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आनुवंशिक परीक्षणों (Genetic testing) में डीएनए टेस्ट भी शामिल होता है। डीएनए एक केमिकल डाटाबेस होता है, जो शारीरिक कार्यों के अनुदेशों को सुरक्षित रखता है। जेनेटिक टेस्टिंग की मदद से जीन (Genes) के बदलावों का पता लगाया जा सकता है, जो किसी बीमारी या रोग का कारण बन सकते हैं।

जेनेटिक टेस्टिंग, आपके जीन की जांच करता है। जीन्स डीएनए के अनुदेश होते हैं, जो आपको अपने माता या पिता से मिलते हैं। जेनेटिक टेस्ट स्वास्थ्य जोखिमो से जुड़ी समस्याओं का पता लगा सकता है। यह टेस्ट उचित इलाज का चयन करने और यह जानने में मदद करता है कि संबंधित समस्या उपचार के प्रति कैसी प्रतिक्रिया दे सकती है। 

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  1. डीएनए टेस्ट क्या होता है? - What is DNA Test in Hindi?
  2. डीएनए टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of DNA Test in Hindi
  3. डीएनए टेस्ट से पहले - Before DNA Test in Hindi
  4. डीएनए टेस्ट के दौरान - During DNA Test in Hindi
  5. डीएनए टेस्ट के बाद - After DNA Test in Hindi
  6. डीएनए टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of DNA Test in Hindi
  7. डीएनए टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of DNA Test mean in Hindi
  8. डीएनए टेस्ट कब करवाना चाहिए - When to get DNA Test in Hindi

डीएनए टेस्ट क्या है?

डीएनए टेस्ट एक प्रकार का मेडिकल टेस्ट होता है जो गुणसुत्रों (Chromosomes), जीन्स या प्रोटीन में हो रहे बदलावों की पहचान करता है। डीएनए टेस्ट का रिजल्ट एक संदिग्ध आनुवंशिक स्थिति की पुष्टि या उसका पता लगा सकता है या किसी व्यक्ति में आनुवांशिक विकार विकसित होने की संभावनाओं को निर्धारित कर सकता है। आनुवांशिक परामर्शदाता (Genetic counselor) मरीज को टेस्ट के फायदे और नुकसान से संबंधित जानकारी दे सकते हैं और टेस्ट के सामाजिक तथा भावनात्मक पहलुओं पर चर्चा कर सकते हैं।

  • नवजात शिशु की जांच के लिए – शिशु के जन्म लेने के तुरंत बाद नवजात शिशु की जांच की जाती है, इसकी मदद से उन आनुवांशिक विकारों का पता लगाया जा सकता है जिनका समय पर इलाज संभव होता है। (और पढ़ें - दूध पिलाने वाली मां के लिए आहार)
  • नैदानिक (Diagnostic) टेस्टिंग – किसी विशिष्ट आनुवांशिक या गुणसुत्र संबंधी समस्या को खोजने के लिए नैदानिक टेस्टिंग की जाती है। ज्यादातर मामलों में जब शारीरिक संकेतों और लक्षणों के आधार पर किसी विशेष समस्या स्थिति पर संदेह होता है तो जेनेटिक टेस्टिंग का उपयोग निदान की पुष्टि के लिए किया जाता है।
  • जन्मपूर्व टेस्टिंग – जन्म से पहले भ्रूण के गुणसूत्र या जीन्स के बदलावों का पता लगाने के लिए जन्मपूर्व टेस्टिंग की जाती है। अगर शिशु में गुणसुत्र या जेनेटिक संबंधी विकार होने की अधिक संभावना है तो, इस प्रकार की टेस्टिंग अक्सर गर्भावस्था के दौरान की जाती है। (और पढ़ें - गर्भ में बच्चे का विकास)
  • कैरियर आइडेंटिफिकेशन – अगर आप किसी वंशानुगत रोग से पीड़ित हैं, तो कैरियर आइडेंटिफिकेशन की मदद से इसका पता लगाया जाता है। इसमें यह पता लगाना होता है कि आप वाहक (Carrier) हैं या नहीं, क्योंकि यह जानकारी आपको बच्चे पैदा करने से संबंधित निर्णय लेने में आपकी मदद कर सकता है।

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डीएनए टेस्ट किसलिए किया जाता है?

