नींद से जुड़ी कई समस्याएं लोगों को परेशान करती हैं. इसमें खर्राटे आना भी सामान्य है. सोते समय कई लोग तेज-तेज आवाज निकालते हैं, जिसे खर्राटे कहा जाता है. कभी-कभी खर्राटे आना गंभीर समस्या नहीं होती, लेकिन ये नींद को बाधित कर सकते हैं. वहीं, कई बार खर्राटे मोटापा, साइनस और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के कारण भी आ सकते हैं. अधिकतर लोगों को लगता है कि खर्राटे का इलाज नहीं है, इसलिए इसे रोका नहीं जा सकता है, जबकि खर्राटों की समस्या को दूर करने के लिए पुनर्नवादि क्वाथ व घनवटी जैसी आयुर्वेदिक दवाइयां प्रभावी साबित हो सकती हैं.

आज इस लेख में आप खर्राटे की आयुर्वेदिक दवाइयों और इलाज के बारे में विस्तार से जानेंगे -

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  1. खर्राटे आना क्या हैं?
  2. खर्राटों में फायदेमंद आयुर्वेदिक दवा
  3. तिक्त रस
  4. खर्राटे में फायदेमंद आयुर्वेदिक इलाज
  5. सारांश
खर्राटे की आयुर्वेदिक इलाज व दवा के डॉक्टर

खर्राटे लेना नींद से संबंधित एक समस्या है. सोते समय सांसों के साथ तेज आवाज आने को ही खर्राटे कहा जाता है. यह आवाज नाक या मुंह से आ सकती है. सोने के बाद किसी भी समय खर्राटे शुरू हो सकते हैं और कभी भी बंद हो सकते हैं. वैसे तो खर्राटे की समस्या किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है, लेकिन पुरुषों और अधिक वजन वाले लोगों यह ज्यादा परेशान करती है. वहीं जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, खर्राटे भी अधिक आने लगते हैं. जो लोग खर्राटे मारते हैं, उन्हें जागने के बाद गले में जलन महसूस हो सकती है.

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कई लोग खर्राटों को गंभीरता से नहीं लेते और उसका इलाज नहीं करवाते. उन्हें लगता है कि यह एक सामान्य प्रतिक्रिया है और इसे ठीक नहीं किया जा सकता है, जबकि आयुर्वेद में खर्राटे का इलाज पूरी तरह से संभव है. कुछ आयुर्वेदिक दवाइयों की मदद से खर्राटे की समस्या को कम किया जा सकता है.

इस संबंध में एनसीबीआई (नेशन सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी) ने इस संबंध में एक केस स्टडी को अपनी साइट पर पब्लिश किया है. इसमें उन आयुर्वेदिक दवाओं व इलाज का जिक्र किया गया है, जिसे खर्राटों से ग्रस्त व्यक्ति को दिया गया था. रिसर्च में पाया गया कि इन दवाओं से व्यक्ति के खर्राटों की समस्या कुछ कम हुई थी. यहां हम उन्हीं आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें बिना आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के नहीं लेना चाहिए -

पुनर्नवादि क्वाथ

अगर किसी को खर्राटे आते हैं, तो वो पुनर्नवादि क्वाथ का सेवन कर सकता है. आयुर्वेद में इस दवा को खर्राटे रोकने के लिए प्रभावी बताया गया है. इसे खाना खाने के बाद गुनगुने पानी के साथ ले सकते हैं. रोजाना पुनर्नवादि क्वाथ लेने से खर्राटे की समस्या से धीरे-धीरे छुटकारा मिल सकता है.

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घनवटी

आयुर्वेद में घनवटी का उपयोग कई समस्याओं का इलाज करने के लिए किया जाता है. घनवटी को सोते समय आने वाले खर्राटों से छुटकारा दिलाने में भी कारगर माना जा सकता है. रिसर्च में भी यह साबित हुआ है कि पुनर्नवादि क्वाथ के साथ घनवटी लेने से खर्राटों को बंद किया जा सकता है. इसलिए, अगर किसी को खर्राटे आते हैं, तो वो घनवटी को खाना खाने के बाद गुनगुने पानी के साथ रोजाना ले सकता है.

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गुग्गुल तिक्त घृत

इस शोध में साबित हुआ है कि 7 दिन तक रोजाना 30 मिलीलीटर गुग्गुल तिक्त घृत लेने से खर्राटों को कम किया जा सकता है. अगर किसी व्यक्ति को खर्राटे आते हैं, तो वे गुग्गुल तिक्त घृत को गर्म पानी के साथ ले सकता है. यह पाचन को भी बेहतर बनाता है. रिसर्च के अनुसार गुग्गुल तिक्त घृत को रोजाना खाली पेट लिया जा सकता है.

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तिक्त रस स्वाद में कड़वा होता है. इसे हर्बल दवाइयों के साथ लिया जा सकता है. एनसीबीआई की ओर से उपलब्ध रिसर्च में बताया गया है कि हर्बल दवाइयों के साथ तिक्त रस लेने से मोटापे को कम करने में मदद मिल सकती है. जब वजन कम होता है, तो खर्राटे आने भी कम हो सकते हैं. इतना ही नहीं यह डायबिटीज को भी कम करने में मदद कर सकता है.

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आइए, अब जानते हैं कि दवाओं के साथ किस प्रकार के आयुर्वेदिक इलाज को करने से खर्राटे कम हो सकते हैं. इस इलाज के बारे में एनसीबीआई की साइट पर पब्लिश रिसर्च में बताया गया है -

अभ्यंग तेल से मालिश

अभ्यंग दो शब्दों अभि और अंग से मिलकर बना है. इसका मतलब है शरीर की तेल से मालिश करना. अभ्यंग एक प्रकार की आयुर्वेदिक मालिश है. इसमें गुनगुने तेल में कुछ जड़ी-बूटियां मिलाकर शरीर की मालिश की जाती है. रिसर्च के दौरान खर्राटे से परेशान व्यक्ति को आयुर्वेदिक दवाएं देने के साथ-साथ तेल से मालिश भी की गई.

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विरेचन क्रिया

विरेचन क्रिया के द्वारा अपशिष्ट पदार्थों को मल मार्ग के माध्यम से शरीर से बाहर निकाला जाता है. इससे शरीर में जमा चर्बी भी कम होती है. इससे वजन कम होने में मदद मिलती है और खर्राटों से भी छुटकारा मिल सकता है. इस शोध के दौरान दवाइयां लेने के 2 महीने बाद व्यक्ति को विरेचन क्रिया करवाई गई थी.

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बस्ती क्रिया

बस्ती क्रिया पंचकर्म क्रियाओं में सबसे अधिक उपयोगी मानी जाती है. बस्ती क्रिया से वजन को कम किया जा सकता है. साथ ही बस्ती क्रिया करने से स्लीप एपनिया, श्वसन, मोटापा और खर्राटों का इलाज भी हो सकता है. इसलिए, खर्राटे से परेशान व्यक्ति का आयुर्वेदिक उपचार करते समय बस्ति क्रिया भी दी गई थी.

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अगर आपको भी सोते समय खर्राटे आते हैं, तो आप डॉक्टर के परामर्श पर इन आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन कर सकते हैं. इन दवाइयों की मदद से वजन कम होगा और खर्राटे भी धीरे-धीरे बंद होने लगेंगे. वहीं, अगर पूरी रात खर्राटे आते हैं, इसकी वजह से नींद भी होती है या सांस लेने में दिक्कत आती है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर खर्राटों के इलाज करवाना चाहिए.

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