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एंडोस्कोपी (Endoscopy) एक ऐसी परीक्षण प्रक्रिया होती है, जिसकी मदद से शरीर के अंदरूनी अंगों और वाहिकाओं आदि को देखा व उनको संचालित किया जाता है। शरीर के अंदरूनी अंगों को देखने के लिए इस प्रक्रिया में एक विशेष उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है। इस उपकरण की मदद से शरीर के अंदर कोई बड़ा चीरा लगाये बिना ही अंदरूनी अंगों को देखा जा सकता है।

  1. एंडोस्कोपी क्या होता है? - What is Endoscopy in Hindi?
  2. एंडोस्कोपी क्यों किया जाता है - What is the purpose of Endoscopy in Hindi
  3. एंडोस्कोपी से पहले - Before Endoscopy in Hindi
  4. एंडोस्कोपी के दौरान - During Endoscopy in Hindi
  5. एंडोस्कोपी के बाद - After Endoscopy in Hindi
  6. एंडोस्कोपी के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of Endoscopy in Hindi
  7. एंडोस्कोपी के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of Endoscopy mean in Hindi
  8. एंडोस्कोपी कब करवाना चाहिए - When to get Endoscopy in Hindi

एंडोस्कोपी क्या है?

एंडोस्कोपी एक प्रक्रिया होती है, जिसमें एक 'एंडोस्कोप' नाम के उपकरण का इस्तेमाल करते हुऐ शरीर के अंदरूनी अंगों की जांच की जाती है।

एंडोस्कोप एक लंबी, पतली और लचीली ट्यूब होती है, जिसके एक सिरे पर एक लाइट और एक कैमरा लगा होता है। कैमरा की मदद से ली गई तस्वीरें कंप्यूटर स्क्रीन पर भेजी जाती हैं।

कई विभिन्न प्रकार के एंडोस्कोपी हैं। नीचे कुछ प्रकार की एंडोस्कोपी के नाम तथा उनका प्रयोग कहां किया जाता है आदि के बारे में बताया गया है -

  • अर्थरोस्कोपी (Arthroscopy) – जोड़ों के लिए (और पढ़ें - कंधे की अर्थरोस्कोपी)
  • ब्रोंकोस्कोपी (Bronchoscopy) – फेफड़ों के लिए,
  • कोलनोस्कोपी (Colonoscopy) और सीमोइडोस्कोपी (Sigmoidoscopy) – बड़ी आंत के लिए,
  • सिस्टोस्कोपी (Cystoscopy) और यूटेरोस्कोपी (Ureteroscopy) - मूत्र प्रणाली के लिए,
  • लेप्रोस्कोपी (Laparoscopy) – पेट व पेल्विस के लिए,
  • उपरी गेस्ट्रोइंटेस्टिनल एंडोस्कोपी – इसोफेगस और पेट के लिए

एंडोस्कोपी किस लिए किया जाता है?

एंडोस्कोपी का इस्तेमाल निम्न के लिए किया जाता है:

  • असाधारण लक्षणों की छान-बीन करने के लिए,
  • किसी विशेष प्रकार की सर्जरी करने में मदद करने के लिए,
  • एंडोस्कोपी की मदद से शरीर से ऊतक का सैंपल भी निकाला जा सकता है, जिसका विश्लेषण किया जाता है। इस प्रक्रिया को बायोप्सी के नाम से जाना जाता है।
  • पेट के अंदर खून बहने की समस्या की जांच और उसका इलाज करने के लिए,
  • पाचन तंत्र में कुअवशोषण के कारण को ढूंढने के लिए,
  • एक्स रे में दिखाई दे रही छोटी आंतों की समस्याओं की पुष्टी करने के लिए भी एंडोस्कोपी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • सर्जरी के दौरान, स्वस्थ ऊतकों को कम से कम नुकसान पहुंचाते हुऐ घाव को ढूंढना और बाहर निकालने के लिए एंडोस्कोपी की मदद लेना।
  • कैंसर पर नजर रखना और उसकी रोकथाम करना, उदाहरण के लिए कोलन कैंसर पर नजर रखने के लिए डॉक्टर कोलनोस्कोपी नाम की एंडोस्कोपी प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं।
  • रोग लक्षणों के कारणों की जांच करने और उनका पता लगाने के लिए। डॉक्टर द्वारा चुना हुआ एंडोस्कोपी का प्रकार, मरीज के शरीर के उस भाग पर निर्भर करता है, जिसकी जांच की जरूरत होती है।

