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अवसाद एक मनोदैहिक विकार है जो पूरे शारीरिक और मानसिक संरचना पर निर्भर करता है। तंत्रिका तंत्र, अंतःस्रावी ग्रंथियों का नेटवर्क, शरीर की मांसपेशियों की प्रणाली, नींद के पैटर्न और भूख सभी पर डिप्रेशन का असर पड़ता है। एक हाल ही में किए गए अध्ययन से पता चला है कि 2 से 4% अमेरिकियों को हर साल अवसाद के लिए चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है, और 8 में से 1 को जीवन में कभी ना कभी गंभीर अवसाद होता है। यूरोपीय देशों और ऑस्ट्रेलिया में किए गये अध्ययन से इसी तरह के परिणाम मिले हैं।

(और पढ़ें - ध्यान क्या है)

जाहिर है, अवसाद सबसे आम बीमारियों में से एक है, और फिर भी अक्सर कई सालों तक इस से पीड़ित व्यक्ति को इसका ग्यात नहीं होता। कई डॉक्टरों के मुताबिक डिप्रेशन चिकित्सा पद्धति में सबसे आम समस्या है। और इसके अलावा, न केवल पीड़ित व्यक्ति पर इस बीमारी का बुरा प्रभाव पड़ता है, बल्कि इसका असर पीड़ित व्यक्ति के पारिवारिक सदस्यों, मित्रों और सहकर्मियों पर भी होता है।

  1. कैसे अवसाद या डिप्रेशन कम करने में लाभदायक है योग? - How Does Yoga Help with Depression?
  2. अवसाद या डिप्रेशन के लिए योग आसन - Yoga Asana for Depression in Hindi
  3. अवसाद या डिप्रेशन की समस्याओं के लिए करें प्राणायाम - Pranayama for depression in hindi
  4. षट्कर्म करेगा अवसाद के इलाज में फायदा - Shatkarma for Depression Treatment in Hindi
  5. योग बंध से होगा अवसाद या डिप्रेशन की ट्रीटमेंट में फायदा - Yoga Bandha for Depression in Hindi
  6. अवसाद या डिप्रेशन में क्या खायें और उचित जीवन शैली - Diet and Lifestyle for Depression in Hindi

योग अवसाद को प्रभावी रूप से कम करता है। यहां तक कि सबसे गहरी अवसादग्रस्त स्थिति में भी योगिक चिकित्सा प्रभावी होती है, परंतु ऐसी स्थिति में योग्य योग चिकित्सक के निर्देशन में योग अभ्यास करना चाहिए, चाहे उसके लिए कुछ समय एक आश्रम में ही क्यों ना रहना पड़े। अवसाद का इलाज करने के लिए योग की उन प्रथा पर ध्यान दिया जाता है जो भौतिक और महत्वपूर्ण ऊर्जा के स्तर का निर्माण करती हैं। अगर आप पूर्ण रूप से योग के मध्यम से डिप्रेशन को डोर करना चाहते हैं तो आम तौर से एंटी-डिपरेसेंट दवाइयाँ को बंद करने की सलाह दी जाती है और पीड़ित व्यक्ति को कर्म योग को अपनाने को कहा जाता है। किंतु अगर आप एंटी-डिपरेसेंट दवाइयाँ ले रहे हैं तो उन्हे रोकने से पहले अपने डॉक्टर से पहले परामर्श अवश्य करें।  

मुक्तानंद की किताब 'नव योगिनी तंत्र" के मुताबिक, "अवसाद ऊर्जा की कमी होना नहीं है, बल्कि एक तरह का मानसिक कब्ज है जो हमारी ऊर्जा प्रवाह को अवरुद्ध करता है"।  

जो भी अवसाद से ग्रस्त है, वह इस कथन की सच्चाई को पहचान सकता है। अत्यधिक थकान, निर्जीवता और उदासीनता की भनाओं के साथ अक्सर गहन अंतर्मुखता और कमजोरता डिप्रेशन के चिन्ह हैं। वास्तव में यह तमस की अवस्था है, जहां सरल कार्य सामान्य रूप से सक्षम इंसान के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसलिए, योगिक दृष्टिकोण अवसाद के कारणों को नहीं देखता, बल्कि व्यक्ति की ऊर्जावान स्थिति को देखता है।   योग में अवसाद या डिप्रेशन के उपचार के 5 पहलू हैं। यह इस प्रकार हैं:

