अपनी और अपनों की सेहत को ध्यान में रखते हुए हम सब हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी खरीदते हैं। यह हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी बीमारी या एक्सीडेंट की स्थिति में हमें आसानी से स्वास्थ्य सेवाएं लेने में मदद करती है। बुरे वक्त में पैसों की कमी के बावजूद हम इस हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी की मदद से ही समय पर उचित और कैशलेस इलाज भी करवा सकते हैं। इसके बावजूद कई ऐसी स्थितियां होती हैं, जब हमें अपनी हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी को कैंसल या रद्द करवाना पड़ता है। ऐसे में कई प्रश्न हमारे जेहन में आते हैं जैसे - पॉलिसी कैंसल कैसे होती है, पॉलिसी कैंसल कितने प्रकार से होती है, पॉलिसी कैंसल होने पर कितना पैसा वापस मिलता है और किन परिस्थितियों में पॉलिसी कैंसल नहीं होती।

अगर आप अपनी हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी को रद्द करना चाहते हैं, तो इसके लिए भी कुछ नियम और शर्तें हैं, जिनका आपको ध्यान रखना होगा। हालांकि, आप जब चाहें अपनी हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी को रद्द करवा सकते हैं, इसके लिए आपको किसी तरह का कोई इंतजार करने की जरूरत नहीं है। अब बात आती है आपके चुकाए प्रीमियम का क्या होगा? तो इसके लिए भी नियम हैं। आप जितने ज्यादा दिन तक हेल्थ इन्शुरन्स को अपने पास रखेंगे, उतना ही कम रिफंड आपको पॉलिसी रद्द करने पर मिलेगा। कब रद्द करने पर लगभग कितना रिफंड मिलता है, इस बारे में जानने के लिए आपको आर्टिकल में नीचे पढ़ना होगा।

(और पढ़ें - हेल्थ इन्शुरन्स में नॉमिनी बनाना क्यों जरूरी है)

  1. हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी रद्द कितने प्रकार से होती है - Type of Health Insurance Policy Cancellation in Hindi
  2. फ्री-लुक कैंसलेशन क्या होता है - Free-Look Cancellation of Health Insurance in Hindi
  3. पॉलिसी रद्द करने की प्रक्रिया - Steps to Cancel the Health Insurance Policy in Hindi
  4. इन्शुरन्स पॉलिसी रद्द करने पर कितना रिफंड मिलेगा - How much refund I should get after Cancellation of Health Policy in Hindi
  5. पॉलिसी कैंसल और रिन्यु न करने में फर्क - Difference between Policy cancellation and Non renewal in Hindi

हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी को आपने अपने बुरे समय के लिए लिया है, इसलिए हमारी तो आपको यही सलाह है कि आपको अपनी पॉलिसी रद्द नहीं करवानी चाहिए। रद्द कराने की बजाय आप अपनी पॉलिसी को किसी अन्य कंपनी में पोर्ट कर सकते हैं। इसके बावजूद यदि आपने हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी को रद्द कराने का मन बना ही लिया है तो आप कंपनी के टोलफ्री नंबर पर कॉल करके, ईमेल के जरिए और ब्रांच में संपर्क करके अपनी पॉलिसी को रद्द करवा सकते हैं। इसके अलावा यदि आप पॉलिसी को रिन्यु करने के लिए प्रीमियम का भुगतान नहीं करते हैं तो भी आपकी पॉलिसी अपने आप रद्द हो जाएगी।

आपकी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी भी आपकी पॉलिसी को रद्द कर सकती है। इसे ऑटोमेटिक कैंसलेशन भी कहा जाता है। यदि कंपनी को यह विश्वास हो जाए कि आपने पॉलिसी लेते समय किसी स्थिति को छिपाया है या कोई बड़ी धोखाधड़ी की है तो आपकी पॉलिसी को रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा कुछ परिस्थितियां ऐसी भी होती हैं, जिनके तहत कंपनी आपकी पॉलिसी को रिन्यु करने से भी इनकार कर सकती है, ऐसी स्थिति में भी आपकी हेल्थ इन्शुरन्स पलिसी रद्द हो जाएगी।

(और पढ़ें - हेल्थ इन्शुरन्स में वेटिंग पीरियड का क्या मतलब है?)

