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ज्यादातर पुरुषों के दिमाग में यह सवाल रहता है कि क्या जिम में वजन उठाने या वेट लिफ्टिंग से बॉडी बनती है। बॉडी बिल्डिंग को लेकर लोगों में हजारों सवाल रहते हैं लेकिन यह सामान्य सवाल है, जो ज्यादातर लोगों के दिमाग में रहता है। कई लोगों को लगता है कि जिम में हल्का वजन उठाने से बॉडी बनती है तो कुछ को लगता है की भारी वजन उठाने से उनके बाइसेप्स ज्यादा बड़े बनेंगे।

बॉडी बनाने में वजन की एक अहम भूमिका है। यह कहना गलत नहीं होगा कि यदि वेट ट्रेनिंग न की जाए तो शायद ही आपके शरीर में नई मांसपेशियां विकसित हों। जब आप वजन उठाकर कोई भी एक्सरसाइज करते हैं तो उसका सीधा असर संबंधित मांसपेशी पर पड़ता है। आज हम आपको इसी बारे में बताएंगे कि जिम में वजन उठाने से कैसे आपकी बॉडी बनती है।

वजन उठाने से ऐसे बनती है बॉडी
फिटनेस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ‘वजन उठाने के दौरान आपकी मांसपेशियों पर अधिक दबाव पड़ता है तब मांसपेशियों में टूटफूट होती है।’ उन्होंने कहा, ‘इस बारीक टूटफूट भले ही आपको थोड़ी नुकसानदायक लगे लेकिन सच्चाई यह है कि यह आपके मांसपेशियों की एक समान्य प्रतिक्रिया है, जो वह दबाव पड़ने के दौरान देती हैं। जब आप आराम कर रहे होते हैं तो इन मांसपेशियों की मरम्मत होती है और इससे मांसपेशियों का आकार और ताकत बढ़ती है।’

इसलिए जब आप वजन उठाते हैं तो आपकी मांसपेशियों को थोड़ा नुकसान होता है। इस दौरान आप सामान्य दिनचर्या के मुकाबले अधिक वजन उठा पाते हैं। मांसपेशियों के विकास से बॉडी बनती है। ऐसे में मांसपेशियों के विकास के लिए दो चीजें जरूरी होती हैं। पहला मांसपेशियों में उत्तेजना और दूसरी उनकी मरम्मत।

ऐसे में सेटेलाइट कोशिका कही जाने वाली निष्क्रिया कोशिकाएं जो मांसपेशियों के फाइबर में बाहरी और आंतरिक झिल्ली में स्थिति होती है। वह मांसपेशियों में टूटफूट, नुकसान या चोटिल होने की स्थिति में सक्रिय हो जाती है। इस दौरान यह एक्सरसाइज को हर संभव प्रतिक्रिया देती है। इसके बाद रोधीतंत्र की प्रतिक्रिया शुरू होती है, इससे मांसपेशियों में जलन, सामान्य साफ-सफाई और कोशिका के स्तर पर इनकी मरम्मत की प्रक्रिया शुरू होती है।

इसके साथ-साथ ही एक हार्मोन की प्रतिक्रिया भी शुरू होती है, जिससे कॉर्टिसोल और टेस्टोस्टेरोन स्राव होने लगता है। यह दोनों ही मांसपेशियों के विकास के कारक होते हैं। मांसपेशियों के विकास के यह कारक मसल्स हाइपोट्रॉफी (मांसपेशियों का बनना) को प्रोत्साहित करते हैं जबकि टेस्टोस्टेरोन मांसपेशियों में प्रोटीन सिंथेसिस बढ़ाने लगता है।

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इस प्रक्रिया से निष्क्रिय कोशिकाएं और उनसे पैदा हुई कोशिकाएं उन उत्तक की तरफ जाती हैं, जिन्हें नुकसान हुआ होता है। यहां पर वो कंकाल की मांसपेशियों में जाकर मिल जाती हैं और मांसपेशियों के फाइबर में अपने नाभिक को मिलाकर उन्हें विकसित और मोटा होने में मदद करती हैं। सामान्य भाषा में कहें तो एक्सरसाइज के दौरान भारी वजन उठाने से ही बॉडी बनती है।

वजन उठाते वक्त तकनीक का रखें ध्यान
यह बात तो स्पष्ट हो गई कि जिम में भारी वजन के साथ एक्सरसाइज करने से आपकी मांसपेशियों का आकार बढ़ता है, जिससे आपकी बॉडी बनती है। लेकिन आपको सीधे जिम में जाकर एकाएक  भारी वजन नहीं उठाना है। भारी वजन उठाने की तकनीक को समझना आपके लिए बेहद ही जरूरी है। इसके बारे में जानकारी होने पर आप आसानी से भारी वजन उठा पाएंगे।

आपको प्रोग्रेसिव ओवरलोड की तकनीक को अपनाना है। इसके अनुसार आपको हल्के वजन से शुरुआत करनी है। जैसी ही आपको लगता है कि आप उस वजन को आसानी से उठा सकते हैं तो आप अगले दिन उससे थोड़ा ज्यादा वजन उठाएं। इस तकनीक में आपको अपनी पिछली लिमिट को तोड़ना होगा।

जिम में भारी वजन से एक्सरसाइज करने के बाद मुश्किल से 48-72 घंटों बाद आपकी बॉडी रिकवर हो जाती है। इसके बाद आप पहले से ज्यादा वजन उठाने के लिए तैयार हो जाते हैं।

इन 48-72 घंटों के दौरान हमारा शरीर ज्यादा दबाव झेलने की क्षमता हासिल कर लेता है। यह एक ऐसा मानक है जिसमें कंकाल की मांसपेशियां दबाव को झेलने के लिए अपने आपको उसके अनुरूप ढाल लेती हैं।

वजन उठाने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
यदि आपने हाल ही में जिम में वर्कआउट करना शुरू किया है तो अपने हाथों की पकड़ को मजबूत करने के लिए दस्तानें जरूर पहनने हैं। इसके अलावा आप कमर पर बेल्ट जरूर बांधकर जाएं।

इससे आपकी कमर को सुरक्षा मिलेगी। अक्सर भारी वजन उठाते वक्त लोगों को कमर में चोट लग जाती है। इसकी वजह से उनका एक्सरसाइज रुटीन तो खराब होता ही है, साथ ही बॉडी बनाने से ज्यादा उसका डर उनके दिमाग में घर कर जाता है।

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जिम में मात्र भारी वजन उठाने से ही बॉडी नहीं बनती, इसके लिए आपको ध्यान रखना है कि आप पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लें। इससे आपकी मांसपेशियों में हुई टूटफूट की मरम्मत होगी।

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