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ज़्यादातर लोग “वीर्य” और “शुक्राणु” को एक ही समझते हैं, लेकिन असलियत में ये दोनों एक जैसे नहीं हैं। फर्क बिल्कुल वैसा है जैसे चौकोर और आयत में होता है, शुक्राणु वीर्य का हिस्सा होता है, लेकिन वीर्य शुक्राणु का हिस्सा नहीं होता। इस लेख के जरिए आप जानेंगे स्पर्म और सीमेन में क्या अंतर है।

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  1. वीर्य क्या है?
  2. शुक्राणु क्या है?
  3. एक जैसा क्यों समझतें हैं
  4. वीर्य में क्या-क्या होता है?
  5. वीर्य का असली काम क्या है?
  6. वीर्य कहाँ बनता है?
  7. इजेकुलेशन के समय कितना वीर्य निकलता है?
  8. क्या प्री-इजैक्युलेट में शुक्राणु होते हैं?
  9. क्या शुक्राणु नंगी आँखों से दिखते हैं?
  10. सामान्य शुक्राणु मात्रा कितनी होती है?
  11. शुक्राणु कितने दिन तक ज़िंदा रहते हैं?
  12. शरीर को शुक्राणु बनाने में कितना समय लगता है?
  13. क्या उम्र के साथ शुक्राणु बनना बंद हो जाता है?
  14. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  15. सारांश
यौन रोग के डॉक्टर

वीर्य एक सफेद रंग का तरल होता है जो पुरुष के लिंग से स्खलन के समय निकलता है। इसमें सिर्फ शुक्राणु ही नहीं, बल्कि प्रोस्टेट ग्लैंड, सिमिनल वेसिकल्स और बल्बोयूरेथ्रल ग्लैंड से आने वाले तरल पदार्थ भी शामिल होते हैं। ये तरल शुक्राणुओं को पोषण देते हैं और उन्हें महिला के अंडाणु तक पहुँचने में मदद करते हैं ताकि गर्भधारण हो सके।

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शुक्राणु वो छोटी सेल्स हैं जो पुरुष के शरीर में बनती हैं और इनका काम महिला के अंडाणु को फर्टिलाइज करना होता है। शुक्राणु बहुत छोटे होते हैं, इतने छोटे कि इन्हें केवल माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है।

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इसमें समझने की बात नहीं है, क्योंकि दोनों एक ही जगह से बाहर निकलते हैं और दोनों शब्द “S” से शुरू होते हैं। इसी कारण की वजह से बहुत से लोग इन्हें एक ही मान लेते हैं। और ये गलती होना नॉर्मल है। परन्तु शुक्राणु, वीर्य के अंदर मौजूद सिर्फ एक हिस्सा होता है। और वीर्य तो होता ही अलग है।

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वीर्य असल में बड़े हुए शुक्राणु और शरीर के कुछ ग्लैंड्स से निकलने वाले तरल पदार्थों का मिश्रण होता है, जैसे प्रोस्टेट, सिमिनल वेसिकल्स और बल्बोयूरेथ्रल ग्लैंड।

ये मिक्सचर एक तरह का “कॉकटेल” होता है, जिसमें शुगर, प्रोटीन और कुछ विटामिन्स और मिनरल्स भी शामिल होते हैं। ये सब मिलकर शुक्राणु को ऊर्जा और सुरक्षा देते हैं ताकि वो अंडाणु तक पहुँच सकें।

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आपने कभी देखा होगा कि शुक्राणु टॉडल यानी छोटी पूँछ वाली मछली जैसी दिखते हैं और लोग उन्हें “तैराक” भी कहते हैं। लेकिन असलियत ये है कि वो अकेले तैरते हुए सही दिशा में नहीं जा सकते।

वीर्य उन्हें उस रास्ते तक पहुँचने में मदद करता है जहाँ अंडाणु होता है। आसान भाषा में कहें तो वीर्य शुक्राणु के लिए सहारा और धक्का देता है, जिससे वो अंडाणु तक सही तरीके से पहुँच सकें और नए जीवन की शुरुआत हो सके।

