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हाइपरथायरायडिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपके शरीर में मौजूद थायरॉयड ग्रंथि थायरोक्सिन (Thyroxine) हार्मोन का उत्पादन अधिक करती है।

थायरॉयड एक छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि होती है जो आपकी गर्दन के आगे वाले हिस्से में स्थित होती है। 

यह ग्रंथि टेट्रायोडोथायरोनिन (टी4) (Tetraiodothyronine) और ट्रीओडोथायरोनिन (टी3) (Triiodothyronine) बनाती है, जो दो प्राथमिक हार्मोन हैं। यह हार्मोन आपकी कोशिकाओं को ऊर्जा इस्तेमाल करने में नियंत्रित करते हैं। थायरॉयड ग्रंथि इन हार्मोनों के रिलीज के माध्यम से आपके चयापचय (Metabolism) को नियंत्रित करती है। थायरॉयड तब बढ़ता है जब थायरॉयड ग्रंथि टी4, टी3 या दोनों हार्मोन बहुत ज़्यादा बनाती है।

हाइपरथायरायडिज्म आपके शरीर की चयापचय (Metbolism) में तेजी ला सकता है, जिससे अचानक वजन घटना, तेज़ या अनियमित दिल की धड़कन, पसीना आना और घबराहट या चिड़चिड़ापन हो सकते हैं। हाइपरथायरायडिज्म का सबसे आम कारण ग्रेव्स बीमारी, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक प्रचलित है।

  1. थायराइड के प्रकार - Types of Thyroid problems in Hindi
  2. थायराइड के चरण - Stages of Thyroid in Hindi
  3. थायराइड के लक्षण -Thyroid Symptoms in Hindi
  4. थायराइड के कारण - Thyroid Causes in Hindi
  5. थायराइड से बचाव - Prevention of Thyroid in Hindi
  6. थायराइड का परीक्षण - Diagnosis of Thyroid in Hindi
  7. थायराइड का इलाज - Thyroid Treatment in Hindi
  8. थायराइड के जोखिम और जटिलताएं - Thyroid Risks & Complications in Hindi
  9. थायराइड कम करने के घरेलू उपाय
  10. थायराइड डाइट चार्ट
  11. थायराइड की दवा - Medicines for Thyroid in Hindi
  12. थायराइड के डॉक्टर

थायराइड के प्रकार - Types of Thyroid problems in Hindi

थायराइ विकार दो प्रकार के होते हैं -
1. हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism; थायराइड कम होना)
2. हाइपरथायराइडिज्म (Hyperthyroidism; थायराइड बढ़ना) - इसके बारे में इस लेख में बताया गया है

(और पढ़ें - थायराइड कम करने के घरेलू उपाय)

थायराइड के चरण - Stages of Thyroid in Hindi

थायराइड कम होने (हाइपोथायरायडिज्म) के चरण - Stages of Hypothyroidism in Hindi

हाइपोथायरायडिज्म के कितने चरण हो सकते हैं?

1. उप-क्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म (Subclinical Hypothyroidism)-

उप-क्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म में TSH (Thyroid Stimulating Hormone) का स्तर 3 से 5.5 mlU/L  तक बढ़ जाता है। अगर थायरोक्सिन (ThyroxineT4) का स्तर सामान्य स्तर के भीतर हो तो यह संदर्भ उप-क्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म की तरफ संकेत करते हैं।

2. हल्के हाइपोथायरायडिज्म (Mild Hypothyroidism)-

टीएसएच (TSH) के स्तर को 5.5 से 10 mlU/L तक बढ़ाया जा सकता है और थायरोक्सिन (ThyroxineT4) का स्तर कम किया जा सकता है, इससे ज्यादातर मरीजों का टी4 स्तर सामान्य स्तर पर आ जाता है। टी3 का स्तर आगे नहीं गिरता जब तक बीमारी उच्च तरीके से विकसित ना हो इसका कारण ये है कि TSH के स्तर का बढ़ना थायरॉयड को अधिक टी3 जारी करने के लिए उत्तेजित करने लगता है। इसके उत्कृष्ट निष्कर्ष तब दिखते हैं जब टी3 का स्तर गिरने लगता है। हल्के हाइपोथायरायडिज्म संभवत (Mild Hypothyroidism) ऑटोइम्यून थायरायराइटिस के कारण होते हैं, जिनके लक्षण थकान, वजन बढ़ना, तरल अवरोधन (Fluid Retention) आदि के रूप में  देखने को मिलते हैं। (और पढ़ें – थकान दूर करने के लिए क्या खाएं)

3. मध्यम हाइपोथायरायडिज्म (Moderate Hypothyroidism)-

किसी व्यक्ति को मध्यम हाइपोथायरायडिज्म तब होता है जब उसके टीएसएच का स्तर 10 से 20 mlU/L की सीमा के भीतर हो और जब उनका टी3 और टी4 निम्न स्तर में हो। हल्के (Mild Hypothyroidism) और मध्यम हाइपोथायरायडिज्म (Moderate Hypothyroidism) महिलाओं में जल्दी होने की संभावना रहती है। महिलाओं के मामले में यह बहुत जरूरी होता है कि हाइपोथायरायडिज्म कि जांच करके इसको ठीक किया जाए, क्योंकि इससे महिलाओं में गर्भपात (Miscarrage) और भ्रूण मृत्यू जैसे जोखिम बढ़ जाते हैं।

4. मैक्सिडेमा कोमा (Myxedema Coma)-

अगर हाइपोथायरायडिज्म का समय पर उपचार ना किया जाए को वह बढ़ कर मैक्सिडेमा कोमा (Myxedema Coma) का रूप धारण कर सकता है। मैक्सिडेमा कोमा एक बहुत ही खतरनाक स्थिति होती है, थायरॉयड हार्मोन का बहुत ही कम उत्पादन इसकी विशेषता होती है। शरीर इस स्थिति में तनाव, ठंडा मौसम और शल्य चिकित्सा आदि स्थितियों का सामना करने में असमर्थ हो जाता है। मरीज इस स्थिति में सामान्य महसूस नहीं करता एवं उसे शारीरिक कमजोरी, उलझन, शरीर में सुजन इत्यादि की स्थिति का सामना करना पड़ता है।

थायराइड के लक्षण -Thyroid Symptoms in Hindi

थायराइड बढ़ने (हाइपरथायरायडिज्म) के लक्षण - Hyperthyroidism Symptoms in Hindi

टी 4, टी 3 या दोनों हार्मोनों की ज़्यादा मात्रा अत्यधिक उच्च चयापचय दर का कारण हो सकती हैं। इसे हाइपरमेटाबॉलिक (Hypermetabolic) अवस्था कहा जाता है। इस अवस्था में, आपको हृदय की दर में तेज़ी, उच्च रक्तचाप और हाथों में झटकों का अनुभव हो सकता है। आपको अधिक पसीना आ सकता है और गर्मी के प्रति कम सहिष्णुता हो सकती है। हाइपरथायरायडिज्म आतों की अधिक गतिशीलता, वजन घटना और महिलाओं में, अनियमित मासिक धर्म चक्र उत्पन्न कर सकता है।
थायरॉयड ग्रंथि स्वयं भी सूज कर गोइटर (Goiter) बन सकती है। आपकी आंखें भी काफी बाहर निकली हुई दिखाई दे सकती हैं, जो एक्सोफ़थैल्मोस (Exophthalmos) का एक लक्षण है और ग्रेव्स बीमारी (Graves’ disease) से संबंधित है।

