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स्पर्म डोनेशन को हिंदी में शुक्राणु या वीर्य दान कहा जाता है। स्पर्म डोनेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक व्यक्ति अपने वीर्य का दान करता है जो एक अकेली महिला या एक जोड़े को गर्भधारण करने में मदद करता है। पुरुष लिंग से स्खलन के दौरान निकलने वाले तरल पदार्थ को वीर्य या स्पर्म कहा जाता है।

किसी जोड़े के पुरुष साथी में प्रजनन की समस्याओं के कारण या किसी महिला का कोई पुरुष साथी नहीं होने के कारण उन्हें दान किये गए शुक्राणु की आवश्यकता हो सकती है।

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वीर्य दान एक उदार और सकारात्मक कार्य है जो कई जोड़ों और महिलाओं को माता-पिता बनने का सुख दे सकता है। यदि आप वीर्य दान करने का फैसला करते हैं, तो आप दूसरे लोगों की परिवार बनाने की उम्मीदों को पूरा करने में मदद करने का काम कर सकते हैं।

इस लेख में विस्तार से बताया गया है कि स्पर्म डोनेशन क्या है, स्पर्म डोनेट कैसे होता है, आप स्पर्म दान कहाँ करें या आप को दान किये गए स्पर्म की आवश्यकता है तो इसके बारे में भी जानकारी इस लेख में जानकारी दी गयी है। लेख में यह भी बताया गया है कि भारत में स्पर्म डोनेशन को लेकर क्या नियम कानून है।

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  1. स्पर्म डोनेशन क्या है - Sperm donation kya hai in hindi
  2. स्पर्म डोनेट कैसे होता है - Sperm donation process in hindi
  3. स्पर्म दान कहाँ करें - Sparm kaha donate kare in hindi
  4. स्पर्म डोनेशन इन इंडिया - Sperm donation in india in hindi

स्पर्म डोनेशन के अंतर्गत आम तौर पर किसी स्पर्म बैंक को एक स्वस्थ पुरुष द्वारा वीर्य का दान किया जाता है ताकि वह उस महिला का यौन साथी नहीं होने के बावजूद कृत्रिम रूप से गर्भ धारण में उसकी मदद कर सके।

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पुरुष बांझपन से प्रभावित विषमलैंगिक जोड़े, समलैंगिक महिलायें और माँ बनने की इच्छा रखने वाली कोई अकेली महिला आदि लोग स्पर्म डोनेशन के माध्यम से वीर्य प्राप्त करते हैं।

स्पर्म डोनेट करने वाले को उनके नमूने के लिए भुगतान किया जाता है, किंतु स्पर्म बैंक द्वारा आपको स्पर्म डोनर के रूप में स्वीकार करने से पहले इसके लिए कई योग्यताएं होती हैं।

आप स्पर्म दान करे इससे पहले आपकी जाँच की जाती है कि आपको कोई बीमारी तो नहीं है। आपके लिए स्पर्म दान करने से जुड़े संभावित भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और कानूनी मुद्दों को भी समझना आवश्यक है।

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दान किये गए स्पर्म को इंट्रा यूटेरिन इनसेमिनेशन नामक प्रक्रिया से महिला के गर्भ में  रखा जाता है अथवा लैब में परिपक्व अंडों के साथ वीर्य को मिलाकर निषेचन करवाया जाता है और उसके बाद भूर्ण विकसित होने के लिए महिला के गर्भ में रख दिया जाता है, इसे आईवीऐफ (इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन) कहा जाता है।

दान करने वाले और प्राप्त करने वाले दोनों की पहचान स्पर्म बैंक द्वारा गुप्त रखी जाती है। हालाँकि कई देशों में जानकार व्यक्ति से भी स्पर्म लिए जा सकते हैं।

किसी भी व्यक्ति को स्पर्म डोनेशन से पहले एक लंबी जाँच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसके बारे में इस लेख के अंत में विस्तार से बताया गया है।

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यदि आप शुक्राणु दान करने का विचार कर रहे हैं, तो अपने निर्णय के दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में पहले जान लें।

इसके लिए आप निम्न बातों पर विचार करें:

  • क्या आप शुक्राणु दान करने के अपने निर्णय के बारे में अपने परिवार को बताएंगे?
  • क्या आप किसी बच्चे या कई बच्चों के जैविक पिता बनने के लिए तैयार हैं जिनसे आप कभी नहीं मिल सकते हैं?
  • क्या होगा यदि आपके स्पर्म डोनेशन की मदद से पैदा हुए बच्चे एक दिन आपसे मिलना चाहे?
  • यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति को शुक्राणु दान कर रहे हैं जिसे आप जानते हैं, तो किसी वकील की मदद से ऐसे अनुबंध का मसौदा तैयार करने पर विचार करें जो आपके वित्तीय और अभिभावकीय अधिकारों और दायित्वों को परिभाषित करता हो।

