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गला खराब होना क्या है? 

गला आपके शरीर के लिए एक नली का काम करता है, यह भोजन को भोजन नली (इसोफेगस) तक लेकर जाता है और हवा को श्वसन नलियों और लैरिंक्स (कंठनली) तक पहुंचाता है। गला खराब  होना काफी दर्दनाक व परेशान कर देने वाली स्थिति बन जाती हैं। हालांकि गले संबंधी समस्या किसी मामूली बीमारी का ही संकेत देती है और यह बिना किसी इलाज के अपने आप ठीक हो जाती है। गले को खराब करने वाली समस्याओं में मुख्य रूप से गले में सूजन, लालिमा, इन्फेक्शन, छाले, गले में मांस बढ़ना और यहां तक कि कुछ मामलों में गले के कैंसर आदि शामिल है। 

यदि आपके गले में गांठ हो गई है या गले में दर्द हो गया है, जो कुछ समय के बाद भी ठीक नहीं हुआ और जिसके कारण निगलने में कठिनाई और या घरघराहट जैसी समस्या हो रही है। ऐसी स्थिति में यह गले में कैंसर जैसे संकेत दे सकता है। यदि आप धूम्रपान करते हैं और आपको ये लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो गले के कैंसर के जोखिम और अधिक बढ़ जाते हैं।

गला खराब होने से समय के साथ-साथ आपको गले में जलन या खुजली, निगलने के दौरान दर्द या हर समय गले में दर्द रहने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसके अलावा गला खराब होने पर समय के साथ-साथ गले के अंदर सूजन व लालिमा होना, आवाज कम आना या आवाज पूरी तरह से बंद हो जाना आदि जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि आपको गले के अंदर सफेद रंग के दाग दिखाई दे रहे हैं, तो आपको जल्द से जल्द डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए। डॉक्टर आपके लक्षणों के आधार पर या आपके गले का परीक्षण करके समस्या का पता लगा सकते हैं। इसके अलावा स्थिति का पता करने के लिए कुछ अन्य टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जैसे लैरिंगोस्कोपी, थ्रोट स्वेब और खून टेस्ट आदि। 

सामान्य स्वच्छता अपना कर और अन्य कुछ बातों का ध्यान रख कर गला खराब होने से बचाव किया  जा सकता है, जैसे संक्रमण से बचाव करना, एलर्जिक पदार्थों व प्रदूषक पदार्थों के संपर्क से दूर रहना और ऊंची आवाज में ना बोलना आदि। गला खराब करने वाले कारण के आधार पर ही इस समस्या का समाधान किया जाता है। गले संबंधी समस्याओं के इलाज में दवाएं, सेलाइन पानी से गरारे करना, आराम करना, तरल पदार्थों का सेवन करना और कुछ मामलों में ऑपरेशन आदि की आवश्यकता पड़ सकती है, जो स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करता है। 

(और पढ़ें - गला खराब होने पर क्या करें)

  1. गला खराब होने के प्रकार - Types of Common Throat Problems in Hindi
  2. गला खराब होने के कारण व लक्षण - Common Throat Problems Symptoms in Hindi
  3. गला खराब होने से बचाव - Prevention of Common Throat Problems in Hindi
  4. गला खराब का परीक्षण - Diagnosis of Common Throat Problems in Hindi
  5. गला खराब का इलाज - Common Throat Problems Treatment in Hindi
  6. गला खराब की जटिलताएं - Common Throat Problems Complications in Hindi
  7. गला खराब हो जाए तो क्या करना चाहिए
  8. गला खराब होने के घरेलू उपाय
  9. गला खराब के डॉक्टर

गला खराब होने के प्रकार - Types of Common Throat Problems in Hindi

गले संबंधी समस्याएं कितने प्रकार की होती हैं?

गले संबंधी समस्याएं निम्न प्रकार की हो सकती हैं:

(और पढ़ें - मुंह के कैंसर का इलाज)

गला खराब होने के कारण व लक्षण - Common Throat Problems Symptoms in Hindi

गला खराब होने के कारण व लक्षण क्या हैं?