1. हाइपरथायरायडिज्म के अन्य लक्षण निम्नलिखित हैं -

  1. भूख में वृद्धि
  2. घबराहट
  3. बेचैनी
  4. ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता
  5. दुर्बलता
  6. अनियमित दिल की धड़कन
  7. नींद आने में कठिनाई
  8. नाज़ुक बाल
  9. खुजली
  10. बाल झड़ना
  11. मतली और उल्टी
  12. पुरुषों में स्तन विकास

2. निम्नलिखित लक्षणों को तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है -

  1. चक्कर आना
  2. साँस लेने में कठिनाई
  3. बेहोशी
  4. तेज या अनियमित हृदय की गति

हाइपरथायरायडिज्म, आर्टरियल फिब्रिलेशन (Atrial Fibrillation) का कारण बन सकता है जो एक खतरनाक अतालता (Arrhythmia: असामान्य दिल की धड़कन) है जिससे स्ट्रोक और दिल की विफलता भी हो सकती है।

 

थायराइड कम होने (हाइपोथायरायडिज्म) के लक्षण - Hypothyroidism Symptoms in Hindi

1 . हाइपोथायरायडिज्म के संकेत और लक्षण क्या हो सकते हैं?
 
हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण और संकेत मूल रूप से थायरॉयड हार्मोन उत्पादन में होने वाली कमी और उसकी गंभीरता पर आधारित होते हैं। पर सामान्य तौर पर देखा जाए तो इससे जुड़ी कई परेशानियां होती हैं जो हमारे अंदर सालों से पनपती चली आ रही होती हैं।
पहली बार आप हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों में थकावट और वजन बढ़ने जैसी परेशानियों को महसूस कर सकते हैं। मगर जब आपके चयापचय (Metabolism) के काम करने की गति धीमी होने लगती है, तब आप और स्पष्ट संकेत देख सकते हैं। 
हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण और संकेतों में निम्नलिखित शामिल है-
 
  1. थकान
  2. ज्यादा ठंड महसूस होना
  3. सूखी त्वचा
  4. वजन का बढ़ना
  5. चेहरे पर सूजन
  6. आवाज का बैठ जाना (Hoarseness)
  7. मांसपेशियों में कमजोरी
  8. रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ना
  9. मांसपेशियों का दर्द, कोमलता और जकड़न
  10. जोड़ों में अकड़न और सूजन के साथ दर्द
  11. असामान्य और अनियमित रूप से मासिक धर्म
  12. बाल झड़ना
  13. दिल की गति धीमी होना
  14. अवसाद
  15. स्मरण शक्ति का खराब पड़ जाना

अगर हाइपोथायरायडिज्म का उपचार ना किया जाए तो उसके लक्षण और संकेत धीरे-धीरे और बढ़ते चले जाते हैं और थायरॉयड हार्मोन ज्यादा जारी होने लगते हैं, जिससे थायरॉइड का आकार बढ़ने (Goiter) जैसी परेशानियां हो सकती है। इसके साथ-साथ आपको विस्मृत विकार हो सकते हैं, सोचने-समझने की शक्ति कम हो सकती है और आप अवसादग्रस्त भी महसूस कर सकते हैं।

 
2. मैक्सिडेमा कोमा-
एक अग्रवर्ती हाइपोथायरायडिज्म को 'मैक्सिडेमा' के नाम से पहचाना जाता है, यह काफी दुर्लभ होता है मगर हो जाने पर यह जीवन के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। इसके संकेत व लक्षणों में रक्त दबाव में कमी (Low Blood Pressure) सांस लेने में कमी होना, शरीर का तापमान कम होना, अप्रतिसाद, यहां तक की कोमा भी इसके लक्षणों में शामिल है। कई मामलों में मैक्सिडेमा घातक सिद्ध हो सकता है।
 
3. शिशुओं में हाइपोथायरायडिज्म-
हालांकि, हाइपोथायरायडिज्म खासतौर पर मध्यम वर्ग के लोगों और बूढ़ी महिलाओं पर ज्याादा प्रभाव डालता है पर यह स्थिति किसी के अंदर भी विकसित हो सकती हैं, यहां तक कि छोटे शिशुओं में भी। शिशु बिना थायरॉयड ग्रंथि के जन्म लेते हैं या फिर उस उम्र में उनकी थायरॉयड ग्रंथि काम नहीं करती, जिसके कुछ लक्षण हो सकते हैं। जिन शिशुओं को थायरॉयड से संबंधित परेशानियां होती हैं, वह निम्न प्रकार से हो सकती हैं-
  1. बच्चे की त्वचा पीली और आंखें सफेद पड़ जाना (Jaundice) खासतौर पर यह तब होता है जब बच्चों का जिगर (Liver) किसी पदार्थ को ना पचा पाए, इसको बिलीरूबिन (Bilirubin) भी कहा जाता है।
  2. बार-बार श्वास नली का रुकना
  3. जीभ का अत्यधिक बढ़ जाना या फैल जाना (Protruding Tongue)
  4. चेहरे में सूजन प्रतीत होना
 
जब बच्चों में रोग विकसित होने लगता है, तब उनको कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं, जैसे- उपयुक्त खाना खाने में परेशानियां जिस कारण से उनका सामान्य रूप से हो रहे विकास में कमी होने लगती हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे परेशानियां भी होने लगती हैं जिनके लक्षण कुछ इस प्रकार के हो सकते हैं।
  1. कब्ज
  2. खराब और कमजोर मांसपेशियां
  3. सामान्य से ज्यादा नींद आना
शिशुओं में हाइपोथायरायडिज्म का उपचार ना होने पर, हल्के हाइपोथायरायडिज्म के मामले में भी उनको शारीरिक और मानसिक बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
 
4. बच्चों और किशोरों में हाइपोथायरायडिज्म-
सामान्य रूप से बच्चे और किशोर जो हाइपोथायरायडिज्म से ग्रसित हैं उनके लक्षण आम व्ययस्क के जैसे ही हो सकते हैं, पर उनके इन सब लक्षणों के साथ-साथ कुछ अन्य स्थितियों का भी सामना करना पड़ता है, जो निम्न हैं-
  1. विकास में कमी, जिस कारण से लंबाई में कमी
  2. पक्के दातों के आने में देरी हो जाना
  3. तरुण अवस्था आने में देरी (Delayed puberty)
  4. मानसिक विकास में कमी
5. डॉक्टर की सलाह किस समय लेें?
जब आप बिना किसी कारण के थकान महसूस करने लग जाते हैं या हाइपोथायरायडिज्म के कुछ ऐसे लक्षण जैसे रूखी त्वचा होना, शरीर का पीला पड़ जाना, चेहरे पर सूजन, कब्ज या गले का बैठ जाना इत्यादि। जब आपको इस तरह से लक्षण महसूस हों तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
इसके अलावा अगर आप पहले भी किसी हाइपोथायरायडिज्म से गुजर चुके हैं तो आपको समय-समय पर डॉक्टर के पास सामान्य चेक-अप करवाते रहना चाहिए। रेडियो धर्मी आयोडीन (Radioactive Iodine) या थायरॉयड विरोधी दवाओं से उपचार या फिर सिर और गर्दन के लिए विकिरण उपचार (Radiation Therapy) और थैरेपी, किसी भी समय या यहां तक की कुछ सालों तक हाइपोथायरायडिज्म के परिणाम दिखा सकती है।
अगर आपको उच्च रक्त कोलेस्ट्रॉल है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करें, क्योंकि यह भी हाइपोथायरायडिज्म का एक कारण बन सकता है। अगर आप हाइपोथायरायडिज्म के लिए हार्मोन थैरेपी ले रहे हैं, तो आपके डॉक्टर के कहने के अनुसार उनका अनुसरण करते रहें। यह शुरू में ही सुनिश्चित कर लें की आप दवाईयों की सही मात्रा ले रहे हैं और समय के विपरित दवाईयां लेने की आदत भी छोड़ दें।

