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स्पीच थेरेपी एक प्रकार की पुनर्वास प्रक्रिया है जो बच्चों या बड़ों में बोलने की या इससे संबंधित कोई परेशानी होने पर उसका इलाज करने के लिए की जाती है। इसकी मदद से शिशु जिनको खाना खाने में या निगलने में परेशानी है उसका भी उपचार हो सकता है।

इसके अलावा जिन बच्चों में सीखने में सामान्य परेशानी, शारीरिक विकलांगता, अटकना, कुछ उच्चारण करने में परेशानी, सुनने में परेशानी, क्लेफ्ट पेलेट (मुँह के ऊपरी होंठ या जीभ में एक जन्मजात विभाजन इसे भंग तालु या खंड तालु भी कहा जाता है), हकलाना, ऑटिस्टिक स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (आटिज्‍म), डिस्लेक्सिया, आवाज से सम्बंधित परेशानी, हलके गूंगेपन इत्यादि में भी मदद मिलती है।

व्यस्क लोगों में भी अगर इस तरह की परेशानियाँ पायी जाती है या किसी दुर्घटना की वजह से ये परेशानी पैदा हो जाती है तो उसमें भी स्पीच थेरेपी मदद कर सकती है।

इस लेख में विस्तार से बताया गया है कि स्पीच थेरेपी क्या है, कैसे की जाती है और स्पीच थेरेपी के क्या तरीके होते हैं इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि स्पीच थेरेपी के क्या फायदे या लाभ है।

(और पढ़ें - बोलने में दिक्कत)

  1. स्पीच थेरेपी क्या है - Speech therapy kya hai in hindi
  2. स्पीच थेरेपी कैसे होती है - Speech therapy kaise hoti hai in hindi
  3. स्पीच थेरेपी के तरीके - Speech therapy ke tarike in hindi
  4. स्पीच थेरेपी के फायदे - Speech therapy benefits in hindi

स्पीच थेरेपी बोलने और अन्य लोगों के साथ बातचीत में होने वाली परेशानी का एक उपचार है। स्पीच थेरेपी में विभिन्न तकनीकों का प्रयोग परेशानी के प्रकार के अनुसार किया जाता है।

इसमें बोलने में उपयोग होने वाली मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए एक्सरसाइज करवाने से लेकर बोलने में स्पष्टता के लिए अभ्यास तथा अभिव्यक्ति में सुधार करने के लिए ध्वनि निकालने का अभ्यास आदि तकनीक शामिल हो सकती हैं।

स्पीच-लैंग्वेज पैथोलोजिस्ट बच्चों और व्यस्क लोगों में बोलने, भाषा, संज्ञानात्मक और निगलने संबंधी विकार का परिक्षण और उपचार करते हैं।

स्पीच-लैंग्वेज पैथोलोजिस्ट (speech-language pathologist) आपकी परेशानी की जाँच करते हैं और बच्चों और व्यस्क लोगों का उपचार करने के लिए दिमाग और तंत्रिका तंत्र की परेशानी (न्यूरोलॉजिस्ट), कान, नाक और गले की परेशानी (ईएनटी विशेषज्ञ), पुनर्वास चिंताएं (दवाईयाँ और पुनर्वास विशेषज्ञ), बच्चों की मेडिकल परेशानियां (पीडिअट्रिशन, पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट, क्रानिओफ़ेसिअल टीम विशेषज्ञ) और अन्य परेशानियों के लिए इनके विशेषज्ञ डॉक्टर के साथ मिलकर काम करते हैं।

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बच्चों के लिए स्पीच थेरेपी
बच्चों की स्पीच थेरेपी के विशेषज्ञ को स्पीच-लैंग्वेज पैथोलोजिस्ट (एसएलपी) कहा जाता है। सबसे पहले स्पीच-लैंग्वेज पैथोलोजिस्ट आपके बच्चें की आवश्यकता के अनुसार कौन सा तरीका उपयोगी होगा इसका निर्धारण करता है।

इसके बाद स्पीच-लैंग्वेज पैथोलोजिस्ट आपके बच्चें की कमजोरियों को दूर करने के लिए मजेदार तरीकों का उपयोग करते हैं ताकि बच्चा उसमें पूरे मन से भाग ले और उसे लाभ हो सके। इसमें, जीभ और फेफड़ों को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज करवाना जैसे कि - सीटी बजाना आदि और भाषा में सुधार के लिए शब्दों को दुहराने वाले खेल या बातचीत आदि को शामिल किया जा सकता है।

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व्यस्क के लिए स्पीच थेरेपी
जब आप किसी स्पीच और भाषा चिकित्सक के पास जाते हैं तो वे सबसे पहले आपकी परेशानी जानने का प्रयास करते हैं।

