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पानी जीवन के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व है। आपके शरीर के दो-तिहाई भाग में पानी भरा हुआ है। पानी आपकी आंखों और जोड़ों को नम बनाने, आपकी त्वचा को स्वस्थ रखने, शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और पाचन में मदद करने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य करता है। वयस्कों को एक दिन में आठ से दस गिलास पानी पीना चाहिए। हालांकि यह भिन्न भिन्न कारकों पर निर्भर करता है। (और पढ़ें - खाली पेट पानी पीने के 9 बड़े फायदे)

जब आप निर्जलित (Dehydrated) होते हैं उस समय आपके शरीर में तरल पदार्थ पर्याप्त मात्रा में नहीं होते हैं। पानी की कमी आपके शरीर में खनिज (शर्करा और नमक के) संतुलन को बिगाड़ सकती है। यदि निर्जलीकरण का समय पर उपचार नहीं किया गया तो यह मस्तिष्क क्षति (Brain damage) और गंभीर मामलों में मृत्यु का कारण भी बन सकता है। इसीलिए गंभीर निर्जलीकरण की स्थिति में जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा प्राप्त करायी जाती है।

  1. डिहाइड्रेशन क्या है - What is dehydration in Hindi
  2. रोज कितना पानी पीना चाहिए? - How much water should I drink daily in Hindi
  3. शरीर में पानी की कमी के लक्षण और संकेत - Dehydration symptoms and signs in Hindi
  4. निर्जलीकरण के कारण - Dehydration ke karan in Hindi
  5. डिहाइड्रेशन के उपाय - Dehydration ke upay in Hindi

जल शरीर का एक महत्वपूर्ण तत्व है और शरीर को नमी प्रदान करने और सुचारु रूप से कार्य करने के लिए अति आवश्यक है। शरीर के वजन का 75% भाग पानी से बना होता है। अधिकांश पानी शरीर की कोशिकाओं (Intracellular space) में पाया जाता है बाकी रक्त वाहिकाओं (Intravascular space) या कोशिकाओं के बीच के स्थान (Interstitial space) में भरा होता है।

निर्जलीकरण वह स्थिति है जब शरीर से निकलने वाले पानी की मात्रा, शरीर में मौजूद पानी की मात्रा से अधिक हो जाती है। आपका शरीर बहुत क्रियाशील रहता है और पानी की खपत बहुत तेज़ी से करता है। आपके शरीर को निम्न क्रियाओं में पानी की ज़रूरत होती है :

  1. जब आप सांस लेते और छोड़ते हैं। (आप यह प्रक्रिया किसी कांच पर देख सकते हैं, जब आप सांस निकालते हैं तो उसपर कुछ सेकण्ड के लिए भाप बन जाती है वो भाप पानी का ही वाष्पित रूप होती है)
  2. शरीर को ठंडा रखने के लिए पसीने के रूप में।
  3. पेशाब या मूत्र की सहायता से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में।

सामान्यतः शरीर के लिए आवश्यक पानी की मात्रा, शारीरिक संरचना, चयापचय (Metabolism), आहार, जलवायु और कपड़ों जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।

चिकित्सा संस्थान के अनुसार, वयस्क पुरुषों और महिलाओं को प्रति दिन क्रमशः 3.7 और 2.7 लीटर पानी पीना चाहिए।

लगभग 80 प्रतिशत पानी पेय पदार्थों द्वारा (पानी, कैफीनयुक्त पेय और अल्कोहल आदि) से तथा शेष 20 प्रतिशत भोजन से प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन ये केवल एक अनुमान है। आपको अपने शरीर के अनुसार कितना पानी पीना चाहिए इसका आंकलन आप इस प्रकार कर सकते हैं :