थायराइड के कारण - Thyroid Causes in Hindi

1. थायराइड बढ़ने (हाइपरथायरायडिज्म) के कारण - Hyperthyroidism Causes in Hindi

विभिन्न स्थितियों के कारण हाइपरथायरायडिज्म हो सकता है। ग्रेव्स बीमारी, हाइपरथायरायडिज्म का सबसे आम कारण है। यह एन्टीबॉडीओं (Antibodies) को थायरॉयड को बहुत अधिक हार्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करता है। ग्रेव्स बीमारी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक होती है। यह बीमारी परिवारों आनुवंशिक होती है, यदि आपके रिश्तेदारों को यह बीमारी है तो अपने डॉक्टर को बताएं।

हाइपरथायरायडिज्म के अन्य कारण हैं -

  1. अत्यधिक आयोडीन (टी4 और टी 3 में एक प्रमुख घटक)।
  2. थायरायडाइटिस (Thyroiditis) या थायरॉयड की सूजन, जो टी4 और टी3 का ग्रंथि से बाहर निकलने का कारण बनती  है।
  3. अंडाशय या वृषण (Testes) के फोड़े।
  4. थायराइड या पिट्यूटरी ग्रंथि के छोटे फोड़े।
  5. आहार या दवा के माध्यम से बड़ी मात्रा में ट्रीओडोथायरोनिन (टी 3) लेना।
  6. थायरॉयड गाठों का अत्यधिक काम करना (जहरीला एडिनोमा, विषाक्त बहुपक्षीय गोइटर, प्लम्मर रोग)। हाइपरथायरायडिज्म का यह रूप तब होता है जब आपके थायरॉयड के एक या अधिक एडेनोमा बहुत ज्यादा टी4 का उत्पादन करते हैं।

2. थायराइड कम होने (हाइपोथायरायडिज्म) के कारण - Hypothyroidism Causes in Hindi

हाइपोथायरायडिज्म होमो के क्या कारण हो सकते हैं?

हाइपोथायरायडिज्म एक बहुत ही सामान्य स्थिति है। कुल आबादी में अनुमानित 3% से 5% तक की जनसंख्या में हाइपोथायरायडिज्म के कई रूप देखे जाते हैं। हाइपोथायरायडिज्म पुरूषों से ज्याादा महिलाओं में सामान्य है और इसका जोखिम उनकी उम्र के साथ बढ़ता रहता है।  

वयस्कों में होने वाले हाइपोथायरायडिज्म के कुछ सामान्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. हाशिमोटो थायरोडिटिस (Hashimoto's Thyroiditis)
  2. लिम्फोसाइटिक थायरोडिटिस, जो हाइपोथायरायडिज्म के बाद हो सकता है (Lymphocytic Thyroiditis)
  3. थायरॉयड खंडन (रेडियोधर्मी आयोडीन और सर्जरी के कारण, Thyroid destruction)
  4. पिट्यूटरी या हाइपोथेलैमस रोग, (Pituitary or hypothalamic disease)
  5. दवाएं  (Medications)
  6. आयोडीन में गंभीर कमी (Severe iodine deficiency)

 

  1.  हाशिमोटो थायरोडिटिस-
    हाशिमोटो थायरोडिटिस आमतौर पर तब होता है जब थायरॉयड ग्रंथि बढ़ जाती है (अंग्रेजी भाषा में इस बीमारी को 'गोइटर'/ Goiter कहते हैं) और थायरॉयड हार्मोन बनाने की क्षमता को कम कर देती है। हाशिमोटो थायरोडिटिस एक ऑटोइम्यून (Autoimmune/ स्व-प्रतिरक्षित) रोग है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) अनउपयुक्त तरीके से थायरॉइड ऊतकों पर हमला करती है। अंशिक रूप से इस स्थिति को अनुवांशिकता का आधार माना जाता है।
     
  2. लिम्फोसाइटिक थायरोडिटिस-
    लिम्फोसाइटिक थायरोडिटिस, थायरॉयड ग्रंथि की सूजन को संदर्भित करता है। जब सूजन एक विशेष प्रकार के सफेद रक्त के कारण होती है तो उसको लिम्फोसाइटिक के नाम से जाना जाता है। इस स्थिति को लिम्फोसाइटिक थायरोडिटिस भी कहा जाता है।
     
  3. थायरॉयड खंडन- 
    जिन मरीजों का हाइपोथायरॉइड स्थिति (जैसे ग्रेव्स रोग/ Graves' disease) के लिए उपचार हो चुका है और उन्होनें रेडियोधर्मी आयोडीन थैरेपी ली है एवं उपचार के बाद उनके थायरॉइड ऊतकों ने काम करना कम कर दिया है या बंद कर दिया है तो, इस तरह कि संभावनाएं इस बात पर निर्भर करती है कि मरीज ने आयोडीन कि कितनी मात्रा को प्राप्त किया था या मरीज कि थायरॉइड ग्रंथि का आकार और उसकी गतिविधियां कैसी थी। रेडियोधर्मी आयोडीन उपचार के 6 महीने के बाद भी अगर थायरॉयड ग्रंथि कोई महत्वपूर्ण गतिविधि नहीं दे रही है तो आमतौर पर यह मान लिया जाता है कि थायरॉयड ग्रंथि अब उचित रूप से काम नहीं कर पा रही है।  इसका परिणाम हाइपोथायरायडिज्म ही निकलता है। ठीक उसी प्रकार सर्जरी की मदद से थायरॉइड ग्रंथि को हाइपोथायरायडिज्म का पालन करते हुऐ हटा दिया जाता है। 
     
  4. पिट्यूटरी या हाइपोथेलैमस रोग-
    जब किसी कारण से पिट्यूटरी ग्रंथि या हाइपोथैलेमस, थायरॉयड को संकेत देने में असमर्थ हो जाते हैं और थायरॉयड हार्मोन को उत्पादित करने का निर्देश दे देते हैं। इसके परिणास्वरूप टी4 और टी3 का स्तर नीचे गिरने लगता है भले ही थायरॉयड ग्रंथि सामान्य हो। अगर यह प्रभाव  पिट्यूटरी रोगों के कारण होता है तो इस स्थिति को 'मध्यम हाइपोथायरायडिज्म' (Secondary Hypothyroidism) कहा जाता है और अगर यही प्रभाव हाइपोथैलेमस रोगों के कारण हो तो इसे तृतीयक 'हाइपोथायरायडिज्म' (Tertiary Hypothyroidism) कहा जाता है।
     
  5. पिट्यूटरी जख्म (Pituitary Injury)-
    जब दिमाग की सर्जरी या किसी कारण से उस क्षेत्र में रक्त की आपूर्ती में कमी हो जाए तो उसका परिणाम पिट्यूटरी जख्म (Pituitary Injury) के रूप में आता है। पिट्यूटरी जख्म के इस मामले में टीएसएच (TSH) स्तर जो पिट्यूटरी ग्रंथि के द्वारा जारी किया जाता है वह कम हो जाता है और टीएसएच में रक्त स्तर भी काफी कम हो जाता है। परिणास्वरूप हाइपोथायरायडिज्म हो जाता है क्योंकि थायरॉयड ग्रंथि अब पिट्यूटरी टीएसएच द्वारा उत्तेजित नहीं की जाती।
     