गले की खराबी के प्रकार के अनुसार ही उसके कारण व लक्षण पैदा होते हैं, जैसे:

खांसी - 

खांसी शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया होती है, जिसका मुख्य कार्य गले के अंदर बलगम व अन्य बाहरी उत्तेजक पदार्थों को बाहर निकालना होता है। खांसी तब होती है, जब गले के वायुमार्गों की कोशिकाओं में किसी प्रकार की जलन व खुजली आदि हो जाती है। गला साफ करने के लिए की जाने वाली खांसी बार-बार नहीं होती। ऐसी बहुत सारी समस्याएं हैं, जिसके कारण बार-बार खांसी होने लगती है। 

खांसी के कारण:  

(और पढ़ें - टीबी में परहेज)

संक्रमण के अलावा स्थितियां जो खांसी का कारण बनती हैं:

(और पढ़ें - अस्थमा में क्या नहीं खाना चाहिए)

खांसी के लक्षण:

खांसी खुद ही एक लक्षण होता है, हालांकि इसके साथ कुछ अन्य लक्षण भी जुड़े हो सकते  हैं, जैसे:

(और पढ़ें - बुखार दूर करने का तरीका)

गले में दर्द - 

गले में खुजली, जलन व अन्य तकलीफ एक साथ होने पर इस स्थिति को गले में दर्द कहा जाता है, जो खासकर निगलने के दौरान होता है। गले का दर्द ज्यादातर किसी प्रकार के संक्रमण के कारण या किसी वातावरण संबंधी कारक (जैसे सूखी हवा) के कारण भी हो सकता है। गले में दर्द होना काफी परेशान कर देने वाली स्थिति होती है, लेकिन आमतौर पर यह अपने आप ठीक हो जाता है। 

गले में दर्द के कारण: 

ऐसी बहुत सारी वजह हो सकती हैं, जिनसे गले में दर्द होने लगता है। लेकिन गले में दर्द ज्यादातर जुकाम और फ्लू के कारण ही होता है। अन्य कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

(और पढ़ें - एलर्जी के घरेलू उपाय)

गले में दर्द के लक्षण: 

दर्द के साथ-साथ अन्य कई लक्षण देखे जा सकते हैं, जैसे:

(और पढ़ें - सिरदर्द दूर करने का घरेलू उपाय)

गले में खुजली - 

गले में खुजली होना एलर्जी या किसी बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है। सांस के साथ उत्तेजक पदार्थ गले तक जाने से गला उत्तेजित हो जाता है, जिससे गले में खुजली व अन्य समस्याएं होने लग जाती  हैं। 

(और पढ़ें - एलर्जी होने पर क्या करे)

गले में खुजली के कारण: 

ऐसे बहुत सारे कारक हैं, जिनके कारण गले में खुजली होने लगती है। कुछ ऐसे कारक जो अक्सर गले में खुजली पैदा करने का कारण बनते हैं। 

(और पढ़ें - सीने में जलन के लिए क्या करें)

गला बैठना - 

गला बैठना कोई बीमारी नहीं है, यह एक लक्षण है। आवाज में असामान्य रूप से बदलाव आने की स्थिति को गला बैठना कहा जाता है। जब आपका गला बैठता है, तो उसमें आपकी आवाज काफी कमजोर और कम निकलने लगती है। ऐसा होने पर आपकी आवाज साफ नहीं निकल पाती और उसमें असाधारण बदलाव आ जाते हैं। 

गला बैठने के कारण:

गला बैठने की समस्या मुख्य रूप से ऊपरी श्वसन तंत्र में वायरल संक्रमण के कारण होती है। लेकिन कुछ अन्य कारक भी हैं, जो गला बैठने की समस्या का कारण बन सकते हैं या इस समस्या को और बदतर बना सकते हैं।

  • एसिड रिफ्लक्स
  • चिल्लाना, लंबे समय तक गाना या लंबे समय तक ऊंची आवाज में बोलना
  • धूम्रपान करना
  • सांस के द्वारा विषाक्त पदार्थ अंदर जाना
  • एलर्जी
  • थायराइड कैंसर, गले का कैंसर या फेफड़ों का कैंसर
  • थायराइड ग्रंथि ठीक से काम ना करना 
  • गले के स्वर यंत्र का मांस बढ़ना
  • कैफीन या अल्कोहल वाले पेय पदार्थ पीना, जैसे चाय, कॉफी और शराब आदि
  • नस संबंधी कोई समस्या जिससे गले के स्वर यंत्र की मांसपेशियों कमजोर पड़ जाती हैं

