खर्राटे - Snoring in Hindi

Dr. Nadheer K M (AIIMS)MBBS

June 28, 2017

June 21, 2022

खर्राटे
खर्राटे

क्या है खर्राटे?

अक्सर सोते समय कुछ व्यक्ति सांस लेते और छोड़ते समय कठोर व छरछरी आवाज निकालते हैं, उसको खर्राटे कहा जाता है। खर्राटे की आवाज तब पैदा होते है, जब हवा का बहाव गले की त्वचा में स्थित ऊतकों में कंपन पैदा कर देता है। खर्राटे सांस अंदर लेते समय आते हैं। खर्राटों की आवाज नाक या मुंह, किसी से भी आ सकती है। यह आवाज सोने के बाद किसी भी समय शुरू और बंद हो सकती हैं।

अधिकांश लोग सोते समय कभी ना कभी खर्राटे ले ही लेते हैं। ज्यादातर पुरूषों में खर्राटे मारने की प्रक्रिया सामान्य मानी जाती है। आमतौर पर खर्राटों की समस्या का कारण अनुवांशिक होता है। यदि परिवार का एक सदस्य खर्राटे मारता है तो अन्य सदस्यों को यह समस्या होने की अधिक संभावना होती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ खर्राटे सामान्य रूप से होने लग जाते हैं। लगभग 40 प्रतिशत वयस्क पुरूष और 24 प्रतिशत वयस्क महिलाओं में खर्राटे की समस्या देखी जाते हैं। 70 साल की उम्र के बाद पुरूषों में खर्राटे आने की प्रक्रिया कम हो जाती है।

पीठ के बल सोने से खर्राटे आने की संभावना अधिक हो जाती है। शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करने से गले की मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं। इससे भी खर्राटे आने लग जाते हैं। जुकाम या अन्य एलर्जी के कारण बलगम का जमाव भी खर्राटों का कारण बन सकता है।

खर्राटे की आवाज बहुत अधिक हो सकती है, यहां तक कि खुद खर्राटे मारने वाला व्यक्ति उनसे जाग सकता है। अधिकांश मामलों में लोगों को खुद पता नहीं होता कि वे खर्राटे मारते हैं। जो व्यक्ति खर्राटे मारते हैं, उन्हें नींद से जागने के बाद सूखा मुंह और गले में जलन का एहसास हो सकता है।

हल्के खर्राटे नींद में कोई बाधा नहीं डालते, ज्यादा तेज खर्राटों के कारण शरीर में काफी समस्याएं हो सकती हैं जैसे ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया, नींद में कमी आदि। इन समस्याओं के अलावा खर्राटे कई प्रकार की बिमारीयों के भी जोखिम पैदा कर देते हैं जैसे, हृदय रोग, स्ट्रोक, डायबिटिज और अन्य प्रकार की कई बिमारीयां।

खर्राटे मारना कितनी आम बात है?

खर्राटे कोई भी व्यक्ति बार-बार या कभी कभार मार सकता है। अक्सर जो व्यक्ति नियमित रूप से खर्राटे नहीं मारते, उनको किसी वायरल बीमारी के बाद, शराब पीकर सोने के बाद या किसी अन्य दवाई का सेवन करने के बाद उनको खर्राटे मारने की आदत लग सकती है।

खर्राटों का शारीरिक बनावट से कोई लेना-देना नहीं होता। अक्सर हमें लगता है कि, उंचे खर्राटे एक मोटी गर्दन वाला मोटा व्यक्ति ही मार सकता है, लेकिन एक छोटा और पतला आदमी जिसकी गर्दन पतली हो, वह भी उतने ही उंचे खर्राटे मार सकता है। सामान्य रूप से, जैसे उम्र और वजन बढ़ता जाता है खर्राटें मारने की संभावना भी बढ़ जाती है।

ऐसा अनुमान लगाया जाता है, कि कुल व्यस्क लोगों की आबादी में से 20 प्रतिशत लोग खर्राटों से प्रभावित हैं। जिनमें से 60 प्रतिशत लोग 40 साल से ऊपर की उम्र वाले होते हैं।