  6. दवाएं-
    एक ऑवर-एक्टिव थॉयरॉयड (Over-Active Thyroid) के उपचार के लिए प्रयोग की जाने वाली दवाएं ही वास्तव में 'हाइपोथायरायडिज्म' का कारण बनती हैं। ये दवाइयां जिनमें मेथिमाजॉल या टैपाजॉल (Methimazole/Tapazole) और प्रोपिलथ्योरॉसिल (Propylthiouracil) शामिल हैं। साइकिएट्रिक दवाइयां (Psychiatric Medication) लिथियम (Lithium Eskalith, Lithobid) को थायरॉयड के कार्य को बदलने के लिए भी जाना जाता है जो 'हाइपोथायरायडिज्म' का कारण बनते हैं। खासतौर पर कुछ दवाओं में काफी मात्रा में आयोडीन होता है, जिनमें ऐमियोडेरोन (Amiodarone/ Cordarone), पोटाशियम आयोडाइड (Potassium iodide) और ल्यूगो सोल्यूशन (Lugol's solution) शामिल हैं, जिनके कारण से थायरॉयड के फंक्शन में बदलाव आ सकते हैं। जिसका परिणाम रक्त में  थायरॉयड हार्मोन का स्तर कम होना भी हो सकता है।
     
  7. आयोडीन में गंभीर कमी-
    दुनिया के उन क्षेत्रों में जहां आहार में आयोडीन की कमी पाई जाती है वहां पर 5% से 15% तक की जनसंख्या को गंभीर आयोडीन कमी रोग (Severe Hypothyroidism) देखने को मिलता है। उदाहरण के तौर पर ऐसी जगहों में ज़ैरे, इक्वाडोर, भारत, और चिली आदि शामिल हैं। आयोडीन में गंभीर कमी के रोग दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में भी देखने को मिल जाते हैं, जैसे- एंडीज और हिमालयी क्षेत्रो में।  इस कमी को दूर करने के लिए नमक में (Table Salt) और रोटी में आयोडीन की वृद्धि कर दी जाती है। अमेरीका जैसे देशों में आयोडीन की कमी बहुत ही कम देखी जाती है।

थायराइड से बचाव - Prevention of Thyroid in Hindi

1. थायराइड बढ़ने (हाइपरथायरायडिज्म) से बचाव - Prevention of Hyperthyroidism in Hindi

   ग्रेव्स रोग के कारण होने वाला एक अनुवांशिक बीमारी जिससे बचा नहीं जा सकता। हालंकि धूम्रपान करने से ग्रेव्स रोग और ग्रेव्स ऑफ्थेलनोपथी होने का जोखिम बढ़ जाता है।

 

2. थायराइड कम होने (हाइपोथायरायडिज्म) के रोकने के तरीके - Prevention of Hypothyroidism in Hindi

हाइपोथायरायडिज्म की रोकथाम कैसे की जा सकती है?

सभी थायरॉयड रोगों का इलाज उसके सामान्य लक्षणों और चिह्न को देखते हुऐ किया जा सकता है, हालांकि थायरॉयड की सामान्य स्थिति बनाएं रखने के लिए दवाईयों की जरूरत भी पड़ सकती है। हालांकि, थायरॉयड से संबंधित कैंसर का इलाज मिल चुका है लेकिन सामान्य तौर पर हाइपोथायरायडिज्म के ईलाज के लिए हार्मोन प्रतिस्थापन (Hormone replacement) की जरूरत पड़ती है। जीवनचर्या मे कुछ बदलाव लाकर भी हाइपोथायरायडिज्म की रोकथाम की जा सकती है। जैसे-

  • धूम्रपान करना बंद कर दें।
  • तनाव कम करें।
  • रोज व्यायाम करें और अपना स्वस्थ वजन बनाएं रखें। (और पढ़ें - व्यायाम के फायदे)
  • फिल्टर किया हुआ पानी पीएं, क्योंकि पानी में फ्लोराइड होता है जो थायरॉयड के जोखिम को बढ़ाता है।
  • अधिक वसायुक्त भोजन न खाएं।
  • आयोडीन युक्त आहार का सेवन सीमित मात्रा में होना चाहिए, इसके अधिक सेवन से अन्य स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती है।
  • एक स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, उचित पोषण और कम तनाव आपके सभी थायरॉयड संबंधित रोगों के खतरों को कम कर देती है।

थायराइड का परीक्षण - Diagnosis of Thyroid in Hindi

1. थायराइड बढ़ने (हाइपरथायरायडिज्म) का परीक्षण - Diagnosis of Hyperthyroidism in Hindi

हाइपरथायरायडिज्म का निदान निम्नलिखित तरीकों से किया जाता है -

  1. मेडिकल इतिहास और शारीरिक परीक्षण
    परीक्षण के दौरान आपके चिकित्सक आपकी उंगलिओं में हलके झटकों, अनैच्छिक गतिविधिओं, आंखों परिवर्तन और गर्माहट,त्वचा की नरमी का परीक्षण करते हैं। आपके डॉक्टर आपकी थायरॉयड ग्रंथि की भी जांच करेंगे यह देखने के लिए यह बढ़ी या उभरी हुई तो नहीं है और यह भी देखेंगे की आपकी नब्ज़ तेज़ तो नहीं है।
     
  2. कोलेस्ट्रॉल परीक्षण
    आपके चिकित्सक को आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच करनी पड़ सकती है। कम कोलेस्ट्रॉल एक ज़्यादा चयापचय दर का संकेत हो सकता है।
     
  3. टी 4, फ्री टी 4, टी 3 परीक्षण
    ये परीक्षण आपके रक्त में थायराइड हार्मोन (टी 4 और टी 3) का मूल्यांकन करते हैं।
     
  4. थायरॉयड स्टिम्युलेटिंग हार्मोन स्तर परीक्षण
    थायरॉयड स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (टीएसएच: Thyroid stimulating hormone level test) एक पिट्यूटरी ग्रंथि का हार्मोन होता है जो थायरायड ग्रंथि को हार्मोन उत्पन्न करने के लिए उत्तेजित करता है। जब थायरॉयड हार्मोन का स्तर सामान्य या ज़्यादा होता है तो टीएसएच कम होना चाहिए। एक असामान्य रूप से कम टीएसएच हाइपरथायरायडिज्म का पहला संकेत हो सकता है।
     
  5. ट्राइग्लिसराइड टेस्ट
    आपका ट्राइग्लिसराइड के स्तर का भी परीक्षण किया जा सकता है। कम कोलेस्ट्रॉल के समान, कम ट्राइग्लिसराइड्स उच्च चयापचय दर का संकेत हो सकता है।
     
  6. थायराइड स्कैन
    यह स्कैन आपके डॉक्टर को यह देखने की अनुमति देता है कि आपका थायरायड अतिसक्रिय है या नहीं। विशेष रूप से, यह बताता है कि संपूर्ण थायराइड ग्रंथि या उसका सिर्फ एक ही क्षेत्र अति-सक्रियता पैदा कर रहा है।
     
  7. अल्ट्रासाउंड
    अल्ट्रासाउंड पूरी थायरायड ग्रंथि के आकार को मापता है, साथ ही यह भी देखता है की इसमें किसी भी प्रकार का जमाव है या नहीं। 
     
  8. सीटी या एमआरआई स्कैन
    सीटी या एमआरआई दिखा सकते हैं कि कहीं पिट्यूटरी ग्रंथि में ट्यूमर तो नहीं है जो कि हाइपरथायरायडिज्म कर रहा है।

2. थायराइड कम होने (हाइपोथायरायडिज्म) का परीक्षण - Diagnosis of Hypothyroidism in Hindi

हाइपोथायरायडिज्म का परीक्षणनिदान कैसे किया जाता है?

