नवजात शिशु के पोषण के लिए स्तनपान न सिर्फ एक प्राकृतिक बल्कि स्वस्थ विकल्प है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे के जन्म के बाद कम से कम 6 महीने तक उसे स्तनपान कराना चाहिए। जब तक बच्चा 1 से 2 वर्ष का नहीं हो जाता है, तब तक नियमित रूप से उसके आहार में मां का दूध शामिल होना चाहिए। हालांकि, कुछ महिलाओं को स्तनपान से चुनिंदा समस्याएं हो सकती हैं, जैसे मैस्टाइटिस (स्तन का संक्रमण), निप्पल में दर्द और पीड़ा, पर्याप्त मात्रा में दूध न आना, या थ्रश (यीस्ट इंफेक्शन)। यदि बच्चा स्तनपान करते समय उधम (नखरे करना या असहज) मचाता है, तो इससे स्तनपान में परेशानी (दूध न पीने की वजह से दूध जम जाना) हो सकती है। ऐसे में प्रभावित हिस्से पर गर्म सिकाई करने, पर्याप्त आराम करने, उचित समय पर स्तनपान कराने और आरामदायक ब्रा पहनने से इन समस्याओं को दूर करने में मिल सकती है। स्तन में संक्रमण के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स और दर्द निवारक दवाएं भी लेनी पड़ सकती हैं।

पारंपरिक दवाओं के अलावा होम्योपैथिक उपचार की मदद से भी स्तनपान संबंधी समस्याओं को ठीक किया जा सकता है। होम्योपैथिक उपाय एगैलेक्टिया (दूध न बनना), सप्रेस्ड लैक्टेशन, दूध का स्वाद खराब होना, बहुत ज्यादा मात्रा में दूध बनना, गैलेक्टोरोएहिया (दूध का अत्यधिक या अनुचित उत्पादन) का इलाज करके स्तनपान की समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। अनुभवी होम्योपैथिक डॉक्टर मरीज की शारीरिक, मानसिक स्थिति के अनुसार उपाय निर्धारित करते हैं। इन दवाओं को यदि डॉक्टर के अनुसार, लिया जाए तो इनका साइड इफेक्ट्स नहीं होता है। लैक्टेशन की समस्याओं के उपचार के लिए उपयोग किए जाने वाले उपचारों में एसाफोएटिडा, लैक कैनिनम, सिलिकिया टेरा, ब्रायोनिया अल्बा, एसिटिकम एसिडम, थायराइडिनम, कैल्केरिया फॉस्फोरिका, मेडुसा और कैल्केरिया कार्बोनिका शामिल हैं।

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  1. स्तनपान की समस्याओं की होम्योपैथिक दवा - Homeopathic Medicines for Lactation Problems in Hindi
  2. स्तनपान की समस्याओं के लिए होम्योपैथी के अनुसार जरूरी बदलाव - Changes for lactation problems as per homeopathy in Hindi
  3. स्तनपान की समस्याओं के लिए होम्योपैथिक उपचार कितना प्रभावी है? - How effective is homeopathic treatment for lactation problems in Hindi
  4. स्तनपान की समस्याओं के लिए होम्योपैथिक उपायों के साइड इफेक्ट्स - Disadvantages of homeopathic medicine for Lactation problems in Hindi
  5. ब्रेस्टफीडिंग समस्याओं के लिए होम्योपैथिक उपचार से जुड़े टिप्स - Tips related to homeopathic treatment for Lactation problems in Hindi
ब्रेस्टफीडिंग से जुड़ी समस्या के लिए होम्योपैथिक दवा और इलाज के डॉक्टर

निम्नलिखित कुछ होम्योपैथिक उपचार हैं, जिनका उपयोग स्तनपान की समस्याओं के प्रबंधन के लिए किया जाता है:

लैक कैनिनम
सामान्य नाम :
डॉग्स मिल्क
लक्षण : लैक कैनिनम उन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त है, जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर अनियमित रूप से दर्द और अत्यधिक कमजोरी महसूस करते हैं। यह गैलेक्टोरोएहिया और दूध सूख जाने का उपचार करके स्तनपान की समस्याओं का इलाज करता है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों को भी कम करने में भी मदद करता है जैसे :