खर्राटे के लक्षण - Snoring Symptoms in Hindi

खर्राटे को अक्सर नींद के डिसऑर्डर के साथ जोड़ा जाता है जिसको ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया (ओएसए) कहा जाता हैं। हालांकि, जरूरी नहीं है कि हर कोई जो खर्राटे मारता है उसे ओएसए हो। लेेकिन अगर खर्राटों के साथ निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण दिखें तो डॉक्टर को दिखाने में देरी नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया के संकेत दे सकते हैं -

  1. सोने के दौरान नाक से आवाज आना
  2. दिन में ज्यादा नींद आना
  3. ध्यान देने में कठिनाई
  4. सुबह सिर में दर्द होना
  5. गले में खराश होना
  6. नींद में बेचैनी
  7. रात को सोते समय दम घुटना या हांफना
  8. उच्च रक्तचाप
  9. रात के समय छाती में दर्द (एनजाइना)
  10. खर्राटों में बहुत ज्यादा आवाज (पास सो रहे आपके साथी को परेशानी)
  11. दम घुटने से नींद से जागना

खर्राटे आने का कारण क्या है? - Snoring Causes in Hindi

खर्राटे क्यों आते हैं?

जब मुंह और नाक के अंदर से निकलने वाला रास्ता रूक जाता है या कम हो जाता है तब खर्राटे की स्थिति पैदा होने लग जाती है। हवा का बहाव कम होने के निम्न कारण हो सकते हैं। 

  • नाक के वायुमार्ग में रूकावट: 
    कुछ लोगों को खर्राटे सर्दी के दिनों में या साइनस में संक्रमण के दौरान ही होते हैं। नाक में विकृति होना जैसे सैप्टम (नाक के रास्ते को दो भागों में बांटने वाली दीवार) का टेढ़ापन या नाक के अंदर निकले छोटे-छोटे कणों के कारण भी वायुमार्ग में रुकावटें आ सकती हैं।
     
  • मांसपेशियों की कमजोरी:
    गले और जीभ की मांसपेशियां जब बहुत शांत और शिथिल हो जाएं, तो इनकी मांसपेशियां रास्ते में लटकने लग जाती  हैं और रास्ता रूक जाता है। आम तौर पर यह गहरी नींद, अधिक एल्कोहॉल सेवन या नींद की गोलियां लेने के कारण होता है। उम्र के बढ़ने से मांसपेशियों का सुस्त हो जाना भी एक साधारण बात है।
     
  • गले के ऊतकों में भारीपन: 
    गले को ऊतकों का आकार बढ़ जाना अक्सर मोटापे के कारण होता है। कई बार वे बच्चे जिनके टॉन्सिल या एंडीनोइड्स (adenoids) का आकार बड़ा हो जाता है उनको भी खर्राटे मारने की परेशानियां होने लगती हैं।
     
  • पैलेट या यूव्यूला (uvula) का आकार बढ़ना और नरम होना:
    हमारे गले के बीच में लटक रहे ऊतक को यूव्यूला टीश्यू कहते हैं। यूव्यूला या तलुए का आकार ज्यादा बढ़ने से नाक से गले में खुलने वाला रास्ता बंद हो सकता है।  हवा के संपर्क में आकर यूव्यूला में थर्थराहट उत्पन्न होती हैं जिससे खर्राटे कहा जाता है।

खर्राटे से बचाव - Prevention of Snoring in Hindi

खर्राटों पर रोकथाम के लिए कुछ टिप्स दिए गए हैं:

  1. अगर मोटापा है तो वजन घटाएं: 
    वजन ज्यादा होने से शरीर के अन्य भागों की तरह गले में भी चर्बी ज्यादा हो जाती है। और ऊतकों की ज्यादा संख्या होने से खर्राटे आना शुरू हो सकते हैं। वजन कम करके आप खर्राटे रोक सकते हैं।
     
  2. एक तरफ मुंह करके सोएं:
    खर्राटे मारना सोने के तरीके पर भी निर्भर करता है। पीठ के बल सोने से जीभ पीछे की तरफ सरक जाती है। इससे वायुमार्ग संकुचित हो जाता है, और हवा अवरुद्ध हो जाती है। इसलिए एक तरफ मुंह करके सोना चाहिए। अगर आप हर रोज सुबह खुद को पीठ के बल सोया हुआ पाते हैं, तो उसके लिए अपने पजामें के पीछे, उपरी भाग में सिलाई के साथ एक टेनिस बॉल लगा लें।
     