  1. क्योंकि महिलाओं में हाइपोथायरायडिज्म काफी प्रचलित है, इसलिए ज्यादातर डॉक्टर महिलाओं को हर बार नियमित रूप से शारीरिक परीक्षण के दौरान इस विकार की जाँच करवाने की सलाह देते  हैं। कुछ डॉक्टरों का मानना है कि गर्भवती महिलाएं या वे महिलाएं जो गर्भवती बनने के बारे में सोच रही हैं, उनको हाइपोथायरोइडिज्म की जाँच करवा लेनी चाहिए।
  2. अगर आप थका हुआ मसहूस करते हैं, आपकी त्वचा रूखी हो गई है, आपको कब्ज है, वजन बढ़ रहा है या फिर आपको पहले थायरॉयड से संबंधित परेशानियां हो चुकी हैं तो सामान्य रूप से डॉक्टर, अंडरएक्टिव थायरॉयड (Underactive Thyroid) के लिए आपका शारीरिक परीक्षण कर सकते हैं। 

रक्त की जाँच:

  1. हाइपोथायरायडिज्म का परीक्षण आपके लक्षणों और आपके खून की जाँच (जो आपके टीएसएच स्तर को बताती है) पर निर्भर करता है। कई बार इसका निदान थायरॉयड हार्मोन थायरोक्सिन की जांच करके भी किया जाता है। थायरोक्सिन का निम्न स्तर और टीएसएच का उच्च स्तर अंडरएक्टिव थायरॉयड के संकेत देते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपकी पिट्यूटरी ग्रंथि ज्यादा टीएसएच जारी करके आपकी थायरॉयड ग्रंथि  को ज्यादा थायरॉयड उत्पन्न करने के लिए उत्तेजित करती रहती है। 
  2. टी4 और ऑटोएंटीबॉडी (Autoantibody) परीक्षण खून की जाँच के लिए अतिरिक्त परीक्षण हैं जिनका प्रयोग इसके निदान और इसके कारणों को निर्धारित करने के लिये किया जाता है। 
  3.  पूर्ण स्वास्थ्य और थायरॉयड ग्रंथि की गतिविधियों को पूरी तरह से स्थापित करने के लिए, डॉक्टर एक पूर्ण थायरॉयड पैनल चला सकते हैं जिसमें टी3 और टी4 और थायरॉयड ऑटोएंटिबॉडी का परीक्षण भी शामिल होगा।
  4. यहां पर कोलेस्ट्रॉल स्तर, लीवर एंजाइम्स (Liver Enzymes), प्रोलैक्टिन (Prolactin) और सोडियम को चेक करने के लिए भी कई परीक्षण किये जा सकते हैं।
  5. पहले डॉक्टर हाइपोथायरायडिज्म का पता तब तक नहीं लगा पाते थे जब तक उसके लक्षण स्पष्ट रूप से ना दिखने लगें। लेकिन अब लक्षणों के अनुभव होने से पहले ही डॉक्टर संवेदनशील टीएसएच स्तर की जाँच करके थायरॉयड के विकारों का पता लगाने में समर्थ हो चुके हैं। क्योंकि टीएसएच परीक्षण सबसे अच्छा जाँच होता है, डॉक्टर पहले टीएसएच परीक्षण करेंगे उसके बाद अगर जरूरत पड़े तो थायरॉयड हार्मोन का परीक्षण भी कर सकते हैं क्योंकि टीएसएच परीक्षण हाइपोथायरायडिज्म को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह परीक्षण आपके डॉक्टर को शुरूआती समय में और समय के साथ-साथ दवाई की सही मात्रा को निर्धारित करने में मदद करेगा।
  6. इसके अलावा टीएसएच टेस्ट, सबक्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म (Subclinical Hypothyroidism) कि स्थिति का निदान करने में मदद करता है, जिसके आमतौर पर कोई बाहरी लक्षण या संकेत नहीं दिखते हैं। ऐसी स्थिति में आपके रक्त में  ट्रीआयोडोथायरोनिन (Triiodothyronine) और थायरोक्सिन का स्तर सामान्य रहेगा पर टीएसएच का स्तर उच्च होगा।

थायराइड का इलाज - Thyroid Treatment in Hindi

1. थायराइड बढ़ने (हाइपरथायरायडिज्म) का इलाज - Hyperthyroidism Treatment in Hindi

आपका इलाज आपकी उम्र, हाइपरथायरॉडीजम के कारण, शरीर कितना थायराइड हार्मोन बना रहा है और अन्य चिकित्सा स्थितियों पर निर्भर करता है। हाइपरथायरायडिज्म के तीन उपचार होते हैं जन्में से एंटीथायरॉयड दवाएं और रेडियो-एक्टिव आयोडीन आम हैं। कुछ दुर्लभ मामलों में, सर्जरी भी की जाती है। हाइपरथायरायडिज्म से अधिक गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं इसलिए यदि आपके लक्षण दुविधा नहीं भी कर रहे हैं, तो भी आपको इलाज की आवश्यकता है।

हाइपरथायरायडिज्म का शुरूआती उपचार
हाइपरथायरायडिज्म का शुरुआती उपचार आमतौर पर एंटीथायरॉयड दवाएं या रेडिओ-एक्टिव आयोडीन से होता है। यदि आपके लक्षण ज़्यादा हैं तो आपके डॉक्टर आपको पहले एंटीथायरॉयड दवाएं लेने के लिए सलाह दे सकते हैं और फिर यह तय करेंगे कि आपको रेडियो-एक्टिव आयोडीन के उपचार की ज़रुरत है या नहीं।

  1. एंटीथायरॉयड दवाएं
    एंटीथायरॉयड दवाएं सबसे अच्छा काम करती हैं यदि आपको हल्का हाइपरथायरायडिज्म है, यदि आपका पहली बार ग्रेव्स रोग का इलाज हो रहा है, यदि आप 50 वर्ष से कम उम्र के हैं या यदि आपकी थायरॉयड ग्रंथि में थोड़ी सूजन है (गोइटर)।
     
  2. रेडियो-एक्टिव आयोडीन (Radioactive Iodine)
    रेडियो-एक्टिव आयोडीन की सलाह तब दी जाती है जब आपको ग्रेव्स बीमारी है और आप 50 से अधिक उम्र के हैं या यदि आपको थायरॉयड की गांठ है जो बहुत अधिक थायराइड हार्मोन बना रही है। रेडियो-एक्टिव आयोडीन का उपयोग नहीं किया जाता है यदि -
    आप गर्भवती हैं या आप उपचार के 6 महीने के भीतर गर्भवती बनना चाहती हैं।
    आप स्तनपान करवा रही हैं।
    आपको थाइरेडिटिस या अन्य प्रकार का हाइपरथायरोडिज़्म है जो अस्थायी है।
     
  3. सर्जरी
    आमतौर पर प्रारंभिक उपचार में सर्जरी नहीं की जाती है। यह तभी की जाती है यदि आपकी थायरॉयड ग्रंथि इतनी बढ़ गयी है कि आपको निगलने या साँस लेने में तकलीफ हो रही है या एक बड़ी थायरॉयड गांठ बहुत अधिक थायरायड हार्मोन बना रही है या यदि आपको एंटीथायरॉयड दवाओं और रेडियो-एक्टिव आयोडीन से बहुत सारे दुष्प्रभाव हो रहे हैं।
     