  1. सुबह उठने के बाद नाश्ता करने से पहले 3-4 दिनों तक अपना वज़न मापें और चारों दिनों के वज़न का औसत निकाल लें। यह आपके शरीर का वास्तविक वज़न होगा क्योंकि प्रतिदिन पानी पीने की मात्रा के अनुसार आपका वज़न घटता बढ़ता रहता है। (और पढ़ें - शरीर के वजन के हिसाब से कितना पानी पीना चाहिए)
  2. अब अपने वज़न को 30 से विभाजित कर लीजिये। जैसे यदि आपका वज़न 70 किलो है तो आपको [70/30] = 2.3 लीटर पानी पीना चाहिए।
  3. अपने मूत्र का आंकलन करें। आपको नियमित रूप से मूत्र होना चाहिए (दिन में तीन से चार बार से अधिक) और यह हल्के पीले रंग का होना चाहिए। यदि 3-4 बार से भी कम या गहरे रंग का मूत्र हो रहा है तो आपको अधिक तरल पदार्थ पीने की ज़रूरत है।
  4. लेकिन तरल पदार्थ पीने के बारे में भी सचेत रहें। तरल पीने से सिर्फ प्यास बुझनी चाहिए।

जल्दी जल्दी प्यास लगना निर्जलीकरण के शुरुआती लक्षणों में से एक है। ऐसे में, मूत्र का रंग गहरा पीला होता और सामान्य दिनों में हल्के पीले रंग का। ये लक्षण तब विकसित होते हैं जब आपके शरीर में पानी की मांग बढ़ती है और पानी का निष्कासन कम होता है।

इनके अलावा निर्जलीकरण के कुछ लक्षण निम्नलिखित हैं :

कम निर्जलीकरण होने की स्थिति में निम्न लक्षण प्रदर्शित होते हैं :

  1. प्यास लगना।
  2. मुंह सूखना।
  3. कम मूत्र त्यागना।
  4. मूत्र का रंग गहरा पीला होना।
  5. सूखी त्वचा।
  6. सिरदर्द
  7. मांसपेशियों में ऐंठन

गंभीर निर्जलीकरण की स्थिति में महसूस होने वाले लक्षण इस प्रकार हैं :

  1. मूत्र न आना या अत्यधिक गहरे रंग का मूत्र होना।
  2. बहुत शुष्क त्वचा।
  3. चक्कर आना।
  4. धड़कनों का तेज़ होना।
  5. तेज़ी से सांस लेना।
  6. धंसी हुई आंखें।
  7. जरुरत से ज्यादा नींद आना , ऊर्जा की कमी, भ्रम या चिड़चिड़ापन महसूस होना।
  8. बेहोशी आना।

शिशुओं और छोटे बच्चों में वयस्कों की तुलना में अलग प्रकार के लक्षण अनुभव होते हैं।

  1. मुंह और जीभ सूखना।
  2. रोते वक्त आंसू न आना।
  3. 3 घंटे बाद भी डायपर (Diaper) सूखा होना।
  4. धंसी हुई आंखें, गाल, सिर पर हल्के हल्के निशान होना।
  5. जरुरत से ज्यादा सोना, ऊर्जा में कमी और चिड़चिड़ा होना।

बहुत से लोगों को पता नहीं चलता कि उनके शरीर में पर्याप्त पानी का अभाव होता है। आपके शरीर में पानी की कमी होने के संकेत इस प्रकार हैं :

  1. सिर में दर्द होना हो सकता है शरीर में पानी की कमी का संकेत – Headache is a sign of dehydration in Hindi
  2. निर्जलीकरण होने पर आ सकती है याददाश्त में कमी – Memory loss due to dehydration in Hindi
  3. सांस की दुर्गंध का कारण हो सकता है डिहाइड्रेशन – Bad breath due to dehydration in Hindi
  4. पानी की कमी होने पर हो सकती है कब्ज़ की समस्या – Constipation is a sign of dehydration in Hindi
  5. निर्जलीकरण बढ़ाए खाने की लालसा – Food cravings are one of the signs of lack of water in the body in Hindi
  6. कम मूत्र आना है डिहाइड्रेशन का संकेत – Decreased urine output is a sign of dehydration in Hindi
  7. थकान है निर्जलीकरण का विश्वसनीय संकेतक – Fatigue is a reliable indicator of dehydration in Hindi
  8. मांसपेशियों में दर्द है डिहाइड्रेशन का संकेत – Muscle pain due to dehydration in Hindi
  9. निर्जलीकरण के कारण आता है त्वचा में सूखापन – Dry skin is a sign of dehydration in Hindi
  10. निर्जलीकरण से बढ़ती है हृदय गति – Increased heart rate due to dehydration in Hindi

