बीते गुरुवार को दुनियाभर में किडनी दिवस मनाया गया। इसके अगले ही दिन यानी शुक्रवार को किडनी की बीमारी के संबंध में एक महत्वपूर्ण खबर आई। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी चर्चित पत्रिका ‘ऐनल्ज ऑफ सर्जरी’ की रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने ‘नाइट्रोसिलेटिंग’ नामक कंपाउंड के जरिये दान की गई किडनी को अधिक समय तक संरक्षित रखने का विकल्प तलाशने का दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं की इस कामयाबी के बाद न सिर्फ किडनी के प्रत्यारोपण के लिए अधिक समय मिल सकेगा, बल्कि डोनर की किडनी की क्षमता को भी बेहतर किया जा सकेगा।

शोधकर्ताओं का यह दावा सच निकला तो किडनी को अधिक समय तक संरक्षित किए जाने की वजह से इसके ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया भी आसान हो सकेगी, क्योंकि डॉक्टरों के पास ऑपरेशन के लिए अतिरिक्त समय होगा। फिलहाल दान की गई किडनी को लंबे समय तक जीवित रखने (संरक्षित) में थोड़ी मुश्किल आती है। यही कारण है कि 20 प्रतिशत अंग ट्रांसप्लांट से पहले खराब हो जाते हैं। myUpchar से जुड़े डॉक्टरों के अनुसार, ट्रांसप्लांट से पहले किडनी को 24 घंटे तक जीवित (कोल्ड स्टोरेज में) रखा जा सकता है। हालांकि नए शोध के बाद इस अवधि को बढ़ाने का दावा किया गया है। 

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किडनी रोग के मामले कितने गंभीर
भारत सरकार के नेशनल हेल्थ पोर्टल (एनएचपी) की साल 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व में हर दस लोगों में से एक व्यक्ति किडनी रोग से पीड़ित है। किडनी संबंधित रोग मौजूदा समय में कितने गंभीर और व्यापक हैं इसका अंदाजा रिपोर्ट में बताए गए आकंड़ों से पता चलता है। एनएचपी के मुताबिक, विश्वभर में लगभग 85 करोड़ लोग किडनी से जुड़ी अलग-अलग प्रकार की बीमारी से ग्रसित हैं। एक अनुमान की मानें तो वैश्विक स्तर पर हर साल किडनी खराब होने के चलते लगभग 17 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है।

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किडनी रोग क्या है?
किडनी संबंधी कई प्रकार के रोगों के समूह को किडनी की बीमारी कहा जाता है। जब किडनी किसी कारण से खराब हो जाती है या काम करना बंद कर देती है तो इस स्थिति को किडनी की बीमारी कहा जाता है। जब किडनी की बीमारी हो जाती है, तो किडनी प्रभावी रूप से खराब द्रव (वेस्ट फ्लूड) को शरीर से बाहर नहीं निकाल पाती। इससे शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन भी खराब हो जाता है। शरीर में अपशिष्ट द्रव जमा होने से शरीर का संतुलन खराब हो जाता है। इस कारण शरीर में कुछ लक्षण महसूस होने लगते हैं।

किडनी रोग के लक्षण
किडनी की बीमारी के लक्षण और संकेतों में खुजली, हाई ब्लड प्रेशर, मांसपेशियों में मरोड़ या टखनों और पैरों में सूजन जैसी समस्याएं आ सकती हैं। किडनी संबंधी रोगों का पता लगाने के लिए डॉक्टर खून टेस्ट  और पेशाब टेस्ट करते हैं।

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किडनी रोग के प्रकार
किडनी की बीमारी में कई रोग शामिल हैं, जैसे किडनी की पथरीकिडनी का कैंसरकिडनी की सूजन, पॉलिसिस्टिक किडनी डिजीज और मूत्र मार्ग में संक्रमण आदि। यदि किसी व्यक्ति को को डायबिटीजहाई ब्लड प्रेशर या परिवार में पहले से किसी को किडनी संबंधी बीमारी हैं, तो ऐसे में उस व्यक्ति में किडनी संबंधी रोग होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं।

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