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आज के तकनीकी रूप से संचालित समाज में हम हर काम बैठे-बैठे ही करते हैं, चाहे हम घर पर, ऑफिस में हो या फिर यात्रा कर रहे हों। किसी भी प्रकार से ज्यादा देर बैठे रहना हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कह रहे हैं कि अधिक समय बैठना एक प्रकार से धूम्रपान करने जितना ही हानिकारक है। JAMA इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित 2012 के एक अध्ययन में यह बताया गया है कि जो लोग शारीरिक गतिविधि नहीं करते और लंबे समय तक बैठे रहते हैं, उनकी मृत्यु जल्दी होने की संभावना रहती है। इस अध्ययन में यह भी बताया गया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शारीरिक गतिविधि के स्तर को बढ़ाने के अलावा हमें अपने बैठने के समय को कम करने पर ध्यान देना चाहिए। द एनल्स ऑफ़ इंटरनल मेडिसिन में 2015 में प्रकाशित एक अध्ययन में इस तथ्य पर प्रकाश डाला गया है कि लंबे समय तक बैठे रहना हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। तो चलिए जानते हैं लम्बे समय तक बैठे रहने के क्या-क्या हानिकारक परिणाम हैं।

  1. लंबे समय तक बैठे रहने के दुष्प्रभावों को कम करने का तरीका - Tips to undo the side effects of prolonged sitting in hindi
  2. अधिक समय तक बैठने का नुकसान है अधिक फैट जमा होना - Sitting too much increases belly fat in hindi
  3. लंबे समय तक बैठे रहने के नुकसान हृदय के लिए - Too much sitting linked poor heart health in hindi
  4. अधिक देर तक बैठने से समस्या हो सकती है रीढ़ की हड्डी में - Sitting for long periods of time causes back pain in hindi
  5. ज्यादा समय तक बैठे रहने से होती है मधुमेह की समस्या - Sitting too long is a risk factor for diabetes in hindi
  6. लंबे टाइम तक बैठने से बढ़ती है कैंसर की सम्भावना - Too much time sitting increases risk of cancer in hindi
  7. बहुत अधिक बैठे रहना है मस्तिष्क के लिए हानिकारक - Sitting for too long may affect mental health in hindi
  8. बहुत अधिक बैठे रहने का दुष्परिणाम है कमजोर पैर और कूल्हे - Sitting for too long weakens leg and hip muscles in hindi
  9. बहुत लम्बे समय बैठने से होते हैं खून के थक्का - Blood clot from sitting too long symptoms in hindi

लंबे समय तक बैठे रहने के दुष्प्रभावों को कम करने के कुछ आसान तरीके इस प्रकार हैं -

  • फोन पर बात करते समय खड़े होकर चलें।
  • अगर आप डेस्क पर बैठ कर काम करते है तो स्टैंडिंग डेस्क का उपयोग करने की कोशिश करें।
  • बैठे रहने के हर 30 मिनट के बाद 10 मिनट के लिए वाकिंग ब्रेक लें।
  • शारीरिक व्यायाम और योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाए। (और पढ़ें - डेस्क पर काम करने से हो रही समस्याओं के लिए ये योगासन)
  • सही मुद्रा में बैठें। इसके लिए आप अपने ऊपरी पीठ और गर्दन को आराम से सीधे और कंधों को आराम की स्तिथि में रखें। (और पढ़ें - पीठ को सीधा रखने के लिए टिप्स)

गतिहीन जीवनशैली के कारण शरीर में खासकर कमर के आस-पास फैट बढ़ जाता है। यदि आप घूमते फिरते नहीं है या व्यायाम नहीं करते हैं तो आपका शरीर वसा जलाने में सक्षम नहीं होता नतीजा शरीर में फैट बढ़ जाता है। अमेरिकन जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी में प्रकाशित एक 2011 का अध्ययन में बताया गया है कि जब हम घूमते फिरते हैं और कसरत करते हैं तो हमारी मांसपेशियों से लाइपोप्रोटीन लिपसे मोलेक्युल्स के रूप में निकलते हैं। जिसके कारण हमारे शरीर से फैट कम होती है। ये मोलेक्युल्स जो हम खाते हैं उन्हें वसा और शर्करा में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब आप लंबे समय तक बैठे रहते हैं तो वसा और शर्करा ठीक से संसाधित (processed) नहीं हो पाते हैं, जिससे पेट के क्षेत्र में वसा जमा हो जाता है। 