वीर्य बनना एक बड़ा और दिलचस्प प्रोसेस है। इसे शरीर के अलग-अलग हिस्सों में बनाया जाता है:

  1. टेस्टिकल्स  – इन्हें आम भाषा में “अंडकोष” या “बॉल्स” कहते हैं। ये दो छोटे अंग हैं जो स्क्रोटम के अंदर होते हैं। यहाँ शुक्राणु और टेस्टोस्टेरोन बनते हैं।
  2. एपिडिडिमिस – यह एक लंबी नली है जो हर वृषण के पास होती है। इसका काम शुक्राणु को वृषण से वास डिफरेंस तक ले जाना है।
  3. वास डिफरेंस – यह नली एपिडिडिमिस और मूत्रमार्ग को जोड़ती है। मूत्रमार्ग वह रास्ता है जिससे मूत्र और वीर्य शरीर से बाहर निकलते हैं। वास डिफरेंस शुक्राणु को स्टोर करता है और उन्हें स्क्रोटम से बाहर ले जाता है।
  4. सिमिनल वेसिकल्स – ये थैली जैसी ग्रंथियाँ मूत्राशय के पीछे होती हैं और वीर्य का तरल हिस्सा बनाती हैं।
  5. प्रोस्टेट– यह ग्रंथि मूत्राशय और मूत्रमार्ग के गले के आसपास होती है। यह क्षारीय तरल बनाती है जो वीर्य का हिस्सा होता है और इसे लिंग से बाहर निकलने में मदद करती है।

जब वीर्य बन जाता है, तो इजाकुलेशन के दौरान यह मूत्रमार्ग से होकर लिंग के बाहर निकलता है।

आमतौर पर एक व्यक्ति के इजेकुलेशन में लगभग एक चम्मच भर वीर्य निकलता है। हालांकि यह मात्रा हर किसी में अलग हो सकती है और इसे कई चीज़ें प्रभावित करती हैं। जैसे कि किसी का धूम्रपान, खानपान, जेनेटिक्स यानी वंशानुगत गुण, और सामान्य स्वास्थ्य वीर्य की मात्रा को बढ़ा या घटा सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति कुछ दिनों तक सेक्स नहीं करता है, तो आमतौर पर स्खलन के समय ज्यादा वीर्य निकलता है। उम्र भी इस पर असर डालती है और दिलचस्प बात यह है कि पुरुष अपने 30 के शुरुआती सालों में सबसे ज्यादा वीर्य का निर्माण करते हैं।

ज्यादातर नहीं, लेकिन कभी-कभी हो सकता है। अगर मूत्रमार्ग में पिछले स्खलन का शुक्राणु बचा रह जाए, तो वो प्री-इजैक्युलेट या प्री-कम में मिल सकता है। इसी वजह से पुल-आउट मेथड भरोसेमंद गर्भनिरोधक तरीका नहीं माना जाता है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि प्री-कम के नमूनों में सही और चलने वाले शुक्राणु मौजूद हो सकते हैं।

शुक्राणु इतने छोटे होते हैं कि इन्हें सिर्फ माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है। असल में, ये बहुत ही छोटे हैं। एवरेज एक शुक्राणु की लंबाई लगभग 4.3 माइक्रोमीटर और चौड़ाई लगभग 2.9 माइक्रोमीटर होती है।

एक मिलीलीटर वीर्य में 15 मिलियन से 200 मिलियन शुक्राणु होना नॉर्मल माना जाता है। शुक्राणुओं की संख्या पर कई चीज़ें असर डाल सकती हैं, जैसे शरीर के प्रजनन अंगों में कोई समस्या, बीमारियाँ, खान-पान और जीवनशैली, और यहाँ तक कि आसपास का वातावरण भी।

ये इस बात पर निर्भर करता है कि शुक्राणु शरीर से निकलने के बाद कहाँ पहुँचते हैं। अगर शुक्राणु योनि में पहुँच जाएँ, तो वो करीब 5 दिन तक जीवित रह सकते हैं, क्योंकि वहाँ की स्राव उन्हें सुरक्षा और पोषण देता है। लेकिन अगर शुक्राणु कहीं और गिर जाएँ, जैसे ठंडी और सूखी सतह, जैसे बाथरूम का फर्श या कंप्यूटर स्क्रीन तो उनकी ज़िंदगी बहुत छोटी होती है, अक्सर कुछ मिनटों की होती है। और इसके साथ, गर्म पानी में शुक्राणु और भी जल्दी मर जाते हैं।

