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ऐसे मरीजों को जिन्हें कोई गंभीर मेडिकल परेशानी होती है, उन्हें विशेष प्रकार की सेवा दी जाती है उसे इंटेंसिव केयर यानी गहन देखभाल कहा जाता है। अस्पताल के जिस वार्ड में यह सेवा दी जाती है उसे इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) यानी गहन देखभाल इकाई कहा जाता है।

इस प्रकार आईसीयू अस्पताल के ऐसे विशेषज्ञ वार्ड होते हैं जिनमें बहुत अधिक बीमार लोगों के लिए उपचार और निगरानी प्रदान करने का कार्य किया जाता है।

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इन वार्ड में विशेष रूप से प्रशिक्षित हेल्थकेयर पेशेवरों को नियुक्त किया जाता है जो मरीजों की देखभाल का काम करते हैं। यहाँ पर विशेष निगरानी उपकरण भी होते हैं। आईसीयू को कभी-कभी गंभीर देखभाल इकाइ (सीसीयू) या गहन चिकित्सा इकाइ (आईटीयू) भी कहा जाता है।

इस लेख में विस्तार से बताया गया है कि आईसीयू क्या है, आईसीयू के अंदर कौनसे उपकरण होते हैं, आईसीयू में मरीज को क्यों और कैसे रखा जाता है, इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि आईसीयू में क्या सावधानियां रखी जाती हैं और आईसीयू में रखने का खर्च कितना होता है।

  1. आईसीयू क्या है - ICU kya hai hindi
  2. आईसीयू के साधन - ICU equipments in hindi
  3. आईसीयू में क्यों रखा जाता है - Why ICU is needed in hindi
  4. आईसीयू में कैसे रखा जाता है - ICU me kya hota hai in hindi
  5. आईसीयू में सावधानियां - ICU protocols in hindi
  6. आईसीयू कीमत - ICU cost in india in hindi

गहन देखभाल का तात्पर्य उन रोगियों को दिए गए विशेष उपचार से है जो गंभीर रूप से अस्वस्थ होते हैं और उन्हें 24 घंटे कड़ी देखभाल की आवश्यकता होती है। एक गहन देखभाल इकाई यानी आईसीयू, अत्यधिक बीमार और गंभीर रूप से घायल मरीजों को महत्वपूर्ण देखभाल और जीवन सहायता प्रदान करती है।

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जब तक आप किसी आपातकालीन सेवा के लिए भर्ती नहीं किये जाते हैं, तब तक आपको आईसीयू में भर्ती होने के लिए अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ द्वारा रेफेर करने की आवश्यकता होगी। कई अलग-अलग प्रकार के रोगियों को आईसीयू में भर्ती कराया जाता है।

कुछ रोगी सीधे आपातकालीन विभाग से आते हैं, तो कुछ अस्पताल के भीतर अन्य वार्ड से उनकी बीमारी में जटिलताओं के कारण आते हैं। आईसीयू में वैसे तो कई प्रकार के मरीज़ होते हैं, लेकिन उन सभी को एक ही चीज़ की आवश्यकता होती है - निरंतर अवलोकन और विशेष देखभाल की।

आईसीयू में उन लोगों की देखभाल की जाती है जिनका जीवन गंभीर बीमारी या दुर्घटना में चोट के कारण खतरे में होता है, जहां उन्हें हर पल निगरानी और जीवन सहायता उपकरण पर रखा जाता है। यह अस्पताल के अन्य वार्डों से अलग स्थिति होती है -

  • आईसीयू में विशेषज्ञों की एक उच्च प्रशिक्षण प्राप्त टीम द्वारा 24 घंटे देखभाल प्रदान की जाती है।
  • यहां पर बहुत कम बिस्तर होते हैं, जिनमें बहुत से उपकरण गंभीर रूप से बीमार मरीजों की निगरानी और देखभाल करते हैं।
  • बहुत कम लोगों को मरीज से मिलने की अनुमति होती है।

जब आप पहली बार आईसीयू में अपने किसी सगे-संबंधी से मिलने आते हैं तो उन चीजों में से एक जो आपको चिंतित कर सकती है वह आपके परिवार के सदस्य से जुड़े उपकरण और मशीनों की संख्या है। आईसीयू में विभिन्न प्रकार के साधन या उपकरण होते हैं जो निम्नलिखित हैं -