उपरोक्त के साथ ही साथ निम्न उपचारों में इसका इस्तेमाल किया जाता है:-

  • छोटे चीरे की मदद से सर्जरी करना, जिसे लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कहा जाता है।
  • लेजर थेरेपी, इसमें कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए शक्तिशाली किरण (Powerful beam) का इस्तेमाल किया जाता है।
  • फोटो डायनामिक सर्जरी, इस प्रक्रिया में ट्यूमर में लाइट के प्रति संवेदनशील पदार्थ को इंजेक्शन आदि के द्वारा डाला जाता है और फिर उसे लेजर की मदद से नष्ट किया जाता है।

(और पढ़ें - लैब टेस्ट)

एंडोस्कोपी से पहले क्या किया जाता है?

  • एंडोस्कोपी को आमतौर पर अस्पताल में ही किया जाता है। एंडोस्कोपी के कुछ प्रकार ऐसे भी हो सकते हैं, जिनमें प्रक्रिया शुरू करने से पहले अधिक तैयारियां करनी पड़ती हैं। उदाहरण के लिए, शरीर के जिस भाग का परीक्षण किया जाना है उस पर निर्भर करते हुऐ मरीज को एंडोस्कोपी से पहले खाने व पीने से परहेज करना पड़ सकता है। डॉक्टर मरीज को इस बारे में सलाह भी देते हैं कि प्रक्रिया शुरू होने से कितने समय पहले खाने से परहेज करना है और मरीज तरल पदार्थों का सेवन कर सकते हैं या उनका भी परहेज रखना है।
  • अगर बड़ी आंत में कोलोनोस्कोपी परीक्षण किया जाना है, तो डॉक्टर प्रक्रिया से पहले मरीज को लैक्सेटिव (जुलाब की गोली) दे सकते हैं, जिससे उनकी आंतों से मल अच्छे से साफ हो जाता है।
  • अगर मरीज पहले ही किसी प्रकार की दवा ले रहे हैं, तो प्रक्रिया शुरू होने के कुछ सीमित समय से पहले उन्हें दवाओं का सेवन बंद करना पड़ सकता है या दवा लेने का समय बदलना पड़ सकता है। हालांकि, डॉक्टर से दवाएं चेक करवाए बिना और जब तक डॉक्टर उनको छोड़ने के लिए ना कहें तबतक, दवाएं लेना बंद नहीं करना चाहिए। कुछ लोगों को एंडोस्कोपी प्रक्रिया से पहले एंटीबायोटिक दवाएं भी लेनी पड़ती हैं।

(और पढ़ें - एंटीबायोटिक दवा लेने से पहले ज़रूर रखें इन बातों का ध्यान)

एंडोस्कोपी के दौरान क्या किया जाता है?

  • इस प्रक्रिया में रातभर अस्पताल में रुकने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि यह प्रक्रिया पूरा होने में 1 घंटे तक का ही समय लेती है।
  • एंडोस्कोपी प्रक्रिया आमतौर पर दर्दनाक नहीं होती, कुछ लोगों को इसके दौरान हल्की तकलीफ अनुभव हो सकती है, (गले में दर्द या खराश के समान तकलीफ)
  • एंडोस्कोपी आमतौर पर मरीज की सचेत (Conscious) अवस्था में की जाती है। किसी विशिष्ट क्षेत्र को सुन्न करने के लिए लोकल अनेस्थेटिक (Local anesthetic) दिया जाता है। ये आम तौर से गले को सुन्न करने के लिए स्प्रे या लॉजेंज (Lozenge) के रूप में होता है।
  • मरीज को रिलेक्स महसूस करवाने के लिए सीडेटिव (Sedative) दी जा सकती है, जिससे मरीज को कम जानकारी रहती है कि उसके आस पास क्या हो रहा है।
  • एंडोस्कोप बहुत ही सावधानीपूर्वक मरीज के शरीर में डाला जाता है, एंडोस्कोप को ठीक उसी जगह भेजा जाता है, जहां का परीक्षण करना होता है। उदाहरण के तौर पे इसको शरीर के निम्न भागों में डाला जा सकता है -
    • गला
    • गुदा – गुदा द्वार के मल को पहले शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
    • मूत्रमार्ग – पहले मूत्र को शरीर से निकाल दिया जाता है।

एंडोस्कोपी के बाद क्या किया जाता है?