उपचार के दौरान

  • हाइपरथायरायडिज्म के उपचार के दौरान और बाद में आपके थायराइड-उत्तेजक हार्मोन (टीएसएच) के स्तर की जांच करने के लिए नियमित रक्त परीक्षण होंगे। आपके टी 4 और टी 3 हार्मोनों के स्तरों की भी जांच की जाएगी। ये परीक्षण यह जानने में मदद करते हैं कि आपका उपचार कितनी अच्छी तरह से काम कर रहा है। यदि प्रारंभिक उपचार से आपके लक्षण ठीक नहीं होते हैं, तो आपको उपचार दोहराने या एक किसी और उपचार की आवश्यकता हो सकती है।
  • कभी-कभी उपचार हाइपरथायरायडिज्म ठीक कर देता है लेकिन हाइपोथायरायडिज्म का कारण बन जाता है।
  • हाइपोथायरायडिज्म में थायरायड ग्रंथि बहुत कम थायराइड हार्मोन बनती है। रेडियो-एक्टिव आयोडीन के उपचार के बाद हाइपोथायरायडिज्म होना सबसे सामान्य है लेकिन यह सर्जरी के बाद और कभी-कभी एंटीथायरॉयड दवाएं लेने के बाद भी हो सकता है। यदि आपको हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों में से कोई भी अनुभव होते हैं जैसे कि वज़न बढ़ना, थकावट महसूस होना या सामान्य से ज़्यादा ठण्ड लगना, तो अपने चिकित्सक से तुरंत बात करें। यदि आपको हाइपोथायरायडिज्म है, तो आपको अपने पूरे जीवन थायरॉयड हार्मोन की दवा लेने की आवश्यकता हो सकती है।

2. थायराइड कम होने (हाइपोथायरायडिज्म) का इलाज - Hypothyroidism Treatment in Hindi

हाइपोथायरायडिज्म का निदान कैसे किया जा सकता है?

अगर आप हाइपोथायरायडिज्म से ग्रस्त हैं, तो डॉक्टर आपको सिंथेटिक (मानवनिर्मित) थायरॉयड हार्मोन टी -4 लेने की सलाह देंगे यह दवाई आपको रोज़ लेनी होगी। यह दवा थायरॉयड हार्मोन के उचित स्तर को पुनर्स्थापित कर देती है जिससे हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण और संकेत फिर से ठीक होने लगते हैं

उपचार चलने के एक या दो सप्ताह के बाद मरीज अपने शरीर की थकान में कमी महसूस करने लगेगा, धीरे-धीरे यह दवाई उसके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कम करने लगेगी जो रोगों की वजह से उच्च स्तर हो गया था साथ ही बढ़ा हुआ वजन भी धीरे-धीरे कम होने लगेगा। आमतौर पर लेवोथायरोक्सिन (Levothyroxine) द्वारा किया गया उपचार जीवनभर चलता रहता है पर दवाई की मात्रा धीरे-धीरे कम होती जाएगी और डॉक्टर हर साल मरीज की TSH स्तर की जाँच करेंगे।

1. मरीज के लिए उचित खुराक का निर्धारण-

  • लेवोथायरोक्सिन (Levothyroxine) की सही मात्रा को निर्धारित करने के लिए डॉक्टर मरीज के TSH स्तर की हर दो या तीन महीने में जाँच करेगा। दवाई की ज्यादा मात्रा से हार्मोन स्तर में बढ़ोत्तरी हो सकती हैं जिससे कुछ ऐसे दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।
  • भूख बढ़ना
  • अनिद्रा (Insomnia)
  • दिल में घबराहट महसूस होना (Heart palpitations)
  • अस्थिरता, काँपना (Shakiness)
  • अगर मरीज कोरोनरी धमनी की बीमारी (Coronary Artery Disease) या कठोर हाइपोथायरायडिज्म (Severe Hypothyroidism) से ग्रसित हैं तो डॉक्टर दवाई की एक छोटी से मात्रा से उपचार शुरू कर सकतें हैं औऱ धीरे-धीरे मात्रा को बढ़ा सकते हैं। हार्मोन का प्रगतिशील विस्थापन दिल को चयापचय (Metabolism) की वृद्धि में समायोजित होने की अनुमति देता है।
  • लेवोथायरोक्सिन (Levothyroxine) के वास्तव में कोई दुष्प्रभाव (Side Effects) नहीं होते है। इसके साथ ही यह अन्य के मुकाबले सस्ती भी होती है। अगर आप दवाई का ब्रांड बदलना चाहते हैं तो डॉक्टर को बता दें ताकि डॉक्टर सुनिश्चित कर सकें कि आप सही दवाई ले रहें हैं। अगर आपको अच्छा महसूस होने लगाता है तो भी दवाईयों को बीच में ना छोड़ें ऐसा होने पर हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण धीरे-धीरे वापस आ सकते हैं। 

2. लेवोथायरोक्सिन का उचित अवशोषण-

  • कुछ दवाईयां, सप्लिमेंट्स यहां तक की कुछ खाद्य पदार्थ भी आपकी लेवोथायरोक्सिन के अवशोषण करने की क्षमता पर प्रभाव डाल सकते हैं। अगर आप सोया के पदार्थ या उच्च फाइबर वाले आहार लेते हैं तो इस बारे में डॉक्टर से बात करें इसके अलावा अगर ऐसी दवाईयां या सप्लिमेंट ले रहे हैं जो नीचे दिए गए हैं, तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है।
  • आयरल सप्लिमेंट्स (Iron supplements) या कुछ ऐसे मल्टिविटामिन पदार्थ जिनमें आयरन होता है।
  • कोलेस्टाइरामिन
  • एल्यूमिनियम हाइड्रोक्साइड (Aluminum hydroxide), जो किसी एंटीसिड्स में पाए जाते हैं।
  • कैल्सियम सप्लिमेंट्स (Calcium supplements)
  • अगर आपको सबक्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म (Subclinical Hypothyroidism) है तो अपने डॉक्टर के साथ इसके उपचार के बारे में बात करें। अगर टीएसएच स्तर बढ़ रहा है तो आपके लिए थायरॉयड हार्मोन थैरेपी (Thyroid Hormone Therapy) लाभकारी नहीं होगी, यहां तक कि यह आपके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। वहीं दूसरी ओर टीएसएच का उच्च स्तर आपके कोलेस्ट्रॉल स्तर में वृद्धि कर सकता है, इसके साथ ही यह आपको दिल कि पंपिंग क्षमता में सुधार और शरीर में उर्जा भी ला सकता है।

3. वैकल्पिक दवाईंयां-

  • यद्यपि ज्यादातर डॉक्टर सिंथेटिक थायरोक्सिन (Synthetic Thyroxine) की सलाह देते हैं, थायरॉयड हार्मोन समेत प्राकृतिक अर्क जो सूअर की आंत से ली जाती है, वह उपलब्ध है। इन उत्पादों में थायरोक्सिन और ट्राइयोडोथायरोनिन दोनों होते हैं। सिंथेटिक थायरॉइड दवाईयों में केवल थायरोक्सिन ही होती है एवं आपके शरीर को ट्राइयोडोथायरोनिन, थायरोक्सिन से निकालने की जरूरत पड़ती है। अर्क सिर्फ नुस्खे के लिए ही होते हैं। इन उत्पादों को खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration) द्वारा विनियमित नहीं किया जाता और इन उत्पादों की प्रभावशीलता और शुद्धता की कोई गारंटी नहीं होती।