  1. योग आसन
  2. प्राणायाम
  3. षट्कर्म
  4. बँध
  5. उचित आहार और जीवन शैली

नीचे इनके बारे में बताया गया है, किंतु ध्यान रहे की अपना मेडिकल उपचार ना रोकें, और कुशल गुरु के निर्देशन में व्यक्तिगत मामलों में विशिष्ट संशोधन आवश्यक हो सकते हैं।

योग के माध्यम से पहला दृष्टिकोण हठ योग का अभ्यास करना है। इस से पिङ्गल और इडा नाड़ी के बीच संतुलन हासिल होता है। हठ योग का उद्देश्य इन दोनो नाड़ियों में ऊर्जा और प्राण के प्रवाह को संतुलित करना है, ताकि न तो शारीरिक और न ही मानसिक संकाय प्रबल हो सके। अवसाद के योग प्रबंधन में यह एक केंद्रीय सिद्धांत है।  

आसन अभ्यास अवसाद के उन्मूलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, खासकर गतिशील आसन जिनमें आप खड़े होते हैं जैसे की सूर्य नमस्कार, और चंद्र नमस्कार। अगर आपको यह कठिन लगें तो आप पवन्मुक्तासन श्रृंखला के आसान कर सकते हैं जिसमें शामिल हैं: उत्तानपादासननावासन, चकरापादासान, पद्द संचालन। भुजंगासनउष्ट्रासन, और धनुरासन जैसे पीछे झुकने वाले आसन बहुत लाभदायक हैं क्योंकि उनका सीधा प्रभाव अधिवृक्क (अड्रीनल) ग्रंथियों पर पड़ता है और थाइरोइड ग्रंथि पर कम। लेकिन, आसन अभ्यास में अनुभव नहीं होने पर आसन किसी गुरु की निगरानी में ही करें। इनके अलावा को भी ऐसे आसान कर सकते हैं जिनमें आपकी पीठ मुड़ती है जैसे कि परिवृत्त त्रिकोणासनपरिवृत्त पार्श्वकोणासन या अर्ध मत्स्येन्द्रासन।  

हाल ही में, वैज्ञानिक अनुसंधान ने दिखाया है कि सभी गतिशील शारीरिक व्यायाम एंडोर्फिन (रसायन जो मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं) रिलीज़ करते हैं और मूड को अच्छा करते हैं। हालांकि, हम जानते हैं कि योगासन के पूरे शरीर-मन परिसर पर इस से कहीं गहरा प्रभाव होता है।

प्राणायाम डिप्रेशन से होने वाली शारीरिक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए बहुत उपयोगी है। परंतु यह महत्वपूर्ण है कि आप समझें की कौन सी मानसिक स्थिति को संबोधित करने के लिए कौन से प्राणायाम का उपयोग किया जाना चाहिए।  

नाड़ी शोधन प्राणायाम किसी के द्वारा सुरक्षित रूप से किया जा सकता है। यह आपको एक शांतिपूर्ण स्थिति में लाने सक्षम है।  

उज्जयी प्राणायाम (सरल रूप) को मुख्य शांति प्रदान करने वाले प्राणायाम माना जाता है। इसके अभ्यास के परिणाम थोड़े समय अभ्यास के बाद ही महसूस होने लगते हैं। इसका अभ्यास किसी भी स्थान पर, ध्यान आकर्षित किए बिना किया जा सकता है।

भास्त्रिका प्राणायाम और कापलाभाती प्राणायाम ऊर्जा का स्तर जल्दी और वांछित करने में सक्षम हैं। अवसाद से पीड़ित लोगों के लिए यह अपना दिनचर्या ऊर्जा से भरपूर बनाने का सबसे अच्छा माध्यम है। बँध के साथ संयोजन में, ये प्राणायाम अवसाद के प्रबंधन में सबसे प्रभावी होते हैं।

जब आपकी अवसाद या डिप्रेशन के आसन और प्राणायाम में एक बुनियादी आधार बन जाए तो आप षट्कर्म पर जा सकते हैं।

हठ योग के 6 क्रिया, जिन्हे षट्कर्म कहा जाता है, अवसाद या डिप्रेशन केरने के लिए बहुत शक्तिशाली हैं। यह क्रिया प्रारंभ करने से पहले किसी गुरु से इनका सही रूप से अभ्यास सीखना आवश्यक है।  

जिव्हा धौति, यानी जीभ की सफाई, के साथ शुरू करें। इस क्रिया की सरलता की वजह से यह ज्यादातर कोई भी कर सकता। अगर सही तरीके से अभ्यास किया जाए तो जिव्हा धौति एक उल्टी आने जैसे असर पैदा करता है जो तुरंत आपके शरीर में ऊर्जा पैदा करता है।  

