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एमआरआई स्कैन (MRI Scan) का पूरा नाम 'मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग' (Magnetic Resonance Imaging) होता है। इस स्कैन के लिए शक्तिशाली चुंबकों, रेडीयो किरणों और कंप्यूटर का प्रयोग किया जाता है, जिसकी मदद से शरीर की जानकारी को विस्तृत तस्वीरों के माध्यम से प्राप्त किया जाता है।

डॉक्टर इस टेस्ट का इस्तेमाल मरीज के शारीरिक परीक्षण करने के लिए या यह देखने के लिए कर सकते हैं कि मरीज उपचार के प्रति किस तरह प्रतिक्रिया दे रहा है। एमआरआई स्कैन में एक्स-रे और सीटी स्कैन टेस्ट की तरह विकिरणों (Radiation) का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

(और पढ़ें - एक्स रे क्या है)

एमआरआई ने मेडिकल दुनियां में एक नई क्रांति ला दी है। इसकी खोज के बाद डॉक्टरों और खोजकर्ताओं ने इसके इस्तेमाल करने की तकनीकों में सुधार किया है, जिससे मेडिकल प्रक्रियाओं और संबधित खोजों में काफी मदद मिली है।

एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल शरीर के लगभग हर हिस्से की जांच करने के लिए किया जा सकता है, जिसमें शामिल है:

  • दिमाग और रीढ़ की हड्डी की जांच,
  • हड्डियों और जोड़ों की जांच,
  • स्तनों की जांच,
  • ह्रदय और रक्तवाहिकाओं की जांच,
  • अन्य अंदरुनी अंग जैसे लिवर, गर्भाशय और पौरुष ग्रंथि आदि की जांच।

एमआरआई स्कैन के परिणाम का इस्तेमाल मरीजों की स्थितियों के परीक्षण करने के लिए, उपचार की योजना तैयार करने के लिए और यह देखने के लिए किया जाता है कि पहले किया जा चुका उपचार कितना प्रभावित था।

  1. एमआरआई स्कैन क्या होता है? - What is MRI Scan in Hindi?
  2. एमआरआई स्कैन क्यों किया जाता है? - What is the purpose of MRI Scan in Hindi
  3. एमआरआई स्कैन से पहले - Before MRI Scan in Hindi
  4. एमआरआई स्कैन के दौरान - During MRI Scan in Hindi
  5. एमआरआई स्कैन के बाद - After MRI Scan in Hindi
  6. एमआरआई स्कैन के क्या जोखिम होते हैं? - What are the risks of MRI Scan in Hindi
  7. एमआरआई स्कैन के परिणाम का क्या मतलब होता है? - What do the results of MRI Scan mean in Hindi

एमआरआई स्कैन क्या होता है?

मेडिकल क्षेत्र में एमआरआई नई तकनीक मानी जाती है, जिसका प्रयोग 1980 के दशक के शुरुआत से किया जा रहा है। 

एमआरआई स्कैन में चुम्बकीये शक्ति और रेडियों किरणों की मदद से शरीर के अंदरूनी अंगों और ऊतकों की विस्तृत तस्वीरें निकाली जाती हैं, जिनका परीक्षण कंप्यूटर पर किया जाता है।

इस टेस्ट में एक्स-रे तथा अन्य इमेजिंग टेस्टों की तरह किसी प्रकार की रेडिएशन या हानिकारक चीजों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

एमआरआई द्वारा ली गई तस्वीरें अन्य मेडिकल इमेजिंग टेस्ट विकल्पों से काफी विस्तृत और जानकारी पूर्ण होती हैं। इसलिए इसकी गुणवत्ता ज्यादातर इस्तेमाल किये जाने वाले इमेजिंग टेस्ट (जैसे एक्स-रे) से बेहतर होती है।

एमआरआई स्कैन क्यों किया जाता है?

