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जिन लोगों को डायबिटीज होता है, वे अपने खून में शुगर को मापने के लिए केवल यूरिन टेस्ट या डेली फिंगर स्टिक्स पर निर्भर होते हैं। ये टेस्ट सटीक होते हैं, लेकिन केवल कुछ पल के लिए। ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए एक संपूर्ण उपाय के रूप में ये काफी सीमित होते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि ब्लड शुगर की मात्रा दिन के समय, गतिविधि स्तर और यहा तक कि हार्मोन्स के बदलावों के आधार पर काफी अलग-अलग हो सकती है।

(और पढ़ें - मधुमेह से जुड़ी कुछ गलत धारणाएं)

  1. एचबी ए 1 सी टेस्ट क्या होता है? - What is HbA1c Test in Hindi?
  2. एचबी ए 1 सी टेस्ट क्यों किया जाता है? - What is the purpose of HbA1c Test in Hindi
  3. एचबी ए 1 सी टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है? - What do the results of HbA1c Test mean in Hindi

1980 के दशक से लेकर अब तक A1C टेस्ट शुगर को कंट्रोल करने का एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है।  A1C टेस्ट पिछले दो से तीन महीनों के औसत रक्त ग्लूकोज को मापता है। इसलिए अगर आपको हाई फास्टिंग ब्लड शुगर (High Fasting Blood Sugar) है, तब भी आपका संपूर्ण ब्लड शुगर स्तर सामान्य हो सकता है या इसका उल्टा भी हो सकता है। (हाई फास्टिंग ब्लड शुगर एक टेस्टिंग प्रक्रिया होती है, जिसमें ब्लड शुगर टेस्ट करने के लिए मरीज को 8 घंटों तक पानी के अलावा कुछ नहीं दिया जाता) 

एक सामान्य फास्टिंग ब्लड शुगर, टाइप 2 डायबिटीज की संभावना को समाप्त नहीं कर पाता है। यही कारण है कि A1C परीक्षणों का उपयोग अब प्री- डायबिटीज (Prediabetes) की जांच और निदान के लिए किया जा रहा है। क्योंकि इसमें खाली पेट रहने (Fasting) की आवश्यकता नहीं है। 

A1C टेस्ट को हीमोग्लोबिन A1C टेस्ट या HbA1C टेस्ट के रूप में भी जाना जाता है।

यह टेस्ट कैसे कार्य करता है?

हीमोग्लोबिन (HbA1C) कोशिकाओं के जीवनकाल की वजह से यह टेस्ट प्रभावी होता है। जैसे मान लीजिए कि पिछले हफ्ते या महीने आपका ब्लड ग्लूकोज काफी हाई स्तर पर था, लेकिन अब यह सामान्य हो गया है। आपके खून में अधिक A1C के रूप में हीमोग्लोबिन पिछले हफ्ते के हाई ब्लड ग्लूकोज का "रिकॉर्ड" रखेगा। पिछले तीन महीनों के दौरान हीमोग्लोबिन से जुड़ा ग्लूकोज भी परीक्षण द्वारा दर्ज किया जाएगा, क्योंकि कोशिकाओं का जीवन काल लगभग तीन महीने होता है।

A1C टेस्ट पिछले तीन महीनों की ब्लड शुगर की औसत रीडिंग प्रदान करता है। इसकी रीडिंग किसी भी दिन सटीक नहीं होती, लेकिन इससे डॉक्टरों को अंदाजा मिल जाता है, कि आपका ब्लड शुगर कंट्रोल हर समय कितना प्रभावी रहता है।

जिन लोगों को मधुमेह नहीं होता है उनमें में भी हीमोग्लोबिन का लगभग 5 प्रतिशत ग्लाइकेटेड होता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज़ एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज के मुताबिक, सामान्य ए 1 सी का स्तर 5.6 प्रतिशत या उससे नीचे है। 5.7 से 6.4 प्रतिशत के स्तर में प्री-डायबिटीज का संकेत मिलता है और मधुमेह वाले लोगों में 6.5% या उससे अधिक स्तर पर ए 1 सी होता है।

संपूर्ण ग्लूकोज नियंत्रण पर नजर रखने के लिए, मधुमेह वाले लोगों को साल में कम से कम दो बार ए1सी टेस्ट करवाना चाहिए।

जिन लोगों को पिछले काफी समय से मधुमेह है, उनके लिए A1C टेस्ट अभी तक भरोसेमंद साबित नहीं हो पाए हैं। पहले कईं प्रकार के A1C टेस्ट अलग-अलग प्रकार के रिजल्ट देते थे, उनका रिजल्ट उनका विश्लेषण करने वाली लैब पर निर्भर करता था।

हालांकि, इसकी सटीकता में सुधार नेशनल ग्लाइकोहिमोग्लोबिन स्टैंडर्डाइज़ेशन प्रोग्राम (National Glycohemoglobin Standardization Program) द्वारा किया जाता है। A1C टेस्ट के निर्माताओं को अब यह साबित करना होता है कि उनके टेस्ट उनके लिए भी अनुरूप है जो एक प्रमुख मधुमेह अध्ययन में इस्तेमाल किये जाते हैं।

हालांकि, जब A1C या ब्लड ग्लूकोज टेस्ट की बात आती है, A1C टेस्ट का रिजल्ट वास्तविक प्रतिशत से आधा प्रतिशत अधिक या उससे कम हो सकता है। इसका मतलब है कि अगर आपका A1C टेस्ट का रिजल्ट 6 है, तो यह 5.5 से 6.5 तक की सीमा का संकेत दे सकता है। कुछ लोगों में ब्लड ग्लूकोज का टेस्ट मधुमेह का संकेत दे सकता है, जबकी  उनका A1C टेस्ट सामान्य आता है, या इसके विपरित स्थिति होती है। मधुमेह के निदान करने से पहले, आपके डॉक्टर को टेस्ट दोहराना चाहिए।

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