  3. नेजल स्ट्रिप्स का प्रयोग करना:
    नेजल स्ट्रिप एक चिपकने वाली पट्टी होती है जिसको नाक के उपर से दोनों हिस्सों में लगाया जाता है। नेजल स्ट्रिप की मदद से नाक के अंदर की जगह खुल जाती है और हवा में कोई रुकावट नहीं होती। इसको खर्राटों पर नियंत्रण पाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि जिन लोगों को स्लीप एप्निया जैसी समस्याएं हैं, कई बार उनके लिए ये स्ट्रिप काम नहीं कर पाती।
     
  4. नाक की रुकावटों का इलाज:
    नाक में एलर्जी या नेजल सैप्टम (नाक की बीच वाली दीवार का भाग) के आकार की असामान्यता भी हवा के प्रवाह को कम कर सकती है। ऐसा होने पर हवा की पूर्ति करने के लिए मुंह से सांस लेने के लिए दबाव बढ़ता है जिसके परिणामस्वरूप खर्राटे शुरू हो जाते हैं। नाक में बलगम आदि के जमाव को ठीक करने के लिए, लगातार तीन दिन से ज्यादा स्प्रे डिकॉन्जेस्टेंट (सर्दी जुकाम की दवाइयां) का उपयोग नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी है। लंबे समय तक प्रयोग करने से इन दवाओं का प्रभाव उल्टा पड़ सकता है, जिससे नाक की समस्याएं और ज्यादा बढ़ सकती हैं। अगर कोई व्यक्ति नाक की इस रुकावट से काफी दिनों से परेशान है तो डॉक्टर की मदद से एक बढ़िया स्टेरॉयड स्प्रे का उपयोग कर सकते हैं।
     
  5. एल्कोहॉल और अन्य नशीली दवाओं के सेवन से बचें:
    सोने के कम से कम दो घंटे पहले कोई भी शराब या अन्य सोढ़ा पेय पदार्थ को ना पिएं और डॉक्टर को उसके बाद के अनुभव के बारे में बताएं। शराब व अन्य नशीले पदार्थ तंत्रिका तंत्र पर दबाव डाल देते हैं, जिसके कारण मांसपेशियां फैलने लग जाती हैं। इनमें शामिल गले के ऊतक भी फैलने लगते हैं और खर्राटें आने का कारण बनते हैं। (और पढ़ें - शराब की लत से छुटकारा पाने के तरीके)
     
  6. धूम्रपान छोड़ें:
    धूम्रपान में कमी खर्राटों होने के कारणों को भी कम कर देता है, इसके अलावा धूम्रपान छोड़ देने के अन्य भी कई फायदे होते हैं।
     
  7. पर्याप्त नींद लें:
    व्ययस्कों को कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। बच्चों के लिए पर्याप्त नींद की मात्रा भी उनकी उम्र के साथ बदलती रहती है। प्री-स्कूल की उम्र के बच्चों को 10 से 12 घंटे तक सोना चाहिए। स्कूल उम्र के बच्चों को कम से कम 10 घंटे की नींद लेनी चाहिए। और किशोरों के लिए भी 9 से 10 घंटे की नींद जरूरी है।

खर्राटे का परीक्षण - Diagnosis of Snoring in Hindi

खर्राटे की जांच कैसे की जाती है?

खर्राटे की समस्या का पूर्ण तरीके से आंकलन करने के लिए, पीड़ित व्यक्ति के साथ में सोने वाले या घर के किसी मेंबर से बात करना बहुत महत्वपूर्ण है। निदान के लिए डॉक्टर पीड़ित व्यक्ति को पहले हुई बीमारीयों और ली गई दवाईयों की जानकारी भी ले सकते हैं।

डॉक्टर मरीज के साथी को मरीज के बारे में कुछ बातें पूछेंगे - जैसे कि, उसे खर्राटे कब आते हैं और किस तरह से आते हैं - ताकि समय की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सके। अगर किसी बच्चे को खर्राटे की समस्या है तो उसके माता-पिता से उसके खर्राटे की गंभीरता के बारे में पूछने की कोशिश की जाती है।