(और पढ़ें - मांसपेशियों को मजबूत करने का तरीका)

गला बैठने लक्षण:

गला बैठने से आवाज कमजोर हो जाती है और आवाज के साथ घरघराहट सी होने लगती है, जिसकी वजह से आवाज की पिच और वोल्यूम भी प्रभावित हो जाती है। तीव्रता से ऐसा कोई लक्षण विकसित किसी ऐसी स्थिति के कारण होता है, जो गले में घरघराहट पैदा कर देती है। 

गला बैठने के साथ-साथ कुछ अन्य लक्षण भी जुड़े हो सकते हैं, जैसे:

गले में चुभन - 

यदि गले की चुभन लंबे समय से महसूस हो रही है, तो यह काफी परेशान कर देने वाली स्थिति बन सकती है। हालांकि यह स्थिति गले संबंधी समस्याओं के अन्य प्रकारों से कम परेशान करती है। गले में चुभन होने से कई बार ऐसा महसूस होता है, जैसे कि आपके गले में कुछ फंस गया है। 

गले में चुभन के कारण: 

  • शरीर में पानी की कमी होना
  • वातावरण के प्रदूषण के संपर्क में आना
  • धूम्रपान करना
  • अस्थमा
  • फेरिंजाइटिस
  • सर्दी जुकाम
  • गले का कैंसर
  • एसिड रिफ्लक्स

(और पढ़ें - अस्थमा से निजात पाने की रेसिपी)

गले में चुभन के लक्षण:

  • आवाज में बदलाव होना
  • पोस्ट नेजल ड्रिप के कारण गले के अंदर चुभन सी महसूस हो सकती है
  • निगलने में कठिनाई
  • सूखी खांसी
  • बुखार
  • ठंड लगना
  • नाक बहना
  • चेहरे में दर्द या चेहरे में दबाव सा महसूस होना

(और पढ़ें - बहती नाक को रोकने के उपाय)

गले में जलन -

गले में जलन या दर्द हमेशा किसी चिंता का कारण नहीं होते। गले में जलन का मुख्य कारण एसिड रिफ्लक्स होता है, लेकिन यह सर्दी-जुकाम, वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन और यहां तक की गले या खाने की नली के कैंसर के कारण भी हो सकता है। इसके कारण निगलने में कठिनाई, मुंह का स्वाद बिगड़ना और लगातार खांसी होने जैसे लक्षण होने लग जाते हैं। 

गले में जलन के कारण:

  • गले में वायरल इन्फेक्शन
  • गले का कैंसर
  • अधिक शराब पीना (और पढ़ें - शराब की लत का इलाज)
  • शरीर में पानी की कमी होने के कारण गला सूखना
  • टॉन्सिल में फोड़ा बनना
  • एसिड रिफ्लक्स
  • गले का कैंसर
  • धूम्रपान करना
  • मसालेदार भोजन खाना
  • दर्दनिवारक दवाओं का अत्यधिक उपयोग करना

(और पढ़ें - एसिडिटी में क्या खाएं)

गले में जलन के लक्षण: 

  • जी मिचलाना
  • निगलने में कठिनाई
  • उल्टी
  • लंबे समय तक खांसी रहना
  • ऐसा महसूस होना जैसे भोजन गले में अटक गया है
  • डकार आना (और पढ़ें - खट्टी डकार का इलाज)
  • गर्दन की ग्रंथियों में सूजन आना
  • गले और सीने में एक खट्टे द्रव जैसा स्वाद महसूस होना
  • सीने में जलन और अन्य तकलीफें महसूस होना
  • गले में तकलीफ महसूस होना
  • हिचकी आना और उनके साथ पेट के एसिड गले तक आ जाना
  • गले में बलगम जमना
  • गला बैठना

(और पढ़ें - पेट की गैस का इलाज)

गला खराब होने से बचाव - Prevention of Common Throat Problems in Hindi

गला खराब होने से कैसे बचाव किया जाता है?