यह लक्षण सुबह व उसकी अगली शाम को खराब हो जाते हैं, जबकि कोल्ड ड्रिंक्स लेने और ठंडे मौसम में इनमें सुधार होता है।

सिलिकिया टेरा
सामान्य नाम :
सिलिका
लक्षण : यह उपाय उन लोगों में अच्छा असर करता है, जिनमें मवाद बनने की समस्या होती है। ऐसे लोग सर्दी के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं और यह लक्षण सर्दियों के मौसम में बिगड़ जाते हैं। यह निपल्स (स्तन का अगला हिस्सा) में दर्द और पर्याप्त मात्रा में दूध का उत्पादन न होने की स्थिति का इलाज करके स्तनपान की समस्याओं को ठीक करता है। यह निम्नलिखित लक्षणों से भी राहत देता है :

यह लक्षण सुबह, मासिक धर्म के दौरान, बाईं तरफ लेटने के बाद और ठंडे मौसम में खराब हो जाते हैं। जबकि गर्म और नम मौसम व सिर को लपेटने के बाद बेहतर महसूस होता है।

थायराइडिनम
सामान्य नाम :
ड्राइड थायरॉयड ग्लैंड ऑफ दि शीप
लक्षण : यह उपाय उन लोगों के लिए असरदार है, जिनकी त्वचा पीली होती है। पर्याप्त मात्रा में दूध न बनने का इलाज करके यह उपाय स्तनपान की समस्याओं को दूर करता है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों में भी प्रभावी है :

कैल्केरिया फॉस्फोरिका
सामान्य नाम :
फॉस्फेट ऑफ लाइम
लक्षण : कैल्केरिया फॉस्फोरिका उन बच्चों के लिए सबसे उपयुक्त है, जो एनेमिक, कमजोर और चिड़चिड़े होते हैं। यह दूध का स्वाद अच्छा न आने का इलाज करके स्तनपान की समस्याओं को कम करता है। यह निम्नलिखित लक्षणों को भी कम करता है :

  • लंबे समय तक दूध पिलाने के बाद गर्भाशय वाले हिस्से में दर्द और दबाव
  • दूध का स्वाद नमकीन होना, ऐसे में बच्चा दूध पीने से मना कर देता है
  • स्तनपान के दौरान यौन उत्तेजित होना
  • शिशु का अक्सर दूध पीने का मन करना और आसानी से उल्टी कर देना
  • चिड़चिड़ापन

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यह लक्षण ठंडे मौसम में, नमी वाले इलाकों में खराब हो जाते हैं, जबकि गर्मी और सूखे मौसम में इन लक्षणों से राहत मिलती है।

एसिटिकम एसिडम
सामान्य नाम :
ग्लेशियल एसिटिक एसिड
लक्षण : यह उपाय मुख्य रूप से उन लोगों के लिए निर्धारित किया जाता है जो पतले, कमजोर और जिनकी त्वचा पीली होती है। यह दूध के खराब स्वाद को ठीक करके स्तनपान की समस्याओं को कम करता है। यह निम्नलिखित लक्षणों से भी राहत दिलाता है :

ब्रायोनिया अल्बा
सामान्य नाम :
वाइल्ड हॉप्स
लक्षण : यह उपाय उन लोगों के लिए सबसे अच्छा काम करता है, जो चिड़चिड़े स्वभाव के होते हैं और त्वचा फटने या चुभन जैसा दर्द महसूस करते हैं, जो कि हिलन- डुलने के बाद लक्षण को और खराब कर देता है। यह निम्नलिखित लक्षणों में भी सुधार करता है :

  • स्तनों में दर्द के साथ गर्मी महसूस होना
  • स्तन का सख्त होना
  • पीरियड्स के दौरान स्तनों में दर्द
  • स्तन में फोड़े
  • मिल्क फीवर (चयापचय रोग जिसमें शरीर में कैल्शियम का स्तर कम हो जाता है)