अगली षट्कर्म क्रिया है जल नेती (नाक की सफाई)। इसे सामान्य रूप से हकले गर्म पानी से किया जाता है, किंतु अवसाद से पीड़ित व्यक्ति को गर्म पानी की बजाय ठंडे पानी से करना चाहिए। इस ठंडे पानी में थोड़ा नमक डाल लें। ठंडे नाकाम के पानी को उपयोग करने से मस्तिष्क में जागरूकता का सा प्रभाव पड़ता है, और उसके बाद जब आप ज़ोर से पानी नाक से बहार निकालते हैं (जो नाक कक्षों को सुखाने के लिए आवश्यक हैं), उस से और अधिक ऊर्जा पैदा होती है।  

अगली षट्कर्म क्रिया है वमन धोती। यह उन लोगों को करनी चाहिए जिन्हे अवसाद के साथ गहरी चिंता के ना हों। इसमें गर्म नमक के पानी को पिया और फिर झटके से निकाला है। इस से पेट शुद्ध हो जाता है। हालांकि, यह अवसाद के प्रबंधन में मूल्यवान है क्योंकि यह ऊर्जा के प्रवाह को रोकने वाली बाधाओं को हटा देता है।

बँध का अभ्यास ग्रंथियों को संबोधित करता है। मूल बँध ऊर्जा बढ़ाता है और ज़हेन में दबाए हो अनुभव को ऊपर लाने की प्रक्रिया शुरू करता है। उड्डीयान बंध बँध खालीपन की भावना, जो अक्सर डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति को महसूस होती है, को कम करने में प्रभावी है। प्रसवोत्तर अवसाद के प्रबंधन में यह विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि प्रसव के बाद अक्सर एक महिला को ऐसा लगता है की उन्होने शारीरिक रूप से खुद का एक हिस्सा 'खो दिया' है - उन्होने बच्चे को जन्म दिया है और अब 'ख़ालीपन" सा महसूस होता है। चूंकि बँध कुछ भी खाने या पीने से पहले करने चाहिए, इसलिए सुबह के समय योगाभ्यास का नियमित अभ्यास करने की आदत बना लेनी चाहिए। बँध करने के परिणाम तुरंत ही दिखते हैं और आगे बढ़ते रहने की हिम्मत देते हैं।

अवसाद या डिप्रेशन को काबे करने के लिए अन्य कई चीज़ें की जेया सकती हैं:

  1. योगिक आहार महत्वपूर्ण है, क्योंकि मांस और अंडे (विशेष रूप से) बहुत ही तामसिक भोजन हैं जिनसे अवसाद में वृद्धि होती है।
  2. नींद एक प्रमुख विषय है - पर्याप्त नींद लेना, जल्दी सोने और जल्दी उठने से एक वास्तविक (और सकारात्मक) बदलाव हो सकता है। कितनी नींद की जरूरत है, इसके बारे में आत्म जागरूकता महत्वपूर्ण है; जब लोग निराश होते हैं, वे ज़रूरत से ज़्यादा हैं जिस से अवसाद की परेशानी बढ़ती है।
  3. चन्द्रमा के चरणों और मासिक धर्म चक्रों की जागरूकता आपको यह महसूस करने में मदद कर सकती है कि उनकी मनोदशा बाहरी कारानो से प्रभावित है।
  4. सावधानीपूर्वक डायरी रखने से हमें मूड के बदलने की विविधताओं का अनुमान लगा सकते हैं और हमारे संतोष और कल्याण की भावना को अनुकूलित करने के लिए हमारी गतिविधियों को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

इन बातों का खास तौर से ध्यान रखें:

  1. याद रहे की योगाभ्यास से आराम निरंतर अभ्यास करने के बाद ही मिलता है और धीरे धीरे मिलता है।
  2. आसन से जोड़ों का दर्द बढे नहीं, इसके लिए अभ्यास के दौरान शरीर को सहारा देने वाली वस्तुओं, तकियों व अन्य उपकरणों की सहायता जैसे ज़रूरी समझें वैसे लें।
  3. अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक जोर न दें। अगर दर्द बढ़ जाता है तो तुरंत योगाभ्यास बंद कर दें और चिकित्सक से परामर्श करें।
  4. यह ज़रूर पढ़ें: योग के नियम
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