• हिं
  • हिं

जिस तरह से लगातार मेडिकल एक्सपेंसिस बढ़ते जा रहे हैं, उसे देखते हुए हेल्थ इन्शुरन्स बहुत जरूरी हो गया है। हेल्थ इन्शुरन्स न सिर्फ बुरे वक्त में हमें अच्छे इलाज का आश्वासन देता है, बल्कि अच्छे वक्त में भी चिंता मुक्त रखता है। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए आप हेल्थ इन्शुरन्स खरीदते हैं, लेकिन इसमें भी कुछ ऐसे इलाज हैं जो आपकी पॉलिसी कवर नहीं करती है। आपकी हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी कौन सी बीमारियों या स्थितियों में काम नहीं आएगी, इसके लिए आपको अपने पॉलिसी बॉन्ड को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए। हालांकि, हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी के दस्तावेजों को समझना काफी कठिन होता है और इसमें शर्तें भी जटिल होती हैं, जो किसी भी व्यक्ति को उलझन में डाल सकती हैं। आपकी इसी उलझन को हम इस आर्टिकल में सुलझाने का प्रयास करेंगे। चलिए जानते हैं आपकी हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी क्या कवर नहीं करती -

(और पढ़ें - हेल्थ इंश्योरेंस में क्या-क्या कवर होता है?)

  1. मानसिक स्वास्थ्य - Is mental health covered by insurance in Hindi?
  2. अन्य स्थितियां जो इन्शुरन्स में कवर नहीं होतीं - Other conditions not covered by insurance in Hindi
  3. माइ उपचार बीमा प्लस क्या कवर नहीं करता - What doesn't myUpchar suraksha kawach cover
  4. पहले से ही मौजूद चोट और विकलांगता - Pre-existing injury and disease not covered by insurance in Hindi
  5. खतरनाक या साहसिक खेल - Adventure sports not covered in insurance in Hindi
  6. किसी गुंडागर्दी और स्वयं को नुकसान पहुंचाने पर - Act of self-harm or suicide attempts are not covered in Hindi
  7. एलोपेसिया और बालों से जुड़ा इलाज - Hair transplant not covered by insurance in Hindi
  8. स्लीप डिसऑर्डर से जुड़ा इलाज और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी - Is sleep disorder covered by insurance in Hindi?
  9. मोटापा या वजन नियंत्रण - Weight loss treatment not covered by insurance in Hindi
  10. ओपीडी कवर नहीं होता - Is OPD covered in Hindi?
  11. कॉस्मेटिक और प्लास्टिक सर्जरी - Cosmetic surgery not covered in health insurance in Hindi
  12. सेक्सुअल हेल्थ - Are STDs covered by health insurance in Hindi?
  13. प्रेगनेंसी और मातृत्व से जुड़े इलाज - Kya pregnancy cover hoti hai health insurance mein?
  14. ब्लैकलिस्ट अस्पताल में इलाज - Treatment in blacklisted hospital not covered in health insurance in Hindi
  15. स्पेशलिस्ट का दिन में एक से ज्यादा बार विजिट - Are repeated specialist visits covered in health insurance in Hindi?
  16. घर पर इलाज - Treatment at home not covered in health insurance in Hindi
  17. नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाली बीमारी - Does health insurance cover drug use in Hindi?
  18. अल्टरनेटिव थेरेपी और इलाज की नई-नई तकनीकें - Alternative therapy cover nahi hoti

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियों को भी हेल्थ इन्शुरन्स में कवर नहीं किया जाता है। फिर चाहे वह मानसिक मंदता हो, बौद्धिक अक्षमता हो या दिमाग के अधूरे विकास से संबंधित समस्या। इसके अलावा पर्मानेंट न्यूरोलॉजिकल डैमेज की स्थिति में लगातार 90 दिन से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहने पर 90 दिन के बाद का क्लेम हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां नहीं देती हैं। हालांकि, ऐसी स्थिति में शुरुआती 90 दिन तक का कवर मिलता है।

