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यूरिन टेस्ट क्या होता है?

यूरिन टेस्ट एक सामान्य प्रक्रिया होती है, जिसमें पेशाब की जाँच की जाती है। नियमित यूरिन टेस्ट पेशाब की जांच करने और उसके विश्लेषण करने की एक श्रृंखला होती है। इस टेस्ट का इस्तेमाल डॉक्टर सामान्य और आम रोगों की जांच करने के लिए भी करते हैं। यूरिन टेस्ट को मूत्र विश्लेषण (Urine Analysis) के नाम से भी जाना जाता है। नियमित रूप से स्वास्थ्य की जांच करने के लिए भी यूरिन टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है।

यूरिन टेस्ट, मरीज के स्वास्थ्य स्थिति की महत्वपूर्ण और विश्वसनीय जानकारी प्रदान करता है। यूरिन टेस्ट कई सामान्य रोग विज्ञान संबंधी तंत्रों की सूची प्रदान करता है। मूत्र, शरीर में मौजूद कई पदार्थों के मिश्रण से बना होता है, इन पदार्थों को उत्सर्जित करने की आवश्यकता होती है। ये पदार्थ शरीर के सामान्य या असामान्य मेटाबॉलिज्म के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं।

यूरिन टेस्ट, एक विशेष कप में मरीज के मूत्र का सैंपल लेकर किया जाता है। आम तौर पर मूत्र विश्लेषण या टेस्ट के लिए पेशाब की छोटी सी मात्रा (30-60 एमएल) की ही आवश्यकता होती है। पेशाब के सैंपल का विश्लेषण या तो मेडिकल क्लिनिक में किया जाता है या उसे लेबोरेटरी में भेज दिया जाता है।

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  1. यूरिन टेस्ट क्या होता है? - What is Urine Test (Urinalysis) in Hindi?
  2. यूरिन टेस्ट क्यों किया जाता है? - What is the purpose of Urine Test (Urinalysis) in Hindi
  3. यूरिन टेस्ट से पहले - Before Urine Test (Urinalysis) in Hindi
  4. यूरिन टेस्ट के दौरान - During Urine Test (Urinalysis) in Hindi
  5. यूरिन टेस्ट के बाद - After Urine Test (Urinalysis) in Hindi
  6. यूरिन टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं? - What are the risks of Urine Test (Urinalysis) in Hindi
  7. यूरिन टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of Urine Test (Urinalysis) mean in Hindi
  8. यूरिन टेस्ट कब करवाना चाहिए? - When to get Urine Test (Urinalysis) in Hindi?

रूटीन यूरिन टेस्ट क्या होता है?

रूटीन यूरिन टेस्ट कई परीक्षणों का एक समूह होता है, जिसको पेशाब के सैंपल से किया जाता है। यह ज्यादातर इस्तेमाल किए जाने वाले टेस्टों में से एक है। इसमें मूत्र का भौतिक, केमिकल और माइक्रोस्कोपिक परीक्षण शामिल होता है। किसी प्रकार के किडनी के रोग या मूत्र पथ में संक्रमण की जांच करने के लिए भी यूरिन टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। यह उन रोगों की पहचान करने में भी मदद करता है, जिसके कारण शरीर के पदार्थ असामान्य तरीके से टूट कर यूरिन के माध्यम से शरीर से बाहर निकलने लगते हैं।

यूरिन टेस्ट क्यों किया जाता है?

यूरिन टेस्ट भौतिक, केमिकल और माइक्रोस्कोपिक टेस्टों का एक ग्रुप होता है। यह टेस्ट मूत्र में कुछ विशेष प्रकार के पदार्थों का पता लगाता है और उनकी मात्रा का माप करता है। जैसे कि कोशिकाएं, कोशिकाओं के टुकड़े, बैक्टीरिया और सामान्य और असामान्य मेटाबॉलिज्म के उप-उत्पाद आदि।

यूरिन टेस्ट की राय डॉक्टर कई कारणों से दे सकते हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं -

  • नियमित चिकित्सा मूल्यांकन (Routine Medical Evaluation) – सामान्य वार्षिक जांच, सर्जरी से पहले मूल्यांकन (Preoperative Assessment), अस्पताल में दाखिल होना, गुर्दे की बीमारी के लिए जांच, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, और लिवर के रोग आदि।
  • विशेष लक्षणों का मूल्यांकन करना – पेट में दर्द, पार्श्व-भाग (Flank) में दर्द, पेशाब करने में दर्द होनाबुखार, मूत्र में रक्त या अन्य मूत्र संबंधी लक्षण।
  • मेडिकल स्थितियों का परीक्षण करना - मूत्र पथ में संक्रमण, गुर्दे की पथरी, अनियंत्रित मधुमेह (उच्च रक्त शर्करा), गुर्दे की खराबी, मांसपेशियों का टूटना (Rhabdomyolysis), मूत्र में प्रोटीन, दवाओं पर नजर रखना और गुर्दे में सूजन (Glomerulonephritis)।
  • रोग के फैलने या बढ़ने और उसके उपचार की प्रतिक्रिया पर नजर रखना – डायबिटीज से संबंधित किडनी के रोग, गुर्दे की खराबी, लुपस से संबंधित गुर्दे के रोग, ब्लड प्रैशर से संबंधित गुर्दे के रोग, गुर्दे में संक्रमण, पेशाब में प्रोटीन, पेशाब में खून आना।
  • गर्भावस्था की जांच – महिला के गर्भवती होने का पता भी यूरिन टेस्ट करके किया जाता है। (और पढ़ें - गर्भावस्था के शुरूआती लक्षण)

एक कम्पलीट यूरिन टेस्ट तीन चरणों से मिलकर बनता है:

  • देख कर जांच करना – इस चरण में मूत्र के रंग व शुद्धता आदि की जांच की जाती है।
  • केमिकल परीक्षण – मूत्र में ग्लूकोज व प्रोटीन आदि की जांच करने के लिए केमिकल परीक्षण किया जाता है। क्योंकि, मूत्र में उपस्थित पदार्थ शरीर के स्वास्थ्य और अन्य रोगों की महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं।
  • माइक्रोस्कोपिक जांच – इसकी मदद से मूत्र में कोशिकाओं के प्रकारों और उनकी मात्रा की जांच की जाती है। मूत्र में होने वाले अन्य घटक जैसे बैक्टीरिया आदि की पहचान भी माइक्रोस्कोपिक जांच द्वारा की जाती है।

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यूरिन टेस्ट से पहले क्या किया जाता है?

टेस्ट करवाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें की आप खूब मात्रा में पानी पी रहे हैं, ताकि आप पर्याप्त मात्रा में सैंपल दे सकें। यूरिन टेस्ट के लिए आपको खाना-पीना छोड़ने या आपने में किसी प्रकार का बदलाव करने की जरूरत नहीं होती।

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अगर आप कुछ दवाएं या सप्लीमेंट्स आदि लेते हैं, तो डॉक्टर को इनके बारे में जरूर बताएं। कुछ दवाएं व सप्लीमेंट्स ऐसे होते हैं, जो यूरिन टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • विटामिन सी सप्लीमेंट्स
  • मेट्रोनीडाजोल (Metronidazole)
  • राइबोफ्लेविन (Riboflavin)
  • अंथ्राक्विनोन लैक्सेटिव (Anthraquinone laxatives)
  • मेथोकार्बेमोल (Methocarbamol)
  • नाइट्रोफ्यूरन्टाइन (Nitrofurantoin)

यूरिन टेस्ट के दौरान क्या किया जाता है?

टेस्ट करने के लिए डॉक्टर आपको पेशाब का सैंपल घर से लाने या अस्पताल में ही सैंपल देने को कह सकते हैं। सैंपल को लेने के लिए डॉक्टर कंटेनर देते हैं।

बेहतर रिजल्ट 'क्लीन-कैच' विधि का इस्तेमाल करने से मिलता है, जिसको करने के स्टेप इस प्रकार होते हैं:

  • मूत्र द्वार के आस-पास के क्षेत्र को अच्छे से साफ करें।
  • उसके बाद टॉयलेट में पेशाब करना शुरू करें। 
  • बीच में रुक जाएं। 
  • उसके बाद डॉक्टर के द्वारा दिए गए कंटेनर में सैंपल भरें, कंटेनर को डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा के अनुसार भर लें।
  • बाकी पेशाब फिर से टॉयलेट में ही करें।
  • सैंपल को डॉक्टर तक पहुंचाने के लिए डॉक्टर के दिशा-निर्देशों का पालन करें।

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यूरिन टेस्ट के बाद क्या किया जाता है?

