myUpchar प्लस+ के साथ पूरेे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत

सर्वांगासन में संपूर्ण शरीर का व्यायाम होता है और इसी लिए इसे सर्व-अंग-आसन = सर्वांगासन नाम दिया गया है। इस आसन को करने से आप हमेशा स्वस्थ रहेंगे और किसी भी प्रकार की बीमारी भी नहीं होगी।

इस लेख में सर्वांगासन के फायदों और उसे करने के तरीको के बारे में बताया है। साथ ही इस लेख में सर्वांगासन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई है। लेख के अंत में सर्वांगासन से संबंधित एक वीडियो शेयर किया गया है। 

  1. सर्वांगासन के फायदे - sarvangasana ke fayde
  2. सर्वांगासन करने से पहले यह आसन करें - sarvangasana karne se pehle yeh aasan kare
  3. सर्वांगासन करने का तरीका - sarvangasana karne ka tarika
  4. सर्वांगासन का आसान तरीका - sarvangasana karne ka aasaan tarika
  5. सर्वांगासन करने में क्या सावधानी बरती जाए - sarvangasana karne me kya savdhani barti jaye
  6. सर्वांगासन का वीडियो - sarvangasana ka video

हर आसन की तरह सर्वांगासन के भी कई लाभ होते हैं। उनमें से कुछ हैं यह:

  1. कंधो और गर्दन में खिचाव पैदा करता है।
  2. सर्वांगासन थायराइड और हाइपोथेलेमस ग्रंथियों को संतुलित करता है ताकि शरीर में उचित हार्मोन उत्पादन हो सके। (और पढ़ें - महिलाओं में थायराइड लक्षण)
  3. हृदय और श्वसन प्रणाली को मजबूत करता है।
  4. सर्वांगासन से पाचन अंगों पर सकारात्मक असर होता है जिस से कब्ज़ में राहत मिलती है।
  5. इस आसन से चेहरे पे रक्‍त प्रवाह बढ़ने के कारण झुर्रियां कम होती हैं।
  6. सर्वांगासन करने से मन का तनाव कम होता है जिस से बेहतर नींद आती है।

(और पढ़ें - मेडिटेशन के लाभ)

सर्वांगासन करने से पहले आप यह आसन कर सकते हैं इनसे आपकी हॅम्स्ट्रिंग, कूल्हे, और जांघे पर्याप्त मात्रा में खुल जाएँगे।

  1. सेतुबंधासन (Setu Bandahasana or Bridge Pose)
  2. हलासन (Halasana or Plow Pose)
  3. विरासन (Virasana or Hero Pose)

(और पढ़ें -  सांस लेने में दिक्कत

सर्वांगासन करने का तरीका हम यहाँ विस्तार से दे रहे हैं, इसे ध्यानपूर्वक पढ़ें।

  1. कमर के बल सीधे लेट जायें। हाथों को सीधा पीठ के बगल में ज़में पर टिका कर रखें।
  2. साँस अंदर लेते हुए दोनो टाँगों को उठा कर “अर्ध-हलासन” में ले आयें।
  3. कोहनियों को ज़मीन पर टिकाए हुए दोनो हाथों से पीठ को सहारा दें। इस मुद्रा में 1-2 साँस अंदर और बाहर लें और यह पक्का कर लें की आपका संतुलन सही है।
  4. अब धड़ और और टाँगों को उठा कर बिल्कुल एक सीध में कर लें (नीचे दिए गये चित्र में चौथी मुद्रा देखें)। दृष्टि को नाक पर रखें। अगर आपको यह करने से दिक्कत होती है संतुलन बनाए रखने में तो दृष्टि को नाभी पर भी रख सकते हैं।
  5. अपनी क्षमता के मुताबिक 60 से 300 सेकेंड तक इस मुद्रा में रहें और फिर धीरे से नीचे आ जायें। शुरुआत में कम देर करें (30 सेकेंड भी पर्याप्त है) और धीरे धीरे समय बढ़ायें।

(और पढ़ें- मानसिक रोग को कैसे दूर करें

  1. अगर आपकी गर्दन में लचीलापन कम हो तो कंधों के नीचे एक तौलिया लगा लें ऐसा करने से गर्दन को आराम मिलेगा।
  2. अगर आपको अपने आप को संतुलित रखने में कठिनाई आ रही हो तो दीवार का सहारा ले सकते हैं।

(और पढ़ें - पेट की गैस के लिए योग)  

  1. दस्त, सिरदर्दहाई बीपी, माहवारी या गर्दन में चोट हो तो सर्वांगासन ना करें।
  2. क्यूंकी यह एक कठिन आसन है, इसे शुरुआत में किसी गुरु के निर्देशन में ही करें।
  3. अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक जोर न लगायें।

सर्वांगासन को ठीक से करने के लिए यह वीडियो ध्यान से देखें।

और पढ़ें ...