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कान के रोग को खत्म करने के लिए पहले इसके लक्षणों को जान लेना बेहद जरूरी होता है। जिसमें कान में दर्द होना, कान भरा हुआ लगना, कान बजना, कान बहना, कान की नली में सूजन होना या कान में मैल जमना आदि शामिल हैं। वैसे तो कान संबंधी समस्याएं होने पर बिना देरी किए डॉक्टर के पास ही जाना चाहिए, लेकिन कान संबंधी कुछ ऐसी समस्याएं है, जिन्हें घरेलू उपायों से ठीक किया जा सकता है।

  1. जैतून का तेल है कान संंबंधी रोगों की दवा - Olive oil hai kaan ki sambandhi rogo ki dawa
  2. कान के रोग का इलाज है सेब का सिरका - Kaan ke rog ka ilaj hai seb ka sirka
  3. लहसुन है कान के रोग का उपचार - Lahsun hai kaan ke rog ka upchar
  4. लैवेंडर तेल है कान के रोग का घरेलू उपाय - Lavender tel hai kaan ke rog ka gharelu upay
  5. कान के रोग को ठीक करने का तरीका है नमक के गरारे - Kaan ke rog ko theek karne ka tarika hai namak ke garare
  6. बेकिंग सोडा है कान के रोग का घरेलू उपचार - Baking soda hai kaan ke rog ka gharelu upchar
  7. कान के रोग का इलाज है नारियल तेल - Kaan ke rog ka ilaj hai nariyal tel

कान में दर्द होना कान के रोग का सामान्य लक्षण है, जिसे आमतौर पर जैतून के तेल से ठीक किया जा सकता है। इसमें ऐसे कई दर्द निवारक गुण होते हैं, जो कान के दर्द से राहत दिलाते हैं। जैतून के तेल  में एंटी इंफ्लामेटरी (सूजन को कम करने वाले) और एंटीबैक्टीरियल (बैक्टीरिया को नष्ट करने वाले) गुण होते हैं , जिनके कारण यह कान के रोग का इलाज करने में भी मदद करता है।

आवश्यक सामग्री

  • 2-3 बूंद जैतून का तेल

इस्तेमाल का तरीका

  • जैतून के तेल को हल्का गर्म कर लें
  • अब इसकी कुछ बूंद अपने प्रभावित कान में डालें

ध्यान रहे की तेल ज्यादा गर्म न हो क्योंकि यह कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है।

कब इस्तेमाल करें

इस उपाय को दिन में दो से तीन बार इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

यदि कान के बाहरी हिस्से में इन्फेक्शन हो गया है। इस स्थिति को सेब के सिरके की मदद से घर पर ही ठीक किया जा सकता है। सेब के सिरके में मैलिक एसिड मौजूद होते हैं, जो कीटाणुओं को नष्ट करते हैं और कान के रोग का इलाज करने में मदद करते हैं। 

आवश्यक सामग्री 

  • 2 चम्मच सेब का सिरका
  • 2 चम्मच गुनगुना पानी
  • थोड़ी सी रूई 

इस्तेमाल का तरीका

  • सेब के सिरके और पानी को बराबर मात्रा में मिला लें 
  • इस मिश्रण की कुछ बूंदों को अपने प्रभावित कान में डालें 
  • अब अपने कान को रूई की मदद से ढक लें और दूसरी ओर झुकते हुए मिश्रण को कान के अंदर जाने दें 
  • इस प्रक्रिया को 5 मिनट तक करें 

जरूरत पड़ने पर इस प्रक्रिया को फिर से दोहराएं

कब इस्तेमाल करें 

इस उपाय को सिर्फ एक बार ही इस्तेमाल करें।

अगर आप कान के रोग को ठीक करने के लिए पूरी तरह से प्राकृतिक एंटीबायोटिक (बैक्टीरिया को नष्ट करने वाले) का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो लहसुन ऐसे में एक शक्तिशाली उपचार रहेगा। लहसुन में ऐसे कई गुण पाए जाते हैं, जो कान संबंधी कई गंभीर स्थितियों को ठीक करने में मदद करते हैं।

आवश्यक सामग्री

  • 1 टुकड़ा लहसुन (पीसा हुआ या बारीक कटा हुआ)
  • 1 चम्मच ऑलिव ऑयल
  • 1 कटोरी
  • थोड़ी सी रूई

इस्तेमाल का तरीका

  • एक छोटी कटोरी में लहसुन और जैतून के तेल को मिला लें
  • अब 2 से 4 घंटे के लिए लहसुन को ऑलिव ऑयल में भिगने दें
  • लहसुन को छान कर तेल से अलग कर लें
  • अब इसकी 2 या 3 बूंद अपने प्रभावित कान में डालें
  • रूई से ढक कर इसे कुछ देर के लिए छोड़ दें

उसके कान को नीचे की तरफ करके इस मिश्रण को निकाल दें और रुई से हल्के हल्के पोंछ लें। ध्यान रहें इसके बाद कान को पानी से धोने की कोशिश ना करें।