अन्य कई स्थितियां है, जिसमें हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां क्लेम नहीं देती हैं। रेजिटेंट डॉक्टर की फीस के मामले में भी ऐसा ही है। इसके अलावा देश से बाहर इलाज और एयर एंबुलेंस को आमतौर पर हेल्थ इन्शुरन्स में कवर नहीं किया जाता। लेकिन आजकल हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां ऐसी पॉलिसी लेकर आ रही हैं, जिनमें एयर एंबुलेंस और विदेश में इलाज को भी कवर किया जाता है। इसके अलावा हॉस्पिटल में एडमिशन और डिस्चार्ज के दौरान होने वाले खर्च (इलाज से अलग) को भी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां कवर नहीं करती हैं। इसके अलावा यदि आपको व्हीलचेयर, वॉकर, क्रचेस या कोई अन्य मेडिकल इक्विपमेंट की जरूरत है तो इसके लिए क्लेम नहीं मिलता।

डिसक्लेमर : इनके अलावा अलग-अलग पॉलिसी के अनुसार कई अन्य बीमारियों को भी इस लिस्ट में शामिल किया जा सकता है। कई स्थितियां जो हमने ऊपर बताई हैं उनके लिए कंपनियां क्लेम दे सकती हैं, जबकि कुछ को राइडर के तहत अतिरिक्त प्रीमियम लेकर कवर किया जाता। कई स्थितियों के लिए कंपनियां अलग से इन्शुरन्स भी बेचती हैं। इसलिए अपनी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी से इस बारे में विस्तार से पूछें और पॉलिसी वर्डिंग्स को ध्यानपूर्वक पढ़ें।

myUpchar बीमा प्लस में भी आमतौर पर उन्ही स्थितियों को कवर नहीं किया जाता है, जिन्हें अन्य कंपनियां कवर नहीं करती हैं। निम्न स्थितियों में आप माइ उपचार बीमा प्लस के तहत क्लेम नहीं कर सकते। 

  • शराब व अन्य नशीले पदार्थों के सेवन, लत या दुरुपयोग से होने वाली बीमारियों के इलाज पर होने वाला खर्च।
  • दुर्घटना को छोड़कर कोई भी इलाज या अन्य मेडिकल खर्च जो पॉलिसी अवधि के शुरुआती 30 दिनों के भीतर किया गया हो।
  • जन्मजात रोगों के इलाज पर होने वाला मेडिकल खर्च।
  • खुद को चोट पहुंचाने, खुदकुशी करने या उसकी कोशिश करने पर होने वाला मेडिकल खर्च।
  • एबॉर्शन या मिसकैरेज पर होने वाला मेडिकल खर्च।

यदि हेल्थ इन्शुरन्स लेने से पहले से आपको कोई चोट लगी हुई है या किसी तरह की विकलांगता है तो इन्शुरन्स कंपनी उसके लिए आपको क्लेम नहीं देगी। हालांकि, कुछ प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज (पहले से मौजूद बीमारियों) को लगभग सभी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां 2 से 5 साल तक नियमित तौर पर प्रीमियम चुकाने पर कवर करती हैं। myUpchar बीमा प्लस पॉलिसी में भी पहले से मौजूद चोट को कवर नहीं किया जाता। हालांकि, पॉलिसी लेने के बाद हर तरह की चोट को कवर किया जाता है।

अगर आपको पैराग्लाइडिंग, स्कूबा डाइबिंग, बेस जंपिंग, रॉक क्लाइबिंग, स्काइडाइविंग और रिवर राफ्टिंग जैसे खेलों का शौक है तो हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां इस दौरान चोटिल होने पर आपको क्लेम देने से इनकार कर सकती हैं।

यदि आप गुंडागर्दी करते हुए चोटिल हो जाते हैं या किसी तरह के आपराधिक दुराचार में शामिल होते हैं तो ऐसी स्थिति में भी आपको हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी क्लेम नहीं मिलता है। इसके अलावा यदि आप स्वयं को नुकसान पहुंचाते हैं, आत्महत्या की कोशिश करते हैं तो कंपनी क्लेम देने से इनकार कर देगी।

अगर आप बाल झड़ने की समस्या से पीड़ित हैं या आपको एलोपेसिया है और इसका कोई इलाज करवाना चाहते हैं। हेयर ग्रोथ के लिए कोई प्रोडक्ट लेना चाहते हैं या टेस्ट करवाना चाहते हैं तो हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां आपको क्लेम नहीं देंगी। इसी तरह अगर आप गंजे हो गए हैं तो आपको एलोपेसिया विग के लिए भी क्लेम नहीं मिलेगा।

