myUpchar प्लस+ के साथ पूरेे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत

स्टैमरिंग यानि हकलाना काफी सामान्य समस्या है। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया की लगभग 1.5% आबादी इस भाषण विकार से प्रभावित होती है। हकलाने का इलाज हर पीड़ित व्यक्ति के द्वारा पूछा जाता है और हकलाने की समस्या को दूर करने के लिए कई पाठ्यक्रमों को विज्ञापित किया गया है जिसकी मदद से हकलाने की परेशानी दूर हो सकती है।

लेकिन हकलाने की समस्या का कोई सार्वभौमिक इलाज नहीं है। यह इलाज हर किसी के लिए समान असर नहीं करता। यह अभी तक पता नहीं चल पाया है कि हकलाने का क्या कारण होता है? अधिकांश विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कई कारकों के संयोजन से होता है जैसे शारीरिक, न्यूरोलॉजिकल, मनोवैज्ञानिक और पर्यावरणीय। ये कारक इस स्थिति में किस तरह काम करते हैं यह भी अभी तक पता नहीं चल पाया है और स्पष्ट रूप से हकलाने का इलाज एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग होता है। हकलाने का इलाज उम्र पर भी निर्भर करता है।

तो आज हम आपको हकलाने से संबंधित कारण, व्यायाम, जीवनशैली आदि के घरेलू उपाय बताएंगे जिसका असर प्रत्येक व्यक्ति की विषेशताओं के अनुसार पड़ सकता है।

  1. हकलाने का क्या कारण है - What causes stammering in Hindi
  2. हकलाने की समस्या को दूर करने के लिए व्यायाम - Exercise for stammering in Hindi
  3. हकलाना रोकने का इलाज - Treatment of stammering in Hindi
  4. हकलाना बंद करने के लिए क्या खाएं - Foods for stammering in Hindi
  5. हकलाना रोकने के लिए कुछ टिप्स - Tips for stammering in Hindi
  6. हकलाना बंद करने के घरेलू उपाय - Home Remedies for Stammering in Hindi
  7. हकलाना क्या है - What is stammering in Hindi
  8. हकलाने की उम्र - Stuttering (stammering) age in Hindi
  9. हकलाने का संबंध - Implications for Stuttering in Hindi
  10. हकलाने के लक्षण - Haklane ke lakshan in Hindi
  11. विश्व हकलाहट जागरूकता दिवस: शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है डटकर करें हकलाहट का मुकाबला

शारीरिक कारक मुख्य रूप से बच्चों में हकलाने का कारण बनता है। निम्न कारणों में से किसी एक कारण की वजह से बच्चे हकलाते हैं जैसे -

  1. बोलने के अंगों की मांसपेशियों को नियंत्रित करने में असमर्थता
  2. बोलने के अंगों में बाधा पहुंचना।
  3. न्यूरोमस्कुलर संबंधित समस्याएं।
  4. जीभ और होंठों को चलाने में कठिनाई।

हालांकि, हकलाना बढ़ते युग में मनोवैज्ञानिक कारकों की वजह से भी हो सकता है जैसे -

  1. बिना हकलाए बोलने में भी विश्वास खो देना।
  2. अन्य मनोवैज्ञानिक कारक जैसे घृणा, चिंता, उत्तेजना और तनावपूर्ण परिवेश का वातावरण शामिल हैं।

व्यायाम शारीरिक कारणों की वजह से हकलाने की समस्या में बहुत प्रभावी है। सामान्य तौर पर व्यायाम जीभ, होंठ, जबड़ा, ट्रेकिया और फेफड़ों सहित बोलने से संबंधित अंगों को शक्ति प्रदान करने के लिए किया जाता है। बहुत से लोग जो हकलाने की समस्या से पीड़ित होते हैं उन्हें व्यायाम से इस परेशानी को दूर करने में मदद मिलती है और कभी कभी ये समस्या हमेशा के लिए चली भी जाती है। ये व्यायाम आपको रात को सोने से पहले एक एकांत जगह पर करना चाहिए। नीचे दिए गए व्यायाम आपकी हकलाने की समस्या में फायदा पहुचाएंगे साथ ही इस समस्या को दूर भी करेंगे।

पहला व्यायाम -

ए, ई, आई, ओ, यू स्वर को आप ज़ोर से और एकदम स्पष्ट दोहराएं। जब भी आप इन स्वर को दोहराएंगे तो हर बार अलग अलग तरीको से बोलने की कोशिश करें।

