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प्रोजेस्टेरोन टेस्ट क्या है?

खून में प्रोजेस्टेरोन के स्तर की जांच प्रोजेस्टेरोन टेस्ट द्वारा की जाती है। प्रोजेस्टेरोन एक हार्मोन है जो कि महिलाओं के शरीर में अंडाशय द्वारा बनाया जाता है। गर्भवती महिलाओं में ये हार्मोन गर्भनाल द्वारा बनाया जाता है। इस हार्मोन का मुख्य कार्य गर्भाशय को गर्भावस्था के लिए तैयार करना, गर्भावस्था को सहारा देना और लैक्टेशन (दूध स्रावित होने की प्रक्रिया) के दौरान दूध बनाने में मदद करना है।

महिला के शरीर में ओवुलेशन के बाद प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ता है, जिसका मतलब है मासिक धर्म चक्र के दूसरे भाग में। इस समय गर्भाशय की परत मोटी होने लगती है, ताकि गर्भ धारण के लिए इंप्लांटेशन हो सके। अगर कन्सेप्शन (गर्भ धारण) नहीं होता तो प्रोजेस्टेरोन का स्तर गिर जाता है और मासिक धर्म हो जाता है। यदि गर्भ धारण हो जाता है तो प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ने लगता है। ये स्तर गर्भावस्था के दौरान घटते-बढ़ते रहते हैं, इसीलिए डॉक्टर महिला के प्रजनन की अवधि में प्रोजेस्टेरोन के स्तर की जांच कई बार करने की सलाह दे सकते हैं।

किसी विशेष समय पर प्रोजेस्टेरोन का स्तर गर्भावस्था के असफल होने का, ओवुलेशन का या एक्टोपिक प्रेगनेंसी का संकेत दे सकते हैं। प्रोजेस्टेरोन के स्तर गर्भावस्था में मां के स्वास्थ्य से जुड़े भी हो सकते हैं और इस प्रकार ये सही और स्पष्ट इलाज के बारे में भी बता सकते हैं।

  1. प्रोजेस्टेरोन टेस्ट क्यों किया जाता है - Progesterone Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. प्रोजेस्टेरोन टेस्ट से पहले - Progesterone Test Se Pahle
  3. प्रोजेस्टेरोन टेस्ट के दौरान - Progesterone Test Ke Dauran
  4. प्रोजेस्टेरोन टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Progesterone Test Ke Parinam Ka Kya Matlab

प्रोजेस्टेरोन टेस्ट क्यों किया जाता है?

डॉक्टर निम्न स्थितियों की जांच के लिए प्रोजेस्टेरोन टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं :

  • महिला में ओवुलेशन हो रहा है या नहीं इसकी पुष्टि करने के लिए
  • यदि महिला को पहले मिसकैरेज हो चुके हैं तो गर्भावस्था की वर्तमान स्थिति जानने के लिए
  • बांझपन का कारण जानने के लिए
  • एड्रिनल ग्रंथि से जुड़ी समस्याओं और किसी कैंसर का परीक्षण करने के लिए
  • बांझपन के लिए किए जा रहे इलाज का प्रभाव जानने के लिए

कभी-कभी कोई ट्यूमर होने के कारण भी महिला व पुरुष दोनों में प्रोजेस्ट्रोन का स्तर असामान्य हो सकता है। इसीलिए पुरुषों को भी प्रोजेस्टेरोन टेस्ट करवाने की सलाह दी जा सकती है। जैसा कि बताया जा चुका है कि प्रोजेस्टेरोन हार्मोन गर्भावस्था को सामान्य रखने में मदद करता है इसलिए जिन महिलाओं को मिस्कैरेज होने का अधिक खतरा होता है उनमें प्रोजेस्टेरोन के स्तर की जांच लाभदायक साबित होती है।

प्रोजेस्टेरोन टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

स्टेरॉयड सप्लीमेंट और गर्भनिरोधक गोलियां टेस्ट के नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं इसीलिए यदि मरीज द्वारा ऐसी कोई भी दवा या सप्लीमेंट लिए जा रहे हैं तो इसकी जानकारी उसे डॉक्टर को दे देनी चाहिए। इसके अलावा यदि हर्बल सप्लीमेंट या नशीले पदार्थ का सेवन करते हैं, तो इस बारे में भी डॉक्टर को बता दिया जाना चाहिए।

डॉक्टर की सलाह के बगैर किसी भी दवा या सप्लीमेंट को लेना बंद न करें और ना ही उसकी खुराक में कोई बदलाव करें। डॉक्टर को अपनी पिछल पीरियड की तारीख भी बताएं क्योंकि ऐसा हो सकता है कि वे किसी विशेष अवस्था में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर टेस्ट करने के लिए कहें। यदि प्रोजेस्टेरोन टेस्ट से पहले एक हफ्ते में व्यक्ति ने कोई थायराइड टेस्ट या बोन स्कैन करवाया है तो इसके बारे में डॉक्टर को बताना जरूरी है क्योंकि इनके कारण प्रोजेस्टेरोन टेस्ट के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।

प्रोजेस्टेरोन टेस्ट कैसे किया जाता है?