गला खराब होने के लक्षणों को शांत करने के लिए और गले संबंधी अन्य समस्याएं होने से रोकथाम करने के लिए कुछ सामान्य उपाय किये जा सकते हैं:

  • मसालेदार भोजन ना खाएं (और पढ़ें - मसालेदार खाना खाने से होने वाले दर्द का इलाज)
  • अल्कोहल वाले उत्पादों का सेवन ना करें, जैसे शराब आदि क्योंकि ये पदार्थ गले की अंदरुनी त्वचा को क्षतिग्रस्त कर देते हैं और एसिडिटी पैदा कर देते हैं। 
  • अधिक वसायुक्त भोजन ना खाएं
  • कैफीन वाले खाद्य व पेय पदार्थों का सेवन ना करें, जैसे चाय-कॉफी आदि 
  • तनाव को कम करने की कोशिश करें  (और पढ़ें - तनाव के लिए योग) 
  • पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पिएं
  • अम्लीय खाद्य व पेय पदार्थों का सेवन ना करें जैसे टमाटर, संतरासंतरे का जूस और अन्य कोल्ड ड्रिंक्स आदि
  • यदि आप अधिक प्रदूषण वाले स्थान पर रहते हैं, तो जिस समय प्रदूषण अधिक होता है उस समय घर के अंदर ही रहने की कोशिश करें। (और पढ़ें - पर्यावरण को प्रदूषण से दूर रखने के उपाय)
  • छींकते समय नाक पर कोई कपड़ा या टिश्यु रखें और गंदे टिश्यु पेपर को दूर फेंक दें और अपने हाथों को अच्छे से धो लें
  • बीमार लोगों के अधिक संपर्क में ना रहें
  • अपने हाथों को नियमित रूप से धोते रहें खासकर अपनी नाक साफ करने के बाद अपने हाथ जरूर धोएं

(और पढ़ें - तनाव दूर करने के घरेलू उपाय)

गला खराब का परीक्षण - Diagnosis of Common Throat Problems in Hindi

गला खराब होने का परीक्षण कैसे किया जाता है?

परीक्षण के दौरान डॉक्टर आपके स्वास्थ्य स्थिति कि पिछली जानकारी लेंगे और अच्छी रोशनी की मदद से आपके गले की जांच करेंगे। कुछ मामलों में डॉक्टर आपको कान,नाक व गले के विशेषज्ञ डॉक्टर के पास भी भेज सकते हैं। 

स्थिति की ठीक से जांच करने के लिए डॉक्टर कुछ अन्य टेस्ट भी लिख सकते हैं:

  • खून टेस्ट:
    डॉक्टर खून का सेंपल लेकर आपका कम्पलीट ब्लड काउंट टेस्ट करते हैं, जिसकी मदद से संक्रमण आदि के संकेत मिल जाते हैं। (और पढ़ें - हीमोग्लोबिन टेस्ट क्या है)
     
  • लैरिंगोस्कोपी:
    यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसकी मदद से डॉक्टर गले के अंदर गहराई तक देख पाते हैं। (और पढ़ें - क्रिएटिनिन टेस्ट क्या है)
     
  • एक्स रे:
    इस प्रक्रिया के दौरान आपको बेरियम नामक तरल पिलाया जाता है। यह द्रव आपके गले के अंदर, पेट और आंतों के अंदर परत बना लेता है, जिससे एक्स रे तस्वीरों में ये अंग साफ दिखाई देने लग जाते हैं। ऐसा होने पर डॉक्टर एक्स रे की मदद से इन अंगों संबंधी समस्याओं का पता लगा लेते हैं। (और पढ़ें - पैप स्मीयर टेस्ट क्या है)
     
  • एंडोस्कोपी:
    इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर एक पतली और लचीली ट्यूब आपकी पाचन प्रणाली में डाली जाती है। इस ट्यूब के एक सिरे पर कैमरा व लाइट लगी होती है, जिसकी मदद से अंदरूनी अंगों में क्षति को देखा जाता है। यह ट्यूब नाक के माध्यम से भोजन नली से होते हुऐ शरीर के अंदर डाली जाती है। इस ट्यूब का उपयोग बायोप्सी के लिए भी किया जाता है। (और पढ़ें - एंडोस्कोपी कैसे होती है)
     