अगर आपको बातचीत में परेशानी होती है तो परेशानी के स्वरुप, आप पर उसका प्रभाव और परेशानी के कारण के बारे में पूछा जायेगा। इसके बाद स्पीच और भाषा चिकित्सक आपको सवाल पूछ कर या अलग-अलग फोटो दिखा कर आपकी भाषा की कमजोरियों की जाँच करते हैं। जब वो भाषा संबंधी सभी मुद्दों का पता लगा लेते हैं तो फिर आपकी परेशानी को दूर करने का प्लान तैयार करते हैं।

यदि आपको भोजन निगलने में परेशानी होती है तो आपसे आपकी मेडिकल हिस्ट्री और भोजन तथा परेशानी के बारे में सवाल किये जा सकते हैं। उसके बाद स्पीच और भाषा चिकित्सक आपकी मुँह और गले की मांसपेशियों की जाँच करेंगे। फिर वे कई तरह के भोजन की अनुकूलता और तकनीक का उपयोग करके निगलने के सबसे सुरक्षित तरीके को निर्धारित करने का प्रयास करते हैं। वे आपको पेय या भोजन में बदलाव, बैठने के तरीके में बदलाव या एक्सरसाइज करने के लिए कह सकते हैं।

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बच्चों के लिए स्पीच थेरेपी तकनीक
बच्चों के लिए स्पीच थेरेपी के लिए स्पीच-लैंग्वेज पैथोलोजिस्ट (डॉक्टर) निम्नलिखित रणनीतियों का उपयोग करते हैं -

  • लैंग्वेज इंटरवेंशन एक्टिविटीज़ (भाषा में हस्तक्षेप की गतिविधियाँ) - ये गतिविधियाँ कई तरीकों से बच्चों के कौशल को विकसित करती है जैसे - मॉडलिंग और बच्चों को प्रतिक्रिया देना इत्यादि। चिकित्सक फोटो और बुक या खेल आधारित थेरेपी का उपयोग कर सकते हैं। कौशल बढ़ाने के लिए वे भाषा का अभ्यास भी करवा सकते हैं।
  • आर्टिकुलेशन थेरेपी (अभिव्यक्ति चिकित्सा) - स्पीच-लैंग्वेज पैथोलोजिस्ट बच्चों को जिन ध्वनियों में परेशानी होती है उनके मॉडल तैयार करते हैं। इसमें जब किसी आवाज को निकालना हो तो जीभ कैसे हिलती है यह करके दिखाने जैसे तरीके शामिल किये जा सकते हैं।
  • फीडिंग एंड स्वालोइंग थेरेपी (खाने और निगलने की चिकित्सा) - स्पीच-लैंग्वेज पैथोलोजिस्ट बच्चों को मुँह की मांसपेशियों को मजबूत करने की एक्सरसाइज सिखाते हैं। वे खाने और निगलने के दौरान सजगता को बढ़ाने के लिए भोजन की अलग-अलग बनावट का उपयोग कर सकते हैं।

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व्यस्क लोगों के लिए स्पीच थेरेपी तकनीक
जिन व्यस्क लोगों के लिए स्पीच थेरेपी की जरुरत पड़ती है उनको निगलने में परेशानी, बोलने में कुछ ध्वनियों को निकालने में परेशानी, भाषा को समझने और उपयोग करने में परेशानी इत्यादि परेशानियाँ हो सकती हैं। इनके लिए निम्न तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है जैसे कि -

  • फ़्लैश कार्ड का उपयोग
  • आईने में देख कर अभ्यास करने की तकनीक
  • मेंढक की तरह कूदना
  • जबड़े की कसरत
  • टंग ट्विस्टर्स (द्रुत गति से कहे जाने वाले वाक्य) का प्रयोग इत्यादि।

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स्पीच थेरेपी से बच्चें अधिक साफ-साफ बोलना सीख सकते हैं। इससे उनमें अधिक आत्मविश्वास आता है और दूसरों से बात करते समय कम परेशानी महसूस होती है। जिन बच्चों को भाषा की परेशानी होती है इस सुधार से उनको सामाजिक, भावनात्मक और शैक्षणिक तौर पर लाभ मिलता है।

जिन बच्चों को पढ़ने में परेशानी होती है जैसे कि डिस्लेक्सिया, उन बच्चों को स्पीच थेरेपी से शब्दों को सुनने और विशेष ध्वनि को पहचानने में मदद मिलती है। इसके उनकी पढ़ने की कला में सुधार होता है और उन्हें पढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

स्पीच थेरेपी तब अधिक फायदा देती है जब बच्चों में कम आयु में ही शुरू की जाएं। एक अध्यन में यह पता चला है कि प्री स्कूल के 70 प्रतिशत बच्चें जिनको भाषा की परेशानियां थी उनको स्पीच थेरेपी से लाभ हुआ और उनकी भाषा दक्षता में सुधार हुआ।

नोट - ये लेख केवल जानकारी के लिए है। myUpchar किसी भी सूरत में किसी भी तरह की चिकित्सा की सलाह नहीं दे रहा है। आपके लिए कौन सी चिकित्सा सही है, इसके बारे में अपने डॉक्टर से बात करके ही निर्णय लें।

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