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  1. कूल्हे का प्रत्यारोपण क्या होता है? - Hip replacement surgery kya hai in hindi?
  2. कूल्हा प्रत्यारोपण क्यों कराया जाता है? - Hip replacement kab kiya jata hai?
  3. हिप प्रत्यारोपण होने से पहले की तैयारी - Hip ke operation ki taiyari
  4. कूल्हा प्रत्यारोपण ऑपरेशन कैसे किया जाता है? - Kulhe ka operation kaise hota hai?
  5. कूल्हा प्रत्यारोपण सर्जरी के बाद देखभाल - Kulhe ka operation hone ke baad dekhbhal
  6. हिप रिप्लेसमेंट के बाद सावधानियां - Kulhe ka operation hone ke baad savdhaniya
  7. हिप रिप्लेसमेंट की जटिलताएं - Kulhe ki surgery me jatiltaye

कूल्हे के जोड़ों की सर्जरी (हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी) के अंतर्गत ऐसी ऑपरेटिव विधियां शामिल है जिनमें काम न कर रहे या बेकार काम कर रहे कूल्हे के जोड़ों को एक कृत्रिम और स्वस्थ जोड़े के साथ बदला जाता है। सर्जरी के लिए पूरी तरह कार्यात्मक कृत्रिम कूल्हे के जोड़ों का निर्माण किया जाता है।

कूल्हे के जोड़े बॉल और सॉकेट जोड़े होते हैं जिसका अर्थ है इन जोड़ों को कई दिशाओं में मोड़ा या स्थानांतरित किया जा सकता है। फेमूर हेड (जांघ की हड्डी का ऊपरी भाग) कूल्हे के जोड़ों की बॉल है और ऐसीटैबुलम इसका सॉकेट होता है। कूल्हे के जोड़ों की आंशिक रिप्लेसमेंट सर्जरी में सिर्फ कूल्हे की बॉल को बदला जाता है। कूल्हे के जोड़ों की कुल रिप्लेसमेंट सर्जरी में कूल्हे की बॉल को बदलकर सॉकेट को फिर से संगठित (निर्मित) किया जाता है।

यह सर्जरी कृत्रिम अंग के विशेषज्ञ द्वारा की जाती है। कृत्रिम अंग एक मानव द्वारा निर्मित शरीर का अंग है जो असली अंग की तरह ही सामान्य कार्यों को पूरा करता है। सर्जरी लगभग 1-2 घंटे तक चलती है। यह एक बहुत सावधानीपूर्वक की जाने वाली प्रक्रिया है और ऐसे चिकित्सक द्वारा की जाती है जो आर्थोपेडिक्स (हड्डियों के रोग) के क्षेत्र में विशेषज्ञ है।

कूल्हे के जोड़ों की कुल रिप्लेसमेंट सर्जरी (Total Hip Replacement Surgery)

स्वास्थ्य की कोई भी ऐसी स्थिति, जिसमें दोनों में से कोई एक तरफ के कूल्हे के जोड़ों की कारवाई में परेशानी हो, का उपचार करना ज़रूरी है। कभी कभी दवा, फिजियोथेरेपी, या व्यायाम से भी मदद मिल सकती है। हालांकि, कभी-कभी ये उपचार विधियां कूल्हे के जोड़ों को ठीक करने में मदद नहीं कर पाती हैं। ऐसा भी हो सकता है की कूल्हे के जोड़ों का ज़्यादा नुकसान हो रखा है, जिसे सिर्फ पारंपरिक तरीकों से ठीक नहीं किया जा सकता। ऐसी परिस्थितियों में शल्य चिकित्सा की ज़रुरत होती है। यदि कूल्हे के जोड़े इतने क्षतिग्रस्त हैं कि उनको ठीक करना मुश्किल है, तो ऐसे में उसे बदलने के लिए सर्जरी की जाती है। निम्न लिखित कुछ ऐसी स्थितियां जिसमें कूल्हे के जोड़ों को बदलने की सर्जरी की ज़रुरत हो सकती है :-