इसके अलावा, मरीजों से उनके सोने के तौर तरीकों के बारे में जानकारी ली जा सकती है। दिन में सोने के लक्षण, दिन में नींद के कारण उंघना, या रात में जागने की आवृत्ति के बारे में जानना डॉक्टरों के लिए बहुत जरूरी होता है।

एक संपूर्ण शारीरिक परिक्षण भी किया जा सकता है, जिसमें ये सब किया जाएगा -

  1. मरीज के वजन का आंकलन किया जाएगा
  2. बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) का हिसाब लगाया जाएगा
  3. गर्दन की बाहरी मोटाई का नाप लिया जाएगा
  4. गले, नाक और मौखिक कैविटी को परखा जाएगा ये देखने के लिए कि वायुमार्ग कितने पतले और संकुचित हैं।

इसके अलावा आपके डॉक्टर कुछ टेस्ट करवाने को भी कह सकते हैं।

1. इमेजिंग

डॉक्टर मरीज के कुछ इमेंजिग टेस्ट ले सकते हैं जैसे एक्स-रे, सीटी स्कैन या एमआरआई। इन सभी टेस्ट से नाक और मुंह से हवा में होने वाली रुकावटों की जांच की जाती है।

2. नींद अध्ययन या स्लीप स्टडी

खर्राटे और उनके लक्षणों की जानकारी के लिए डॉक्टर स्लीप स्टडी की मदद ले सकते हैं। इस अध्ययन को मरीज के सोने के बाद किया जाता है, और अक्सर डॉक्टर मरीज के घर आकर इसको पूरा करते हैं।

मरीज की अन्य मेडिकल समस्या या नींद के लक्षणों के आधार पर, नींद के अध्ययन के दौरान डॉक्टरों की एक टीम द्वारा मरीज की नींद की आदतों पर गहराई से विश्लेषण किया जा सकता है। ऐसे में मरीज को रात भर एक नींद अवस्था में रहने की आवश्यकता हो सकती है इस पोलीसोम्नोग्राफी (polysomnography) कहा जाता है।

पोलीसोम्नोग्राफी में मरीज को सोते समय कई उपकरणों से जोड़कर पूरी रात निरिक्षण के लिए छोड़ दिया जाता है। स्लीप स्टडी में मरीज के सोते समय मस्तिष्क की तरंगे, खून में ऑक्सीजन का स्तर, हद्य गति, सांस लेने की गति, और आंख तथा टागें कि गतिविधी आदि सब कुछ मशीनों की मदद से रिकॉर्ड किया जाता है।

खर्राटे का इलाज क्या है? - Snoring Treatment in Hindi

खर्राटे का उपचार

कई बार जीवनशैली में कुछ बदलाव करके खर्राटों की समस्या से राहत मिल सकती है। इससे फर्क ना पड़ने पर इलाज करवाकर भी खराटों से छुटकारा पाया जा सकता है।

1. जीवनशैली में बदलाव

खर्राटों की समस्या के लिए डॉक्टर भी मरीजों को पहले जीवनशैली में बदलाव लाने की सलाह देते हैं जिनमें कुछ ऐसी टिप्स मौजूद होती हैं -

  • अगर मरीज का ज्यादा वजन है तो वजन घटाएं
  • शराब पीना छोड़ दें या कम करें (खासतौर पर सोने से 3 या 4 घंटे पहले)
  • धूम्रपान छोड़ दें
  • नियमित रूप से व्यायाम करना (व्यायाम करने से गले की कोशिकाएं मजबूत रहेंगी और रुकावटों से लड़ने के लिए शरीर को शक्ति मिलेगी)

खर्राटे पर नियंत्रण करने के लिए तकनीक -

पीठ के बल सोने से खर्राटों की समस्या बढ़ सकती है।इसलिए साइड के बल सोना बेहतर होता है। साइड में सोने की आदत बनाने के लिए आप इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं -

  • एक टीशर्ट में पीछे की तरफ दोनों कंधों के बीच एक जेब सिल लें
  • उसमें टेनिस या उसके आकार की कोई गेंद डाल लें
  • क्योंकि गेंद के कारण आप पीठ के बल सो नहीं पाएंगे