यदि आपको नींद से जुड़े विकार (स्लीप डिसऑर्डर) जैसे स्लीप एपनिया सिंड्रोम है तो इसके इलाज और थेरेपी के लिए भी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां आपको क्लेम नहीं देती हैं। इसी तरह अगर आपको हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की आवश्यकता है तो कंपनियां इसके लिए भी हेल्थ इन्शुरन्स क्लेम नहीं देती हैं। यही नहीं फोड़े-फुंसी के इलाज को भी हेल्थ इन्शुरन्स में कवर नहीं किया जाता है।

यदि आपका वजन (मोटापा) अधिक है और आप इसके लिए किसी तरह की थेरेपी लेना चाहते हैं या सर्जरी करवाना चाहते हैं तो हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां इसके लिए आपको क्लेम नहीं देंगी। इसी तरह से यदि आप पतले हैं और वजन बढ़ाना चाहते हैं तो उसके लिए भी आपको हेल्थ इन्शुरन्स में कवर नहीं मिलता।

सर्दी-जुकाम, बुखार जैसी छोटी-मोटी बीमारियों के साथ ही हल्की चोट, मोच आदि के लिए जब आप किसी डॉक्टर को दिखाते हैं और आपको अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती है तो इसे ओपीडी कैटेगरी में रखा जाता है। आमतौर पर हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां ओपीडी को कवर नहीं करती हैं। हालांकि, कुछ अतिरिक्त प्रीमियम देकर आप एक राइडर के तौर पर ओपीडी कवर ले सकते हैं। इसके तहत आपको सालाना एक निश्चित राशि तक का ओपीडी क्लेम मिल सकता है।

पैथोलॉजी टेस्ट
ओपीडी में दिखाने के बाद यदि डॉक्टर आपको पैथोलॉजी टेस्ट (ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, स्टूल टेस्ट, स्लाइवा टेस्ट), एक्स-रे, एमआरआई, सीटी-स्कैन जैसे टेस्ट करने को कहते हैं तो इनके लिए हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां क्लेम नहीं देती हैं।

प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप
आप अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं और सालाना या हर छह माह में प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप करवाते हैं तो इसके लिए इन्शुरन्स कंपनियां क्लेम नहीं देती हैं। हालांकि, आजकल ज्यादातर हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां स्वयं ही सालाना एक प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप करवाती हैं। अपनी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी से इस बारे में भी जरूर पूछ लें। इसके अलावा वैक्सीनेशन और इम्युनाइजेशन को भी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां कवर नहीं करती हैं। हालांकि, कोरोना के प्रकोप को देखते हुए कई हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां अपनी लगभग सभी पॉलिसी में कोरोना वैक्सीन के लिए क्लेम दे रही हैं। इसलिए एक बार इस बारे में जानकारी के लिए भी कंपनी से संपर्क करें।

ओवर द काउंटर दवाएं
अगर आप कैमिस्ट से जाकर बिना प्रिस्क्रिप्शन के (ओटीसी) कोई भी दवा ले लेते हैं तो उसके लिए कंपनी क्लेम नहीं देती है। फिर चाहे आप ताकत की दवाएं, डाइट्री सप्लीमेंट (विटामिन, मिनरल या ऑर्गेनिक सब्सटांस) ही क्यों न ले रहे हों। हालांकि, अगर आप अस्पताल में भर्ती थे और डॉक्टर ने डाइट्री सप्लीमेंट लेने को कहा है और अपने प्रिस्क्रिप्शन में लिखा है तो हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां इसका क्लेम देती हैं।

कॉस्मेटिक और प्लास्टिक सर्जरी को हेल्थ इन्शुरन्स में कवर नहीं किया जाता है। क्योंकि इसके बिना आपके जीवन पर कोई खतरा नहीं होता। झुर्रियां हटाने के लिए बोटोक्स, दांतों की सफाई, नकली दांत लगाने, ऑर्थोडोंटिक्स, पेरिओडोंटिक्स और एंडोडोंटिक्स के लिए भी कंपनियां क्लेम नहीं देती हैं। ईयर या बॉडी पीयर्सिंग और टैटू बनाने या उनकी वजह से इलाज की जरूरत पड़ने पर कंपनी इन्शुरन्स क्लेम देने से इनकार कर सकती है। यदि आपकी नजर कमजोर है तो आप लेजर थेरेपी या किसी अन्य विधि से नजर ठीक करना चाहते हैं तो भी कंपनी क्लेम नहीं देती हैं। हालांकि, यदि किसी एक्सीडेंट या बीमारी की वजह से ऊपर बताए गए किसी भी इलाज को करना जरूरी हो तो हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी क्लेम देने से इनकार नहीं कर सकती।

