टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को सेक्स हार्मोन भी कहा जाता है जो कामेच्छा के लिए जिम्मेदार होता है. पुरुषों में मुख्य रूप से बनने वाले टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की मात्रा महिलाओं में बहुत कम होती है.
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पुरुषों के यौवन और उनके विकास के लिए टेस्टोस्टेरोन भी जिम्मेदार माना जाता है. टेस्टोस्टेरोन का संबंध पुरुषों की कामेच्छा के साथ-साथ स्पर्म प्रोडक्शन से भी है. युवा अवस्था में हड्डियों का विकास, मांसपेशियां में ताकत, चेहरे के बालों के उगने जैसी स्थिति के लिए टेस्टोस्टेरोन जिम्मेदार होता है. पुरुषों में 10 साल की अवस्था से लेकर 30 साल की अवस्था तक आते-आते टेस्टोस्टेरोन के प्रोडक्शन में कमी आने लगती है.
आइए इस लेख में जानें कि टेस्टोस्टेरोन क्या है और यह आपके स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है -
- टेस्टोस्टेरोन क्या है? - What is testosterone in Hindi
- टेस्टोस्टेरोन के लाभ और महत्त्व - Role and benefits of testosterone in Hindi
- टेस्टोस्टेरोन का लेवल कितना होना चाहिए - Normal testosterone level in Hindi
- टेस्टोस्टेरोन को प्रभावित करने वाले कारण - Factors affecting testosterone production in Hindi
- टेस्टोस्टेरोन की कमी से क्या होता है? - What happens due to testosterone deficiency in Hindi
- टेस्टोस्टेरोन से महिलाओं में अंदर होने वाले बदलाव - Changes that occur in women due to testosterone in Hindi
- टेस्टोस्टेरोन के असंतुलन का इलाज - Treatment of testosterone imbalance in Hindi
- टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी - Testosterone replacement therapy in Hindi
- सारांश - Takeaway
टेस्टोस्टेरोन क्या है? - What is testosterone in Hindi
टेस्टोस्टेरोन हार्मोन पुरुषों में यौन विशेषताओं और उससे जुड़ी इच्छाओं के लिए मस्तिष्क के लिए मैसेन्जर के तौर पर काम करता है. इस हार्मोन के स्त्रावित होने से शरीर में आवश्यक परिवर्तन होते हैं. पुरुषों के शरीर में मौजूद पिट्यूटरी ग्लैंड के जरिए टेस्टोस्टेरोन के लेवल को कंट्रोल किया जाता है.
(और पढ़ें - टेस्टोस्टेरोन टेस्ट)
टेस्टोस्टेरोन के लाभ और महत्त्व - Role and benefits of testosterone in Hindi
टेस्टोस्टेरोन के प्रोडक्शन के बाद यह हार्मोन ब्लड के जरिए शरीर के अंदर अलग-अलग जरूरी कामों को पूरा करता है. शारीरिक परिवर्तन के साथ-साथ इस टेस्टोस्टेरोन के जरिए पुरुषों में मानसिक परिवर्तन होते हैं. टेस्टोस्टेरोन को स्पर्म प्रोडक्शन के साथ-साथ हमारी काम इच्छाओं को संचालित करता है, पुरुषों के टेस्टिकल्स के जरिए टेस्टोस्टेरोन के प्रोडक्शन से कई बदलाव होते हैं, जैसे -
- सेक्स ड्राइव
- आरबीसी का प्रोडक्शन
- हड्डियों के वॉल्यूम में बदलाव
- बॉडी में फैट का डिस्ट्रीब्यूशन
- मसल्स में ताकत और उनका आकार
(और पढ़ें - सेक्स पावर बढ़ाने का इलाज)
टेस्टोस्टेरोन का लेवल कितना होना चाहिए - Normal testosterone level in Hindi
टेस्टोस्टेरोन के स्तर को ब्लड टेस्ट के माध्यम से मापा जाता है। अधिकांश डॉक्टर इस बात से सहमत हैं कि एक "सामान्य" रीडिंग 300 से 1,000 नैनोग्राम प्रति डेसीलीटर (एनजी / डीएल; ng/dL) के बीच कहीं भी होती है।
45 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 40% पुरुषों के स्तर उस सीमा से नीचे होंगे। लेकिन अपने आप में लेवल कम होने का मतलब यह नहीं है कि कोई परेशानी की बात है।
वास्तव में, इस बात का बहुत महत्त्व होता है कि टेस्टोस्टेरोन लेवल मापने के लिए दिन के किस समय ब्लड टेस्ट किया गया है। टेस्ट के लिए सबसे अच्छा समय सुबह 7 से 10 बजे के बीच होता है। नार्मल टेस्टोस्टेरोन लेवल सुबह के समय लिए गए ब्लड सैंपल पर आधारित होता है। दोपहर के समय लिए गए ब्लड सैंपल में लेवल कम आ सकता है, जो कि गलत हो सकता है।
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टेस्टोस्टेरोन को प्रभावित करने वाले कारण - Factors affecting testosterone production in Hindi
आमतौर पर पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का प्रोडक्शन 30 साल की अवस्था से कम होने लगता है, लेकिन इसके लिए कई और कारण भी जिम्मेदार हैं. मगर ऐसा देखा गया है कि 30 से कम उम्र के लोग भी हाइपोगोनाडिज्म (hypogonadism) से जुड़ी परेशानियों की शिकायत करते हैं. इसका प्रमुख कारण अधिक स्ट्रेस और खराब लाइफस्टाइल के दौरान हेल्थ को नजरअंदाज करना है. इसके अलावा क्रोनिक डिजीज से भी टेस्टोस्टेरोन प्रभावित होता है, जैसे -