एमआरआई के विकास ने मेडिकल दुनिया को काफी आगे पहुंचा दिया है, क्योंकि इसकी मदद से डॉक्टर शरीर में किसी प्रकार का उपकरण पहुंचाए बिना भी अंदरुनी अंगों को काफी सटीकता से देख सकते हैं।

एमआरआई स्कैन, रोग और चोट का निदान करने में डॉक्टरों की मदद करती है। इसकी मदद से यह भी नजर रखी जाती है कि मरीज में उपचार कितने अच्छे से काम कर रहा है।

मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के मामले में एमआरआई स्कैन निम्न प्रकार से जांच करती है:

ह्रदय और रक्त वाहिकाओं में एमआरआई निम्न की जांच करती है:

  • अवरुद्ध रक्त वाहिकाएं की जाँच,
  • दिल का दौरा पड़ने के कारण हुए नुकसान की जाँच,
  • ह्रदय रोग की जाँच,
  • दिल की संरचना से संबंधित समस्याओं की जाँच

हड्डियों और जोड़ों के मामले में  एमआरआई स्कैन द्वारा निम्न की जांच की जाती है:

शरीर के कुछ अंदरुनीं अंगों के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए भी एमआरआई स्कैन किया जा सकता है, जिसमें निम्न जाँच शामिल है:

एक विशेष प्रकार के एमआरआई को 'फंक्शनल' एमआरआई (fMRI) कहा जाता है, यह मस्तिष्क गतिविधियों की जांच करता है।

यह जांच करने के लिए कि जब आप कुछ विशेष कार्य करते हैं, तो मस्तिष्क का कौन सा हिस्सा अधिक गतिशील रहता है, इस टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। एफएमआरआई स्कैन मस्तिष्क संबंधित समस्याओं का पता लगा लेता है, जैसे स्ट्रोक आदि। मिर्गी या मस्तिष्क में ट्यूमर होने पर अगर मस्तिष्क सर्जरी की जरूरत पड़ती है, तो उसके लिए एफएमआरआई की मदद से ब्रेन मैपिंग किया जाता है। उपचार की योजना तैयार करने के लिए भी डॉक्टर एमआरआई का इस्तेमाल करते हैं।

एमआरआई स्कैन करने से पहले क्या करना चाहिए?

एमआरआई स्कैन करवाने के लिए मरीज को थोड़ी बहुत तैयारी करने की जरूरत पड़ सकती है। अस्पताल में जाने के बाद डॉक्टर मरीज को कपड़े बदलने के लिए कह सकते हैं। क्योंकि, एमआरआई टेस्ट में चुंबकीय शक्ति का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए यह जरूरी है कि स्कैन कराये जाने वाले हिस्से के अंदर किसी भी प्रकार की धातु की वस्तु न हो। इसलिए मरीज को एमआरआई स्कैन से पहले किसी भी प्रकार की धातु की ज्वैलरी उतारने हेतु बोल दिया जाता है।

एमआरआई में अत्याधित शक्तिशाली चुंबक का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए जिन लोगों के अंदरूनी शारीरिक अंग बदले गए हैं उनका एमआरआई स्कैन नहीं किया जा सकता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शक्तिशाली चुंबकिय शक्ति शरीर में लगे मेडिकल इम्प्लांट (implant; उपकरणों) को अव्यवस्थित कर सकती है या उसके कार्यों को प्रभावित कर सकती है क्योंकि इनमें धातु हो सकता है।

इसलिए अगर मरीज के शरीर में अंग प्रत्यारोपण हुआ है तो स्कैन क्षेत्र में जाने से पहले उन्हें डॉक्टरों से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए। (मरीज को एक सेफ्टी फ़ार्म भी भरना पड़ सकता है, जिसमें धातु की चीजों से जुड़ी सभी बाते लिखी होती हैं)