लगभग हर हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी अपनी हेल्थ पॉलिसी के साथ एक फ्री-लुक पीरियड भी देती है। अलग-अलग कंपनियों, अलग-अलग पॉलिसी और ऑनलाइन व ऑफलाइन के मामले में 15 से 30 दिन के बीच फ्री-लुक पीरियड हो सकता है। फ्री-लुक पीरियड का सीधा मतलब यह है कि इस दौरान यदि आपको पॉलिसी में कुछ भी पसंद नहीं आता है, नियम और शर्तें पसंद नहीं हैं, तो आप कंपनी को पॉलिसी लौटा सकते हैं और कंपनी आपका चुकाया गया पूरा प्रीमियम लौटा देगी। हालांकि, इस दौरान कुछ कंपनियां उतने दिन का प्रीमियम काटकर आपके प्रीमियम को रिफंड कर देंगी और पॉलिसी रद्द हो जाएगी। इसके अलावा प्रशासनिक शुल्क या एडमिनिस्ट्रेटिव चार्जेस काटने के साथ ही यदि आपको पॉलिसी देने से पहले कंपनी ने हेल्थ चेकअप करवाया है तो वह आपसे उस हेल्थ-चेकअप का चार्ज भी ले सकती है। इसके लिए आपको इन्शुरन्स खरीदते समय प्रीमियम के भुगतान से पहले ही कंपनी के नियम और शर्तों को समझ लेना चाहिए। यही नहीं आपकी इन्शुरन्स पॉलिसी के लिए जो स्टांप ड्यूटी चुकाई गई है वह भी आपके प्रीमियम में से काटा जा सकता है।

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एक बार जब आप अपनी हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी को रद्द करने का मन बना लें तो इन्शुरन्स कंपनी से संपर्क करें। पॉलिसी कैंसल करने के लिए आप अपनी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी से ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में भी संपर्क कर सकते हैं। कुछ कंपनियां स्टैंडर्ड हेल्थ इन्शुरन्स कैंसलेशन फॉर्म उपलब्ध कराती हैं, जिन्हें आपको फ्री-लुक पीरियड के दौरान पूरी तरह से भरना होता है। इस फॉर्म में आपको पॉलिसी को रद्द करने को लेकर कई जानकारियां भरनी होंगी, जैसे पॉलिसी कैंसल करने का कारण, पॉलिसी की पूरी डिटेल के साथ ही पॉलिसी डॉक्यूमेंट मिलने की तारीख आदि की भी जानकारी देनी होगी।

आपकी तरफ से पॉलिसी रद्द करने की रिक्वेस्ट मिलने के बाद इन्शुरन्स कंपनी आपसे कॉन्टेक्ट करेगी। इसमें आपसे पॉलिसी रद्द करने का कारण जानने के साध ही संभावित समाधान या विकल्प भी आपको सुझाया जाएगा। यदि आप कंपनी के समाधान या विकल्प से सहमत होते हैं तो आपकी रिक्वेस्ट को कैंसल करके वह विकल्प या समाधान आपको दिया जाता है। यदि आप सहमत नहीं हैं तो कंपनी आपकी रिक्वेस्ट को आगे प्रोसेस करेगी और आपके रिफंड की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इन्शुरन्स कंपनी आपको एक आधिकारिक मेल करेगी, जिसमें आपकी पॉलिसी रद्द होने के बारे में जानकारी होगी।

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ये बात तो सही है कि फ्री-लुक पीरियड में यदि आप पॉलिसी को रद्द करते हैं तो आपको आपका चुकाया पूरा प्रीमियम वापस मिल सकता है। अब प्रश्न उठता है कि अगर आप फ्री-लुक पीरियड खत्म होने के बाद पॉलिसी रद्द करना चाहें तो उस स्थिति में कितना रिफंड मिलेगा? एक बात तो निश्चित है कि फ्री-लुक पीरियड खत्म होने के बाद पॉलिसी रद्द करने पर चुकाया गया पूरा प्रीमियम आपको वापस नहीं मिलेगा। इसके लिए इन्शुरन्स कंपनियां कुछ नियम और शर्तों के तहत काम करती हैं -