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एक बार जब आप निर्णय कर लेते हैं तो अपने शहर के स्पर्म बैंक में जाकर स्पर्म दान कर सकते हैं। आपके शुक्राणु लेने से पहले किसी भी रोग को फैलने से रोकने के लिए आपका प्रारंभिक परीक्षण किया जाता है। इसके बाद यदि आप पूरी तरह स्वस्थ है तो आपके वीर्य के नमूने को लिया जा सकता है।

जो महिला या जोड़े दान किये गए स्पर्म प्राप्त करने में रुचि रखते हैं उन्हें स्पर्म बैंक से संपर्क करने की आवश्यकता होती है, जिसे स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त होती है। कुछ सार्वजनिक शुक्राणु बैंक होते हैं जो अस्पतालों के भीतर ही संचालित होते हैं और कुछ स्वतंत्र शुक्राणु बैंक भी होते हैं।

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डोनर के स्पर्म को महिला के गर्भ में डाला जाता है। दान किये गए शुक्राणु को किसी महिला के प्रजनन अंग में इंजेक्ट करने के लिए उसे एक प्लास्टिक की नली में डाला जाता है जो महिला की गर्भाशय ग्रीवा से होती हुई गर्भ तक जाती है। एक अन्य विकल्प यह है कि प्रयोगशाला में परिपक्व अंडों को उर्वरित करने के लिए इनका प्रयोग किया जाए, इसे इन विट्रो निषेचन कहा जाता है।

स्पर्म दान करने वाले व्यक्ति के बारे में प्राप्तकर्ता को स्पर्म बैंक द्वारा जानकारी नहीं दी जाती है और न ही दान करने वाले को प्राप्तकर्ता की जानकारी दी जाती है। हालाँकि अगर कोई चाहे तो अपने जानने वाले से भी स्पर्म ले सकता है।

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आप किसी स्थानीय स्पर्म बैंक में जाकर स्पर्म दान कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको स्वास्थ्य, ऊंचाई और वजन के निर्धारित मानक को पूरा करना होगा। वे आपको दान करने के लिए विशिष्ट निर्देश देंगे।

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आपको एक कंटेनर दिया जाता है जिसको लेकर आप एक ​​कमरे में अकेले जाकर हस्तमैथुन करके स्पर्म निकालते है। ध्यान रहे की आप को स्पर्म बैंक में ही स्पर्म निकालने होते हैं आप घर से किसी कंटेनर में स्पर्म निकाल कर नहीं ले जा सकते हैं।

आप जो वीर्य दान करते हैं उसके लिए आपको भुगतान किया जाता है और यह कीमत दान किये गए स्पर्म प्राप्त करने वाले व्यक्ति से वसूली जाती है। इसका मूल्य क्या होगा ये आपके स्पर्म बैंक पर निर्भर करता है।
 

सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी विधेयक, 2016 (Assisted Reproductive Technology Bill, 2016) के अनुसार, स्पर्म डोनर अपने पूरे जीवनकाल में एक से अधिक बार शुक्राणु या वीर्य दान नहीं कर सकता है।

भारतीय मेडिकल शिक्षा परिषद (आईसीएमआर) के दिशानिर्देशों के अनुसार गर्भधारण कराने के लिए की जाने वाली सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) में केवल एक पंजीकृत वीर्य बैंक में जमा हुए वीर्य का ही उपयोग किया जा सकता है।

इसी तरह, किसी भी डोनर के वीर्य का उपयोग केवल एक बार ही किया जा सकता है, और गर्भधारण होने के बाद स्पर्म बैंक को सूचित किया जाता है और स्पर्म बैंक उस वीर्य के नमूने को नष्ट कर देता है।

आईसीएमआर नियम यह भी कहते हैं कि वीर्य दान करने वाला व्यक्ति हमेशा अज्ञात होना चाहिए। दाता की पहचान किसी भी स्थिति में प्राप्तकर्ता, या इसके विपरीत, प्राप्तकर्ता की पहचान दानकर्ता के सामने प्रकट नहीं की जानी चाहिए।

दान किया गया वीर्य हमेशा एक पंजीकृत वीर्य बैंक से ही लिया जा सकता है। आईवीएफ (इन-विट्रो निषेचन) केंद्र किसी भी एआरटी प्रक्रिया में उपयोग के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञों को वीर्य इकट्ठा करके नहीं दे सकते हैं।

भारत में एक वीर्य डोनर बनने के लिए निर्धारित मानक निम्नलिखित हैं -

नोट - ये लेख केवल जानकारी के लिए है। myUpchar किसी भी सूरत में किसी भी तरह की चिकित्सा की सलाह नहीं दे रहा है। आपके लिए कौन सी चिकित्सा सही है, इसके बारे में अपने डॉक्टर से बात करके ही निर्णय लें।

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