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वास्तव में कमर के आस पास वजन में वृद्धि पूरे शरीर के वजन बढ़ने के मुकाबले कहीं अधिक खतरनाक होता है। पेट में फैट बढ़ने से पुरानी स्वास्थ्य समस्याएं जैसे हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह, कैंसर और प्रारंभिक मृत्यु का जोखिम बढ़ाता है। इस प्रकार पेट के फैट को कम करना हमारे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। 

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लंबे समय तक बैठे रहने से हमारे आंतरिक अंगों खासकर हमारे दिल पर हानिकारक प्रभाव परता हैं। कब हम एक ही स्थान पर घंटों तक बैठे रहते है तो हमारा हृदय शरीर के सभी अंगों में रक्त प्रवाह ठीक तरह से नहीं कर पता है। खराब रक्त प्रवाह फैट और पट्टिका को आसानी से हमारे में रोक देता है जो हाई ब्लड प्रेशर, ऊंचा कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग जैसी समस्या को जन्म देता है। 

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मेडिसिन एंड साइंस इन स्पोर्ट्स एंड एक्सरसाइज में 2010 में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि जो पुरुष बहुत अधिक समय तक बैठे रहते हैं उनकी हृदयवाहिका रोग के कारण मरने संभावना में वृद्धि होती है। वास्तव में जो लोग अधिक समय तक बैठे रहते हैं, उनमें हार्ट अटैक या स्ट्रोक का 82% अधिक खतरा होता है।

जब हम गलत मुद्रा में अधिक समय तक बैठे रहते हैं, तो हमारे पीठ और गर्दन खराब होती है। बहुत अधिक समय तक बैठने से हमारी रीढ़ की हड्डियों पर बहुत अधिक दबाव पड़ता है और हमारी रीढ़ की हड्डियों के डिस्क पर भी दबाव पड़ता है। रीढ़ की हड्डियों का समय से पहले अध: पतन हो सकता है जिसके परिणामस्वरूप दर्द हो सकता है। लंबे समय तक बैठे रहने से मांसपेशियों में खिचाव या तनाव जैसी समस्या अधिक हो सकती है जो अचानक पीठ और गर्दन की मांसपेशियों में दर्द पैदा कर सकता है। 

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कैनेडियन सेंटर फॉर ऑक्यूपेशनल हेल्थ एंड सेफ्टी के 2010 में प्रकाशित एक लेख के अनुसार लंबे समय तक बैठे रहने से मांसपेशियों, हड्डियों, पट्टा और लिगमेंट को नुकसान पहुंचती है। साथ ही इससे गर्दन और पीठ के निचले हिस्से भी प्रभावित करते हैं।

जो लोग अधिक समय तक बैठे रहते हैं और व्यायाम नहीं करते उनमें मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। बिना कुछ किए अधिक समय तक बैठे रहना इंसुलिन प्रतिरोध, मधुमेह और खरब ग्लूकोज सहनशीलता का कारण होता है। साथ ही लंबे समय तक बैठे रहने से अग्न्याशय में इंसुलिन का अधिक उत्पादन हो सकता है, जिससे मधुमेह की समस्या हो सकती है। 

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आर्टेरिओस्क्लेरोसिस थ्रोम्बोसिस एंड वैस्कुलर बायोलॉजी में प्रकाशित 2007 के एक अध्ययन में कहा गया है कि जो लोग शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं है उनमे इंसुलिन प्रतिरोध, डिसलिपिडेमिया, रक्तचाप में वृद्धि और ख़राब माइक्रोवेस्कुलर फ़ंक्शन का विकास होता है।

बहुत अधिक समय तक बैठने से कोलोरेक्टल, फेफड़े, गर्भाशय, एंडोमेट्रियल, डिम्बग्रंथि, कोलन और प्रोस्टेट कैंसर की बिमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे बहुत कारण है कि अधिक समय तक बैठे रहना और बढ़े हुए कैंसर के जोखिम के बीच महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उदाहरण के लिए मोटापा कई प्रकार के कैंसर का प्रमुख कारण होता है। इसके अलावा भोजन के तुरंत बाद बैठने से रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है जिससे कारण पेट के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। द अमेरिकन जर्नल ऑफ़ एपिडेमियोलॉजी में 2011 में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि बहुत अधिक समय तक बैठ कर काम करने से पेट के कैंसर और गुदा के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।  इसलिए यदि आपको लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना है तो नियमित ब्रेक लेने की सलाह दी जाती है।