दूसरा व्यायाम -

  • बिना ज़ोर लगाएं आप अपने जबड़ों को जितना हो सके उतना खोलें।
  • खुले जबड़ों में अब अपनी जीभ के आगे वाले हिस्से से ऊपर तलवे को छुएं।
  • फिर अपनी जीभ को पीछे की तरफ लेकर जाएँ।
  • जब आप ये व्यायाम करेंगे तो आपकी जीभ और मुँह फैलेगा (लेकिन बिना किसी दर्द के आप ये व्यायाम करें) जितना हो सके उतना पीछे की ओर कुछ सेकेंड्स के लिए रोक कर रखें।
  • अब अपनी जीभ को बाहर की तरफ लेकर आएं और अपनी ठोड़ी से उसे छूने की कोशिश करें।
  • इस स्थिति में भी आपको कुछ सेकेंड के लिए रुकना है। इस प्रक्रिया को 4-5 बार दोहराएं।

तीसरा व्यायाम -

गहरी सांस लेने वाले व्यायाम भाषण विकारों के इलाज में बहुत प्रभावी होता है क्योंकि ये श्वसन अंगों को मजबूत करने और शरीर में न्यूरोमस्क्युलर तनाव को दूर करने में मदद करता है।

विशिष्ट व्यायामों के पैटर्न की मदद से हकलाने की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

इस व्यायाम के कई रूप हैं और आप किसी एक या सभी व्यायाम को अपने अनुसार चुन सकते हैं। कुछ रूप जैसे -

  1. मुंह के माध्यम से गहरी सांस लें और धीरे-धीरे साँस छोड़ें, सांस लेने के बाद तुरंत सांस छोड़ें।
  2. मुंह से गहरी सांस लें और मुंह से सांस को छोड़ते समय झीब को झटके से बाहर निकालें।
  3. मुंह से गहरी सांस लें और उसी समय अपनी छाती की मांसपेशियों को अंदर की तरफ दबाएं। अब धीरे धीरे सांस छोड़ें।

आप स्वयं से भी गहरी साँस लेने के व्यायाम में विविधताएं ला सकते हैं। पेट की सूजन और छाती और अन्य भाषण अंगों के लिए व्यायाम करें। ज़रूरत से ज़्यादा व्यायाम न करें साथ ही अपने व्यायाम में विविधताएं हर एक या दो मिनट बाद लाने की कोशिश करें।

चौथा व्यायाम -

  • पढ़ने या बोलने की बाधा को कम करने के लिए कुछ भी पढ़ने का अभ्यास करें।
  • इसकी मदद से आपके हकलाने की समस्या दूर होगी। इस व्यायाम के लिए सबसे पहले कोई भी बुक लें और बिना किसी रुकावट के उसे जल्दी जल्दी पढ़ते जाएँ।
  • किसी भी शब्द को जल्दी जल्दी पढ़ने से आपकी झिझक खुलेगी।
  • अच्छा पढ़ने की बजाए जल्दी जल्दी पढ़ने को प्राथमिकता दें।
  • गलत पढ़े जाने वाले शब्दों पर बिल्कुल न रुके और न ध्यान दें।
  • यह व्यायाम 2-3 महीने के लिए जारी रखें। इससे भाषण के सभी अवरोधों को ठीक करने में मदद मिलेगी।

पांचवा व्यायाम -

हकलाने की समस्या को दूर करने के लिए गाना गाना बहुत ही प्रभावी व्यायाम है। इससे पीड़ित को सांस और स्वर संबंधी मांसपेशियों को बेहतर और नियंत्रित करने में मदद मदद मिलती है। हकलाने का एक और उपाय है नाटकीय गतिविधियों में भाग लेना। नाटक में भाग लेने से आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और इस समस्या को दूर करने में भी मदद मिलेगी।

जीवनशैली से जुड़े सुझाव कुछ इस प्रकार हैं -

हीन भावना से लड़ने वाले -

हकलाने की समाया में आप सबसे पहले अपना आत्मविश्वास बढ़ाएं। यह उपाय आपके हकलाने की समस्या में सबसे ज़्यादा प्रभावी होगा। हालाँकि हकलाने की समस्या में आत्मविश्वास बढ़ाना कोई आसान काम नहीं है। हीन भावना प्राकृतिक रूप से सभी पीड़ित व्यक्तियों में मौजूद होती है। इस भावना से खुले तौर पर बात करना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए अपने घर में इस समाया से पीड़ित बच्चों को बिना किसी तनाव के बोलना सीखाएं।

अपनी सांस देखें -

सामान्य अंगूठे के नियम के रूप में, छाती से सांस लेने की बजाए सभी को पेट से सांस लेनी चाहिए। पेट से साँस लेने से स्वाभाविक रूप से घबराहट और तनाव से आराम मिलता है और हकलाने की समस्या का भी इलाज होता है।

पारिवारिक समर्थन -

हकलाने की समस्या में सबसे महत्वपूर्ण भाग परिवार का समर्थन होता है। परिवार वालो का समर्थन पीड़ित की चिंता को दूर करता है जो हकलाने की समस्या का सबसे बड़ा कारण है।