  • गठिया (Arthritis):
    कूल्हे के जोड़ों का गठिया सामान्य है क्योंकि इन जोड़ों में जब भी पैर चलते हैं तो हमेशा ही क्रिया होती रहती है। श्रोणि और जांघ की हड्डी कूल्हे के जोड़ों को बनाती हैं। ये हड्डियां जहाँ मिलती हैं वहां उपास्थि की एक परत होती है जो एक तकिये की तरह काम करती है और हड्डियों की सतह को टकराव से बचाती है। जोड़ों के लगातार उपयोग से वे घिसना शुरू हो जाते हैं जिससे वह ख़राब या नष्ट होने लगते हैं। इससे गठिया बनता है। गठिया धीरे धीरे बढ़ता है जिससे उपास्थि और घिसने और ख़राब होने लगती है। गठिया व्यक्ति के ठीक से चलने फिरने या काम करने की क्षमता को सीमित करता है। यदि नुकसान ज़्यादा है और किसी उपचार से ठीक नहीं हो पा रहा, तो जोड़ों को बदलने के लिए सर्जरी की ज़रुरत हो सकती है।
  • कूल्हे के जोड़ों का परिगलन:
    कूल्हे के जोड़ों की संरचना कुछ ऐसी है: जांघ की हड्डी का एक गोल फलाव (आगे निकला हुआ हिस्सा) जो श्रोणि की हड्डी की गोलाकार गुहा (कैविटी) में बैठता है। यह एक सुगठित (कॉम्पैक्ट) संरचना है। इस संरचना में रक्त वाहिका कभी-कभी बाधित हो सकती है। यह कूल्हे के जोड़ों को ख़राब करता है। ऐसी स्थिति में ख़राब जोड़ों को बदलना ही श्रेष्ठ विकल्प होता है।
  • लक्षण (जिनको ठीक न किया जाए):
    कूल्हे के जोड़ों के रोगों में चलने या कूल्हे के द्वारा किये जाने वाले हर काम में दर्द; अकड़न; मांसपेशियों के अति प्रयोग के कारण पैरों में कमजोरी, पालथी मारने या बैठने में असमर्थता, खड़े होकर बैठने में या बैठकर खड़े होने में परेशानी जैसे लक्षण पाए जाते हैं। अगर कूल्हे के जोड़ों का रोग बढ़ता जाए तो लक्षण भी जल्दी जल्दी बढ़ने लगते हैं।
  • आर्थोस्कोपी (Arthroscopy) की असफलता:
    आर्थ्रोस्कोपी में कूल्हे के जोड़ों के अंदर एक वीडियो कैमरा डाला जाता है और आंतरिक संरचनाओं को देखा जाता है। यदि कोई रोगग्रस्त उपास्थि या हड्डी है या जोड़ों में अस्वस्थ मलबा जमा है, तो इसे आर्थोस्कोपी के दौरान हटा दिया जाता है। यह जोड़े के सामान्य कार्यों को फिर से करने में मदद करता है। अगर आर्थ्रोस्कोपी राहत प्रदान करने में विफल रहती है, तो पूरे कूल्हे के जोड़ों को बदलने के लिए सर्जरी की जा सकती है।

रोगी के शरीर का पूर्ण परीक्षण और अतीत में रह चुकी सारी बीमारियों की जानकारी की मदद से डॉक्टर ये तय करता है कि रोगी को इस सर्जरी की ज़रुरत है या नहीं। इसके बाद डॉक्टर सर्जरी की तैयारी करता है। 

कूल्हे के जोड़ों की आंशिक रिप्लेसमेंट सर्जरी (Partial Hip Replacement Surgery)

जोड़ों की क्षति के आधार पर हड्डियों का डॉक्टर कूल्हे के जोड़ों की आंशिक रिप्लेसमेंट सर्जरी के लिए कहता है। आम तौर पर यह तब किया जाता है अगर फेमूर नैक (फेमूर के शाफ़्ट को फेमूर के हेड से जोड़ने वाला भाग; जांघ की हड्डी को फेमूर कहते हैं) में होने वाली फ्रैक्चर को ठीक नहीं किया जा सकता और सॉकेट बिलकुल ठीक है। डॉक्टर को कूल्हे के जोड़ों की सिर्फ बॉल को बदलने की जरूरत पड़ती है।

जांघ की हड्डी की गर्दन के फ्रैक्चर को निम्न रूप में ग्रेड किया जाता है:-

टाइप 1: हड्डियां साथ में दब जाती हैं और अलग नहीं होती। इसके अलावा, उनके संरेखण को काफी हद तक प्रभावित नहीं किया गया है। यह एक प्रकार का स्थिर (स्टेबल) फ्रैक्चर है।
टाइप 2: यहां, हड्डियों का फ्रैक्चर होता है, लेकिन कूल्हे की हड्डियों का संरेखण अभी भी वही है जो फ्रैक्चर से पहले था।
टाइप 3: फ्रैक्चर का वह चरण जहां हड्डियां पूरी तरह से विस्थापित हो जाती हैं लेकिन फिर भी दो हड्डी के टुकड़ों के बीच थोड़ा संपर्क होता है।
टाइप 4: फेमूर नैक फ्रैक्चर। हड्डियां पूरी तरह से विस्थापित हो जाती हैं और हड्डी के टुकड़ों के बीच कोई संपर्क नहीं है।

