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फ्यूकोसिडोसिस - Fucosidosis in Hindi

कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!
फ्यूकोसिडोसिस
सुनिए कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!

फ्यूकोसिडोसिस (Fucosidosis) एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के कई अंग प्रभावित होते हैं, विशेषकर मस्तिष्क। इसमें पीड़ित व्यक्ति को इंट्लेक्चुअल डिसेबिलिटी यानी बौद्धिक विकलांगता की समस्या होती है जैसे सीखने, प्रॉब्लम को सॉल्व करने या निर्णय लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं जो समय के साथ और ज्यादा बदतर होती जाती हैं। बीमारी से पीड़ित कई लोगों को बाद में डिमेंशिया की समस्या भी हो जाती है। बीमारी से ग्रसित कई मरीजों को अक्सर मोटर डिवलपमेंट स्किल्स (मांसपेशियों से जुड़ी) से संबंधित दिक्कत भी हो सकती है जैसे- चलना या उठना-बैठना। इस तरह के लक्षण भी समय के साथ बिगड़ने लगते हैं।

मोटर डिवलपमेंट स्किल को दो भागों में बांटा गया है: ग्रॉस मोटर स्किल्स और फाइन मोटर स्किल्स। ग्रॉस मोटर स्किल्स में बड़ी मांसपेशियों जैसे पैर, भुजा और धड़ आदि शामिल होते हैं जबकि फाइन मोटर स्किल्स में छोटी मांसपेशियों जैसे हाथ और कलाई से की जाने वाली गतिविधियां शामिल होती हैं।

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फ्यूकोसिडोसिस के लक्षण - Fucosidosis Symptoms in Hindi

ऊपर बताए गए लक्षणों के अलावा फ्यूकोसिडोसिस के लक्षण और संकेत में निम्नलिखित समस्याएं भी शामिल हैं:

  • उम्र के अनुसार शरीर का सही विकास न होना
  • हड्डियों का असामान्य विकास (डाइसोस्टोसिस मल्टिप्लेक्स)
  • दौरे पड़ना
  • मांसपेशियों की असामान्य जकड़न (स्पास्टिसिटी)
  • त्वचा पर गहरे लाल धब्बे (एंजियोकेराटोमास)
  • चेहरे की बनावट आसामान्य होना
  • बार-बार होने वाले सांस संबंधी संक्रमण
  • पेट के अंदर मौजूद अंगों का आकार में सामान्य से अधिक होना (विसेरोमेगाली)

गंभीर मामलों में ये लक्षण आमतौर पर शैशवावस्था (नवजात शिशु) में दिखाई देने लगते हैं, जबकि हल्के मामलों में 1 या 2 साल की उम्र में लक्षण दिखाई देना शुरू हो जाते हैं। बीमारी से पीड़ित व्यक्ति मध्य वयस्कता (मिड अडल्टहुड) यानी 20 से 40 साल तक जीवित रहते हैं।

फ्यूकोसिडोसिस का कारण - Fucosidosis Causes in Hindi

फ्यूकोसिडोसिस का कारण जीन में होने वाला परिवर्तन है। एफयूसीए1 नामक जीन में उत्परिवर्तन या गड़बड़ी की वजह से यह बीमारी होती है।दरअसल, एफयूसीए1 जीन अल्फा-एल-फ्यूकोसीडेज नामक एक एंजाइम बनाने के लिए निर्देश देता है। यह एंजाइम कुछ विशेष प्रोटीन (ग्लाइकोप्रोटीन) और वसा (ग्लाइकोलिपिड्स) से जुड़े कॉम्प्लेक्स शुगर मॉलिक्यूल (ओलिगोसेकेराइड्स) को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह बीमारी ऑटोसोमल रिसेसिव पैटर्न के माध्यम से अगली पीढ़ी में पारित होती है, जिसका मतलब है कि प्रभावित बच्चे को उसके माता-पिता दोनों से जीन की खराब प्रतियां मिली हैं और हर एक कोशिका में मौजूद जीन की दोनों कॉपीज में उत्परिवर्तन होता है।

फ्यूकोसिडोसिस का निदान - Diagnosis of Fucosidosis in Hindi

फ्यूकोसिडोसिस या इस तरह की कोई भी आनुवांशिक या दुर्लभ बीमारी का निदान करना अक्सर मुश्किल भरा होता है। इसलिए हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स बीमारी को डायग्नोज करने के लिए आमतौर पर पीड़ित व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री, बीमारी के लक्षण, एमआरआई, शारीरिक परीक्षण और लैब टेस्ट की मदद लेते हैं। 

(और पढ़ें-  मानसिक रोग का कारण)

फ्यूकोसिडोसिस का इलाज - Fucosidosis Treatment in Hindi

फ्यूकोसिडोसिस का उपचार उन विशिष्ट लक्षणों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है जो मरीज में विशेष रूप से दिखाई देते हैं। उदाहरण के तौर पर बार-बार होने वाले सांस संबंधी संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक थेरेपी दी जा सकती है और अधिक पसीना आने के कारण होने वाले डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की मात्रा कम होना) जैसे प्रभावों का मुकाबला करने के लिए फ्लूड रिप्लेसमेंट का सुझाव दिया जा सकता है। फ्यूकोसिडोसिस से पीड़ित व्यक्तियों के इलाज के लिए विशेषज्ञों की एक टीम की आवश्यकता होती है।

वर्तमान में फ्यूकोसिडोसिस के लिए केवल बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही एकमात्र उपचार विकल्प है। हालांकि इसके नतीजे मरीजों में अलग-अलग दिखे हैं और इस बारे में अभी और अधिक शोध की जरूरत है। इसके अलावा फ्यूकोसिडोसिस से पीड़ित बच्चे व उसके परिवार को जेनेटिक काउंसेलिंग की भी जरूरत हो सकती है।



फ्यूकोसिडोसिस के डॉक्टर

Dr. Hemanth Kumar Dr. Hemanth Kumar न्यूरोलॉजी
3 वर्षों का अनुभव
Dr. Deepak Chandra Prakash Dr. Deepak Chandra Prakash न्यूरोलॉजी
10 वर्षों का अनुभव
Dr. Virender K Sheorain Dr. Virender K Sheorain न्यूरोलॉजी
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Dr. Vipul Rastogi Dr. Vipul Rastogi न्यूरोलॉजी
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