  • एंडोस्कोपी होने के बाद मरीज को कम से कम 1 घंटा लगातार आराम करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से बेहोशी आदि की दी गई दवाओं का असर उतर जाता है। ज्यादातर मामलों में मरीज को एक घंटा या उससे अधिक समय के लिए निगरानी में रखा जाता है।
  • अगर मरीज को जनरल अनेस्थेटिक (General anaesthetic) जैसी दवा दी गई है, तो उसे लंबे समय तक निगरानी में रखा जाता है।
  • जरूरत पड़ने पर मरीज को दर्द निवारक दवाएं भी दी जाती हैं।
  • अगर सीडेटिव दवाओं का असर बना हुआ है, तो अस्पताल से घर तक ले जाने के लिए मरीज को एक साथी की जरूरत पड़ सकती है।
  • अगर मूत्राशय की जांच करने के लिए एंडोस्कोपी का इस्तेमाल किया गया है, तो जाँच प्रक्रिया के 24 घंटे बाद तक मरीज के पेशाब में खून आ सकता है। यह अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन अगर 24 घंटे के बाद भी आपको यह समस्या महसूस हो रही है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात करनी चाहिए।

(और पढ़ें - मूत्र मार्ग संक्रमण)

एंडोस्कोपी में क्या जोखिम हो सकते हैं?

एंडोस्कोपी आमतौर पर एक सुरक्षित प्रक्रिया होती है और इसमें गंभीर जटिलताओं के जोखिम काफी कम होते हैं।

संभावित जटिलताएं जिनमें शामिल हैं -

  • एंडोस्कोपी द्वारा शरीर के जिस भाग का परीक्षण किया गया था, उसमें संक्रमण होना – इसमें एंटीबायोटिक्स के साथ उपचार करने की आवश्यकता हो सकती है।
  • अंदरूनी अंगों में छेद या खरोंच लगना (Perforation) या अत्याधिक खून बहना – क्षतिग्रस्त अंग या ऊतक की मरम्मत करने के लिए सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है। कभी-कभी खून चढ़ाने की भी जरूरत पड़ जाती है। (और पढ़ें - रक्तदान के फायदे)
  • अत्याधिक खून बहना (Haemorrhage)
  • बेहोशी की दवा (Anaesthesia) से एलर्जिक रिएक्शन होना,
  • बेहोश करने वाली दवा का अधिक असर हो जाना (Over-sedation) - हालांकि, बेहोश करने की क्रिया हमेशा आवश्यक नहीं होती।
  • जाँच प्रक्रिया होने के बाद कुछ समय तक फूला हुआ (Bloated) महसूस होना। (और पढ़ें - पेट फूलने के उपाय)
  • लोकल अनेस्थेटिक के कारण प्रक्रिया होने के कुछ घंटों तक गला सुन्न रहना।

अगर निम्न में से कोई लक्षण महसूस हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर को इस बारे में सूचना देनी चाहिए -

एंडोस्कोपी के रिजल्ट का क्या मतलब हो सकता है?

यह मरीज की परिस्थिति पर निर्भर करता है कि एंडोस्कोपी के रिजल्ट कब प्राप्त होते हैं। उदाहरण के लिए अगर डॉक्टर अल्सर की जांच करने के लिए एंडोस्कोपी का इस्तेमाल करते हैं, तो प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद ही रिजल्ट का पता चल सकता है। अगर एंडोस्कोपी का इस्तेमाल ऊतक का सैंपल लेने (बायोप्सी) के लिए किया जाता है, तो रिजल्ट का पता करने के लिए कुछ दिन इंतजार करना पड़ सकता है। एंडोस्कोपी का रिजल्ट कितने समय में मिल सकता है, इसके बारे में आप डॉक्टर से भी बात कर सकते हैं।

एंडोस्कोपी कब करवाना चाहिए?

कुछ ऐसे लक्षण जिनकी जांच करने के लिए अक्सर एंडोस्कोपी का इस्तेमाल किया जाता है, वे निम्न हैं:

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