परिवार वालो को इन सब चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए –

  1. हकलाने से पीड़ित व्यक्ति पर कभी भी सजा या सख्ती से पेश ना आएं।
  2. जब इस तरह के व्यक्ति बोल रहे हों तो उन्हें ध्यान से सुनने की कोशिश करें।
  3. उनके साथ में आराम आराम से बात करें साथ ही उनकी बातों को भी ध्यान से सुनें।
  4. जब वो आपसे बात कर रहे हों तो धेर्ये ज़रूर रखें।
  5. जब इस तरह के व्यक्ति अपनी बात बोल रहे हों तो कभी उनके शब्दों को पूरा करने की कोशिश न करें। उन्हें बोलने दें।

एक भाषण चिकित्सक से परामर्श करें -

भाषण थेरेपी का इस्तेमाल हकलाने की समस्या को कम और दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। भाषण चिकित्सक आपके हकलाने के कारणों का निदान करेगा साथ ही उससे संबंधित व्यायाम, दवाएं या अन्य ज़रूरी बातों को निर्धारित करेगा। कई शहरों में स्पेशल थेरेपी सेंटर होते हैं जो हकलाने की समस्या के लिए गहन इलाज और उपचार प्रदान करते हैं।

सुनने से संबंधित मदद -

कुछ सुनने से संबंधित इलाज भी हैं जो हकलाने की समस्या में आपकी मदद करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस एक माइक्रोफ़ोन का इस्तेमाल करते हुए उपयोगकर्ता की आवाज़ रिकॉर्ड करता है और उस आवाज़ को कुछ सेकेंड्स बाद आपके कानों में थोड़ी अलग आवृत्ति में बदलकर आपको भेजता है। इसकी मदद से आपको पता चल पाएगा कि आप किस तरह बोल रहे हैं और सामने वाले को किस तरीके से स्पष्ट हो रहा है। इससे आपको अपने हकलाने से संबंधित गलतियों को सुधारने का मौका मिलेगा।

हालाँकि इस उपकरण के साथ परिचित होने में आपको कुछ महीने लग सकते हैं। इससे आपको मनोवैज्ञानिक अवरोध को तोड़ने में मदद मिलेगी। एक बार ये अवरोध टूट जाता है और पीड़ित व्यक्ति को एक आत्मविश्वास मिल जाता है तो आप उपकरण का उपयोग किए बिना भी सामान्य रूप से बोलना शुरू कर सकते हैं।

हालांकि कोई विशेष खाद्य पदार्थ नहीं है जो आपके हकलाने की समस्या का इलाज कर सके। कुछ खाद्य पदार्थ भाषण अंगों के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। उदाहरण के लिए, आंवलाबादामकाली मिर्चदालचीनी भाषण की रुकावटों को रोकता है। इन्हे कम मात्रा में रोज़ाना लें इससे आपके हकलाने के लक्षणों का इलाज अच्छे से होगा।

हकलाने की समस्या थकान, चिंता या घबराहट से और भी ज़्यादा बढ़ती है। घर या कार्यस्थल पर पीड़ित व्यक्ति को एक सकारात्मक माहौल मिलना चाहिए जिससे कि उसका आत्मविश्वास टूटे न।

ऊपर दिए गए उपायों से इस समस्या को रातोंरात ठीक नहीं किया जा सकता। इसमें काफी समय लगता है साथ ही धैर्य की भी ज़रूरत पड़ती है लेकिन अंत में आपको इसका परिणाम काफी अच्छा देखने को मिलेगा।

हकलाकर बोलना या अटक-अटक कर बोलना, यह दोनों समस्याएं एक ही वजह से होती हैं और वो है बोलने की शक्ति में गड़बड़ी। हकलाने की समस्या में बोलने वाला, बोले हुए शब्दो को दोहराता है या उन्हे लंबा करके बोलता है। हकलाने वाला या तुतला कर बोलने वाला, बोलते-बोलते रुक सकता है।

हकलाने की समस्या ज़्यादातर बच्चो में देखी जाती है। पेरेंट्स अपने बच्चो की हकलाने की समस्या से परेशान हो जाते हैं और तनाव में आ जाते हैं। बच्चे भी इस समस्या की वजह से अपना आत्मविश्वास खो देते हैं।
  1. हकलाने का इलाज है हरा धनिया - Green Coriander for Stammering in Hindi
  2. हकलाहट का इलाज करे आंवला - Amla for Stuttering in Hindi
  3. हकलाना के उपाय करें काली मिर्च और मक्खन से - Black Pepper and Butter for Stammering in Hindi
  4. हकलाहट का देसी इलाज गाय के घी से - Cow Ghee for Stuttering in Hindi
  5. हकलाने के उपाय करें बादाम से - Almonds for Stammering in Hindi
  6. हकलाने की आयुर्वेदिक चिकित्सा है ब्राहमी तेल - Brahmi Oil for Stuttering in Hindi