शरीर लगातार नए शुक्राणु बनाने का काम करता रहता है, बिल्कुल जैसे एक फैक्ट्री में लगातार प्रोडक्ट बनते रहें। हर शुक्राणु का निर्माण अपने आप में एक लंबी प्रक्रिया है, जो शुरू होती है शुरुआती कोशिकाओं से और पूरी तरह विकसित होकर तैयार होने में लगभग 74 दिन लगते हैं। इसका मतलब है कि पुरुष शरीर हमेशा नए जीवन के लिए तैयार रहता है।

नहीं, ऐसा नहीं है। जिस व्यक्ति के पास लिंग होता है, उसका शरीर जीवनभर शुक्राणु बनाता रहता है।
हाँ, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ शुक्राणुओं की गुणवत्ता और गतिशीलता यानी उनकी तैरने की क्षमता धीरे-धीरे कम हो जाती है, खासकर 50 साल की उम्र के बाद।

आपने सवालों के जवाब यहाँ पाएं।

वीर्य का रंग या गाढ़ापन बदलना सामान्य है क्या?

 थोड़ा-बहुत बदलाव सामान्य है। पर अगर वीर्य का रंग बहुत पीला, हरा या बदबूदार हो, तो यह संक्रमण या किसी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।

क्या शुक्राणु रोज़ बनते हैं?

हाँ, शरीर रोज़ नए शुक्राणु बनाता है। हर दिन लगभग 100 मिलियन तक शुक्राणु बन सकते हैं, लेकिन एक शुक्राणु को पूरी तरह परिपक्व होने में करीब 64–74 दिन लगते हैं।

क्या उम्र बढ़ने से पुरुषों की फर्टिलिटी कम हो जाती है?

हाँ, 40–50 की उम्र के बाद पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन स्तर घटने लगता है और शुक्राणुओं की संख्या व गतिशीलता कम हो जाती है। इससे गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है।

वीर्य और शुक्राणु में क्या अंतर है?

वीर्य एक तरल पदार्थ है जिसमें शुक्राणु के साथ-साथ प्रोस्टेट, सिमिनल वेसिकल और बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथियों से निकलने वाले तरल शामिल होते हैं। शुक्राणु वास्तव में वो कोशिकाएँ हैं जो अंडाणु तक पहुँचकर गर्भधारण कराती हैं।

क्या पुरुष जीवनभर शुक्राणु बनाते रहते हैं?

हाँ, पुरुषों का शरीर जीवनभर शुक्राणु बनाता रहता है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ शुक्राणुओं की गुणवत्ता और गतिशीलता घटने लगती है। 50 साल के बाद ये असर ज़्यादा दिखता है, जिससे प्रजनन क्षमता थोड़ी कम हो सकती है।

शुक्राणु और वीर्य एक जैसे नहीं हैं। शुक्राणु बहुत छोटी कोशिकाएँ होती हैं जो अंडाणु को निषेचित करती हैं, जबकि वीर्य एक तरल मिश्रण है जिसमें शुक्राणु के साथ प्रोस्टेट और अन्य ग्रंथियों के द्रव्य होते हैं। ये द्रव्य शुक्राणु को ऊर्जा और सुरक्षा देते हैं ताकि वे अंडाणु तक पहुँच सकें।

शुक्राणु नंगी आँखों से नहीं दिखते और वीर्य में लाखों शुक्राणु होते हैं। पुरुष जीवनभर शुक्राणु बनाते रहते हैं, लेकिन 50 साल के बाद उनकी गुणवत्ता और गति कम होने लगती है। वीर्य का रंग या गाढ़ापन थोड़ा बदलना सामान्य है, पर अगर बदबूदार या बहुत पीला हो, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

Dr. Hakeem Basit khan

Dr. Hakeem Basit khan

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