यूरिन टेस्ट में सामान्य रूप से पेशाब का सैंपल लिया जाता है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

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यूरिन टेस्ट में क्या जोखिम हो सकते हैं?

यूरिन टेस्ट के लिए सैंपल देने के दौरान किसी प्रकार का जोखिम नहीं होता है। अगर कैथेटराइज़्ड स्पेसीमेन (Catheterized Specimen) की आवश्यकता पड़ती है, तो उसमें कुछ समय के लिए थोड़ी परेशानी हो सकती है।

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यूरिन टेस्ट के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?

यूरिन टेस्ट कई प्रकार के मापन प्रदान करता है, जिनकी मदद से यूरिन में असामान्यताओं की जांच की जाती है।

देख कर जांच करना (Visual Exam) –

डॉक्टर पेशाब के सैंपल का टेस्ट निम्न असामान्यताओं की जांच करने के लिए देख कर भी सकते हैं:

  • पेशाब धुंधला दिखाई देना, जो संक्रमण का संकेत देता है।
  • पेशाब का रंग हल्का लाल या भूरे रंग का होना, जो पेशाब में खून की उपस्थिति का संकेत देता है।
  • पेशाब से असामान्य गंध (बदबू) आना।

माइक्रोस्कोपिक टेस्ट (Microscopic Exam) –

इस टेस्ट में डॉक्टर पेशाब की कुछ बूंदों को माइक्रोस्कोप द्वारा देखते हैं, जिससे कई चीजों की जानकारी मिलती है, जैसे:

  • लाल व सफेद रक्त कोशिकाओं में असामान्यताएं, जो संक्रमण, गुर्दे की बीमारी, मूत्राशय में कैंसर या रक्त विकार आदि का लक्षण हो सकता है।
  • क्रिस्टल, जो गुर्दे की पथरी का संकेत कर सकते हैं।
  • संक्रामक बैक्टीरिया या यीस्ट (और पढ़ें - )
  • एपिथेलियल सेल्स, जो एक ट्यूमर का संकेत दे सकती हैं।

केमिलकल टेस्ट (Chemical/ Dipstick Test) –

डिपस्टिक टेस्ट के लिए, डॉक्टर पेशाब के सैंपल में एक केमिकल वाली स्टिक डालते हैं। मूत्र में उपस्थित पदार्थों के अनुसार डाली गई स्टिक का रंग बदलने लगता है। यह टेस्ट मूत्र में कई चीजों का पता लगाने में डॉक्टर की मदद करता है, जैसे -

अगर पेशाब में कणों की मात्रा ज्यादा है, तो यह निर्जलीकरण का संकेत भी हो सकता है। पीएच का उच्च स्तर मूत्र पथ और किडनी से जुड़ी समस्याओं का संकेत भी दे सकता है। इसके साथ ही साथ पेशाब में शुगर की मात्रा शुगर की बीमारी (डायबिटीज) का संकेद दे सकती है।

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यूरिन टेस्ट कब करवाना चाहिए?

अगर आपको निम्न समस्याएं हैं, तो डॉक्टर आपका यूरिन टेस्ट कर सकते हैं -

  • आप सर्जरी के लिए तैयार हो रहे हैं।
  • अस्पताल में दाखिल होने की स्थिति में हैं।
  • गर्भावस्था जांच के लिए भी यूरिन टेस्ट किया जा सकता है।
  • अगर आपको कोई ऐसी स्थिति है जिस पर हर समय नजर रखने की जरूरत होती है, जैसे किडनी संबंधित रोग।

अगर आपको किडनी या मूत्र पथ से संबंधित कोई समस्या है, तो समस्या को अच्छे से जानने के लिए यूरिन टेस्ट किया जा सकता है। जिसके लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

कुछ ऐसे लक्षण, जिनके दिखाई देने के बाद डॉक्टर तुरंत खून टेस्ट करवाने का निर्देश देते हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल है:

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