  • वेंटिलेटर
    एक वेंटिलेटर का उपयोग तब किया जाता है जब रोगी इतने कमजोर या बीमार होते हैं कि खुद साँस भी नहीं ले सकते हैं। जब आपके परिवार के सदस्य या मित्र वेंटिलेटर पर होते हैं, तो वे आपसे बात करने में सक्षम नहीं होंगे। आपको अगर उनसे बात करनी ही है तो इस तरह के सरल प्रश्न पूछने चाहिए जिसका जवाब सिर हिला कर हाँ या ना में दिया जा सकता है। रोगी को अक्सर उन्हें आराम में रखने के लिए अत्यधिक बेहोश किया जाता है, तो वे नींद में हो सकते हैं और इसलिए हमेशा आप की बात का जवाब नहीं दे सकते।
  • हार्ट मॉनिटर
    एक हार्ट मॉनिटर स्क्रीन पर चलने वाली रंगीन रेखाओं के साथ एक टेलीविजन की तरह दिखता है। ये रेखाएं रोगी के दिल की गतिविधि को मापती हैं। हार्ट मॉनिटर रोगी से स्टिकी पैड (चिपकने वाले पैड) के द्वारा त्वचा से जुड़ा हुआ होता है। बीप और अन्य शोर इलेक्ट्रॉनिक मशीनों द्वारा दिए जाने वाले अलर्ट होते हैं ताकि नर्स को पता चल सके कि कुछ ध्यान देने की जरूरत है।
  • फीडिंग ट्यूब्स (खिलाने की नली)
    अगर कोई मरीज सामान्य रूप से खाने में असमर्थ होता है तो उसके नाक में, पेट में बने छोटे कट के माध्यम से या एक नस में ट्यूब के माध्यम से भोजन दिया जाता है।
  • ड्रैंस और कैथेटर
    ड्रैंस शरीर से रक्त या तरल पदार्थ के किसी भी निर्माण को हटाने के लिए उपयोग की जाने वाली ट्यूब होती है। कैथेटर मूत्र को निकालने के लिए मूत्राशय में डाली गई पतली ट्यूब होती है।

ये मशीनें और मॉनीटर गहन देखभाल को यथा संभव सुरक्षित और प्रभावी बनाने में मदद करते हैं।

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अगर कोई गंभीर रूप से बीमार है और उसे गहन उपचार और करीबी निगरानी की आवश्यकता है या यदि किसी की सर्जरी हुई है और गहन देखभाल से उनको मदद मिल सकती है तो मरीज को आईसीयू में रखने की आवश्यकता होती है।

कई अलग-अलग स्थितियां और परिस्थितियां हैं जिनमें किसी को आईसीयू में रखे जाने की आवश्यकता हो सकती है। कुछ सामान्य कारणों में शामिल हैं -

आईसीयू में मरीजों पर आईसीयू कर्मचारियों की एक टीम द्वारा बारीकी से निगरानी रखी जाती है और कई ट्यूबों, तारों और केबल्स द्वारा उपकरण से मरीजों को जोड़ा जाता है। आम तौर पर प्रत्येक एक या दो रोगियों के लिए एक नर्स होती है।

यद्यपि आईसीयू में रोगियों को मशीनों की एक विस्तृत श्रृंखला से जोड़ा जा सकता है, लेकिन जो सबसे आम मशीनें हैं वे हार्ट मॉनीटर और कृत्रिम वेंटिलेटर (जब रोगी स्वयं सांस नहीं ले सकते हैं) है।

कई आईसीयू मशीने बीप की ध्वनि करती हैं और यदि रोगी की स्थिति में कोई बदलव होता है तो कर्मचारियों का ध्यान रोगी की तरफ आकर्षित करने के लिए शोर करती है और अलार्म बजाती है।

जो मरीज स्वयं भोजन नहीं कर पाते हैं उन मरीजों को तरल पदार्थ और पोषक तत्व या अन्य तरल पदार्थ देने के लिए कई ट्यूब लगाने की भी संभावना होती है।

आईसीयू में कई प्रशिक्षित कर्मचारी होते हैं। प्रत्येक मरीज के लिए आमतौर पर एक समर्पित विशेषज्ञ नर्स होती है, जो नियमित रूप से उपकरण और किसी भी जीवन सहायता प्रणाली की जांच करती है।

आईसीयू हेल्थकेयर टीम अच्छे से समझती है कि आईसीयू में इंसान कितना परेशान हो सकता है और इसलिए वे तत्काल परिवार का समर्थन करने के लिए उपलब्ध होते है।