सिर में दर्द होना हो सकता है शरीर में पानी की कमी का संकेत – Headache is a sign of dehydration in Hindi

सिर में दर्द होना और चक्कर आना आपके शरीर में पानी की कमी के संकेत हैं। क्लीनिकल न्यूरोलॉजी की पुस्तिका में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक माइग्रेन्स और सिर दर्द निर्जलीकरण के कारणों में से एक हैं। इसके अलावा, निर्जलीकरण मस्तिष्क में ऑक्सीजन और रक्त के प्रवाह को कम कर देता है। (और पढ़ें – सिर दर्द के लक्षण)

जब आप सिर में दर्द से पीड़ित है तो एक गोली के बजाय एक गिलास पानी पिएं। अगर सिरदर्द निर्जलीकरण के कारण है, तो यह जल्द ही दूर हो जाएगा। (और पढ़ें – सिर दर्द के घरेलु उपाय)

निर्जलीकरण होने पर आ सकती है याददाश्त में कमी – Memory loss due to dehydration in Hindi

मस्तिष्क में पानी की कमी की वजह से याददाश्त और निर्णय लेने की शक्ति पर बुरा असर पड़ता है। डिहाइड्रेशन की वजह से आप चीजों पर फोकस नहीं कर पाते हैं। आपके अंदर वह उर्जा नहीं होती जो किसी समस्या या मुद्दे पर सोच विचार करने में मदद करती है, जिससे आप चीजों को भूलने लगते हैं।

नैदानिक ​​अनुसंधान स्वायत में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, निर्जलीकरण के शुरुआती संकेतो में अकसर थकान, अधिक नींद आना और बेहोशी आदि होते हैं। (और पढ़ें - थकान दूर करने और ताकत के लिए क्या खाएं)

पोषण के ब्रिटिश जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि शरीर में पानी की थोड़ी सी कमी से भी लोगों के संज्ञानात्मक कार्यों और निर्णय लेने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।

एक और अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला है कि मूड का अच्छा ना रहना, कम एकाग्रता और सिरदर्द जैसे लक्षण 1.36 प्रतिशत महिलाओं में निर्जलीकरण की वजह से होते हैं। (और पढ़ें – दिमाग तेज़ कैसे करें)

सांस की दुर्गंध का कारण हो सकता है डिहाइड्रेशन – Bad breath due to dehydration in Hindi

सांसो में बदबू आपके शरीर में पानी की कमी का एक और संकेत है। आप जो भी खाते या पीते हैं उसका असर आपकी सांसों पर पड़ता है। लार में जीवाणुरोधी (Antibacterial) गुण होते हैं लेकिन निर्जलीकरण के कारण शरीर में पर्याप्त लार नहीं बन पाती।

टेक्सास विश्वविद्यालय में कार्डियोवास्कुलर मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर एमडी, जॉन हिगिंस कहते हैं, "यदि आपके मुंह में पर्याप्त लार का उत्पादन नहीं हो रहा है तो आपके मुंह अधिक बैक्टीरिया पनप सकते हैं जो सांसों की बदबू का प्रमुख कारण होते हैं।" लार मुंह के भीतर हानिकारक बैक्टीरिया को पनपने से रोकती है।

सांसो में बदबू आने के साथ साथ आपका मुंह भी सूखने (Dry) लगता है। पानी एक लुब्रिकेंट (Lubricant) की तरह काम करता है, जो गले में श्लेष्मा झिल्ली (Mucus membrane) को नम बनाए रखता है जिससे मुंह नहीं सूखता। (और पढ़ें – मुंह की बदबू का इलाज)

पानी की कमी होने पर हो सकती है कब्ज़ की समस्या – Constipation is a sign of dehydration in Hindi

