसीजर पर होने वाले खर्च को कवर किया जाता है। कुछ बीमा ऑफर करने वाली कंपनियां मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान को एक राइडर या पहले से लिए गए बीमा के अतिरिक्त विकल्प (एड-ऑन) के रूप में देना पसंद करती हैं, ताकि आपकी जेब पर ज्यादा दबाव न पड़े।

हालांकि, कुछ कॉरपोरेट कंपनियां भी वहां काम कर रही महिला कर्मचारियों को हेल्थ इन्शुरन्स के साथ-साथ मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान के लाभ ऑफर कर सकती हैं। इसके अलावा यदि पुरुष कर्मचारियों के परिवार को हेल्थ इन्शुरन्स में शामिल किया जाता है तो ऐसी स्थिति में भी मैटरनिटी कवर दिया जाता है। myUpchar बीमा प्लस पॉलिसी में मैटरनिटी को कवर नहीं किया जाता है।

(और पढ़ें - हेल्थ इन्शुरन्स में क्या-क्या कवर होता है)

मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान के मुख्य लाभ क्या हैं?

मैटरनिटी इन्शुरन्स विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए बनाया गया है, जो गर्भवती हैं या गर्भधारण की योजना बना रही हैं। यह एक विशेष बीमा योजना है, जो महिलाओं को विशेष स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करता है। यदि आपने मैटरनिटी इन्शुरन्स लिया हुआ है और आपको गर्भवस्था या प्रसव से संबंधित या फिर शिशु को कोई भी समस्या हो जाती है, तो आपका बीमा आपके मेडिकल खर्च को कवर करता है। मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान द्वारा ऑफर किए जाने वाले कुछ मुख्य लाभों के बारे में नीचे बताया गया है -

  • भर्ती होने से पहले और बाद का मेडिकल खर्च -
    यदि आपने मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान खरीदा हुआ है, तो अस्पताल में भर्ती होने से 30 दिन पहले तक के सारे मेडिकल खर्च आपके बीमा प्लान द्वारा कवर कर लिए जाते हैं। इसके अलावा जब आपको अस्पताल से छुट्टी मिलती है, तो उसके बाद 60 दिन तक का खर्च भी आपके इन्शुरन्स प्लान द्वारा ही कवर किया जाता है।
     
  • कैश की चिंता नहीं -
    गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य कमजोर पड़ जाता है और थोड़ी सी दिक्कत भी उन्हें परेशान कर देती है। कोई भी स्वास्थ्य समस्या होने पर यदि आपको अचानक से अस्पताल में भर्ती होना पड़ जाए, तो ऐसे में कई बार समय पर कैश उपलब्ध नहीं होता है। लेकिन यदि आपने मैटरनिटी इन्शुरन्स खरीदा हुआ है, तो आप कैश की चिंता किए बिना बीमा कंपनी के नेटवर्क में आने वाले किसी भी अस्पताल में जाकर अपना इलाज शुरू करवा सकती हैं। आपको सिर्फ अस्पताल जाते समय अपनी बीमाकर्ता कंपनी को सूचित करना है, बाकी की चिंता आप अपने प्लान पर छोड़ सकती हैं।
     
  • एम्बुलेस का खर्च -
    गर्भवती महिला को प्रसव या अन्य किसी स्वास्थ्य समस्या के कारण अचानक से अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। यदि आप मैटरनिटी इन्शुरन्स की धारक हैं, तो अस्पताल जाने और अस्पताल से वापस घर आने के लिए एम्बुलेंस का खर्च आपकी बीमा कंपनी कवर करती है।
     
  • नवजात शिशु को कवरेज -
    जैसा कि मैटरनिटी इन्शुरन्स को मातृत्व देखभाल के लिए बनाया गया है, इसमें मां के साथ-साथ नवजात शिशु के मेडिकल खर्च को भी कवर किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से शिशु को लगने वाले सभी वैक्सीन, टीके व दवाएं आदि मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान द्वारा ही कवर किए जाते हैं। इसके अलावा यदि शिशु के जन्म लेने के बाद उसको कोई भी बीमारी है, तो उसके इलाज का मेडिकल खर्च भी मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान द्वारा ही कवर किया जाता है। हालांकि, कुछ बीमा कंपनिया कुछ विशेष रोगों को लिस्ट से निकाल सकती हैं, इसलिए बीमा लेने से पहले एक बार सभी दस्तावेजों को पढ़ लेना चाहिए।
     
  • क्लेम फ्रीम बोनस -
    यदि बीमाधारक महिला एक निश्चित अवधि के अंदर क्लेम नहीं करती है, तो उसे अगले साल के प्रीमियम पर एक विशेष छूट दी जा सकती है। हालांकि, यह भी संभव है कि कुछ बीमा कंपनियां यह ऑफर न दें।
     
