नए सार्स-सीओवी-2 वायरस से होने वाली बीमारी कोविड-19 को भारत में फैलने से रोकने के मकसद से ही 25 मार्च 2020 से लेकर अब तक 4 बार राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन किया जा चुका है। बावजूद इसके भारत में अब तक कोविड-19 के करीब 2 लाख मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में बीमारी से बचने का सिर्फ 2 ही तरीका है। पहला- आप अपने हाथों को साफ रखें और उसे लगातार साबुन-पानी या अल्कोहल बेस्ड हैंड सैनिटाइजर से साफ करते रहें। दूसरा- अपने चेहरे को फेस मास्क या फेस कवर से ढक कर रखें और दूसरों से कम से कम 2 गज की दूरी (6 फीट) बनाकर रखें। 

देशभर के ज्यादातर राज्यों ने अपने यहां सार्वजनिक जगहों पर फेस मास्क के इस्तेमाल को अनिवार्य कर दिया है और मास्क या फेस कवर लगाए बिना कोई भी व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकल सकता। 28 मई 2020 को ब्रिटिश जर्नल ऑफ मेडिसिन (BMJ) में चीन में हाल ही में हुई एक स्टडी को प्रकाशित किया गया, जिसके मुताबिक घर के बाहर ही नहीं बल्कि अगर घर के अंदर भी फेस मास्क पहना जाए तो कोविड-19 इंफेक्शन के खतरे को और कम किया जा सकता है। 

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कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति द्वारा ड्रॉपलेट ट्रांसमिशन के जरिए दूसरों को इस बीमारी का संक्रमण न हो इसके लिए किसी साधारण मास्क नहीं बल्कि 3 लेयर वाले फेस मास्क या फेस कवर का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। ड्रॉपलेट ट्रांसमिशन तब होता है जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या बातें करता है और उसके ऐसा करने पर हवा में फैली पानी की छोटी-छोटी बूंदें नजदीक (3-4 फीट तक) खड़े लोगों तक पहुंचती हैं। इन बूंदों में नया सार्स-सीओवी-2 वायरस होता है जो दूसरे लोगों द्वारा इस वायरस के संपर्क में आने पर उनके शरीर पर प्रवेश कर उन्हें भी बीमार बना देता है। 

हालांकि, यह फेस मास्क या फेस कवर कोविड-19 इंफेक्शन को रोकने में कितना असरदार है, इसे कितनी देर तक पहनकर रखना चाहिए, इन सारी बातों पर अब भी बहस जारी है। इन सबके बीच कुछ डॉक्टरों का सुझाव है कि हमें कोविड-19 इंफेक्शन के ड्रॉपलेट ट्रांममिशन से बचने के लिए फेस मास्क या फेस कवर की जगह प्लास्टिक से बनी फेस शील्ड का इस्तेमाल करना चाहिए। तो आखिर कोविड-19 इंफेक्शन से बचाने में फेस मास्क या फेस शील्ड कौन है ज्यादा कारगर, इस बारे में हम आपको इस आर्टिकल में बता रहे हैं लेकिन पहले जानते हैं कि आखिर फेस शील्ड है क्या?

आखिर क्या है फेस शील्ड?
जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन JAMA में अप्रैल 2020 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी ऑफ आईओवा (IOWA) के 3 डॉक्टरों ने इस बात पर जोर देकर कहा कि कोविड-19 से बचाने में ज्यादा असरदार और कंफर्टेबल है फेस शील्ड जो फेस मास्क को रिप्लेस कर सकता है। एक्सपर्ट्स की टीम की मानें तो एक साधारण और सस्ता फेस शील्ड जिसका इस्तेमाल अस्पतालों में हेल्थकेयर वर्कर्स करते हैं- वह कम्यूनिटी सेटिंग में कोविड-19 को फैलने से रोकने में बेहद असरदार साबित हो सकता है। 