यदि आप लगातार पानी पीते हैं तो आपकी पाचन शक्ति ठीक रहेगी और आपको कब्ज की समस्या भी नहीं होगी, वहीं चिकनाई युक्त भोजन करने के बाद जो लोग पानी नहीं पीते हैं उनके शरीर में कब्ज और अन्य पाचन समस्याएं अधिक होती हैं।

क्लीनिकल न्यूट्रीशन के यूरोपीय जर्नल 2003 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया है कि तरल पदार्थों का सेवन ना करने से कब्ज में वृद्धि होती है। इसलिए कब्ज को रोकने के लिए ज़रूरी है कि आप स्वयं को हाइड्रेटेड बनाए रखें। (और पढ़ें – कब्ज के रामबाण इलाज)

निर्जलीकरण बढ़ाए खाने की लालसा – Food cravings are one of the signs of lack of water in the body in Hindi

अगली बार जब आपको अचानक भूख महसूस हो, तब नाश्ता करने से पहले एक गिलास पानी पिएं। जब आप निर्जलित होते हैं, तब आपका शरीर दिमाग को गलत संकेत भेजता है कि आप भूखे हैं, जबकि वास्तव में आप प्यासे होते हैं।

अचानक से नमकीन खाने की लालसा शरीर में जल की कमी की वजह से हो सकती है। तब आप एक गिलास पानी में नींबू और नमक मिलाकर पिएं। (और पढ़ें - नींबू के फायदे और नुकसान)

कुछ लोगों को पानी की कमी की वजह से मीठा खाने का मन भी करता है। यह तब होता है जब आपके शरीर में ग्लाइकोजन (Glycogen) का उत्पादन अच्छी तरह से नहीं होता है। इस स्थिति में आप तरबूजपपीता या जामुन जैसे फलों का सेवन कर सकते हैं जिनमें शरीर के लिए आवश्यक शर्करा के साथ साथ पानी की मात्रा भी पर्याप्त होती है। सकीमुरा के अनुसार, "दही भी पर्याप्त मात्रा में पानी की आपूर्ति करता है।" (और पढ़ें - स्वास्थ्य के लिए दही के फायदे)

कम मूत्र आना है डिहाइड्रेशन का संकेत – Decreased urine output is a sign of dehydration in Hindi

अगर आप मूत्र त्यागने के लिए एक दिन में 3-4 बार से भी कम जा रहे हैं तो यह आपके शरीर में पानी की कमी की ओर संकेत करता है। आपके शरीर के विषाक्त पदार्थ, पेशाब और पसीने के रूप में बाहर निकलते हैं, इसलिए नियमित अंतराल पर पेशाब ना जाना आपके लिए समस्या पैदा कर सकता है। अकसर पेशाब का गहरा पीला रंग दवाओं के सेवन की वजह से भी हो जाता है लेकिन अगर आप किसी प्रकार की दवाई का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो ये शरीर में पानी की कमी का संकेत है।

मूत्र आपके हाइड्रेशन स्तर का एक महत्वपूर्ण सूचक है। हल्के रंग का मूत्र एक हाइड्रेटेड शरीर की निशानी है, जबकि गहरे पीले रंग का मूत्र इस बात का संकेत है कि आपके शरीर में पानी की कमी हो रही है। इसलिए दिन में 8-9 गिलास पानी ज़रूर पिएं।

थकान है निर्जलीकरण का विश्वसनीय संकेतक – Fatigue is a reliable indicator of dehydration in Hindi

अगर आप ज्यादा काम किए बिना थकान और सुस्त महसूस कर रहे हैं, तो ऐसा आपके शरीर में पानी की कमी के कारण हो सकता है। पानी की कमी लो बीपी और मस्तिष्क सहित पूरे शरीर में अपर्याप्त ऑक्सीजन की कमी का कारण बनती है। ऑक्सीजन की कमी के कारण थकान और सुस्ती होती है। (और पढ़ें – थकान से बचने के उपाय)

इसके अलावा, जब आप निर्जलित होते हैं, तो आपके शरीर को काम करने के लिए उचित रक्त परिसंचरण में कमी और आपको सांस लेने में भी मुश्किल होती है।