जेनेटिक टेस्ट की कई वजह हो सकती है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हो सकती हैं -

  • जन्म लेने से पहले शिशु में जेनेटिक संबंधी रोगों की जांच तलाश करने के लिए।
  • अगर किसी व्यक्ति के जीन में कोई रोग है और जो उसके बच्चों में फैल सकता है, तो डीएनए टेस्ट द्वारा इसकी जांच की जाती है।
  • भ्रूण में रोग की जांच करना।
  • व्यस्कों में रोग लक्षणों के विकसित होने से पहले ही जेनेटिक संबंधी रोगों की जांच करने के लिए।
  • जिन लोगों में रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उनके रोग का परीक्षण करने के लिए।
  • किसी निश्चित व्यक्ति के लिए सबसे बेहतर दवा और उसकी खुराक का पता लगाना।

हर व्यक्ति में टेस्ट करवाने के और टेस्ट ना करवाने की कई अलग-अलग वजहें हो सकती हैं। कुछ लोगों के लिए यह जानना बहुत जरूरी होता है कि अगर उनमें टेस्ट का रिजल्ट पोजिटिव आता है तो क्या उस बीमारी की रोकथाम की जा सकती है या इसका इलाज किया जा सकता है। कुछ मामलों में ईलाज संभव नहीं हो पाता, लेकिन टेस्ट की मदद से व्यक्ति अपने जीवन के कई जरूरी फैसले कर पाता है, जैसे परिवार नियोजन या बीमाकृत राशि आदि। एक आनुवंशिक परामर्शदाता (Genetic counselor) आपको टेस्ट के फायदे व नुकसान से संबंधित सभी जानकारियां दे सकता है।

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डीएनए टेस्ट से पहले क्या किया जाता है?

डीएनए टेस्ट करवाने से पहले कोई विशेष प्रकार की तैयारी करने की जरूरत नहीं होती। जेनेटिक टेस्ट से पहले अपनी तथा अपने परिवार की मेडिकल स्थिति से संबंधी जितनी जानकारी हो सके इकट्ठा कर लें। उसके बाद टेस्ट करने वाले डॉक्टर को वह सभी जानकारी ध्यानपूर्वक बता दें, ऐसा करने से वे आपके डीएनए टेस्ट से जुड़े जोखिम को समझ सकते हैं। डॉक्टर से मीटिंग के दौरान टेस्ट से जुड़े सभी सवाल पूछ लें और जेनेटिक टेस्ट से जुड़ी सभी चिंताओं पर चर्चा कर लें। इसके अलावा, टेस्ट रिजल्ट के आधार पर होने वाले सभी विकल्पों पर भी चर्चा कर लें।

अगर आप उस आनुवांशिक विकार के लिए टेस्ट करवा रहे हैं, जो पूरे परिवार में फैला हुआ है, तो आप अपने परिवार के साथ टेस्टिंग करवाने से संबंधित विषय पर भी डॉक्टर से बात कर सकते हैं। टेस्ट करवाने से पहले यह बातचीत कर लेना आपको यह समझा सकता है कि आपका परिवार आपके टेस्ट के रिजल्ट पर कैसी प्रतिक्रिया दे सकता है और इसका रिजल्ट उनको कैसे प्रभावित कर सकता है।

डीएनए टेस्ट के दौरान क्या किया जाता है?

टेस्ट के लिए तैयारी की आवश्यकता टेस्ट की विधि तथा प्रकार पर निर्भर करती है, टेस्ट करने के लिए डॉक्टर आम तौर पर खून का सैंपल लेते हैं। सैंपल विभिन्न तरीकों से लिए जा सकता है, जैसे:

  • नस से खून निकालना
  • अस्थि मज्जा की बायोप्सी, इसमें कुछ निश्चित प्रकार की हड्डियों के स्पोंजी ऊतकों में से सैंपल लिया जाता है।
  • एम्नियोसेंटेसिस (Amniocentesis), इसमें गर्भाशय से भ्रूण अवरण द्रव (Amniotic fluid) का सैंपल लिया जाता है।

डीएनए टेस्ट के बाद क्या किया जाता है?

आम तौर पर टेस्ट के दिन ही डॉक्टर अस्पताल से छुट्टी दे देते हैं। हालांकि, अगर अस्थि मज्जा (बोन मेरो) से सैंपल निकाला गया है, तो आपको रातभर अस्पताल मे रूकना पड़ सकता है। 

डीएनए टेस्ट में क्या जोखिम हो सकते हैं?

आम तौर पर आनुवांशिक परीक्षणों में शारीरिक जोखिम नहीं होता है। खून टेस्ट और चीक स्वैब टेस्ट (Cheek swab tests) में लगभग कोई जोखिम नहीं होता। हालांकि, एम्नियोसेंटेसिस जैसे जन्मपूर्व टेस्ट मिसकैरेज का एक मामूली जोखिम हो सकता है।

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टेस्ट करवाने में भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक जोखिम भी हो सकते हैं। टेस्ट होने से पहले जेनेटिक टेस्टिंग से जुड़े हर जोखिम तथा फायदे आदि के बारे में अपने डॉक्टर से चर्चा कर लें। एक जेनेटिस्ट (Geneticist) या आनुवांशिक परामर्शदाता आपको इस बारे में सारी जानकारी दे सकते हैं।

डीएनए टेस्ट के रिजल्ट का क्या मतलब हो सकता है?