यह लक्षण सुबह, गर्म मौसम में और खाने के बाद खराब हो जाते हैं। बैठने के बाद व्यक्ति बीमार और बेहोशी महसूस करता है, लेकन आराम करने, दर्द वाले हिस्से के बल लेटने और मसाज जैसे हल्के दबाव से इनमें सुधार होता है।

मेडुसा
सामान्य नाम :
जेली-फिश
लक्षण : यह उपाय भरे-भरे चेहरे वाले लोगों के लिए कारगर है। यह विशेष रूप से गैलेक्टोरोएहिया को कम करने में प्रभावी है। इसके अतिरिक्त यह निम्नलिखित लक्षणों का भी प्रबंधन कर सकता है :

कैल्केरिया कार्बोनिका
सामान्य नाम :
कार्बोनेट ऑफ लाइम
लक्षण : यह उपाय उन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त है, जो अधिक काम करने के कारण मानसिक और शारीरिक रूप से थक जाते हैं। यह निम्नलिखित लक्षणों में भी लाभदायक है :

  • स्तनों में सूजन और गर्मी
  • दूध का उत्पादन अतिरिक्त मात्रा में होना
  • मासिक धर्म से पहले स्तनों को छूने पर दर्द और सूजन
  • स्तन में सूजन के साथ पर्याप्त मात्रा में दूध न आना

यह लक्षण उमस भरे मौसम, शारीरिक या मानसिक थकान और खड़े होने के दौरान खराब हो जाते हैं, जबकि दर्द वाले हिस्से के बल लेटने और सूखे या शुष्क मौसम में इनमें सुधार होता है।

एसाफोएटिडा
सामान्य नाम :
गम ऑफ दि स्टिंकसैंड
लक्षण : यह उपाय उन लोगों के लिए उपयुक्त है, जिनकी हड्डियों को नुकसान हो रहा है, रात में सोते समय दर्द और अल्सर बनते हैं। यह दूध बनने की मात्रा में सुधार करके स्तनपान की समस्याओं को ठीक करता है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों में भी प्रभावी है :

  • ऐसी महिलाएं जो गर्भवती नहीं हैं, लेकिन उनके स्तन में दूध बन रहा है
  • स्तन संवेदनशील होना
  • दूध कम बनना

यह लक्षण रात में, आराम करने के दौरान, गर्म सिकाई और बाईं ओर लेटने से बिगड़ जाते हैं। जबकि खुली हवा में रहने और प्रभावित हिस्से पर थोड़ा दबाव पड़ने या चलने से लक्षणों में राहत मिलती है।

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होम्योपैथिक उपचार प्राकृतिक सोर्स से तैयार किए जाते हैं। कई ऐसे कारक हैं, जिनकी वजह से होम्योपैथी उपायों के असर में बाधा आ सकती है। यदि आप इन उपायों का लाभ सटीक व तेजी से उठाना चाहते हैं, तो आपको इन कारकों के प्रति सावधान रहने की जरूरत है। होम्योपैथिक डॉक्टर हमेशा रोगियों को ट्रीटमेंट के दौरान आहार और जीवन शैली में निम्न बदलाव करने की सलाह देते हैं :

क्या करना चाहिए

  • आपको जो भी खाने-पीने का मन हो, उसे बिना संकोच के आहार में शामिल करें, लेकिन ध्यान रखें यदि उन चीजों को डॉक्टर मना करते हैं तो आप उन्हें बेहद कम मात्रा में लें।
  • कमरे का तापमान अपने अनुसार रखें और आरामदायक कपड़े पहने।

क्या नहीं करना चाहिए

  • अत्यधिक नमक और चीनी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन न करें
  • दिमाग को अत्यधिक थकान न होने दें
  • भावनात्मक रूप से उत्साहित न हों।

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होम्योपैथिक उपचार ऐसे प्राकृतिक पदार्थों से तैयार किए जाते हैं, जो शरीर में उपचार तंत्र को उत्तेजित करके काम करते हैं। यही कारण है कि होम्योपैथिक उपचार न सिर्फ बीमारी के लक्षणों को ठीक करता है, बल्कि यह समग्र स्वास्थ में भी सुधार करता है।