आपको अपने हेल्थ इन्शुरन्स बॉन्ड को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए। इसमें एचआईवी-एड्स, सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (STD) को कवर नहीं किया जाता। इसके अलावा जननांग के मस्से, सिफलिस, गोनोरिया, जेनिटल हर्पीस, क्लैमाइडिया, जघन जूँ और ट्राइकोमोनिएसिस को भी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां कवर नहीं करती हैं। हालांकि, कुछ अतिरिक्त प्रीमियम लेकर कंपनियां इनमें से कुछ का क्लेम दे सकती हैं। इसके अलावा लिंग परिवर्तन से संबंधित सर्जरी को भी हेल्थ इन्शुरन्स में कवर नहीं किया जाता।

आमतौर पर प्रेगनेंसी को हेल्थ इन्शुरन्स में शामिल नहीं किया जाता है। यदि आप अपने हेल्थ इन्शुरन्स में प्रेगनेंसी का कवर चाहते हैं तो इसके लिए आपको अतिरिक्त प्रीमियम का भुगतान करना होगा और 24-36 महीने का वेटिंग पीरियड भी होगा। यानी अगर आपने प्रेगनेंसी कवर नहीं लिया है तो नॉर्मल और सिजेरियन डिलिवरी भी कवर नहीं होगी। इसके अलावा मिसकैरेज होने पर या एबॉर्शन करवाने के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़े तो भी आपको क्लेम नहीं मिलेगा। हालांकि, एक्टॉपिक प्रेग्नेंसी (गर्भाशय से बाहर गर्भ ठहरना) और एक्सीडेंट की वजह से मिसकैरेज होने पर कंपनी आपको क्लेम देगी। myUpchar बीमा प्लस पॉलिसी में प्रेगनेंसी को कवर नहीं किया जाता।

बर्थ कंट्रोल शामिल नहीं
यदि आप और बच्चे नहीं चाहते और इसके लिए किसी तरह का ऑपरेशन (नसबंदी) करवाना चाहते हैं तो इसके लिए हेल्थ इन्शुरन्स कवर नहीं मिलता। यही नहीं अगर आप नसबंदी की प्रक्रिया को वापस उलटा करना चाहें तो उसके लिए भी इन्शुरन्स क्लेम नहीं मिलता है। बांझपन के इलाज के लिए प्रचलित (IVF, ZIFT, GIFT, ICSI) जैसी प्रक्रियाओं के लिए भी हेल्थ इन्शुरन्स कवर नहीं मिलता है। (और पढ़ें - टेस्ट ट्यूब बेबी का खर्च)

सरोगेसी
सरोगेसी (किसी अन्य व्यक्ति के बच्चे को जन्म देना) को भी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां कवर नहीं करती हैं। अगर आप किसी अन्य के लिए सरोगेसी कर रही हैं यानी किसी अन्य व्यक्ति के बच्चे को जन्म देने के लिए राजी हुई हैं तो आपकी इन्शुरन्स कंपनी आपको क्लेम नहीं देगी। यही नहीं यदि आप अपने बच्चे को किसी अन्य महिला के गर्भ से जन्म देती हैं (सेरोगेसी सेवाएं लेती हैं) तो भी कंपनी आपको क्लेम नहीं देगी।

नवजात को नहीं मिलेगी इलाज की सुविधा
यदि आपके हेल्थ इन्शुरन्स में प्रेगनेंसी कवर नहीं है तो आपके बच्चे को जन्म के पहले 90 दिन में किसी तरह का कोई हेल्थ कवर नहीं मिलेगा। अगर आपने प्रेगनेंसी कवर लिया है तो बच्चे को पहले मिनट से ही हेल्थ कवर मिल सकता है। यही नहीं बच्चे को लगने वाले सभी टीके भी इसमें शामिल होते हैं।