- टेस्टिकल्स का इंफेक्शन
- ड्रग्स लेना
- टेस्टिकल्स में चोट
- टाइप 2 डायबिटीज
- किडनी रोग
- मोटापा
- एचआईवी एड्स
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टेस्टोस्टेरोन की कमी से क्या होता है? - What happens due to testosterone deficiency in Hindi
एक सामान्य पुरुष में टेस्टोस्टेरोन का प्रोडक्शन सही मात्रा में न या बिल्कुल ही न हो तो ऐसी अवस्था को मेल इनफर्टिलिटी हैं. टेस्टोस्टेरोन के असंतुलन या उसकी कमी से जो समस्याएं होती हैं तो उन्हें हाइपोगोनाडिज्म कहा जाता है. इस दौरान कई लक्षण सामने आते हैं जैसे -
- स्पर्म काउंट कम होने लगता है
- निप्पल्स के टिश्यू बढ़े हुए या सूजे हुए
- इनफर्टिलिटी
- कामेच्छा की कमी
इसके साथ-साथ टेस्टोस्टेरोन की कमी से होने वाली कई अन्य परेशानियां भी हैं जिन्हें पुरुषों को सामना करना पड़ता है जैसे -
- शरीर के अंदर ताकत की कमी
- मसल्स का टूटना
- बॉडी में फैट का बढ़ना
- शरीर के बालों का झड़ना
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टेस्टोस्टेरोन से महिलाओं में अंदर होने वाले बदलाव - Changes that occur in women due to testosterone in Hindi
महिलाओं में भी कुछ मात्रा में टेस्टोस्टेरोन बनता है, हालांकि, यह पुरुषों की तुलना में बहुत कम होता है लेकिन इसकी कमी, अधिकता या असंतुलन के कारण महिलाओं को कुछ परेशानियां हो सकती हैं -
- बॉडी की शेप में बदलाव
- क्लिटोरिस में सूजन
- मुंहासे
- ब्रेस्ट की साइज का कम होना
- होंठ और चिन के चारों ओर फेशियल हेयर का उगना
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टेस्टोस्टेरोन के असंतुलन का इलाज - Treatment of testosterone imbalance in Hindi
टेस्टोस्टेरोन की कमी की अवस्था को हाइपोगोनाडिज्म कहते हैं. आमतौर पर ये स्थिति ज्यादा उम्र के लोगों में देखी गई है, मगर स्ट्रेस, बदलती लाइफस्टाइल के जरिए कम उम्र के लोगों में हाइपोगोनाडिज्म की समस्या आ जाती है. इसके इलाज के लिए टेस्टोस्टेरोन सप्लीमेंट का सेवन करके किया जा सकता है. कई देशों में मिथाइलटेस्टोस्टेरोन (Methyltestosterone) को टेस्टोस्टेरोन सप्लीमेंट के रूप में मान्यता प्राप्त है. हालांकि, डॉक्टरों की सलाह से ही इसका सेवन करना उपयुक्त होगा क्योंकि इससे लिवर का मेटाबोलिज्म प्रभावित हो सकता है.
(और पढ़ें - टेस्टोस्टेरोन से बनी दवाएं)
टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी - Testosterone replacement therapy in Hindi
टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (TRT) भी कम टेस्टोस्टेरोन से प्रभावित लोगों के लिए मददगार साबित होती है. शोध में पता चला है कि टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (TRT) मुख्य रूप से हीमोग्लोबिन के स्तर को प्रभावित करता है, हड्डियों में मजबूती लाता है. हालांकि, इसके साइड इफेक्ट्स भी हैं जिसके चलते प्रोस्टेट का बढ़ना और मेल स्तनों का बढ़ना, मुंहासे होने के साथ-साथ कार्डियोवैस्कुलर बीमारी के भी बढ़ने का जोखिम है. टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी से कुछ दुर्लभ मामलों में, नींद के दौरान सांस लेने में कठिनाई जैसी परेशानी आ सकती है.
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सारांश - Takeaway
पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बनाए रखना बहुत ही महत्वपूर्ण है, मगर उम्र बढ़ने के साथ-साथ पुरुषों में इसकी कमी स्वाभाविक है. टेस्टोस्टेरोन के घटने या बढ़ने से पुरुषों में मेंटल और ओवरऑल हेल्थ पर असर पड़ता है. टेस्टोस्टेरोन के कम होने की स्थिति में पुरुषों में इनफर्टिलिटी कामेच्छा में कमी और स्पर्म काउंट में कमी होने जैसी परेशानियां होती है. इसके असंतुलन को ठीक करने के लिए टेस्टोस्टेरोन सप्लीमेंट - मिथाइलटेस्टोस्टेरोन (Methyltestosterone) के साथ-साथ टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी का भी सहारा ले सकते हैं. अक्सर, कम टेस्टोस्टेरोन के स्तर से मनुष्यों में हानिकारक शारीरिक प्रभाव नहीं होते हैं. बावजूद इसके टेस्टोस्टेरोन के कम स्तर और उनसे जुड़ी परेशानियां आपको परेशान कर रही हैं तो आपको डॉक्टर से इस बारे में परामर्श लेनी चाहिए.
(और पढ़ें - यौन शक्ति कम होने का इलाज)
टेस्टोस्टेरोन क्या है, महत्त्व, लाभ और नार्मल लेवल के डॉक्टर
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