एमआरआई स्कैन से संबंधित नीचे दी गई सूची अंतिम या निश्चित नहीं है, लेकिन इस सूची की मदद से रेडियोग्राफर को उन चीजों की जानकारी मिल जाती है, जिसकी उसे स्कैन के पूर्व जानने की आवश्यकता होती है।

  • आंतरिक (प्रत्यारोपित) डीफिब्रिलेटर या पेसमेकर,
  • कान (कॉक्लियर) इम्प्लांट,
  • सर्जिकल क्लिप जैसे मस्तिष्क विस्फार (Brain Aneurysms) के लिए इस्तेमाल की जाने वाली क्लिप।
  • कृत्रिम हृदय वाल्व,
  • मेडिसिन इन्फ्यूज़न पोर्ट,
  • धातु के जोड़ या कृत्रिम हाथ-पैर,
  • प्रत्यारोपित किया हुआ तंत्रिका उत्तेजक,
  • पिन, पेच, प्लेट, स्टेंट्स और सर्जिकल स्टेपल।

अगर कभी मरीज की आंख या शरीर में धातु का छोटा से छोटा टुकड़ा भी घुसा हो तो भी इस बारे में रेडियोग्राफर को जरूर बता दें। कुछ मामलों में एमआरआई से पहले एक्स-रे स्कैन करवाने की जरूरत होती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके की मरीज एमआरआई करवाने के लिए सुरक्षित है या अथवा नहीं।

कई बार मरीज के शरीर में 'इंट्रानर्वस' की मदद से 'कोन्ट्रास्ट' इंजेक्ट किया जाता है ताकि कुछ निश्चित ऊतकों की तस्वीर और स्पष्ट आ सके।

रेडियोलोजिस्ट एमआरआई स्कैन के दौरान मरीज से बात कर सकते हैं और स्कैन प्रक्रिया के बारे बता सकते हैं।

एमआरआई स्कैन के दौरान क्या करना चाहिए?

एमआरआई स्कैन करने से पहले मरीज की बांह की नस में एक विशेष कोन्ट्रास्ट डाई का इस्तेमाल किया जाता है। इस डाई की मदद से डॉक्टर शरीर की अंदरूनी संरचना को अच्छे से देख पाते हैं। एमआरआई के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डाई को 'गैडोलीनियम' (Gadolinium) कहा जाता है। इससे मुंह में धातु जैसा स्वाद हो जाता है।

स्कैन के दौरान मरीज के एक मेज जैसी चीज पर लेटाया जाता है, जो एमआरआई मशीन के अंदर जाती है। इस टेस्ट के दौरान मरीज को हिलने से रोकने के लिए पट्टियों की आवश्यकता भी पड़ सकती है। एमआरआई के दौरान जरूरत पड़ने पर पूरे शरीर को भी मशीन के अंदर डाल दिया जाता है। जरूरत ना होने पर जरूरी पार्ट को ही मशीन के अंदर डाला जाता है।

एमआरआई स्कैनर अंदर जाने के बाद, एमआरआई के तकनीशियन मरीज के साथ इंटकॉम की मदद से बात करते हैं और यह सुनश्चित करते हैं कि मरीज कम्फर्टेबल है। जब तक मरीज तैयार (मानसिक रूप से) नहीं होता, तब तक स्कैन शुरू नहीं किया जाता।

स्कैन शुरू होने के दौरान मरीज को चुप और स्थिर रहना होता है। क्योकिं हिलने-डुलने से स्कैन की तस्वीरें में गड़बड़ हो सकती है। क्योंकि कैमरा हिलती हुई वस्तु की ही तस्वीर ले लेता है। स्कैनर का शोर काफी तेज होता है। अगर स्कैन चलने के दौरान भी मरीज को कंम्फर्टेबल ना हो तो वे बीच में भी इंटरकोम की मदद से तकनीशियन से बात कर सकते हैं और रोकने का अनुरोध भी कर सकते हैं।