  • यदि फ्री-लुक पीरियड खत्म होने के एक महीने के अंदर आप अपनी पॉलिसी को रद्द करना चाहते हैं तो आपके चुकाए गए प्रीमियम का 75 फीसद तक आपको रिफंड के रूप में मिल सकता है।
  • फ्री-लुक पीरियड खत्म होने के तीन महीने के भीतर पॉलिसी रद्द करने पर चुकाए गए प्रीमियम का 50 फीसद तक आपको वापस मिल सकता है।
  • अगर आप फ्री-लुक पीरियड खत्म होने के 6 महीने के अंदर पॉलिसी रद्द करने का फैसला लेते हैं तो आपको चुकाए गए प्रीमियम का 25 फीसद तक रिफंड मिल सकता है।
  • यदि आप फ्री-लुक पीरियड खत्म होने के 6 महीने बाद पॉलिसी को जारी नहीं रखना चाहते तो इसे रद्द करने पर आपको कुछ भी रिफंड नहीं मिलेगा। ऐसी स्थिति में हमारी तो आपको यही सलाह है कि पॉलिसी को रद्द न करके अगले प्रीमियम की अवधि तक चलाएं।

ऊपर बताए गए रिफंड के नियम भी तभी लागू होते हैं, जब आपने कोई क्लेम न लिया हो। यदि आप क्लेम ले चुके हैं तो इन्शुरन्स कंपनी आपको रिफंड देने से इनकार भी कर सकती है।

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हालांकि, दोनों ही स्थितियों में आपका हेल्थ कवर खत्म हो जाता है, लेकिन पॉलिसी रद्द करने और रिन्यु न करने में बड़ा फर्क है। जब इन्शुरन्स कंपनी या बीमाधारक किसी कारण से पॉलिसी को और आगे नहीं चलाना चाहता तो ऐसी स्थिति में उसे पॉलिसी को रद्द करना होता है। जबकि पॉलिसी ईयर खत्म होने के बाद, अगला प्रीमियम जमा न करने की स्थिति में पॉलिसी रिन्यु नहीं होती है।

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एक बीमाधारक के रूप में आप जब चाहें अपनी हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी को कैंसल कर सकते हैं या रिन्यु न करने का फैसला भी ले सकते हैं। हालांकि, यह हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी के नियम और शर्तों के अनुरूप ही होता है। इसी तरह इन्शुरन्स कंपनी भी बीमाधारक की तरफ से तथ्यों को छिपाने या गलत तरीके से सामने रखने, रिन्युअल प्रीमियम न मिलने पर आपकी पॉलिसी को रद्द कर सकती है। यहां एक तथ्य यह भी समझ लें कि इन्शुरन्स कंपनी पॉलिसी लेने के 60 दिन बाद आपकी पॉलिसी को रद्द नहीं कर सकती। हालांकि, गंभीर धोखाधड़ी या प्रीमियम राशि न मिलने पर ऐसा किया जा सकता है।

आप यदि प्रीमियम जमा नहीं करते हैं तो कंपनी आपकी पॉलिसी को रद्द कर देगी। इसके अलावा यदि आप एक ही साल में बहुत ज्यादा क्लेम करते हैं तो ऐसी स्थिति में भी इन्शुरन्स कंपनी आपकी पॉलिसी को रिन्यु करने से इनकार कर सकती है। हालांकि, ऐसा करने से पहले इन्शुरन्स कंपनी आपको नोटिस भेजेगी और ऐसा कदम उठाने का कारण स्पष्ट करेगी। यदि किसी कारण से आपकी इन्शुरन्स कंपनी आपकी पॉलिसी को रिन्यु नहीं करती है तो आप दूसरी कंपनी से हेल्थ पॉलिसी ले सकते हैं, ऐसे में यह जरूरी नहीं कि आपसे ज्यादा प्रीमियम ही लिया जाए।

(और पढ़ें - सबसे अच्छा हेल्थ इन्शुरन्स कौन सा है?)

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