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हमें बचपन से ही दूध पीने की आदत होती है। दूध एक कैल्शियम युक्त पेय है जो प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, फास्फोरस, विटामिन बी 2, विटामिन बी 12 जैसे पोषक तत्वों और विटामिन डी के साथ भरी हुआ है। इसलिए यह हमारे आहार में काफी महत्वपूर्ण है। लेकिन क्या दूध पीने का कोई अच्छा या बुरा समय है? आइए इसके बारे में विस्तार से जानें -

  1. क्या दूध सुबह पिया जाना चाहिए? - Should milk be drunk in the morning in Hindi
  2. क्या दूध शाम के समय पिया जाना चाहिए? - Should milk be drunk in the evening in Hindi
  3. रात को दूध पीने के फायदे - Benefits of drinking milk at night in Hindi
  4. सुबह या रात को दूध पीने के नुकसान - Side effect of drinking milk in the morning and night in Hindi

अपना दिन दूध के साथ सीरियल (cereal) खाकर शुरू करने या एक दूध आधारित पेय पीने से आपको ऐसा लग सकता है कि आपने अपने दिन की एक त्वरित और पौष्टिक शुरुआत की है। लेकिन अगर आप ध्यान ना दें, तो यह काफी भारी हो सकता है। मलाईदार दूध का उपयोग करने से आपका नाश्ता पेट में भारीपन पैदा करता है और यह काफी देर तक आपकी भूख शांत रखने में भी मदद नहीं करता है। इसके बजाय अगर आप ऐसा नाश्ता करें जिसमें फाइबर ज़्यादा हो जैसे जई का दलिया या जिसमें प्रोटीन ज़्यादा हो जैसे अंडा तो आपकी भूख काफी देर तक शांत रहती है। 

(और पढ़ें – कब, कैसे और क्या खाएँ, जानिए स्वस्थ भोजन के लिए आयुर्वेदिक टिप्स)

आयुर्वेद के अनुसार सुबह के समय आपका पेट भारी नहीं होना चाहिए। शरीर को एक्टिव रखने के लिए ईंधन की ज़रूरत होती है। भारी दूध पीने से आपके पेट में दर्द या सीने में जलन हो सकती है। इसलिए दिन के इस समय फल या पकी हुई सब्ज़ियाँ, या जई के दलिये में थोड़े से दूध को मिलाकर पीना चाहिए। नट्स वाला दूध भी पी सकते हैं। ऐसा करने से आपके शरीर को पूरा दिन अच्छे से काम करने के लिए मदद मिलती है।

शाम को एक गिलास दूध पीना बूढ़े लोगों के लिए अच्छा है। अगर आप अपने गुर्दे में पथरी जैसी स्वास्थ्य की स्थिति से पीड़ित हैं, तो यह उसे समाप्त करने में मदद करता है।

रात को दूध पीना सबसे अच्छा है जब आपके शरीर को आराम की ज़रूरत है। ट्रिपटोफन एक एमिनो एसिड है जो दूध में होता है जो कि आपकी नींद की गुणवत्ता में सुधार लाता है और आपको देर तक सोने में मदद करता है। यह आपके शरीर को सेरोटोनिन और मेलाटोनिन (न्यूरोट्रांसमीटर) बनाने में मदद करता है जो शरीर के सोने और जागने के चक्र को नियंत्रित करते हैं। दूध में कैल्शियम भी शरीर में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ाने में मदद करता है, जबकि मेलाटोनिन तनाव या किसी औऱ कारण से अनिद्रा या नींद विकार से लड़ने में मदद करता है। दूध में मैग्नीशियम भी दूध को रात में पीने का एक और कारण है। मैग्नीशियम की मदद से आपकी तंत्रिका और मांसपेशियां सामान्य रूप से कार्य करती हैं और यह दोनों ही ज़रूरी हैं अच्छी नींद और रातभर आराम के लिए। इसलिए रात को सोने से आधे घंटे पहले दूध पीना बहुत ही फायदेमंद है। रात को दूध पीकर सोने से आपकी एक नियमित दिनचर्या होगी जिससे आयुर्वेद में निर्धारित ऊर्जा या तीनों दोषों में संतुलन होगा और इस संतुलन के साथ आपके समग्र स्वास्थ्य और जीवन शक्ति में सुधार होगा।

यदि आप अपने दूध में हल्दी मिला लें, तो हल्दी के सूजन को कम करने और जीवाणुरोधी गुणों के कारण आपको और भी लाभ होगा। तो आप आसानी से सो पाएँगे क्योंकि हल्दी वाला दूध पीने से आपके शरीर में अगर कोई दर्द, सूजन है या आपके पूरा दिन काम करने की वजह से आपके सिर में दर्द है, तो आपको इन सब परेशानियों से भी मुक्ति मिलगी। साथ ही जो लोग गठिया जैसी बीमारी से पीढ़ित हैं, उन्हें भी बहुत आराम मिलेगा। 

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कुछ लोगों के लिए दूध पीना कभी भी अच्छा नहीं होता चाहे वो इसे किसी भी समय पर पिएं। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो लैक्टोज असहिष्णुता से पीड़ित हैं या जिन्हें कोई डेयरी एलर्जी है। अब कैसे पता चले कि आपको यह एलर्जी है?

अगर आप लैक्टोज असहिष्णुता से पीड़ित हैं तो आप जैसे ही दूध या किसी भी दूध के उत्पाद का एक कप पिएंगे, आपको पाचन की समस्याएं होंगी। इसके लक्षणों में पेट में गैस या पेट का फूलना, दस्त और पेट की सूजन शामिल हैं। आपको पेट में दर्द और मतली का अनुभव भी हो सकता है। यदि यह मामला है तो आपको लैक्टोज रहित विकल्प जैसे नट्स वाला दूध या चावल या सोया दूध की ज़रूरत पड़ सकती है। अगर दूध से एलर्जी है पर बहुत गंभीर नहीं है तो पित्ती, दाने, पेट खराब या उल्टी होने जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ मामलों में खूनी दस्त भी हो सकता है। अगर बहुत ज़्यादा ही गंभीर एलर्जी है, तो वह एनाफाईलैक्सिस (Anaphylaxis) का रूप ले सकती है। इसमें साँस लेने में बहुत अधिक परेशानी होती है और आपका शरीर शॉक में चला जाता है। 

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