कब इस्तेमाल करें

इस प्रक्रिया को दिन में सिर्फ 2 बार इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

लैवेंडर तेल को लंबे समय से कान के रोगों को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके एंटी इंफ्लामेटरी और एंटीबायोटिक गुण कान के दर्द, सूजन लालिमा और बैक्टीरिया के संक्रमण को ठीक करने में मदद करते हैं और इसके रोग से छुटकारा दिलाते हैं। 

आवश्यक सामग्री

  • 2 चम्मच लैवेंडर ऑयल

इस्तेमाल का तरीका

लैवेंडर तेल को कान के पीछे के भाग से लेकर कान के पीछे की हड्डी तक लगाएं और हल्के दबाव के साथ मालिश करें। गर्दन के साइड से और कान के सामने के भाग से लेकर गालों तक लैवेंडर तेल की मसाज मददगार साबित हो सकती है।

कब इस्तेमाल करें

लैवेंडर तेल से अपने प्रभावित हिस्से की दिन में दो से तीन बार मालिश करें।

कान के अंदरूनी हिस्से में सूजन, जलन व लालिमा हो गई है तो नमक के गरारे करने से इस स्थिति को काफी हद तक कम किया जा सकता है। गले में दर्द के साथ-साथ यह कान की सूजन को कम करने में भी काफी मदद कर सकता है। नमक पानी सूक्ष्म रोगाणुओं को नष्ट करता है, जिससे कान में संक्रमण से होने वाले लक्षणों को भी कम किया जा सकता है।

आवश्यक सामग्री

  • 1 कप गर्म पानी
  • 1 चम्मच नमक

इस्तेमाल का तरीका

  • 1 कप गर्म पानी में 1 चम्मच नमक मिलाएं
  • अब इस मिश्रण से 30 सेकेंड तक गरारे करें और उसके बाद इसे थूक दें

कब इस्तेमाल करें

इस प्रक्रियो को लगातार 30 सेकेंड से 1 मिनट तक करें और हर घंटे में एक बार करते रहें। इससे कान संबंधी रोगों व उसके लक्षणों में काफी हद तक आराम मिल जाता है।

कान के रोग का मुख्य लक्षण कान में जमा मैल भी हो सकता है। कान में मैल कोई रोग नहीं होता लेकिन यह कान से जुड़े कई रोगों का कारण होता है। बेकिंग सोडा कान में जमे मैल को बाहर निकालता है और कान में मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट करने में मदद करता है। 

आवश्यक सामग्री

  • ½ चम्मच बेकिंग सोडा 
  • 60 मिली गुनगुना पानी
  • थोड़ी सी रूई

इस्तेमाल का तरीका

  • बेकिंग सोडा को गुनगुने पानी में मिला लें
  • इस मिश्रण को किसी बोतल में भर लें
  • अपने सिर को दूसरी ओर झुकाते हुए मिश्रण की 5 बूंदे (एक-एक कर के) अपने प्रभावित कान में डालें
  • कुछ देर के लिए अपने सिर को इसी स्थिति में रहने दें ताकि मिश्रण कान के अंदर तक पहुंच सके

लगभग 5 मिनट के बाद कान को नीचे की तरफ करके यह मिश्रण निकाल दें और रुई या साफ कपड़े के साथ पोंछ लें। 

कब इस्तेमाल करें

कान से पूरी तरह से मैल निकालने के लिए इस उपाय को दिन में दो बार इस्तेमाल करें। इस प्रकिया को एक हफ्ते से अधिक समय के लिए इस्तेमाल न करें।

नारियल तेल एक और देसी ऐसा नुस्खा है, जिसकी मदद से कान में मौजूद मैल को निकाल कर कान संबंधी कई समस्याओं को ठीक किया जा सकता है।

आवश्यक सामग्री 

  • 2 चम्मच नारियल तेल 

इस्तेमाल का तरीका 

  • जरूरत अनुसार नारियल तेल को हल्का गर्म कर लें और एक बोतल में भर लें 
  • अब अपने सिर को दूसरी ओर झुका कर नारियल तेल की कुछ बूंदे अपने प्रभावित कान में डालें 
  • रूई से अपने कान को कुछ देर के लिए ढक दें 

करीब 5 मिनट के बाद कान को नीचे की तरफ करके तेल को निकाल दें और रुई से कान साफ कर लें।

कब इस्तेमाल करें 

दिन में दो से तीन बार इसका इस्तेमाल करें। 

कान का रोग एक गंभीर स्थिति हो सकती है, क्योंकि इससे तीव्र दर्द व अन्य कई परेशानियां हो सकती है। कान संबंधी कुछ ऐसे रोग व समस्याएं हो सकती हैं, जिन्हें तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए अगर आपको अधिक दर्द हो रहा है या घरेलू उपायों से एक या दो दिन के भीतर लक्षणों में आराम नहीं मिल पाया है, तो डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए।

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