2. इयर प्लग्स

अगर आपके खर्राटे मारने की आदत स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं कर रही है तो अपने पार्टनर को इयरप्लग्स लगाने के लिए दीजिए। क्योंकि इससे खर्राटे की आवाज आपके पार्टनर की नहीं सुनेगी, ये समस्या को सुलझाने का एक सस्ता और आसान तरीका है।

3. एंटी स्नोरिंग डिवाइस (खर्राटों को रोकने वाले उपकरण)

अगर जीवनशैली में बदलाव होने पर भी राहत ना मिले तो एंटी स्नोरिंग डिवाइस का उपयोग किया जा सकता है। ये खर्राटों पर नियंत्रण करने वाले उपकरण होते हैं जो किसी अच्छी मार्केट से मिल जाते हैं। नीचे कुछ ऐसे ही डिवाइसेस के बारे में बताया गया है।

  • नेजल डिवाइस – नेजल यानि नाक संबंधी। अगर खर्राटे की आवाज ज्यादातर नाक से ही आ रही है तो "नेजल स्ट्रिप" (Nasal Strip) का उपयोग किया जा सकता है। यह एक चिपकने वाली पट्टी होती है जिसको नाक के उपर से ले जाते हुऐ उसके दोनो तरफ चिपकाया जाता है, इससे नाक के वायुमार्ग संकुचित नहीं हो पाते।
  • ओरल डिवाइस – ओरल यानि मौखिक। अगर खर्राटे की आवाज मुख्य रूप से मुंह से आ रही है तो आपके लिए चिन स्ट्रिप (chin strip) और वेस्टिबुलर शील्ड (vestibular shield) फायदेमंद हो सकती है। इनमें से चिन स्ट्रिप को चिन यानि ठोड़ी के नीचे लगाया जाता है तो सोते समय मुंह को खुलने से रोकती है। और वेस्टिबुलर शील्ड एक शील्ड यानि ढाल के जैसा डिवाइस होता है यह भी रात को मुंह खुलने से रोकने में मदद करता है।
  • मेंडिबुलर एडवांसमेंट डिवाइस – इसको एमएडी कहा जाता है। अगर खर्राटें की वजह मुख्य रूप से गले में थरथराहट के कारण हो रही है तो ऐसे में एमएडी का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। देखने में यह डिवाइस वेस्टिबुलर शील्ड के जैसा ही होता है मगर इसको जीभ और जबड़े को आगे खींच कर रखने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे गले के वायुमार्ग संकुचित नहीं होते और हवा को निकलने में परेशानी नहीं होती।

4. सर्जरी

खर्राटे का इलाज वैसे तो सामान्य तरीकों से कर दिया जाता है, लेकिन समस्या अगर गंभीर हो जाए जैसे सांस लेने में कठिनाई तो सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है। नीचे इस समस्या में प्रयोग की जाने वाली कुछ विधियों के बारे में बताया गया है।