कुछ अस्पतालों या डॉक्टरों को हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां उनकी गलत छवि के कारण ब्लैकलिस्ट कर देती हैं। ऐसे किसी अस्पताल में भर्ती होने पर हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी आपको क्लेम देने से इनकार कर सकती है। हालांकि, किसी ऐसी स्थिति जिसमें तुरंत इलाज के आभाव में आपकी जान को खतरा हो या एक्सीडेंट जैसी स्थिति में ब्लैक लिस्ट अस्पताल में भी क्लेम दिया जाना अनिवार्य है। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि आपको उतना ही क्लेम दिया जाएगा, जब तक आपकी स्थिति स्थिर नहीं हो जाती। एक बार स्थिति स्थिर होने पर आपको तुरंत किसी ऐसे अस्पताल में भर्ती होना चाहिए, जो कंपनी के नेटवर्क में हो।

अगर आप अस्पताल में भर्ती हैं और किसी विशेषज्ञ का दिन में एक से अधिक बार दौरा होता है तो ज्यादातर हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां सिर्फ एक बार का ही क्लेम देती हैं। इस बारे में और अधिक जानकारी के लिए आपको अपनी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी से बात करनी चाहिए।

घर पर इलाज यानी डॉमिसिलरी ट्रीटमेंट भी आपकी पॉलिसी में कवर है या नहीं, जरूर देख लें। आजकल कई हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी में कुछ बीमारियों के घर पर ही इलाज को कवर किया जाता है और क्लेम मिलने में कोई दिक्कत नहीं होती। इसके बावजूद कई पॉलिसी में डॉमिसिलरी ट्रीटमेंट को कवर नहीं किया जाता। इसके अलावा यदि आपको 24 घंटे से कम समय के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है तो भी कंपनियां क्लेम नहीं देती हैं। हालांकि, कुछ पॉलिसी में डे-केयर ट्रीटमेंट कवर होता है। इसके लिए आपको अपनी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी से पहले ही बात कर लेनी चाहिए या पॉलिसी डॉक्यूमेंट को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए।

यदि आप धूम्रपान, शराब का सेवन और अन्य किसी नशीले पदार्थ का सेवन करते हैं और आपने पॉलिसी लेते समय इसका खुलासा नहीं किया है तो मुसीबत के समय इन्शुरन्स कंपनी क्लेम देने से इनकार कर सकती है। नशीले पदार्थों के सेवन की वजह से होने वाली बीमारियों को कवर करने के लिए इन्शुरन्स कंपनी शुरू से ही आपसे कुछ अधिक प्रीमियम वसूलती हैं। इसके बावजूद ड्रग्स को किसी भी इन्शुरन्स पॉलिसी में कवर नहीं किया जाता।

यदि आपको ड्रग्स या किसी अन्य नशीले पदार्थ के सेवन की लत लग गई है तो उसे छुड़ाने के लिए होने वाले इलाज को भी हेल्थ इन्शुरन्स में कवर नहीं किया जाता। रिहैब्लिटेशन की प्रक्रिया में होने वाले खर्च को भी इन्शुरन्स कंपनी कवर नहीं करती।

अगर आपने हेल्थ इन्शुरन्स लिया है तो यह सुनिश्चित कर लें कि अल्टरनेटिव थेरेपी और इलाज इसमें कवर हैं या नहीं। मसलन अगर आप किसी स्वास्थ्य समस्या का इलाज आयुर्वेद, होम्योपैथी या यूनानी विधि से कराना चाहते हैं तो उसके लिए क्लेम मिलेगा या नहीं। कई पॉलिसी में इन्हें कवर किया जाता है, जबकि कुछ पॉलिसी में आपको इनके लिए कवर नहीं मिलता। इसके अलावा मेडिकल के क्षेत्र में दिनोंदिन बदलाव हो रहा है। तकनीक तेजी से बदल रही है, लेकिन इन्शुरन्स कंपनियां खुद को उतनी तेजी से नहीं बदल रहीं। इलाज की जो नई तकनीकें आज अपनाई जा रही हैं, उनमें से कुछ अभी तक स्थापित तकनीक नहीं हैं और हेल्थ इन्शुरन्स में कवर भी नहीं होतीं। इसमें रोबोटिक सर्जरी, साइबर नाइफ और स्टेम सेल थेरेपी को आमतौर पर हेल्थ इन्शुरन्स में कवर नहीं किया जाता।

ऐप पर पढ़ें
cross
डॉक्टर से अपना सवाल पूछें और 10 मिनट में जवाब पाएँ