टाइप 1, टाइप 2 और टाइप 3 प्रकार के फेमूर नैक के फ्रैक्चर को नेलिंग (Nailing) उपकरण या पिन की मदद से ठीक किया जा सकता है। टाइप 4 फ्रैक्चर में, खंडित हड्डी के हिस्सों को किसी भी पिन या नेलिंग उपकरण का उपयोग करके ठीक नहीं किया जा सकता और फेमूर हेड (जांघ की हड्डी का ऊपरी हिस्सा) में रक्त आपूर्ति भी बाधित हो सकती है जिससे हड्डी को जल्दी कमज़ोर कर सकता है। इसलिए, ऐसी स्थितियों से बचने के लिए, हड्डियों का डॉक्टर आंशिक हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के लिए कहता है। इस सर्जरी में सॉकेट को नहीं छेड़ा जाता क्योंकि वह बिलकुल स्वस्थ है। यह सर्जरी टूटी हुई या फ्रैक्चर हो रखे कूल्हों के लिए एक उपचार है; गठिया के मरीज़ों के लिए यह सही उपचार नहीं है।

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग (खाली पेट रहना) (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)
  8. कृत्रिम अंग (Prosthesis) का चयन: कृत्रिम अंग बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली धातु को सावधानीपूर्वक चुना जाना चाहिए। शरीर के तरल पदार्थ या अन्य अंगों पर कृत्रिम जोड़ों की वजह से कोई विपरीत प्रतिक्रिया नहीं होनी चाहिए। कृत्रिम अंग को प्रत्येक रोगी के लिए उनकी ऊंचाई, वजन, डील-डौल के आधार पर विशेष रूप से डिजाइन किया जाना चाहिए।
  9. फिजियोथेरेपी (Physiotherapy): जिन मरीज़ों की जोड़ों की सर्जरी होनी होती है, उन्हें ऑपरेशन से पहले फिजियोथेरेपी सेशंस से गुजरना है। यह जोड़ों के आसपास की माँसपेशिओ को मज़बूती देता है जिससे सर्जरी के बाद परेशानियों से बचा जा सके।
  10. अन्य खास बातें: सर्जरी के लिए एक्सेस प्वाइंट (जहाँ चीरा काटकर क्षतिग्रस्त हिस्से तक पहुंचा जायेगा) के रूप में उपयोग की जाने वाली त्वचा पर से सभी बालों को हटा दिया जाता है। यह सभी सूक्ष्मजीवों को खत्म करने के लिए एक एंटी-सेप्टिक सलूशन से साफ किया जाता है।

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

कूल्हे के जोड़ों की कुल रिप्लेसमेंट सर्जरी (Total Hip Replacement Surgery)

कूल्हे के रोगग्रस्त जोड़ों को बदलने की प्रक्रिया केवल एक है, लेकिन इसे ओपन (Open) या Minimally Invasive Method) से किया जा सकता है। दोनों तरीकों को नीचे विस्तार से समझाया गया है:

  • ओपन सर्जरी (Open Surgery)
    यह एक आक्रामक प्रक्रिया है। कूल्हे (जिसे बदलना है) के किनारे में लगभग 6-8 इंच लम्बा चीरा किया जाता है। अंतर्निहित मांसपेशियों, वसा, तंत्रिकाओं और रक्त वाहिकाओं को ध्यान से अलग किया जाता है ताकि उन्हें नुकसान न पहुंचे। जांघ की हड्डी का ऊपरी भाग, जो संरचना में एक गेंद की तरह है, को एक ओर्थपेडीक आरी की मदद से काटा जाता है। 
    जांघ की हड्डी (जो अभी स्वस्थ है) को चुने हुए कृत्रिम अंग (जो धातु या प्लास्टिक से बना है) के साथ जोड़ा जाता है। जोड़ों को फिट करने के लिए एक मजबूत चिपकाने वाले पदार्थ की ज़रुरत होती है। किसी भी रोगग्रस्त उपास्थि या निकले हुए मलबे को कूल्हे की सतह से हटा दिया जाता है। कृत्रिम सॉकेट को कूल्हे की सतह से जोड़ा जाता है। जांघ की हड्डी के बॉल (गेंद) जैसी संरचना वाले कृत्रिम भाग और कृत्रिम सॉकेट को एक दुसरे में फिट किया जाता है। सर्जन यह जांच करता है कि कृत्रिम जोड़े ठीक से फिट हो गए हैं या नहीं। जिन मांसपेशियों को पहले विभाजित किया गया था, उन्हें फिर लगा दिया गया है। सर्जिकल धागे का उपयोग करके त्वचा पर बनाया गया चीरा बंद कर दिया जाता है।
  • न्यूनतम आक्रामक सर्जरी (Minimally Invasive Surgery)
    यह प्रक्रिया आकार और सर्जरी में किये गए चीरों की संख्या में ओपन सर्जरी से अलग होती है। एक लंबे चीरे के बजाय, कूल्हे (जो कि प्रतिस्थापित किया जाना है) के किनारे पर कई छोटे चीरे किये जाते हैं। इन चीरों के माध्यम से सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स डाले जाते हैं। आंतरिक अंगों को देखने के लिए एक आर्थोस्कोप (Arthroscope) का उपयोग किया जाता है। आगे की प्रक्रिया ओपन सर्जरी जैसी होती है। न्यूनतम आक्रामक सर्जरी से आसपास के अंगों या भागों को काम नुक्सान पहुँचता है और इसमें कम रक्तस्त्राव होता है।