  • बायोप्सी टेस्ट:
    बायोप्सी एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसकी मदद से किसी अंग के ऊतक का सेंपल लिया जाता है, जिसपर परीक्षण किए जाते हैं। (और पढ़ें - किडनी फंक्शन टेस्ट क्या है)
     
  • एमआरआई स्कैन या सीटी स्कैन:
    स्वास्थ्य संबंधी कुछ अन्य समस्याओं का पता लगाने के लिए डॉक्टर आपको एमआरआई स्कैन या सीटी स्कैन करवाने का सुझाव भी दे सकते हैं। (और पढ़ें - एसजीपीटी टेस्ट क्या है)
     
  • थ्रोट स्वेब कल्चर:
    इस टेस्ट प्रक्रिया में स्वेब की मदद से आपके गले से द्रव या अन्य पदार्थ का सेंपल निकाला जाता है और उसकी जांच की जाती है। इस जांच में बैक्टीरियल इन्फेक्शन, वायरल इन्फेक्शन व अन्य प्रकार की बीमारियों का पता लगा लिया जाता है। (और पढ़ें - थायराइड फंक्शन टेस्ट)
     
  • एलर्जी टेस्ट: गले में एलर्जी आदि की पता लगाने के लिए कुछ प्रकार के एलर्जी टेस्ट भी किए जा सकते हैं।

(और पढ़ें - एलर्जी होने पर क्या होता है)

गला खराब का इलाज - Common Throat Problems Treatment in Hindi

गला खराब होने का इलाज कैसे करें?

दवाएं:

  • खांसी को दबाने वाली दवाएं: ये दवाएं सीरप व कुछ प्रकार की चूसने वाली गोलियों के रूप में आती हैं। 
  • एक्सपेक्टेरोंट्स: ये दवाएं गले में जमा हुए बलगम को पतला कर देती है, जिससे खांसने में आसानी होती है। (और पढ़ें - कफ निकालने के उपाय)
  • एंटासिड्स दवाएं: ये दवाएं पेट के अम्लों के प्रभाव को कम कर देती हैं। 
  • प्रोटोन पंप इन्हीबिटर: इन दवाओं से पेट कम मात्रा में अम्ल बनाने लगता है। 
  • एंटीबायोटिक: यदि गले में बैक्टीरियल इन्फेक्शन हो गया है, तो उसका इलाज करने के लिए डॉक्टर कुछ प्रकार की एंटीबायोटिक दवाएं लिख सकते हैं। 
  • दर्द निवारक दवाएं: यदि आपके गले में दर्द हो रहा है, तो डॉक्टर आपको कुछ प्रकार की पेन किलर दवाएं दे सकते हैं। दर्द को कम करने वाली कुछ ओटीसी (डॉक्टर की पर्ची के बिना मिल जाने वाली दवाएं) दवाएं भी उपलब्ध हैं, जो दर्द को  कम कर देती हैं जैसे इबूप्रोफेन या एसिटामिनोफेन आदि। 
  • एलर्जी की रोकथाम करने वाली दवाएं: यदि किसी प्रकार की एलर्जी के कारण आपका गला खराब हो गया है, तो डॉक्टर आपके लिए एलर्जी को रोकने वाली कुछ प्रकार की दवाएं लिख सकते हैं। 

(और पढ़ें - एंटीबायोटिक के फायदे)

ऑपरेशन:

  • कुछ मामलों में टॉन्सिल में अधिक सूजन आ जाने के कारण सर्जरी की मदद से टॉन्सिल को निकालना पड़ सकता है। इस प्रक्रिया को टॉन्सिलेक्टॉमी कहा जाता है। (और पढ़ें - टॉन्सिल के घरेलू उपाय)
  • पेट के ऊपरी सिरे पर लगी वाल्व अगर ठीक से काम नहीं कर रही है, तो उसे ठीक करने के लिए भी ऑपरेशन करने की आवश्यकता पड़ सकती है। 
  • यदि आपके गले या भोजन नली में कैंसर है तो उस स्थिति में भी ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ती है। 

(और पढ़ें - सर्जरी से पहले की तैयारी)