हाइड्रेटेड रहने का सबसे आसान तरीका यही है कि आप उचित अंतराल पर पानी पीते रहें। (और पढ़ें – आँखों की थकान को दूर करने के सात सरल उपाय)

मांसपेशियों में दर्द है डिहाइड्रेशन का संकेत – Muscle pain due to dehydration in Hindi

हमारे शरीर की कार्टिलेज (Cartilage) और रीढ़ की हड्डी के निर्माण में 80 प्रतिशत भूमिका पानी की होती है। शरीर में पानी की कमी की वजह से हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं जैसे जोड़ों में सूजन, गर्दन दर्द तथा जोड़ों में दर्द होती हैं। "हिगिंस के अनुसार, आपका तापमान जितना अधिक होगा आपकी मांसपेशियों की ऐंठन बढ़ने की संभावना भी उतनी ही तीव्र होगी। ऐसा मांसपेशियों में गर्मी बढ़ने के कारण होता है। मासपेशियां जितना अधिक काम करती हैं उतनी ही अधिक गर्मी उनमें उत्पन्न होती है। शरीर में  इलेक्ट्रोलाइट्स (Electrolytes), सोडियम और पोटेशियम के स्तर में परिवर्तन होने से मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन होती है।" हडि्डयों में लचीलापन और चिकनाहट बनाए रखने के लिए पानी की ज़रूरत होती है। (और पढ़ें – मांसपेशियों में दर्द के लक्षण)

जब आपके शरीर अच्छी तरह से हाइड्रेटेड है, तो आप बिना दर्द के दौड़ भी सकते हैं और कूद भी सकते हैं। इसके अलावा, पसीने के माध्यम से तरल पदार्थ की कमी मांसपेशियों में ऐंठन पैदा कर सकती है।

एप्लाइड फिजियोलॉजी के जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन 2008 में व्यायाम करना हार्मोन के लिए और नियमन चयापचय प्रतिक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है जो कि शरीर को हाइड्रेटेड रखता हैं। (और पढ़ें – योग को अपनाएं, जोड़ों में दर्द से राहत पायें)

निर्जलीकरण के कारण आता है त्वचा में सूखापन – Dry skin is a sign of dehydration in Hindi

निर्जलीकरण के अन्य संकेतों में त्वचा और होठों का सूखना भी शामिल है। त्वचा शरीर की सबसे बाहरी परत है जो प्रदूषण और बाहरी हानिकारक कारकों से शरीर की रक्षा करती है। इसे हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है।

पानी कम पीने से पसीना भी कम आता है और शरीर से विषैले पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते हैं। शरीर में पानी की कमी से त्वचा खुश्क और रूखी हो जाती है और इससे कई त्वचा संबंधी रोग होने का खतरा रहता है। जबकि डिहाइड्रेशन से मुँहासेएक्जिमा और छालरोग (Psoriasis) का खतरा बढ़ जाता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से इससे बचा जा सकता है। (और पढ़ें – अतिरिक्त रूखी त्वचा का इलाज है गुलाब जल)

निर्जलीकरण से बढ़ती है हृदय गति – Increased heart rate due to dehydration in Hindi

अगर आप पानी नहीं पीते हैं तो इसका प्रभाव आपके दिल पर भी पड़ता है। निर्जलीकरण के कारण प्लाज्मा की मात्रा में कमी आ जाती है जिससे रक्त परिसंचरण प्रभावित होता है और आपके दिल की दर बढ़ जाती है।

निर्जलीकरण, आपके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का कारण बनता है। इससे आपके शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ने के कारण दिल की धड़कन तेज हो जाती है। (और पढ़ें – तरबूज के गुण ह्रदय को रखें स्वस्थ)

अगर आपको अपने दिल की धड़कन तेज लग रही है, तो धीरे-धीरे पानी पीना शुरू करें। यदि समस्या बनी रहती है, तो अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