डीएनए टेस्ट करवाने के दौरान कितना समय लगता है, यह टेस्ट के प्रकार और आपकी स्वास्थ्य देखभाल सुविधा पर निर्भर करता है। टेस्ट होने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें और उनसे पूछे की टेस्ट के रिजल्ट कब तक मिल सकते हैं और उनके बारे में चर्चा कब की जा सकती है।

पॉजिटिव रिजल्ट –

अगर जेनेटिक टेस्ट का रिजल्ट पॉजिटिव आता है, तो इसका मतलब यह होता है कि जिस जेनेटिक बदलाव के लिए टेस्ट किया था वह मिल गया है। पॉजिटिव रिजल्ट आने के बाद जो कदम उठाए जाते हैं, वह उस वजह पर निर्भर करते हैं, जिसके लिए टेस्ट किया गया था।

अगर टेस्ट करने का उद्देश्य निम्न में से हो तो -

  • किसी विशेष रोग या स्थिति का परीक्षण करने के लिए – एक पॉजिटिव रिजल्ट समस्या का सही इलाज निर्धारित करने तथा उसका इंतिजाम करने की योजना बनाने में डॉक्टर की मदद कर सकता है।
  • यह जानने के लिए कि कहीं आपके जीन में कोई ऐसी समस्या तो नहीं जो आपके बच्चे में रोग का कारण बन सकती है। अगर टेस्ट पॉजिटिव मिलता है, तो डॉक्टर आपके बच्चे में यह बीमारी विकसित होने के जोखिम को निर्धारित करने में आपकी मदद कर सकते हैं। टेस्ट रिजल्ट आपको तथा आपके साथी को परिवार नियोजन के निर्णय पर विचार करने के लिए जानकारी प्रदान करता है। (और पढ़ें - परिवार नियोजन के साधन)
  • यह निर्धारित करने के लिए कि क्या आप एक निश्चित बीमारी विकसित कर सकते हैं, क्योंकि पॉजिटिव रिजल्ट का मतलब यह नहीं होता कि निश्चित रूप से आपको यह विकार हो जाएगा। उदाहरण के तौर पर ब्रेस्ट कैंसर जीन (BRCA1 or BRCA2) होने का मतलब है कि जीवन के कुछ बिंन्दू पर स्तन कैंसर के अत्याधिक जोखिम हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि निश्चित रूप से आपको स्तन कैंसर होगा। (और पढ़ें - कैंसर के लक्षण)
  • डॉक्टर से इस बारे में बात करें कि पॉजिटिव रिजल्ट आपके लिए क्या मतलब रखता है। कुछ मामलों में जीवनशैली में कुछ बदलाव करके भी रोग विकसित होने के जोखिमों को कम किया जा सकता है, भले ही आपके जीन में विकार होने की संभावनाएं अधिक हों।

नेगेटिव रिजल्ट –

नाकारात्मक रिजल्ट का मतलब है कि टेस्ट द्वारा कोई उत्परिवर्तित (Mutated) जीन पाई गई, यह आश्वासनपूर्ण हो सकता है लेकिन इसकी 100 प्रतिशत गारंटी नहीं है कि आपको किसी प्रकार का विकार नहीं है। उत्परिवर्तित जीन का पता लगाने में जेनेटिक टेस्ट की सटीकता अलग-अलग होती है, यह उस स्थिति पर निर्भर करता है, जिसके लिए टेस्ट किया जा रहा है और यह इस पर भी निर्भर करता है कि पहले कभी किसी परीवार के सदस्य में जीन उप्तरिवर्तन पाया गया है या नहीं। यहां तक की अगर आपमें कोई उत्परिवर्तित जीन नहीं है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको कभी यह विकार नहीं हो सकता।

(और पढ़ें - बीमारियों के नाम)

डीएनए टेस्ट कब करवाना चाहिए?

  • अगर जेनेटिक संबंधी समस्याओं के पारिवारिक इतिहास के कारण अगर आपके बच्चे में वंशानुगत रोग विकसित होने के जोखिम अधिक बढ़ जाते हैं, तो डॉक्टर जेनेटिक टेस्टिंग की सलाह दे सकते हैं।
  • गर्भावस्था के दौरान हर महिला को डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए।
  • अगर आपकी रिश्तेदारी में से कोई जेनेटिक संबंधी विकार से ग्रसित है और आप बच्चे की योजना बना रहे हैं, तो पहले डीएनए टेस्ट करवा लेना चाहिए।
  • जिनका पहले गर्भपात हो चुका है।
  • किसी भी बच्चे या शिशु की जांच करने से लिए, जिसमें असाधारण विशेषताएं या उसके विकास में देरी हो रही हो।
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