प्रोजेस्टेरोन टेस्ट करने में पांच मिनट का समय लगता है। टेस्ट के लिए रक्त का सैंपल मरीज की बांह से लिया जाता है।

सबसे पहले, बांह पर एक इलास्टिक बैंड बांधा जाता है ताकि नस साफ नजर आए। इसके बाद बांह को साफ करने के लिए अल्कोहल युक्त दवा का प्रयोग किया जाता है। एक कीटाणुरहित सुई से ब्लड सैंपल लिया जाता है। इस समय कुछ लोगों को सुई लगने से चुभन हो सकती है, जो कि जल्द ही ठीक हो जाती है। इसके बाद ब्लड एक साफ ट्यूब में निकाल लिया जाता है और बांह पर बैंडेज लगा दी जाती है। अंत में आगे के परीक्षण के लिए ब्लड सैंपल को लैब में भेज दिया जाता है।

प्रोजेस्टेरोन टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

सामान्य परिणाम
प्रोजेस्टेरोन टेस्ट के परिणाम नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर (ng/mL) में लिखे जाते हैं। प्रजनन उम्र की अलग-अलग अवस्थाओं में इसकी वैल्यू अलग-अलग हो सकती है। निम्नलिखित सूची विभिन्न अवस्थाओं और उनसे जुड़ी नॉर्मल वैल्यू के बारे में बताती है :

  • प्यूबर्टी से पहले  0.1-0.3 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर
  • व्यस्क, ओवुलेशन से पहले की अवस्था में - 0.1-0.7 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर
  • व्यस्क, ओवुलेशन के बाद की अवस्था में - 2-25 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर
  • गर्भावस्था, पहली तिमाही में - 10-44 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर
  • गर्भावस्था, दूसरी तिमाही में - 19.5-82.5 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर
  • गर्भावस्था, तीसरे तिमाह में - 65-290 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर
  • रजोनिवृत्ति के बाद - 1 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर से कम

हर लैब के अनुसार उसके परिणाम की वैल्यू अलग हो सकती है। व्यक्ति की उम्र, लिंग और स्वास्थ्य के बारे में जानकर उसके अनुसार ही डॉक्टर वैल्यू का सही मतलब बता सकते हैं। प्रोजेस्टेरोन मुख्य तौर पर महिलाओं में ही स्रावित होता है। पुरुषों में प्रोजेस्टेरोन का स्तर दिखाई नहीं देता।

असामान्य परिणाम

  • जो महिलाएं गर्भवती नहीं हैं उनमें प्रोजेस्टेरोन के सामान्य से अधिक स्तर ओवरी में प्रकार के ट्यूमर होने के खतरे की और संकेत करते हैं जिसे कोरिओनेपिथेलिओमा (Chorionepithelioma) या लिपिड ओवरियन ट्यूमर कहते हैं। इस स्थिति में एड्रिनल ग्रंथि के ट्यूमर भी मौजूद हो सकते हैं।
     
  • गर्भवती महिला में प्रोजेस्टेरोन का सामान्य से अधिक स्तर जुड़वाँ बच्चे होने या असामान्य गर्भावस्था होने का संकेत दे सकते हैं। गर्भावस्था में किसी प्रकार की असामान्यता मोलर प्रेगनेंसी का रूप ले सकती है।
     
  • गर्भावस्था में प्रोजेस्टेरोन की सामान्य से कम वैल्यू मिसकैरेज या भ्रूण की मृत्यु की तरफ इशारा कर सकती है।
     
  • जो महिलाएं गर्भवती नहीं हैं उनमें प्रोजेस्टेरोन का सामान्य से कम स्तर मासिक धर्म (ओव्यूलेशन) न होने का संकेत हो सकता है। ऐसा हाइपोगोनाडिज्म नामक स्थिति के होने के कारण भी हो सकता है।
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References

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  2. Gerard J. Tortora, Bryan Derrickson. Principles of anatomy and physiology 12th ed. Wiley Publication; 2014. Chapter 28, Page no: 1069-1073
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  4. William J. Marshall, S. K. Bangert. Clinical Biochemistry: Metabolic and Clinical Aspects 3rd Edition Churchill Livingstone: Elsevier; 2014, Page no: 436-448
  5. UW Health. [Internet] UW Hospital and Clinics, University of Wisconsin Hospital and Clinics, Madison, Wisconsin. Progesterone
  6. UCSF health. [Internet] University of California.Serum progesterone
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