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अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने अप्रैल 2020 में कोविड-19 को फैलने से रोकने में कपड़े से बने मास्क का समर्थन किया था। लेकिन लैब टेस्टिंग की मानें तो कपड़े से बना मास्क, वायरस के साइज वाले एरोसोल पार्टिकल्स को कुछ हद तक ही रोकने में कारगार है जबकी फेस शील्ड कोविड-19 के खिलाफ एक बेहतर विकल्प है। एक अच्छा फेस शील्ड प्लास्टिक से बना एक ऐसा पारदर्शी अवरोध है जो व्यक्ति को माथे से लेकर चेहरे पर ठुड्डी के नीचे तक और एक कान से दूसरे कान तक पूरी तरह से कवर कर लेता है। फेस शील्ड पहनते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि फेस शील्ड के हेडपीस और आपके माथे के बीच खाली जगह नहीं होनी चाहिए। 

क्या फेस शील्ड, फेस मास्क से ज्यादा असरदार है?
डॉक्टरों की मानें तो आम लोग जो फेस मास्क या फेस कवर का इस्तेमाल करते हैं वे मास्क से जुड़ी कई गलतियां करते हैं:

  • बहुत से लोग मास्क को गलत तरीके से पहनते हैं
  • मास्क की बाहरी सतह को बार-बार छूते रहते हैं
  • इस्तेमाल किए गए मास्क को गलत तरीके से उतारते हैं
  • एक बार इस्तेमाल कर फेंक दिए जाने वाले सर्जिकल मास्क और एन95 मास्क को दोबारा यूज करते हैं

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यूनिवर्सिटी ऑफ आईओवा (IOWA) के डॉक्टरों की मानें तो फेस मास्क की तुलना में फेस शील्ड के कई फायदे हैं :

  • सबसे पहला फायदा तो यही है कि फेस मास्क की तुलना में फेस शील्ड रीयूजेबल होता है यानी इसे आप दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं
  • साधारण तरीके से साबुन और पानी या घर में इस्तेमाल होने वाले सामान्य कीटाणुनाशक का इस्तेमाल कर फेस शील्ड को साफ करके दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है
  • फेस मास्क की तुलना में फेस शील्ड को पहनना ज्यादा कंफर्टेबल होता है और यह सिर्फ मुंह और नाक ही नहीं बल्कि पूरे चेहरे को सुरक्षित रखता है।
  • फेस शील्ड एक अवरोध की तरह काम करता है, जिस कारण उसे पहनने वाला व्यक्ति अपने चेहरे को बार-बार छूने की आदत से बच सकता है। 
  • फेस शील्ड पहनने वाला व्यक्ति आसानी से बात कर सकता है और पारदर्शी होने के कारण बात करते वक्त सामने वाले व्यक्ति के होंठ और चेहरे के हाव-भाव भी देख सकता है।
  • फेस शील्ड सस्ता होता है और इसे घर में मौजूद आर्ट एंड क्राफ्ट की चीजों से आसानी से तैयार किया जा सकता है। 

जर्नल ऑफ ऑक्यूपेशनल एंड इन्वायरनमेंटल हाइजीन में साल 2014 में प्रकाशित एक स्टडी की मानें तो अगर खांसी के स्त्रोत से फेस शील्ड 18 इंच की दूरी पर हो तो वह 96 प्रतिशत तक वायरल एक्सपोजर को कम कर सकता है। इसके अलावा कोरोना वायरस को रोकने के लिए जरूरी 6 फीट फिजिकल डिस्टेंस रखने के दौरान फेस शील्ड वायरस के ट्रांसमिशन को रोकने में 92 प्रतिशत तक असरदार हो सकता है।

हालांकि, अभी यह जानना जरूरी है कि सार्स-सीओवी-2 वायरस के खिलाफ फेस शील्ड कितना असरदार है। इस बारे में अब तक कोई रिसर्च या अध्ययन नहीं हुआ है। बहुत से एक्सपर्ट्स की मानें तो सिर्फ फेस मास्क या फेस शील्ड इस्तेमाल करने की बजाए मास्क और शील्ड दोनों को अगर साथ में इस्तेमाल किए जाए तो वायरस से बेहतर सुरक्षा मिल सकती है।

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फेस शील्ड का इस्तेमाल करना हो या फिर फेस कवर या फेस मास्क का, यह कोरोना वायरस इंफेक्शन को रोकने का सिर्फ एक हिस्सा है। मास्क या शील्ड के साथ-साथ दिनभर में कई बार साबुन-पानी या सैनिटाइजर से हाथ धोना और दूसरे से कम से कम 2 गज की दूरी बनाकर रखना बेहद जरूरी है और इसका पालन करके ही कोविड-19 को फैलने से रोका जा सकता है।


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