एमआरआई मशीन शरीर के अंदर एक शक्तिशाली चुंबकिया क्षेत्र बनाता है। कंप्यूटर एमआरआई से सिग्नल प्राप्त करता है और उनको जोड़कर तस्वीरें तैयार करता है। हर तस्वीर में शरीर की एक पतली परत बनती है।

टेस्ट के दौरान मरीज को एक उंची आवाज में शोर सुनाई दे सकता है।  यह उंची आवाज मशीन द्वारा शरीर के अंदर की तस्वीरें लेने के लिए एनर्जी पैदा करती है। इस शोर से बचने के लिए डॉक्टर इयर प्लग या हैडफोन दे सकते हैं।

टेस्ट के दौरान एक सनसनी (Twitching) महसूस हो सकती है, यह तब होता है जब एमआरआई शरीर के अंदर की नसों को उत्तेजित करती है। यह सामान्य है और इसके बारे में चिंता करने की कोई बात नहीं है।

एमआरआई स्कैन के बाद क्या करना चाहिए?

एमआरआई टेस्ट होने के बाद इसका कोई शरीर पर प्रभाव नहीं होता। टेस्ट पूरा होने के बाद आप तुरंत अपने रोजाना की गतिविधियां कर सकते हैं। टेस्ट के दौरान आई हुई तस्वीरों की जांच विशेषज्ञ (Radiologist) द्वारा की जाती है। उसके बाद रेडियोलोजिस्ट रिपोर्ट को डॉक्टर के पास भेज देते हैं।

एमआरआई स्कैन के क्या जोखिम हो सकते हैं?

एमआरआई एक दर्दरहित और सुरक्षित प्रक्रिया होती है। जिन लोगों को 'क्लौस्ट्रफ़ोबिया' की समस्या है उनके लिए यह थोड़ा असुविधाजनक (Claustrophobia) हो सकता है। लेकिन रेडियोग्राफर समर्थन की मदद से ज्यादातर लोगों के लिए यह करना संभव हो जाता है। स्कैन के दौरान पैरों की तरफ से स्कैनर में जाना शायद थोड़ा आरामदायक हो सकता है, हालांकि हर बार यह संभव नहीं होता।

एमआरआई स्कैन में एक्स-रे रेडिएशन को शरीर के संपर्क में लाना शामिल नहीं होता। इसका मतलब कि जो लोग विशेष रूप से रेडिएशन के प्रभावों के लिए कमजोर होते हैं, जैसे गर्भवती महिलाएं और बच्चें, वे जरूरत पड़ने पर एमआरआई स्कैन करवा सकते हैं।

हालांकि, हर किसी का एमआरआई स्कैन नहीं हो सकता, उदाहरण के लिए जिन लोगों में अंग प्रत्यारोपण किया गया है, उनके लिए यह टेस्ट नहीं होते हैं। जैसे की पेसमेकर (यह एक बैटरी से चलने वाला उपकरण, जो दिल की अनियंत्रित धड़कनों को नियंत्रण में रखता है) लगे व्यक्ति का।

एमआरआई स्कैन के दौरान प्रयुक्त चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों के कारण मानव शरीर के लिए जोखिम पैदा हो सकता है या नहीं, इस पर काफी रिसर्च की गई है। ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिला जो जोखिम का कारण बता सके। इसका मतलब है कि एमआरआई अब तक उपलब्ध प्रक्रियाओं में से सबसे सुरक्षित प्रक्रिया है। 

एमआरआई स्कैन के परिणाम का क्या मतलब होता है?

एक विशेष प्रशिक्षित डॉक्टर, जिसे रेडियोलोजिस्ट कहा जाता है, वह रिपोर्ट के रिजल्ट को पढ़ता है और उसे संबंधित डॉक्टर के पास भेज देता है। उसके बाद डॉक्टर मरीज को जाँच रिपोर्ट का रिजल्ट समझा देते हैं और आगे क्या करना है, उसकी जानकारी देते हैं।

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