हालांकि दोनों प्रक्रियाओं में कुछ अंतर है,लेकिन दोनों का निष्कर्ष एक समान है। सर्जरी के अंत में पुराने जोड़े को कृत्रिम जोड़े से बदला जाता है। बाद में देखभाल करने के लिए कुछ निर्देश दिए जाते हैं जिससे जल्दी रिकवरी हो सके।

कूल्हे के जोड़ों की आंशिक रिप्लेसमेंट सर्जरी (Partial Hip Replacement Surgery)

कूल्हे के जोड़ों की आंशिक रिप्लेसमेंट सर्जरी एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया है और इसे पूरा करने के लिए लगभग एक या दो घंटे लगते हैं। कूल्हे के जोड़ों में मौजूद बॉल को कृत्रिम या मानव निर्मित इम्प्लांट से बदला जाएगा। इसकी सर्जिकल प्रक्रिया निम्नलिखित है और निम्न क्रम में होती है:

  • कूल्हे के जोड़ों के आगे या पीछे या किनारे में एक चीरा बनाई जाती है। मांसपेशियों, ऊतकों, कण्ड्रों को स्थानान्तरित किया जाता है। कूल्हे को फिर ऐसी स्थिति में रखा जाता है जिससे सर्जन आसानी से उसे पूरी तरह खोल सकें।
  • फिर, फेमूर हेड (जांघ की हड्डी का ऊपरी भाग) को हटा दिया जाता है।
  • फेमूर स्टेम (कृत्रिम अंग का हिस्सा जो तैयार फेमूर के अंत में सम्मिलित होता है) को डालने के लिए फेमूर के अंदर के चैनल को खाली किया जाता है।  
  • फिर फेमूर स्टेम को सिमेंट की मदद से फेमूर के खाली किये गए हिस्से में लगाया जाता है। एक बार यह सही तरह से लग जाये, कृत्रिम बॉल को फेमूर स्टेम के ऊपर लगाया जाता है। 
  • कूल्हे के जोड़ों को फिर से जोड़ दिया जाता है और सारी मांसपेशियां, ऊतकों और कण्ड्रों (जिन्हें पहले कूल्हे के जोड़ों तक पहुँचने के लिए हटाया गया था) को फिर अपनी जगह पर लगाया जाता है और प्रक्रिया समाप्त हो जाती है।

कूल्हे के जोड़ों की आंशिक रिप्लेसमेंट की तकनीकें बेहतर हो रहीं हैं और कम आक्रामक आंशिक रिप्लेसमेंट सर्जरी के मिश्रित परिणाम पाए गए हैं इसलिए अभी भी पारंपरिक तरीके से उपचार किया जा रहा।

सर्जरी के बाद, रोगी को रिकवरी रूम में ले जाया जाता है। एनेस्थीसिया का असर कुछ समय तक रहेगा। रोगी को आंशिक रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद एक या दो दिन तक और कुल रिप्लेसमेंट सर्जरी में 4 से 6 दिन तक अस्पताल में रहने की ज़रुरत हो सकती है।

