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कोरोना वायरस संकट से बुरी तरह प्रभावित महाराष्ट्र के मुंबई शहर के डॉक्टरों को कथित रूप से कोविड-19 के कुछ मरीजों में डेंगू के भी लक्षण दिखे हैं। मुंबई में मॉनसून आने में अभी दस दिन बाकी है। ऐसे में कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस के मरीजों में कोविड-19 और डेंगू की दोहरी मार का खतरा डॉक्टरों समेत सरकार और प्रशासन के लिए मुसीबतें बढ़ा सकता है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कोरोना वायरस से निपटने के लिए बनाई स्टेट टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. ओम श्रीवास्तव ने पुष्टि की है कि उनके पास आए कोविड-19 के तीन मरीजों में डेंगू भी मिला है।

वहीं, ब्रीच कैंड अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि उसने ऐसे तीन मरीज देखे हैं, जिनकी टेस्ट रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव थी, जबकि उनमें कोविड-19 के लक्षण साफ दिखाई दे रहे थे। एक मरीज की उम्र 82 वर्ष थी, जो निमोनिया से पीड़ित था। यह कोविड-19 का एक गंभीर लक्षण है। हालांकि मरीज को डेंगू के इलाज के लिए भर्ती किया गया था। डॉक्टर के मुताबिक, इस मरीज को निमोनिया था और वह सांस नहीं ले पा रहा था। डॉक्टर ने कहा, 'उसमें डेंगू के कोई लक्षण नहीं थे।' वहीं, बाकी दो मरीजों में भी डेंगू के लक्षण (जैसे प्लेटलेट कम होना) नहीं दिखे थे।

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डॉक्टरों का कहना है कि 'सेरॉलिजकल लैप' के कारण दो वायरल रोगों में अंतर करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन बुखार और सिरदर्द को छोड़ दें तो दोनों बीमारियों में अंतर करना उतना मुश्किल नहीं है। इस बारे में ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉक्टर ने कहा है, 'गला खराब होना या सांस लेने में तकलीफ डेंगू के मरीजों की मुख्य शिकायतों में शामिल नहीं होतीं।'

कोविड-19 और डेंगू में संबंध
प्रतिष्ठित मेडिकल पत्रिका दि लांसेट ने मार्च में प्रकाशित अपने एक शोध में बताया था कि कोविड-19 और डेंगू के क्लिनिकल और लैबोरेटरी फीचर्स एक जैसे हैं, इस कारण दोनों बीमारियों में फर्क करना मुश्किल है। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति में डेंगू और कोविड-19 दोनों के लक्षण दिखाई दें, तो यह बता पाना जटिल भरा हो सकता है कि उसे कौन-सी बीमारी है।

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पत्रिका ने अपनी रिपोर्ट में सिंगापुर के दो कोरोना मरीजों का उदाहरण लिया था। इन दोनों मरीजों के डेंगू से ग्रस्त होने की पुष्टि के लिए उनका रैपिड सेरॉलिजकल टेस्ट हुआ था, जो फॉल्स-पॉजिटिव निकला। लेकिन बाद में दोनों में सार्स-सीओवी-2 कोरोना वायरस का संक्रमण होने की पुष्टि हुई। अध्ययन में इस बात पर जोर दिया गया कि अगर डेंगू के लिए किए गए टेस्ट का परिणाम पॉजिटिव आए और उस कारण कोविड-19 की पुष्टि करना मुश्किल हो जाए तो इससे मरीजों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में उपलब्ध डायग्नॉस्टिक टेस्ट के साथ कोविड-19 की तेज और संवेदनशील जांच की जानी चाहिए।

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