घरेलू उपाय:

  • गर्म पानी में नमक डालकर कुल्ला करना:यदि आपके गले में तकलीफ हो रही है, तो गर्म पानी में थोड़ा नमक मिलाकर गरारे करने से इसके लक्षण शांत हो जाते हैं। नमक श्लेष्म झिल्ली की कोशिकाओं से द्रव को निकाल देता है और सूजन कम करता है। (और पढ़ें - नमक के पानी के फायदे)
     
  • एलोवेरा का रस:
    इसमें पाया जाने वाला प्राकृतिक जेल गले की अंदरुनी परत और ऊतकों की सूजन का शांत कर देता है। (और पढ़ें - एलोवेरा के फायदे)
     
  • द्रव बढ़ना: गले संबंधी लक्षणों को शांत करने के लिए गर्म पेय पदार्थ पी सकते हैं, गर्म चाय में एक चम्मच शहद मिला कर पी सकते हैं और गर्म पानी से भाप ले सकते हैं। (और पढ़ें - शहद और गर्म पानी के लाभ)
     
  • हल्दी वाला दूध:
    हल्दी सूजन व लालिमा को कम करने के साथ-साथ बैक्टीरिया और वायरस से होने वाले संक्रमणों से भी लड़ती है। यह गले या श्वसन तंत्र से होने वाली खांसी का इलाज करने में भी काफी प्रभावी होती है। (और पढ़ें - हल्दी वाले दूध के फायदे)
     
  • शहद:
    यह प्राकृतिक रूप से एंटीसेप्टिक है और इसमें गले जैसी समस्याओं को शांत करने वाले गुण पाए जाते हैं। यह काफी गाढ़ा होता है, जो गले की अंदरुनी त्वचा में अपनी परत बना लेता है, जिससे गले में सूखापन व खुजली जैसे लक्षण शांत होने लग जाते हैं। शहद को चाय में मिलाकर पीने से भी गले संबंधी समस्याओं से आराम मिल जाता है। (और पढ़ें - एंटीसेप्टिक क्या है)
  •  
  • ताजा अदरक:
    इसमें सूजन व लालिमा को कम करने वाले शक्तिशाली एजेंट पाए जाते हैं। अदरक गले व श्वसन मार्ग में संक्रमण या एलर्जी के कारण होने वाली सूजन व लालिमा को कम करने में मदद करता है। (और पढ़ें - अदरक की चाय के फायदे)
     
  • लहसुन:
    यदि खांसी गले में इन्फेक्शन या श्वसन तंत्र में संक्रमण के कारण हुई है, तो कच्चे लहसुन के टुकड़े को खाना खांसी से छुटकारा पाने का सबसे आसान तरीका हो सकता है। (और पढ़ें - लहसुन और शहद खाने का तरीका)
     
  • गर्म चाय पीना:
    गर्मागर्म चाय पीने से भी ज्यादातर लोगों में खराब गले के लक्षणों से राहत मिलने लगती है। इसलिए कम कैफीन वाली चाय का सेवन करें और उसमें शहद या नींबू आदि मिलाने से और गला सूखने जैसी समस्याओं से भी राहत मिलने लग जाती है। 

(और पढ़ें - नींबू पानी के फायदे)

गला खराब की जटिलताएं - Common Throat Problems Complications in Hindi

गला खराब होने से क्या समस्याएं होती है?

गला खराब होने से कुछ जटिलताएं हो सकती हैं, जैसे - 

यदि स्ट्रेप थ्रोट का समय पर इलाज ना किए पर होने वाली समस्याएं:

(और पढ़ें - कान बहने की दवा)

लगातार खांसी होने और गले में जलन होने से निम्न समस्याएं हो सकती हैं:

गला संबंधी समस्याओं से पैदा होने वाले लक्षण गले के कैंसर या भोजन नली के कैंसर का शुरुआती संकेत दे सकते हैं।

(और पढ़ें - कान बहने का कारण)

Dr. K. K. Handa

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कान, नाक और गले सम्बन्धी विकारों का विज्ञान

Dr. Aru Chhabra Handa

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कान, नाक और गले सम्बन्धी विकारों का विज्ञान

Dr. Yogesh Parmar

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