हकलाने का इलाज है हरा धनिया - Green Coriander for Stammering in Hindi

हरा धनिया और अमलतास के गूदे को पानी में पीस कर उसी पानी से 21 दिन तक लगातार कुल्ले करने से जीभ पतली हो जाती है और हकलाने की समस्या दूर हो जाती है।

हकलाहट का इलाज करे आंवला - Amla for Stuttering in Hindi

एक आंवला बच्चों को रोज खिलाने से हकलाने की समस्या को दूर किया जा सकता है।

(और पढ़ें – आंवला के फायदे, गुण, लाभ, नुकसान)

हकलाना के उपाय करें काली मिर्च और मक्खन से - Black Pepper and Butter for Stammering in Hindi

सुबह मक्खन में काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर खाने से कुछ ही दिनों में हकलाना दूर हो जाता है।

(और पढ़ें – गैस की समस्या से छुटकारा काली मिर्च से)

हकलाहट का देसी इलाज गाय के घी से - Cow Ghee for Stuttering in Hindi

गाय के घी से हकलाने की समस्या जल्दी ठीक हो जाती है। 

(और पढ़ें – गाय के घी के फायदे और नुकसान)

हकलाने के उपाय करें बादाम से - Almonds for Stammering in Hindi

भीगी हुई बादाम को सुबह मक्खन के साथ खाएं, इससे थोड़े ही दिनों में हकलाहट दूर हो जाएगी।

(और पढ़ें – बादाम के फायदे और नुकसान)

हकलाने की आयुर्वेदिक चिकित्सा है ब्राहमी तेल - Brahmi Oil for Stuttering in Hindi

गुनगुने ब्राहमी आयल से सिर पर 30 से 40 मिनट तक मालिश करें। उसके बाद गुनगुने पानी से नहा लें। इससे हकलाने की समस्या काफी हद तक ठीक हो जाती है। 

(और पढ़ें – ब्राह्मी के फायदे और नुकसान)

अगर आपके बच्चे की हकलाने की समस्या 5 साल से लगातार चल रही है, तो आपको आवश्यकता हैं किसी विशेषज्ञ की सलाह लेने की। इन घरेलू उपचारों के द्वारा भी आपको हकलाने की समस्या से काफी हद तक निजात मिलेगी।

हकलाने की समस्या में एक प्रकार की अनैच्छिक रुकावट होती है या बोलने के दौरान एक शब्द को निकालने के लिए बहुत ज़ोर लगता हैं। यह कठिनाई आम तौर पर तब होती है जब आप बी, डी, जी और टी से सम्बंधित शब्द बोलते हैं। हकलाने से जुड़े लक्षण भी हैं जैसे लाल चेहरा होना, जबड़ों का ज़्यादा हिलना, बोलते समय आँखें का बार बार झपकना आदि शामिल हैं।

हकलाने की समस्या आमतौर पर बचपन में ज़्यादा देखने को मिलती है। यह तीन से सात साल के बीच होती है। हकलाना चिंता का कारण बन सकता है जब यह समस्या 10 साल की उम्र से भी अधिक ठीक नहीं होती। सांख्यिक रूप से प्रत्येक 4 बच्चों में से 1 बच्चा हकलाता है और ये स्थिति वयस्कता तक कायम रहती है।

हकलाना कोई शारीरिक निहितार्थ नहीं है। बचपन में हकलाना (2-5 वर्ष) सामान्य है क्योंकि बच्चे इस उम्र में अपनी भाषा को विकसित कर रहे होते हैं। लेकिन ये समस्या उम्र के साथ साथ खत्म भी होती रहनी चाहिए। हालांकि, अगर हकलाना लंबे समय तक रहता है या अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो उनपर सामाजिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है। हकलाने से आपका प्रेरणा स्तर खत्म होता रहता है साथ ही दोस्तों के बीच, स्कूल, कार्यस्थल पर मज़ाक उड़ने का डर ज़्यादा रहता है।

हकलाने के कुछ लक्षण इस प्रकार हैं -

  • किसी शब्द या वाक्य को शुरू करने में समस्या होना, कुछ शब्दों को बोलने से पहले हिचकिचाहट महसूस करना या अपनी बात तेज़ गति से बोलना।

  • बोलते समय तेज़ गति से आँखे भिचना, पैरों का ज़मीन पर थपथपाना, जबड़े का हिलाना आदि।

  • कुछ आवाज़ निकालने से पहले 'ओह्ह्ह' जैसा विस्मयबोधक शब्द का बार बार इस्तेमाल करना।
और पढ़ें ...