थायराइड के जोखिम और जटिलताएं - Thyroid Risks & Complications in Hindi

1. थायराइड बढ़ने (हाइपरथायरायडिज्म) के जोखिम और जटिलताएं - Hyperthyroidism Risks & Complications in Hindi

हाइपरथायरायडिज्म के जोखिम -
हाइपरथायरायडिज्म, विशेष रूप से ग्रेव्स रोग, पारिवारिक समस्या होती है और पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक आम होती है। यदि आपके परिवार के किसी अन्य सदस्य को थायरॉयड है, तो अपने चिकित्सक से सलाह लें और अपने थायरायड परीक्षण करवाएं।

हाइपरथायरायडिज्म से निम्नलिखित जटिलताएँ हो सकती हैं -

  1. ह्रदय की समस्याएं
    हाइपरथायरायडिज्म की सबसे गंभीर जटिलताओं में से एक है ह्रदय की समस्याएं जैसे - हृदय की गति में तीव्रता, आर्टरियल फिब्रिलेशन (Atrial Fibrillation) और कंजेस्टिव दिल की विफलता (ऐसी स्थिति जिसमें आपका दिल आपके शरीर की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त रक्त प्रसारित नहीं कर सकता पाता है)। ये जटिलताएं आमतौर पर उपयुक्त उपचार के साथ ठीक हो सकती हैं।
     
  2. हड्डियों की कमज़ोरी
    अनुपचारित हाइपरथायरायडिज्म से हड्डियों की कमज़ोरी (ऑस्टियोपोरोसिस) भी हो सकती है। आपकी हड्डियों की ताकत, कैल्शियम और अन्य खनिजों की मात्रा पर निर्भर करती है। बहुत ज्यादा थायराइड हार्मोन आपके शरीर की हड्डियों में कैल्शियम रहने की क्षमता के साथ हस्तक्षेप करता है।
     
  3. नेत्र समस्याएं
    ग्रेव्स ऑफ्थेलनोपथी (Graves' ophthalmopathy) से ग्रस्त लोगों को आँखों की समस्याएं होती हैं जैसे आँखों का उभरापन, लाल या सूजी हुई आंखें, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता और धुंधली या दोहरी दृष्टि। अनुपचारित, गंभीर नेत्र समस्याओं से आँखों की रौशनी भी जा सकती है।
     
  4. लाली और त्वचा की सूजन
    कुछ दुर्लभ मामलों में, ग्रेव्स रोग से ग्रस्त लोगों को ग्रेव्स डर्मोपैथी (Graves' dermopathy) होता है जो त्वचा को प्रभावित करता है जिसमें त्वचा में लाली और सूजन होती है।
     
  5. थायरोटॉक्सिक क्राइसिस (Thyrotoxic crisis)
    हाइपरथायरायडिज्म से आपको थायरोटॉक्सिक क्राइसिस भी हो सकता है जिससे आपके लक्षणों की तीव्रता अचानक बढ़ जाती है जिससे बुखार, नब्ज़ की तेज़ी और यहां तक कि उन्माद भी हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तत्काल चिकित्सा लें।

2. थायराइड कम होने (हाइपोथायरायडिज्म) के जोखिम और जटिलताएं - Hypothyroidism Risks & Complications in Hindi

हाइपोथायरायडिज्म के क्या जोखिम कारक हो सकते हैं?

  1. यद्यपि हाइपोथायरायडिज्म किसी में भी विकसित हो सकता है। जिनके शरीर में निम्न कारक मौजूद हैं वे इसके जोखिम का शिकार हो सकते हैं:
  2. 60 साल से ज्यादा उम्र की महिलाएं
  3. किसी स्व-प्रतिरक्षित बीमारी (Autoimmune disease) से पीड़ित होना
  4. परिवार में पहले थायरॉयड से संबंधित बीमारियां
  5. कभी रेडियोधर्मी आयोडीन (Radioactive iodine) या एंटी-थायरोइड दवाइयों (Anti-Thyroid medications) के द्वारा किया गया उपचार
  6. गर्दन या छाती के ऊपरी भाग में कभी विकिरण प्रकिया (radiation) का उपयोग किया गया हो
  7. कभी थायरॉयड शल्य चिकित्सा (Thyroid surgery) की गई हो
  8. पिछले 6 महीनों के अंदर कोई महिला गर्भवती हुई हो या बच्चे को जन्म दिया हो, तो उसके लिए यह जोखिम कारक हो सकता है।

 

  1. हाइपोथायरायडिज्म की जटिलताएं क्या हो सकती हैं?
    अगर हाइपोथायरायडिज्म का उपचार ना किया जाए तो यह कई स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का कारण बन सकता है। जिनमें निम्न शामिल हैं-
     
  2. गोइटर (Goiter).
    थायरॉड ग्रंथि को लागातार ज्यादा हार्मोन का उत्पादन करने के लिए प्रेरित करने से ग्रंथि का आकार बहुत बड़ा हो जाता है और यह गोइटर नामक बीमारी का रूप धारण कर लेता है। गोइटर होने का सबसे मुख्यों कारणों में से एक हाशिमोटो थायरॉडाइटिस (Hashimoto's thyroiditis) है। गोइटर काफी असुविधाजनक होता है। क्योंकि इसका बड़ा आकार आपके सांस लेने या कुछ निगलने में कठिनाई पैदा कर सकता है।
     
  3. हृदय से संबंधित समस्याएं (Heart problems)
    हाइपोथायरायडिज्म से हृदय से संबंधित रोगों के होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। मुख्य रूप से अंडरएक्टिव थायरॉयड से पीड़ित लोगों का लॉ-डेनसिटी-लिपोप्रोटीन (Low-Density Lipoprotein, LDL) कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है जिसे 'द बैड कोलेस्ट्रॉल' (The 'Bad' Cholesterol) भी कहते हैं। यहां तक की सबक्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म जो एक हल्का और शुरूआती हाइपोथायरायडिज्म है और जिसके संकेत और लक्षण अभी तक विकसित भी नहीं हुुऐ हैं। इसके कारण से आपके कोलेस्ट्रॉल का स्तर पूर्ण रूप से बढ़ सकता है और यह आपके हृदय की पंपिंग क्षमता को कमजोर कर सकता है। हाइपोथायरायडिज्म, हृदय के आकार में अनुचित वृद्धि और हृदय रुक जाने तक का कारण भी बन सकता है।
     
  4. मानसिक स्वास्थ्य की परेशानियां (Mental health issues)
    हाइपोथायरायडिज्म के शुरूआत में ही अवसाद की परेशानी होने लग सकती है और यह समय के साथ-साथ गंभीर भी हो सकती है। हाइपोथायरायडिज्म हमारी मानसिक गति को धीमा कर सकता है।
     
  5. परिधीय न्यूरोपैथी (​Peripheral neuropathy)
    लंबे समय से या अनियंत्रित हाइपोथायरायडिज्म आपकी परिधीय नसों को नुकसान पहुंचा सकता है। परिधीय नसें, वे नसें होती हैं जो आपके मस्तिष्क और मेरूदण्ड से जानकारी बाकी शरीर के हिस्सों एवं अंगो जैसे हाथों और पैरों तक पहुंचाती है। परिधीय न्यूरोपैथी के संकेत और लक्षणों में परिधीय न्यूरोपैथी से प्रभावति जगहों को सुन्न कर देना और वहां पर झुन्नझुनाहट पैदा करना शामिल है। इसके कारण से मांसपेशियों में कमजोरी और उनके नियंत्रण में कमी भी आ जाती है।
     