कभी-कभी निर्जलीकरण सामान्य कारणों से भी होता है जैसे बीमार या व्यस्त होने के कारण पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना, यात्रा के दौरान आदि। इनके अलावा निर्जलीकरण के अन्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. दस्त, उल्टी, गंभीर और तीव्र दस्त। (और पढ़ें - दस्त के घरेलू उपचार)
  2. बुखार
  3. बहुत ज़्यादा पसीना आना।
  4. कुछ दवाओं के सेवन या डायबिटीज के कारण मूत्र अधिक आना।
  5. जलने (Burn) के कारण शरीर से पानी निकलना। (और पढ़ें - जलने पर करें ये घरेलू उपचार)

निर्जलीकरण को रोकने के लिए कम से कम रोज़ 1.5 लीटर पानी पियें लेकिन कभी भी एक बार में इतना पानी न पियें। इसके अलावा अन्य तरल पदार्थ (सूप, दूध, ताजे फलों का रस, नींबू पानी) और जल से परिपूर्ण आहार जैसे सलाद और फलों का सेवन करें। (और पढ़ें - नींबू पानी के फायदे और नुकसान)

लेकिन अगर आप निर्जलीकरण के शिकार हो गए हैं तो इसका इलाज करना अति आवश्यक है। इसके इलाज के कुछ उपाय इस प्रकार हैं :

वयस्कों में निर्जलीकरण का इलाज-

  1. तरल पदार्थों के सेवन जैसे पानी, सूप, ताजा रस और ताजा नारियल पानी आदि से स्वयं को रिहाइड्रेट कर सकते हैं। इसके अलावा ताजे फल और सलाद भी खायें। (और पढ़ें - नारियल पानी के फायदे और नुकसान)
  2. कॉफी, चाय और कार्बोनेटेड पेय से बचें क्योंकि ये मूत्रवर्धक (Diuretics) हैं जो शरीर से पानी निकालते हैं। (और पढ़ें - कॉफी पीने के फायदे और नुकसान)
  3. थोड़ी थोड़ी मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें। यदि आप उल्टी कर रहे हैं तो एक बार में अधिक मात्रा में पानी की बजाय कम मात्रा में तरल पदार्थ लें।
  4. मीठे और नमकीन खाद्य पदार्थों का सेवन करें। इससे शरीर में शर्करा और नमक की कमी दूर होती है।
  5. ओआरएस (ORS) का प्रयोग करें। ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (Oral rehydration solution) आपको रिहाइड्रेट करने में मदद करता है। इस घोल में सोडियम और पोटेशियम लवण के साथ स्टार्च और ग्लूकोज भी होता है जो आपके शरीर के तरल पदार्थों को संतुलित रखने में मदद करता है। ओआरएस घोल दवा की दुकानों पर उपलब्ध होता है।

बच्चों में निर्जलीकरण का इलाज-

  1. बच्चों को केवल पानी न दें, पानी में ओआरएस घोल कर पिलायें।
  2. थोड़ी थोड़ी मात्रा में और कई बार तरल पदार्थों का सेवन करायें।
  3. चावल का पानी या दलिया देने की कोशिश करें क्योंकि चावल के पानी में स्टार्च प्रचुर मात्रा में होता है और दलिया में मौजूद पके हुए अनाज आपके बच्चे के शरीर को पोषण देने में मदद करेंगे। (और पढ़ें - कांजी पानी यानि चावल के पानी के फायदे)

शिशुओं में निर्जलीकरण का इलाज-

अगर आपके शिशु को डिहाइड्रेशन हो गया है तो उसे डॉक्टर के पास अवश्य ले जायें लेकिन उतने समयांतराल में आप निम्न उपाय कर सकते हैं :

  1. उसे स्तनपान करायें। ब्रेस्टमिल्क रिहाइड्रेशन के लिए आदर्श है। (और पढ़ें - स्तनपान के फायदे बच्चों और माताओं के लिए)
  2. थोड़ी थोड़ी देर में तरल पदार्थ जैसे दूध और पानी पिलाते रहें।
  3. अगर आपके शिशु को दस्त या उल्टियां हो रही हैं तो उसे फलों का जूस न पिलायें।
  4. हर घंटे में उसे ओआरएस का घोल पिलाते रहें।
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