इस बारे में अब तक कई रिसर्च हुई हैं जिसमें पुरुषों को कोविड-19 के गंभीर परिणामों से पीड़ित होने की आशंका अधिक व्यक्त की गई है। इसमें अस्पताल में भर्ती होने वालों की अधिक संख्या और इंफेक्शन के कारण होने वाली मृत्यु दर दोनों शामिल है। अब एक नए अध्ययन में भी इस विषय पर किए गए पिछले शोध के अनुरूप ही निष्कर्ष पाए गए हैं।
अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित माउंट सिनाई हॉस्पिटल के आईकैन स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने इस नई स्टडी में यही पाया कि नए कोरोना वायरस इंफेक्शन से मरने वालों में पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक है। इस नई स्टडी की अब तक विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा नहीं की गई है लेकिन इस स्टडी के नतीजे इससे पहले हुए अध्ययनों के अनुसार ही हैं जिसमें अलग-अलग कारकों को खोजने की कोशिश की गई है जैसे- व्यक्ति महिला है या पुरुष और श्वसन संक्रमण के परिणामस्वरूप जो खराब परिणाम सामने आते हैं।
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इस विषय में होने वाली रिसर्च, महिलाओं और पुरुषों के बीच बीमारी के पैटर्न को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। साथ ही अन्य स्वास्थ्य कारकों जैसे- अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियां और उम्र को ध्यान में रखते हुए यह निर्धारित करने में सक्षम है कि संक्रमण महिलाओं से अधिक पुरुषों को क्यों प्रभावित करता है।
- कारण जिनकी वजह से पुरुषों को गंभीर कोविड-19 इंफेक्शन होने का खतरा अधिक है
- महिलाओं और पुरुषों में अलग-अलग नतीजे आने का कारण क्या है?
- कोविड-19 में लिंग भेद के आधार पर किए गए अध्ययन
कारण जिनकी वजह से पुरुषों को गंभीर कोविड-19 इंफेक्शन होने का खतरा अधिक है
इस नई स्टडी में अनुसंधानकर्ताओं ने 3 हजार 86 कोविड-19 मरीजों को शामिल किया जिन्हें 13 अप्रैल 2020 से 2 जून 2020 के बीच अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। इनमें से पहले ही 59.6 प्रतिशत मरीज पुरुष थे। महिलाओं से तुलना की जाए तो अस्पताल में भर्ती कराए गए पुरुषों की औसत उम्र महिलाओं से कम थी और उनमें पहले से कोई और बीमारी जैसे- हाइपरटेंशन, डायबिटीज और मोटापा भी नहीं था।
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अध्ययन में हालांकि, यह पाया गया कि भले ही महिलाओं के लिए लैबोरेटरी मार्कर्स पुरुष रोगियों की तुलना में कम थे और असमायोजित मृत्यु दर भी महिला और पुरुष दोनों लिंगों के बीच एक समान थी, बावजूद इसके औसतन अधिक पुरुषों को महिलाओं की तुलना में आईसीयू में गहन देखभाल की आवश्यकता पड़ी।
अध्ययन में अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि बाकी के महत्वपूर्ण कारकों जैसे- जनसांख्यिकी, पहले से मौजूद स्वास्थ्य स्थितियां और साथ ही आधारभूत हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन की कमी के लक्षण) में सुधार करने के बाद भी पुरुष होना ही कोविड-19 से मृत्यु के लिए एक स्वतंत्र जोखिम कारक था। यहां पर यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि पिछले अध्ययनों में गरीब सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के लोगों और कुछ निश्चित जाति या नस्ल के लोगों को भी कोविड-19 के गंभीर लक्षणों से संक्रमित होने का खतरा अधिक पाया गया है।
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अस्पताल में भर्ती किए गए पुरुष मरीजों की औसत उम्र 64 साल थी जबकी महिलाओं की औसत उम्र 74 साल यानी अस्पताल में भर्ती कराए गए मरीजों की उम्र के बीच पूरे 10 साल का अंतर। पुरुष रोगियों में ऐसे लोगों की भी संख्या अधिक थी जो धूम्रपान करने वाले थे, हालांकि महिलाओं में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा और सीओपीडी या अस्थमा जैसी अंतर्निहित स्थितियों की दर अधिक थी।
क्लिनिकल मार्कर्स में पाए गए अंतर इस बात का सुझाव देते हैं कि पुरुष मरीजों में महिला मरीजों की तुलना में इंफेक्शन के कारण मृत्यु का खतरा 20 प्रतिशत अधिक था। हालांकि, जब ऊपर बतायी गई पहली से मौजूद बीमारियों को ध्यान में रखते हुए मृत्यु दर जोखिम की गणना की गई तब पहले से मौजूद परिस्थितियों वाली महिलाओं की पुरुष समकक्षों की तुलना में कोविड-19 से मृत्यु होने का खतरा अधिक था।
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स्टडी के नतीजों में यह भी सुझाव दिया गया कि जिन पुरुषों में हृदय रोग या मोटापा जैसी स्थितियां मौजूद थीं उनमें कोविड-19 की वजह से मृत्यु दर पर कोई असर नहीं पड़ा। हालांकि इन्हीं बीमारियों ने महिलाओं में इंफेक्शन के कारण होने वाली मृत्यु दर के खतरे को 75 से 80 प्रतिशत तक बढ़ा दिया।
महिलाओं और पुरुषों में अलग-अलग नतीजे आने का कारण क्या है?