  • अस्पताल में देखभाल
    जब तक आप अस्पताल में हैं तब तक आप नर्सों की निगरानी में होते हैं। एनेस्थीसिया का असर जाने के बाद जब मरीज़ को होश आ जाता है तब उसके पूरे शरीर की जाँच की जाती है। घाव को रूई और पट्टियों से ढका जाता है। सर्जरी के बाद 1 या 2 दिन तक मरीज़ को ऐसे काम करने से मना किया जाता है जिनसे कूल्हे के जोड़ों पर बल पड़े। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद आपको देखभाल के लिए कई बातों का ध्यान देना होगा और अपने डॉक्टर द्वारा निर्देशित सभी सलाहों का पालन करना होगा।
  • फिजियोथेरेपी (Physiotherapy)
    कूल्हे के नवनिर्मित जोड़ों के आसपास मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए, फिजियोथेरेपी आवश्यक है। रोगी की रिकवरी के आधार पर सर्जरी के बाद यह जल्द ही शुरू कर देनी चाहिए। रोगी को कम थकाने वाले व्यायाम निर्धारित किये जाते हैं। 
  • सामान्य देखभाल 
    मरीज़ ऐसे कार्य न करें जिससे उनके कूल्हे के कृत्रिम जोड़ों पर किसी भी तरह का बल पड़े। संक्रमण और रक्तस्त्राव से बचने के लिए घाव का ध्यान रखें और उसे साफ़ रखें। घाव को सर्जिकल पट्टियों से ढक के रखें। चलने के लिए लाठी या बैसाखी का सहारा लें। जब तक डॉक्टर न कहे तब तक कोई ऐसे कार्य न करें जिसमे भरी चीज़ें उठानी पड़ें।
  • दवाएं 
    डॉक्टर आपको दर्द से बचने के लिए दर्द निवारक गोलियां और एंटीबायोटिक गोलियां दे सकते हैं। अपने डॉक्टर द्वारा निर्धारित खुराक में निर्धारित अवधि के लिए इन सभी दवाओं का उपयोग करें। 
  • आहार 
    इस सर्जरी के बाद जल्दी रिकवरी के लिए ज़रूरी है कि आप अपने खान पान का ध्यान रखें। आयरन (Iron), कैल्शियम (Calcium) और फॉस्फोरस (Phosphorus) युक्त आहार का सेवन करें। 

कूल्हे के जोड़ों की सर्जरी के बाद मरीज़ अपनी आम दिनचर्या 1-6 महीनों में शुरू कर सकता है हालांकि रिकवरी का समय मरीज़ की शारीरिक स्थिति और सर्जरी के बाद की गयी देखभाल पर निर्भर करता है।

हर सर्जरी के अपने कुछ जोखिम होते हैं। ज़रूरी है कि आप इन सभी जोखिमों के बारे में जानते हों :

  • रक्तस्त्राव 
    किसी भी बड़ी सर्जरी में सबसे बड़ा जोखिम अधिक रक्तस्त्राव का होता है। सर्जरी के दौरान किसी रक्त वाहिका को क्षति पहुँच सकती है या अन्य कोई परेशानी हो सकती है जिससे अत्यधिक रक्तस्त्राव हो सकता है। इसे पहले ही मरीज़ के ब्लड ग्रुप के हिसाब से मरीज़ के ग्रुप का रक्त तैयार रखा जाता है ताकि अगर सर्जरी के दौरान अत्यधिक खून बहे तो स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके और शरीर में तरल पदार्थों का संचार बना रहे। 
  • रक्त के थक्के बन जाना
    रक्तस्त्राव से थक्कों का गठन हो सकता है। बड़े थक्कों को यंत्रों की मदद से हटाया जा सकता है लेकिन छोटे थक्कों को हटाने में दिक्कत हो सकती है। इसके लिए डॉक्टर आपको Blood Thinner (खून को पतला करने वाली दवाएं ) दे सकता है। इनका प्रयोग डॉक्टर के निर्देशानुसार ही करें। 
  • नए जोड़ों का अपनी जगह से हिल जाना 
    अगर मरीज़ ज़्यादा शारीरिक कार्य करते हैं तो इससे कृत्रिम जोड़ों के अपनी जगह से हिल जाने का खतरा रहता है। इसको ठीक करने के लिए सर्जरी की ज़रुरत पड़ सकती है। 
  • पैरों की बदली हुई लम्बाई 
    ऐसा हो सकता है की कृत्रिम अंग असल अंग के आकर का न हो जिससे दोनों पैरों (इस सर्जरी में) की लम्बाई में फर्क लगे। अगर अंतर को अनदेखा किया जा सकता है तो इसको खास तौर पर बनाये गए जूतों की मदद से ठीक किया जा सकता है। लेकिन अगर अंतर ज़्यादा है तो इसके लिए एक सर्जरी की ज़रुरत हो सकती है।  

ज़रूरी नहीं की ऊपर लिखे सभी जोखिम हर मरीज़ के साथ हों। इन सभी जोखिमों से बचा भी जा सकता है और इन्हे ठीक भी किया जा सकता है। अगर सही तरह से पूरी हो जाए तो इस सर्जरी के कई फायदे भी हैं। 

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References

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