  6. मैक्सिडेमा (Myxedema)
    यह एक बहुत ही दुर्लभ और जीवन के लिए खतरा पैदा करने देेने वाली स्थिति है, जो हाइपोथायरायडिज्म के लंबे समय तक रहने या उसका निदान ना होने से पैदा हो जाती है। इसके लक्षण और संकेतों में ठंड सहन ना कर पाना, उनींदापन (Drowsiness) इसके बाद गहरी सुस्ती और बेहोशी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। मैक्सिडेमा कोमा आपके शरीर में सूजन, संक्रमण या अन्य शारीरिक तनाव से शुरू हो सकती है। अगर आपको इसके जैसे कोई लक्षण दिखाई देते हैं तो आपको तत्काल ही एक आपात चिकित्सा की जरूरत है।
     
  7. बांझपन (Infertility)
    थायरॉयड हार्मोन का निम्न स्तर ऑव्यूलेशन (Ovulation) के कार्य में हस्तक्षेप करके प्रजनन क्षमता को बिगाड़ सकता है। इसके अलावा हाइपोथायरायडिज्म के अन्य कारण कुछ ऐसे हैं, जैसे स्व-प्रतिरक्षित विकार (Autoimmune disorder) जो प्रजनन क्षमता को क्षति पहुंचाते हैं।
     
  8. जन्म दोष (Birth defects)
    जो महिलाएं एक अनुपचारित थायरॉयड संबंधित रोग से पीड़ित हैं उनके बच्चों में, स्वस्थ महिलाओं से पैदा हो रहे बच्चों की तुलना में जन्म दोष संबंधित जोखिम ज्यादा पाए जाते हैं। ये बच्चे गंभीर मानसिक विकारों से पीड़ित होते हैं और इनकी ये परेशानियां बढ़ने लग जाती हैं। जन्म के दौरान अनुपचारित हाइपोथायरायडिज्म शिशुओं के लिए शारीरिक और मानसिक दोनों के विकास में खतरा हो सकता है। लेकिन, अगर स्थिति का निदान शिशु के जीवन के पहले कुछ महीनों में ही कर दिया जाए, तो उसके लिए सामान्य विकास की उत्तम संभावना रहती है।
Dr. B.P Yadav

Dr. B.P Yadav

एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान

Dr. Vineet Saboo

Dr. Vineet Saboo

एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान

Dr. JITENDRA GUPTA

Dr. JITENDRA GUPTA

एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान

थायराइड की दवा - Medicines for Thyroid in Hindi

थायराइड के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Cat AidCat Aid Eye Drop50.0
Anti ThyroxAnti Thyrox 10 Mg Tablet359.1
ThyrocabThyrocab 10 Mg Tablet359.1
ThyrodipThyrodip 10 Mg Tablet300.0
MethimezMethimez 10 Mg Tablet75.0
PtuPtu 50 Mg Tablet408.0
Mankind Vitamin CVitamin C Injection2.11
BecosulesBecosules Capsule28.38
Dr. Reckeweg Vita-C 15Reckeweg Vita C 15 Nerve Tonic525.0
Dr. Reckeweg Vita-C 15 ForteReckeweg Vita C 15 Forte Tonic890.0
RenolenRenolen Eye Drop49.1

क्या आप या आपके परिवार में किसी को यह बीमारी है? सर्वेक्षण करें और दूसरों की सहायता करें

थायराइड से जुड़े सवाल और जवाब

सवाल 2 महीना पहले

मुझे हाइपरथायराइडिज्म है। इसके लिए मैं रेग्युलर टैबलेट्स लेता हूं। क्या मुझे ये टैबलेट जीवनभर लेनी होंगी? क्या बिना दवाओं के इस समस्या का समाधान हो सकता है?

Dr. Archana Asthana

इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए नियमित रूप से दवाई लेना जरूरी है। हालांकि कुछ लोगों में दो-तीन सालों तक दवाई लेने के बाद थायराइड नॅार्मल हो जाता है। लेकिन सबके साथ ऐसा नहीं है। इसलिए कुछ सालों तक दवाई लेने के बाद आप अपने डाक्टर से इस संबंध में पूछें कि दवाई लेनी है या फिर बंद करनी है। वे आपके स्वास्थ्य के अनुसार आपको सही ट्रीटमेंट बताएंगे।

सवाल लगभग 2 महीना पहले

थायराइड के दौरान कैसे करें वजन कम?

Dr. Nivedita Mule

आमतौर पर थायराइड के मरीजों के लिए वजन कम करना आसान नहीं होता है। थायराइड मेटाबाॅलिज्म को प्रभावित करता है जिस वजह से वजन कम करना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए आपको अपने खानपान में कुछ बदलाव करने होंगे।

  • सबसे पहले तीन महीने के लिए ग्लूटेन फ्री डाइट लें। अगर खुद में एनर्जी बढ़ने और वजन घटने का अनुभव कर रहे हैं तो यह डाइट आपके लिए उपयोगी है।
  • अपने खानपान के टाइमिंग में भी बदलाव करें जैसे पूरे दिन में दो या तीन बार ही खाना खाएं और रात को 8 बजे के बाद खाना न खाएं। इससे आपके फैट को बर्न होने में मदद मिलेगी साथ ही हंगर हार्मोन भी नियंत्रण में रहेंगे।
  • नियमित एक्सरसाइज करें।

सवाल लगभग 1 महीना पहले

मेरी पत्नी की उम्र 30 साल है। उसे हाइपरथाइरॅायडिज्म है। इसके लिए वह thyrocab 5 mg tab, डी3 टैबलेट, इवियोन कैल्शियम। इसके साथ कुछ और दवाईयां भी ले रही है। मेरी समस्या यह है कि दवाई लेने के बाद उसे अकसर थकन होने लगती है। लगभग 1 घंटे बाद वह सामान्य स्थिति में पहुंच पाती है। कृपया बताएं कि इसे कैसे कंट्रोल किया जा सकता है?

Dr. Vikas Banerjee

थकान होना, बहुत ज्यादा पसीना आना, गर्म तापमान में असहज महसूस करना, हाई बीपी, एंग्जाइटी या कंपकंपी, ये सब थायरोटोक्सीकोसिस के लक्षण हैं। बेहतर है आप उन्हें डाक्टर के पास ले जाएं। वे उन्हें जांच कर बताएंगे कि समस्या क्या है और इसका समाधान क्या हो सकता है।

सवाल 21 दिन पहले

थायराइड के मरीजों के लिए दैनिक दिनचर्या क्या है?

Dr. Arvind Swamy

थायराइड के मरीजों को न सिर्फ खानपान को संतुलित रखना चाहिए बल्कि उन्हें अपनी दिनचर्या का भी पूरा-पूरा ख्याल रखना चाहिए। कहने की जरूरत नहीं है कि थायराइड की वजह से मरीज को तनाव हो सकता है बल्कि तनाव हार्मोन जैसे कोर्टिसोल आपके शरीर में थायराइड हार्मोन के स्तर को बदल सकते हैं। इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि तनाव कम से कम हो। जीवन में ज्यादा से ज्यादा पाॅजिटिव रहना सीखें। अपने रिश्तों को संभाले रखें। इसका असर आपकी जिंदगी पर पड़ता है जिससे तनाव में कमी और खुशियों में इजाफा होता है। इसके साथ अगर आप धूम्रपान करते हैं तो यह छोड़ दें।

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