अगर आपके पास हेल्थ इन्शुरन्स है तो आप नेटवर्क हॉस्पिटल और नॉन नेटवर्क हॉस्पिटल जैसे शब्दों से अच्छी तरह से वाकिफ होंगे। हम सब अपनों की सुरक्षा के लिए हेल्थ इन्शुरन्स लेते हैं तो हमेशा इस बात का ध्यान रखते हैं कि कंपनी क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है, प्रीमियम कितना है, प्री-एग्जिस्टिंग कंडीशन के लिए वेटिंग पीरियड कितना है, डेकेयर ट्रीटमेंट कवर है या नहीं, डॉमिसिलरी हॉस्पिटलाइजेश मिल सकता है या नहीं। इसके अलावा प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन कवरेज के साथ ही हमारी ही जिम्मेदारी है कि हम कंपनी के नेटवर्क अस्पतालों की लिस्ट को भी ध्यान से देखें। इस आर्टिकल में हम नेटवर्क हॉस्पिटल क्या होते हैं, कितने होते हैं और वहां क्या सुविधा मिलती है के साथ ही नॉन नेटवर्क अस्पतालों के बारे में भी विस्तार से समझेंगे -

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  1. नेटवर्क अस्पताल का क्या मतलब है - What is a Network Hospital in Health Insurance in Hindi?
  2. नॉन नेटवर्क अस्पताल क्या होते हैं - What are Non Network Hospital in Health Insurance in Hindi?

नेटवर्क हॉस्पिटल क्या होते हैं? - इस प्रश्न का उत्तर यह है कि जिन अस्पतालों के साथ इन्शुरन्स कंपनी का अपने ग्राहकों के इलाज के लिए अनुबंध होता है, उन्हें नेटवर्क हॉस्पिटल कहते हैं। इसी बात को आसान शब्दों में कहें तो ये वो अस्पताल होते हैं, जहां पर आपकी इन्शुरन्स कंपनी आपको कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराती है। यानी नेटवर्क अस्पतालों में इलाज करवाने पर आपको अपनी पॉकेट से खर्च नहीं करना पड़ता। इसके अलावा यदि आपने ऐसी पॉलिसी ली है, जिसमें आपको कुछ पर्सेंट तक कोपेमेंट करना पड़ेगा या कुछ डिडक्टिबल आपको देना होगा तो बता दें इन्शुरन्स कंपनी के नेटवर्क अस्पताल में आपको किसी अन्य अस्पताल के मुकाबले सस्ता इलाज भी मिलता है।

यह तो पता चल गया कि नेटवर्क अस्पतालों में आपको कैशलेस और सस्ते इलाज की सुविधा मिलती है, अब प्रश्न उठता है कि इनकी संख्या कितनी होती है? हर इन्शुरन्स कंपनी अपने कैशलेस नेटवर्क में ज्यादा से ज्यादा अस्पतालों को रखना चाहती है, ताकि उनके ग्राहकों को बेहतरीन सुविधा मिल सके। अलग-अलग इन्शुरन्स कंपनियों के नेटवर्क में अस्पतालों की संख्या भी अलग-अलग होती है। ज्यादातर हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियों में यह संख्या 2500 से ज्यादा ही होती है। यदि आप myUpchar बीमा प्लस हेल्थ इन्शुरन्स लेते हैं तो आपको 7000 से ज्यादा अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही 24x7 फ्री टेली ओपीडी का लाभ भी आपको इस पॉलिसी के तहत मिलता है।

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नेटवर्क अस्पताल के मामले में एक और स्थिति होती है। हालांकि, यह स्थिति बहुत कम देखने को मिलती है, इसलिए इस बारे में आमतौर पर चर्चा नहीं होती। इस स्थिति को उदाहरण से समझते हैं - मान नें दिल्ली के रहने वाले राहुल के पास एक हेल्थ इन्शुरन्स है, लेकिन उसकी पॉलिसी में कैशलेस सुविधा का विकल्प नहीं है। ऐसे में भले ही कंपनी के नेटवर्क में 10,000 अस्पताल हों और वह उन्हीं में से किसी एक में इलाज करवाए, तब भी राहुल को कैशलेस इलाज नहीं मिलेगा। अस्पताल से डिस्चार्ज होने पर उसे पूरा बिल अपनी पॉकेट से चुकाना होगा और बाद में सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ टीपीए या इन्शुरन्स कंपनी में रिइम्बर्समेंट क्लेम करना होगा। कंपनी एप्लीकेशन और दस्तावेजों की जांच करके पॉलिसी के नियम और शर्तों के अनुसार क्लेम राशि राहुल के अकाउंट में ट्रांस्फर कर देगी।

नटवर्क अस्पताल के मामले में ध्यान रखने योग्य बात - Things Need to know about Network Hospitals in Hindi

जब आप इस बात से खुश हो रहे हों कि आपकी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी के नेटवर्क में दूसरी कंपनी के मुकाबले ज्यादा अस्पताल हैं तो नीचे बताई गई बातों पर भी गौर कर लें -

  • सबसे पहले आपको इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि कंपनी के नेटवर्क में नामी बड़े अस्पताल हैं या नहीं।
  • आपको इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि कंपनी के नेटवर्क में बड़े अस्पतालों के साथ बजट यानी छोटे अस्पताल और डेकेयर सेंटर भी हैं या नहीं।
  • सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि आपको इस बात की तस्दीक कर लेनी चाहिए कि आपके घर के आसपास मौजूद छोटे-बड़े अस्पताल इस लिस्ट में हैं या नहीं।
  • इसके अलावा जिन स्थानों पर आप अक्सर आते-जाते हैं, वहां के अस्पतालों को भी इस लिस्ट में ढूंढ़ लें, क्योंकि इमरजेंसी समय और जगह देखकर नहीं आती।

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नेटवर्क हॉस्पिटल में क्लेम कैसे करें - How to make a Claim at Network Hospitals in Hindi?