जैसा कि पहले ही ऊपर बताया जा चुका है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में तुलनात्मक रूप से लैबोरेटरी मार्कर्स का कम होना जिसमें सफेद रक्त कोशिकाएं भी शामिल हैं जो शरीर में इन्फ्लेमेशन (सूजन-जलन) से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, कोविड-19 के मामले में खराब परिणामों से पीड़ित पुरुषों की उच्च संभावना को दर्शाती हैं। इन मार्करों की अधिक संख्या, साथ ही IL-6 और IL-8 जैसे साइटोकिन्स भी मृत्यु की उच्च संभावना का संकेत देते हैं।
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भले ही अध्ययन के निष्कर्ष यह बताते हों कि पुरुषों को मृत्यु और कोविड-19 की गंभीर जटिलताओं से पीड़ित होने का खतरा अधिक है, लेकिन कुछ कारकों जैसे- अंतर्निहित मोटापा या हृदय रोग महिलाओं को इस वायरल संक्रमण से मृत्यु के उच्च जोखिम में डालता है। हालांकि, कोविड-19 की गंभीर जटिलताओं से पीड़ित होने या मृत्यु होने की आशंका उन लोगों में अधिक है जिन्हें पहले से कोई बीमारी है।
कोविड-19 में लिंग भेद के आधार पर किए गए अध्ययन
आईकैन स्कूल ऑफ मेडिसिन में किए गए इस अध्ययन के कुछ निष्कर्ष पिछले शोधों के समान हैं जो दुनियाभर में कहीं और किए गए थे। फ्रंटियर्स इन पब्लिक हेल्थ में शुरुआत में प्रकाशित एक स्टडी में अनुसंधानकर्ताओं ने मिलते जुलते सबूत पाए और बताया कि इससे पहले हो चुकी कई बीमारियों के प्रकोप जैसे- सीवियर अक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (सार्स) और मि़डिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (मर्स) के मामले में भी पुरुष गंभीर नतीजों से पीड़ित पाए गए थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप में हुई मौतों में करीब 63 प्रतिशत पुरुष ही थे।
चीन में की गई स्टडी, जहां पर इस बीमारी के उत्पन्न होने की बात कही जा रही है, वहां पर कोविड-19 से होने वाली मृत्यु दर के आकड़ों को देखा गया है और यह रिपोर्ट सामने आयी कि इंफेक्शन से मरने वालों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या दोगुना अधिक थी। वुहान की एक और स्टडी में यह बताया गया कि प्रयोगशाला के मार्करों की जब जांच की गई, उन मार्करों में से 11 में पुरुष रोगियों के आंकड़े अधिक थे, जबकि कुछ अन्य मापदंडों में भी काफी वृद्धि हुई क्योंकि बीमारी तब तक और बढ़ गई जब तक रोगियों की मृत्यु नहीं हो गई।
इटली, जो इस कोविड-19 महामारी की वजह से बुरी तरह से प्रभावित होने वाले सबसे पहले देशों में से एक था, वहां भी यही रिपोर्ट सामने आयी कि आईसीयू में भर्ती कराए गए करीब 80 प्रतिशत मरीज पुरुष थे। पुरुषों में इंफेक्शन अधिक होने के लिए जिम्मेदार सबसे अहम कारकों में से एक है- सेल रिसेप्टर्स जैसे- एसीई2 रिसेप्टर की उच्च अभिव्यक्ति। नया कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 किसी व्यक्ति को संक्रमित करने के लिए इसी रिसेप्टर से खुद को संलग्न करता है।
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इस नए अध्ययन में हालांकि कई दूसरे क्लिनिकल और मॉलिक्यूलर कारकों पर भी ध्यान दिया गया है, जो पुरुषों और महिलाओं के लिए विशिष्ट हैं जिसकी मदद से वे अपने निष्कर्षों तक पहुंच सकते हैं। अध्ययन के निष्कर्ष पुरुषों और महिलाओं में बीमारी के पैटर्न की पहचान करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं और साथ ही यह उन्हें अलग तरह से प्रभावित क्यों करता है यह जानने में भी। जो अंततः दोनों लिंगों महिलाओं और पुरुषों के लिए अधिक केंद्रित डायग्नोसिस और इलाज का कारण बन सकता है।
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कोविड-19: पुरुषों को गंभीर इंफेक्शन होने का खतरा अधिक क्यों है, अध्ययन के जरिए पता लगाने की कोशिश के डॉक्टर
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