  • फास्ट रजिस्ट्रेशन -
    मैटरनिटी इन्शुरन्स को खरीदने के लिए आपको ज्यादा जद्दोजहद करने की आवश्यकता नहीं है। यहां तक कि आजकल आप घर बैठे ऑनलाइन भी इस प्लान के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
     
  • टैक्स पर बचत -
    यदि आप मैटरनिटी इन्शुरन्स की धारक हैं, तो इनकम टैक्स के सेक्शन 80डी के तहत आप विशेष छूट पा सकती हैं।
     
  • वेटिंग पीरियड -
    कुछ प्लान में मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान खरीदने के 9 महीने बाद आप मेडिकल खर्च के लिए क्लेम कर सकती हैं। कई इन्शुरन्स प्लान में कम से कम 24 महीने का वेटिंग पीरियड होता है, जिसके बाद क्लेम लिया जा सकता है।
     
  • बीमित राशि के चयन की छूट -
    मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान खरीदते समय व्यक्ति अपने अनुसार बीमित राशि का चुनाव कर सकते हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर राशि का इस्तेमाल कर सकें।

(और पढ़ें - सबसे सस्ता हेल्थ इन्शुरन्स कौन सा है

मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान में क्या-क्या कवर किया जाता है?

कोई भी इन्शुरन्स प्लान खरीदने से पहले यह जानना जरूरी है कि उस बीमा में क्या-क्या कवर किया जाता है। इसी प्रकार यदि आप मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान खरीदने से पहले यह जान लें कि इस प्लान में क्या-क्या कवर किया जा रहा है, तो इसकी मदद से आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि यह बीमा योजना आपके लिए उपयुक्त है या नहीं। नीचे कुछ पॉइंट्स दिए गए हैं, जिनको आमतौर पर मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान में शामिल किया जाता है -

  • डिलीवरी संबंधित खर्च -
    मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान की मदद से नॉर्मल या सी-सेक्शन (सीजिरियन) दोनों डिलीवरियों पर होने वाले मेडिकल खर्च को कवर किया जाता है।
     
  • प्रसव से पहले और बाद के खर्च -
    डिलीवरी के समय से पहले जब महिला को अस्पताल में भर्ती किया जाता है, तब से लेकर प्रसव के बाद उसे छुट्टी मिलने तक सारा मेडिकल खर्च मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान में ही कवर किया जाता है। यहां तक कि यदि डिलीवरी के दौरान कोई जटिलता होती है (जैसे कोई इमर्जेंसी सर्जरी करने की आवश्यकता पड़ना आदि), तो उसका खर्च भी इस बीमा योजना में कवर होता है।
     
  • नवजात शिशु का मेडिकल खर्च -
    मां के स्वास्थ्य के साथ-साथ इसमें नवजात शिशु के स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को भी कवर किया जाता है। उदाहरण के लिए जन्म के बाद बच्चे को लगने वाली वैक्सीन, टीके व दवाओं आदि पर होने वाला खर्च बीमा योजना में ही कवर किया जाता है।
     
  • अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्च -
    यदि आपने मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान खरीदा हुआ है और आपको गर्भवस्था, प्रसव या अन्य कोई संबंधित समस्या हो गई है। ऐसा होने पर अस्पताल में भर्ती होने से 30 दिन पहले और 60 दिन बाद तक के मेडिकल खर्च पर कवरेज आपकी बीमा कंपनी देती है।
     
  • मेडिकल उपकरणों का खर्च -
    जब आप अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं, तो सभी मेडिकल उपकरणों का खर्च भी मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान द्वारा ही कवर किया जाता है उदाहरण के लिए आईसीयू, रूम का किराया व अन्य किसी मेडिकल मशीन का खर्च जैसे डायलिसिस आदि।

(और पढ़ें - फैमिली फ्लोटर हेल्थ इन्शुरन्स क्या होता है)

मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान में क्या-क्या कवर नहीं किया जाता है?

यदि आप मैटरनिटी इन्शुरन्स खरीदने के बारे में सोच रहे हैं, तो यह जानना भी जरूरी है कि इस प्लान में क्या-क्या शामिल नहीं हैं। नीचे दी गई लिस्ट में आप जान सकते हैं कि मैटरनिटी इन्शुरन्स प्लान में क्या-क्या शामिल नहीं है। हालांकि, हर बीमा कंपनी के अपने अलग मानदंड होते हैं, जिनके अनुसार लिस्ट से कुछ पॉइंट्स को निकाला व अन्य को शामिल किया जा सकता है -

  • गर्भावस्था या प्रसव के बाद मां या बच्चे को दिए गए विटामिन व अन्य सप्लीमेंट आदि
  • डॉक्टर द्वारा दोबारा बुलाए जाने पर होने वाला खर्च व डॉक्टर की फीस
  • प्रसव के बाद किए जाने वाले मेडिकल टेस्ट

(और पढ़ें - हेल्थ इन्शुरन्स और लाइफ इन्शुरन्स में अंतर)

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