नेटवर्क हॉस्पिटल में क्लेम करने में तीन पार्टियां सम्मिलित होती हैं। पहला वह व्यक्ति जिसने इन्शुरन्स लिया है और क्लेम लेना चाहता है। दूसरी पार्टी वह अस्पताल है जहां पर बीमाधारक का इलाज किया जा रहा है या किया गया है। तीसरी पार्टी के रूप में इन्शुरन्स कंपनी या टीपीए है जो क्लेम को प्रोसेस करते हैं। क्लेम दो स्थितियों (प्लान्ड हॉस्पिटलाइजेशन, इमरजेंसी हॉस्पिटलाइजेशन) के साथ ही दो तरह से (कैशलेस क्लेम और रिइम्बर्समेंट क्लेम) होता है।

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  • प्लान्ड हॉस्पिटलाइजेशन - जब आप पहले से दिन और समय तय करके किसी बीमारी का इलाज करवाने के लिए अस्पताल में भर्ती होते हैं तो इसे प्लान्ड हॉस्पिटलाइजेशन कहा जाता है। इसके लिए आपको भर्ती होने से कम से कम 24-72 घंटे पहले प्री-ऑथराइजेशन फॉर्म भरकर इन्शुरन्स कंपनी को सूचित करना होता है। कंपनी से प्री-एप्रूवल आने के बाद आप इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हो सकते हैं।
  • इमरजेंसी हॉस्पिटलाइजेशन - जब भी अचानक होने वाली किसी समस्या (चोट या बीमारी) के कारण इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है तो उसे इमरजेंसी हॉस्पिटलाइजेशन कहा जाता है।
  • कैशलेस क्लेम - कैशलेस क्लेम के बारे में हम पहले भी बता चुके हैं। यदि आपकी इन्शुरन्स पॉलिसी में कैशलेस कवर है तो नेटवर्क अस्पताल में इलाज करवाने पर आपको अपनी पॉकेट से कुछ भी खर्च नहीं करना होगा। इन्शुरन्स कंपनी पूरा बिल अस्पताल से संपर्क करके सेटल करती है।
  • रिइम्बर्समेंट - यदि आपकी पॉलिसी में कैशलेस कवर नहीं है या कैशलेस क्लेम में ज्यादा समय लग रहा है तो आप नेटवर्क अस्पताल में भी स्वंय बिल चुकाकर बाद में रिइम्बर्समेंट क्लेम कर सकते हैं।

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अगर आप नेटवर्क हॉस्पिटल को समझ गए हैं तो नॉन नेटवर्क अस्पताल को समझना ज्यादा मुश्किल कार्य नहीं है। नॉन नेटवर्क हॉस्पिटल का सीधा अर्थ यह है कि उस अस्पताल के साथ आपकी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी का कोई समझौता नहीं है। नॉन नेटवर्क अस्पताल में इलाज करवाने पर आपको कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिलती है। नॉन नेटवर्क अस्पताल में इलाज करवाने पर आपको इलाज का पूरा बिल स्वयं अपनी पॉकेट से चुकाना होगा। बाद में आप फॉर्म, ऑरिजिनल बिल, रिपोर्ट और एक्स-रे फिल्म आदि के साथ अपने KYC डॉक्यूमेंट लगाकर रिइम्बर्समेंट क्लेम फाइल कर सकते हैं। आमतौर पर इस प्रक्रिया को अपनाने पर आपके अस्पताल के बिल को रिइम्बर्स कर दिया जाता है।

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नॉन नेटवर्क अस्पताल में इलाज के बाद कब नहीं मिलता क्लेम

इमरजेंसी में नेटवर्क अस्पताल का होशो-हवास किसे रहता है। आमतौर पर नॉन नेटवर्क हॉस्पिटल में इलाज करवाने पर रिइम्बर्समेंट क्लेम किया जा सकता है। लेकिन कुछ स्थितियां है, जिनमें आप क्लेम नहीं कर सकते और किया भी तो आपको रिइम्बर्समेंट नहीं मिलेगी। नीचे उन स्थितियों के बारे में जान लें -

  • ब्लैक लिस्टेड अस्पताल में इलाज करवाने पर। हालांकि, इमरजेंसी में आपकी स्थिति स्थिर होने तक का क्लेम मिल सकता है, लेकिन उसके बाद किसी नेटवर्क अस्पताल में भर्ती होना होगा।
  • बीमारी या इलाज के संबंध में किसी तरह का शक होने पर। पूरी जांच पड़ताल के बाद ही क्लेम राशि जारी की जाएगी और उसका भी कुछ फीसद हिस्सा ही मिलेगा।
  • भर्ती होने की जरूरत न होने के बावजूद अस्पताल में भर्ती होने पर इन्शुरन्स कंपनी क्लेम देने से इनकार कर सकती है।
  • डॉक्टर की सलाह लिए बिना अस्पताल में भर्ती होने पर भी इन्शुरन्स कंपनी क्लेम नहीं देगी

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