ब्रेस्टफीडिंग मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक समीक्षा लेख के अनुसार, ऐसी महिलाएं जो हाइपरग्लैक्टिया से ग्रस्त थीं या जिनमें अत्यधिक मात्रा में दूध का उत्पादन हो रहा था, अलग-अलग तरह के होम्योपैथिक उपचार दिया गया। लेख के अनुसार, उपचार के दौरान लैक कैनिनम 30सी, रिकिनस कम्यूनिस 30सी और पल्सेटिला प्रेटेंसिस 30सी जैसे होम्योपैथी उपायों को दिन में दो या तीन बार दिया गया, जिसने दूध की अत्यधिक आपूर्ति को कम करने में मदद की। इन उपायों में लैक्टोज मिलाया गया था, जिसकी वजह से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंटोलेरेंस देखने को मिला, लेकिन इसके अलावा अन्य कोई दुष्प्रभाव नहीं पाया गया।

हालांकि, लैक्टेशन या स्तनपान की समस्याओं के प्रबंधन के लिए होम्योपैथिक उपचार कितने प्रभावी हैं, इस बात को लेकर अभी और शोध करने की जरूरत है।

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होम्योपैथिक उपाय घुलनशील व पतले होते हैं। इनका कोई साइड इफेक्ट्स् नहीं होता है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि इन्हें डॉक्टर के दिशा-निर्देशों के बिना नहीं लेना चाहिए। इन उपायों को निर्धारित करने से पहले डॉक्टर हमेशा रोगी के लक्षणों के अलावा उसकी शारीरिक, मानसिक स्थिति, उम्र, फैमिली व मेडिकल हिस्ट्री चेक करते हैं। यही वजह है कि भले किन्हीं दो इंसानों को एक जैसी समस्या हो, लेकिन उनके लिए उपाय एक जैसे हों, यह जरूरी नहीं होता है। इनका कोई दुष्प्रभाव नहीं है, लेकिन कभी भी इन्हें खुद से न लें, हमेशा डॉक्टर से परामर्श करके प्रॉपर ट्रीटमेंट लें।

(और पढ़ें - ब्रेस्ट में दूध की अधिकता का कारण)

स्तनपान की समस्याएं कई कारणों से हो सकती है जैसे ब्रेस्ट इंफेक्शन, पर्याप्त मात्रा में दूध न बनना और निप्पल में दर्द या शिशु को ठीक से स्तनपान न करा पाना। परंपरागत रूप से, इन स्थितियों का इलाज दवाइयों और गर्म दबाव (सिकाई) से किया जाता है। इन दवाइयों के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, लेकिन होम्योपैथी ट्रीटमेंट पूरी तरह से दुष्प्रभाव से मुक्त होता है। यह न सिर्फ उस निश्चित बीमारी का इलाज करता है बल्कि यह शरीर के स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देता है। इन दवाओं को बच्चे से लेकर बूढ़ों तक कोई भी ले सकता है, यह पूरी तरह से सुरक्षित हैं, बावजूद इसके अनुभवी डॉक्टर से मिलकर ही ट्रीटमेंट लेना चाहिए।

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संदर्भ

  1. MedlinePlus Medical Encyclopedia. [Internet] US National Library of Medicine; Overcoming breastfeeding problems
  2. Oscar E. Boericke. Repertory. Médi-T; [lnternet]
  3. American Pregnancy Association. Challenges Associated With Breastfeeding. Irving, Texas, United States; [Internet]
  4. Amir L.H., Livingstone V.H. Management of Common Lactation and Breastfeeding Problems. In: Jatoi I., Rody A. (eds) Management of Breast Diseases. Springer, Cham
  5. Anne Eglash. Treatment of Maternal Hypergalactia. Breastfeed Med. 2014 Nov 1; 9(9): 423–425. PMID: 25361472
  6. The European Comittee for Homeopathy. Benefits of Homeopathy. Belgium; [Internet]
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