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आईसीयू में प्रत्येक रोगी बहुत अधिक अस्वस्थ होता है इसलिए प्रत्येक अस्पताल में मरीज से मिलने वालों के लिए एक नीति होती है। आगंतुक आमतौर पर परिवार तक ही सीमित होते हैं। आप को अपने मोबाइल फोन को बंद कर देना चाहिए। आपको रोगी के लिए उपहार लाने से भी मना किया जा सकता है। यदि आप किसी कारण से अस्वस्थ महसूस कर रहे हैं तो रोगी से मिलने आपको नहीं जाना चाहिए।

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विज़िटिंग ऑवर - रोगी से मिलने के घंटे आमतौर पर बहुत लचीले होते हैं, लेकिन ऐसा समय भी हो सकता है जब मिलने की अनुमति नहीं दी जाती है, इसलिए मिलने आने से पहले आपको इसके बारे में पता कर लेना चाहिए। व्यक्ति के बिस्तर के आसपास मिलने वाले लोगों की संख्या सीमित हो सकती है।

स्वच्छता नियम - संक्रमण फैलने के जोखिम को कम करने के लिए, आपको आईसीयू में प्रवेश करने और जाने के दौरान अपने हाथों को साफ करने के लिए कहा जाएगा और आपको कुछ चीजें जैसे फूलों को लाने से रोका जा सकता है।

रोगी कैसा दिखता और व्यवहार कर सकता है - जिस व्यक्ति को आप मिलने जा रहे हैं वह नींद में हो सकता है और उलझन में लग सकता है। उनको थोड़ी सूजन भी हो सकती है या चोट लगने या घावों जैसी चोटें हो सकती हैं। यह देखने से आप परेशान हो सकते हैं, लेकिन चिंता न करें क्योंकि, आईसीयू के कर्मचारी यह सुनिश्चित करेंगे कि रोगी जितना संभव हो उतनी आरामदायक स्थिति में रहे।

आप आम तौर पर व्यक्ति को छूने, आराम से बात करने के लिए स्वतंत्र होंगे। यह उन्हें परिचित आवाज सुनने और पहचानने में मदद कर सकता है, भले ही वे जवाब देने की स्थिति में न हों।

आप उन्हें अपने दिन के बारे में बता सकते हैं या उन्हें कोई किताब या समाचार पत्र पढ़ कर सुना सकते हैं। आप उन्हें अधिक आरामदायक बनाने के लिए कुछ चीजों को ला सकते हैं, लेकिन अगर आप कुछ भी ले जाना चाहते हैं तो कर्मचारियों से पहले पूछ लें।

आपके किसी भी प्रश्न का उत्तर देने के लिए आईसीयू कर्मचारी आपकी यात्रा के दौरान पास में होंगे। केवल परिवार के सदस्यों को ही रोगी के बारे में जानकारी दी जा सकती है। जब रोगी की देखभाल की जाती है तो गोपनीयता हमेशा बनाए रखी जाती है।

मरीजों को आम तौर पर यहाँ से एक अन्य वार्ड में तब ले जाया जाता है जब उन्हें इस तरह के निरंतर ध्यान या मदद की आवश्यकता नहीं रहती है।

एक बार जब कोई व्यक्ति घर जाने के लिए पर्याप्त रूप से ठीक हो जाता है, तो आमतौर पर उन्हें घर पर देखभाल के लिए दवाओं और निर्देशों के साथ छुट्टी मिल जाती है। उन्हें अस्पताल, क्लिनिक या उनके डॉक्टर से आगे की देखभाल के लिए मिलने की आवश्यकता हो सकती है।

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व्यापक बीमा कवर की अनुपस्थिति के कारण 80% से अधिक रोगियों को स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के लिए अपनी जेब से भुगतान करना पड़ता है। इसलिए किसी भी उपचार की लगत हमारे लिए एक महत्वपूर्ण विषय स्वतः ही बन जाता है।

आईसीयू में रखने की लागत मरीज के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं, आईसीयू में बिताए गए समय और विशेष देखभाल की आवश्यकता पर निर्भर करती है।

भारत में एक निजी अस्पताल में आईसीयू में मरीज के भर्ती रहने के लिए कहीं भी 30,000 रुपये से 50,000 रुपये के बीच प्रतिदिन खर्च जा सकता है।

इतनी बड़ी लागत उन मुख्य कारणों में से एक है, जिनके कारण लोग घर पर आईसीयू सेवाओं का चयन कर रहे हैं। घर पर यही लागत प्रति दिन मात्र 7,500 रुपये से 12,500 रुपये तक आती है।

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