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पूरे दिन एक डेस्क पर बैठे रहना आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा नहीं है। लंबे समय तक बैठे रहना आपके मस्तिष्क के आसपास रक्त और ऑक्सीजन के प्रवाह को प्रभावित करता है जो आपके मस्तिष्क के कार्य को प्रभावित कर सकता है। समय के साथ आपका मस्तिष्क व्याकुल हो सकता है और आप जो जरूरी काम कर रहे हैं उस पर भी आपका ध्यान अच्छी तरह केंद्रित नहीं हो पता है।

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वही जब आप घूमते फिरते हैं तो ताजा खून और ऑक्सीजन आपके मस्तिष्क तक पहुंचता है जो आपके मस्तिष्क और मनोदशा को बढ़ाने वाले रसायनों को बढ़ाता है। BMC पब्लिक हेल्थ इंडिकेटेड में 2013 के एक अध्ययन ने संकेत दिया कि बहुत अधिक समय तक बैठे रहना आपकी मानसिक रोग का कारण बन सकता है। दो साल बाद इसी में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में यह भी कहा गया है कि बहुत अधिक समय तक बैठे रहना चिंता का कारण भी बन सकता है।

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यदि आपको बिना ब्रेक लिए अपनी डेस्क पर घंटों तक बैठ कर नौकरी करने की आदत है तो आप पैर और ग्लूशन कि समस्या से पीड़ित हो सकते हैं। जब आप बहुत अधिक देर तक बैठे रहते हैं और अपनी पैर की मांसपेशियों का उपयोग नहीं करते हैं तो इससे आपकी मांसपेशियों को नुकसान पहुँचता है। इस घटना को मांसपेशी क्षय के रूप में जाना जाता है। इससे समय के साथ आपकी पैर की मांसपेशिया कमजोर होने लगती हैं। बहुत अधिक देर बैठे रहना आपकी कूल्हों की गतिशीलता और आपके ग्लूश की ताकत को भी प्रभावित कर सकते हैं। जब आप खड़े होते हैं या चारों ओर घूमते हैं तो कमजोर पैर और ग्लुस्ट आपकी स्थिरता को प्रभावित करते हैं। इससे गिरने का खतरा बढ़ जाता है। अपनी शक्ति और लचीलेपन को बनाए रखने के लिए मांसपेशियों का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। अधिक देर बैठे रहने के प्रभावों को कम करने के लिए बार बार स्ट्रेचिंग और एक्सरसाइज ब्रेक्स लें।

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लंबी अवधि के लिए बैठे रहना जैसे ड्राइविंग, अपने डेस्क पर काम करना आदि गहरी नस घनास्रता (deep vein thrombosis) DVT जैसी समस्या का कारण हो सकती है। DVT तब होता है जब आपके शरीर में एक या गहरी नसों में खून का थक्का (थ्रोम्बस) बन जाते हैं - आमतौर पर यह समस्या पैरों में होती है। इसके कारण बहुत अधिक दर्द हो सकता है। जब आपके पैर घंटों तक उपयोग नहीं होते हैं तो पिंडली की मांसपेशियां भी काम नहीं कर रही होती हैं। इससे परिसंचरण खराब होता है जिससे रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है। इसे ही DVT कहते हैं। द "जर्नल ऑफ़ द रॉयल सोसाइटी ऑफ मेडिसिन" में 2012 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि लंबे समय तक तंग अवस्था में बैठे रहने से वेनस थ्रोम्बोएम्बोलिस्म (venous thromboembolism) का खतरा बढ़ता है। VTE क ऐसी बीमारी है जिसमें DVT और पल्मोनरी एम्बोलिस्म (pulmonary embolism) (PE) दोनों शामिल हैं। DVT किसी के साथ हो सकता है। चाहे आप अपने काम में कितना भी व्यस्त क्यों ना हो समय-समय पर आप अपने पैरों को स्ट्रेच करते रहिए।

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