नवजात शिशु के लिए मां के दूध से बेहतर और कोई पौष्टिक चीज नहीं हो सकती. मां के दूध में वो सभी पोषक तत्व होते हैं, जो बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी होते हैं. यही वजह है कि जन्म के बाद से ही बच्चे को मां का दूध पिलाना शुरू कर दिया जाता है.

वैज्ञानिक शोध भी कहते हैं कि जन्म से लेकर 6 माह तक शिशु को सिर्फ मां का दूध ही पिलाना चाहिए. वहीं, कुछ महिलाएं 6 माह के बाद से लेकर शिशु के 2-3 वर्ष का होने तक स्तनपान करवाती हैं. ऐसे में पहली बार मां बनी महिला के मन में अक्सर ये सवाल आता है कि शिशु को कब तक स्तनपान करवाना चाहिए.

(और पढ़ें - स्तनपान से जुड़ी समस्याएं व उनके समाधान)

  1. शिशु को स्तनपान कब तक करवाएं?
  2. सारांश
शिशु को मां का दूध कब तक पिलाना चाहिए? के डॉक्टर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और द अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (एएपी) के अनुसार बच्चे को 6 महीने तक मां का दूध पिलाना जरूरी होता है. इस दौरान बच्चे को मां के दूध के अलावा कोई अन्य भोजन या पेय नहीं दिया जाना चाहिए. 6 महीने के बाद बच्चे को मां के दूध के साथ अन्य हल्की चीजें खिलाना शुरू किया जा सकता है. इसके बाद बच्चे को 2 साल की उम्र तक मां के दूध के साथ खाने की चीजें भी दी जा सकती है. अगर मां और बच्चा चाहे, तो पहले भी स्तनपान को छोड़ सकते हैं. स्तनपान कराने का निर्णय प्रत्येक महिला का व्यक्तिगत हो सकता है. आइए, इसे और विस्तार से समझते हैं -

  • मां जब तक चाहे अपने शिशु को स्तनपान करवा सकती हैं. बच्चे के लिए कोलोस्ट्रम फायदेमंद होता है. कोलोस्ट्रम सिर्फ मां के दूध में ही पाया जाता है. कोलोस्ट्रम पोषण से भरपूर होता है. इसमें एंटीबॉडी और अन्य प्रतिरक्षा गुण भी होते हैं. बच्चे के लिए मां का पहला दूध काफी लाभाकारी होता है.
  • स्तनपान तब तक जारी रखा जा सकता है, जब तक मां और बच्चे को अच्छा महसूस हो रहा है. बस इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि 6 माह के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ हल्का भोजन दिया जाना भी जरूरी है. जैसे-जैसे शिशु बढ़ता है, उसकी खाने पर निर्भरता बढ़ानी जानी चाहिए और दूध पर कम होनी चाहिए. 2-3 साल की उम्र तक बच्चे को दूध पिलाया जा सकता है, लेकिन ठोस आहार की मात्रा ज्यादा होना जरूरी है.
  • अगर 6 माह के बाद भी मां बच्चे को स्तनपान कराती हैं, तो इससे बच्चे को अधिक लाभ मिल सकते हैं. स्तनपान से बच्चे को अस्थमाएलर्जीमधुमेह और कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम से बचाया जा सकता है.
  • कई लोगों को लगता है कि अगर बच्चे को अधिक उम्र तक स्तनपान करवाया जाता है, तो इससे बच्चे पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन इस संबंध में अभी तक कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है. द अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार, स्तनपान कराने की कोई ऊपरी सीमा नहीं है. मां चाहे तो बच्चे को 3 साल तक भी स्तनपान करवा सकती हैं. अधिक उम्र तक स्तनपान करने से बच्चे को होने वाले मनोवैज्ञानिक या विकासात्मक नुकसान का कोई सबूत नहीं है.
  • स्तनपान की अवधि इस बात पर भी निर्भर करती है कि मां के स्तनों में दूध का उत्पादन कब तक हो रहा है. अगर 6 माह या 1 वर्ष के बाद दूध का निर्माण नहीं होता है, तो स्तनपान करवाने का कोई फायदा नहीं रह जाता.

(और पढ़ें - स्तनपान के दौरान हो रहे दर्द का उपाय)

स्तनपान कब तक करवाना है, यह एक मां का व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है. महिलाएं कुछ हफ्तों, महीनों या वर्षों तक स्तनपान करवा सकती हैं. एक बच्चे को कितने समय तक स्तनपान कराना चाहिए, यह मां के निर्णय पर ही निर्भर करता है, लेकिन अगर बच्चे को कोई स्वास्थ्य समस्या रहती है, तो इस स्थिति में डॉक्टर की सलाह पर स्तनपान का समय तय किया जा सकता है. इसके अलावा, जो महिलाएं स्तनपान के साथ ही बच्चे को फॉर्मूला मिल्क पिलाती हैं, वे डॉक्टर से स्तनपान कराने की सही उम्र पता कर सकती हैं.

(और पढ़ें - ब्रेस्टफीडिंग की समस्या के लिए होम्योपैथिक दवा)

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