सोते समय खर्राटे आना सामान्य होता है, लेकिन कुछ मामलों में ऐसा स्लीप एपनिया के कारण भी हो सकता है. इस स्थिति में सोते समय व्यक्ति के गले के टिश्यू रिलैक्स होकर लटक जाते हैं. खर्राटे से छुटकारा दिलाने में योगासन फायदेमंद हो सकते हैं. सिंहासन व भुजंगासन जैसे योगासन करने से मोटापे को कम करने और गले की मांसपेशियों में मजबूती आती है, जिससे खर्राटे ठीक होने में मदद मिलती है.

आज इस लेख में आप खर्राटे के लिए योगासन के फायदे के बारे में जानेंगे -

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  1. खर्राटे के लिए योगासन के फायदे
  2. सारांश
योगासन से ठीक करें खर्राटे के डॉक्टर

खर्राटे के लिए किए जाने वाले योगासन से अलग-अलग तरह के फायदे हैं, जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि व्यक्ति कौन-सा योगासन कर रहा है. जैसे भुजंगासन करने से वायुमार्ग साफ होता है और खर्राटे लेने की स्थिति में सुधार आता है. आइए, खर्राटे के लिए योगासन के फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं -

भुजंगासन

भुजंगासन को कोबरा पोज भी कहा जाता है, जो गले की मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ शरीर के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों को भी मजबूती प्रदान करता है. यह वायु मार्ग को साफ करने में मदद करता है. इससे खर्राटे की स्थिति में सुधार हो सकता है.

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नौकासन

नौकासन पेट की मांसपेशियों को स्ट्रेच करने के साथ ही उनमें खिंचाव लाने के साथ ही उन्हें रिलैक्स भी करता है. इस तरह से यह योगासन करने से वजन को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है. चूंकि मोटापा खर्राटे लेने का एक कारण है, तो इस तरह से ये योगासन खर्राटे के लिए फायदेमंद हो सकता है.

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सिंघासन

कई बार चेस्ट में कंजेशन होना भी खर्राटे का कारण हो सकता है. ऐसी स्थिति में सिंघासन करने से चेहरे, जीभ, जबड़े और गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव आता है. साथ ही उनकी टोनिंग होती है. यह योगासन चेस्ट कंजेशन को ठीक करने में अहम भूमिका निभाता है और खर्राटे को दूर करने में सहायक हो सकता है.

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धनुरासन

यह अस्थमा के रोगियों के लिए बेहतरीन योगासन है. धनुरासन पीठ को एक सीध में लाने में मददगार है, जिससे सांस लेने में सुधार आता है और नेजल पैसेज से हवा आसानी से पास होती है. इस तरह से यह योगासन खर्राटे के लिए फायदेमंद हो सकता है. 

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नाड़ी शोधन प्राणायाम

इसे आम भाषा में ब्रीदिंग एक्सरसाइज भी कहा जाता है, जो रेस्पिरेटरी एलर्जी को ठीक करने के लिए बढ़िया है. यह नर्वस और रेस्पिरेटरी सिस्टम को बेहतर करके उनमें ऑक्सीजन का संचार करता है. नाड़ी शोधन प्राणायाम के नियमित अभ्यास से पल्स रेट सामान्य होने और सांस रोकने के समय में बढ़ोत्तरी पाई गई है. इस तरह से यह खर्राटे को ठीक करने में मददगार है.

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खर्राटे में सुधार लाने और इसे ठीक करने में भुजंगासन, सिंहासन व नौकासन करने से अलग-अलग फायदे पाए गए हैं. इनमें से कुछ गले की मांसपेशियों में खिंचाव लाते हैं, तो कुछ मोटापे को कम करने में मददगार हैं और अंततः खर्राटे को ठीक करने में मददगार हैं. बस ध्यान रहे कि शुरुआत में ये योगासन विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें.

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Dr. Smriti Sharma

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