  • कॉन्टीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रैशर (Continuous positive airway pressure; CPAP) – ऑबस्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया से होने वाले खर्राटों की समस्या में अक्सर इसी विधी का प्रयोग किया जाता है। ऑबस्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया के इलाज के लिए CPAP सबसे विश्वसनीय और प्रभावी तरीका माना जाता है। कुछ लोग इसके शोर की वजह से सोने में परेशानी महसूस करते हैं।
  • पैलेटल इंपलैंट्स (Palatal Implants) – इस प्रक्रिया को पिल्लर या यानि स्तंभ प्रक्रिया के नाम से भी जाना जाता है। डॉक्टर नरम तालु (palate) में पॉलिस्टर की कुछ तारें इंजेक्ट कर देते हैं जिससे तालु थोड़ा कठोर हो जाता है और लटकता नहीं है। इससे हवा के रास्ते में रुकावटें कम हो जाती हैं और खर्राटों की समस्या खत्म हो जाती है। पैलेटल इम्पलैंट्स का कोई साइड इफेक्ट नहीं है, हालांकि इसकी सुरक्षा के मामले में अभी तक शोध किए जा रहे हैं।
  • ट्रेडिश्नल सर्जरी (Traditional Surgery) – इस प्रक्रिया को यूवीलोपैलेटोफेरिगोंप्लास्टी (uvulopalatopharyngoplasty/UPPP) भी कहा जाता है। इस सर्जरी के दौरान मरीज को बेहोशी की दवा दी जाती है। सर्जरी के दौरान डॉक्टर गले के ऊतकों को ट्रिम (तराशना) करके उनको टाइट कर देते हैं। इस सर्जरी में खून बहना, संक्रमण, दर्द और नाक में जमाव आदि के जोखिम होते हैं।
  • लेजर सर्जरी – इसको लेजर एसिस्टेड यूवीलोपैलेटोफेरिगोंप्लास्टी (laser-assisted uvulopalatopharyngoplasty ) के नाम से जाना जाता है। यह खराटे के इलाज के लिए एक आउटपेशेंट सर्जरी होती है। इसमें डॉक्टर एक छोटे लेजर बीम की मदद से पैलेट के अतिरिक्त ऊतकों को हटाते हैं जिससे हवा को जाने का रास्ता मिल सके। इसके बाद मरीज को खर्राटे पर नियंत्र करने के लिए कम से कम एक सत्र का समय लग सकता है।
  • रेडियोफ्रीक्वेंसी टीश्यू एबलेशन (Radiofrequency Tissue Ablation) – इस सर्जरी को सोमनोप्लास्टी (somnoplasty) कहा जाता है और यह भी एक आउटपेशेंट प्रक्रिया होती है। इसमें भी सामान्य बेहोशी की दवा दी जाती है। अतिरिक्त ऊतकों को तालु से हटाने के लिए डॉक्टर लो इंटेसिटी रेडियोफ्रिक्वेंसी सिग्नल्स का प्रयोग करते हैं। जिससे गले का रास्ता खोला जाता है और खर्राटे की होने वाली आवाज को खत्म किया जाता है।ये एक नई तकनीक है और इसके प्रभाव पर शोध किया जाना अभी बाकी है। सामान्य रूप से सर्जरी की यह प्रक्रिया बाकी अन्य प्रक्रियाओं से कम दर्दनाक है।

खर्राटे के नुकसान - Snoring Complications in Hindi

खर्राटे के क्या नुकसान हो सकते हैं?

खर्राटे मारने की आदतों से, पास में सो रहे साथी की नींद में बाधा के अलावा, उसकी परेशानी कुछ बढ़कर हो सकती हैं। अगर खर्राटे की परेशानी ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया के कारण हुई है तो इसकी कुछ जटिलताएं हो सकती हैं जिनमें निम्न शामिल हैं।

  • दिन में नींद आना
  • मरीज को बार-बार गुस्सा और निराशा होना
  • ध्यान देने में कठिनाई
  • दिल का दौरा, हाई ब्लड प्रेशर, और स्ट्रोक के खतरे
  • व्यवहार में परेशानी जैसे, उत्तेजित होना
  • एप्निया से ग्रसित बच्चों को पढ़ने में परेशानी
  • रात में नींद ना आने से दिन में झपकियां आना, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा

क्या खर्राटे लेना किसी समस्या का संकेत है? - Is it bad to snore in Hindi?

कभी-कभी खर्राटे लेना गंभीर समस्या नहीं है. अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक खर्राटे लेता है तो यह नींद की गुणवत्ता को चोट पहुँचाता है. खर्राटे लेना ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया जैसी स्वास्थ्य समस्या का लक्षण हो सकता है. यदि कोई दिन में अत्यधिक नींद में हों और अक्सर वह बहुत जोर से खर्राटे लेता हो, या फिर नोटिस किया जाए कि व्यक्ति कभी-कभी पूरी तरह से सांस लेना बंद कर देता है, तो उसे डॉक्टर से बात करनी  चाहिए. सही इलाज से उसे रात को गहरी और भरपूर नींद मिल सकेगी.

योग से खर्राटों को कैसे रोकें? - Yoga for snoring in Hindi

खर्राटे से छुटकारा पाने के लिए नीचे दिए योगा पोज का रोज अभ्यास करना चाहिए.

भुजंगासन

भुजंगासन फेफड़ों को साफ करता है और छाती को खोलता है जिससे ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन के बहाव में सुधार आता है.

धनुरासन

धनुरासन गहरी सांस लेने और छोड़ने के लिए छाती की मांसपेशियों को खोलता है जिससे बिना किसी रूकावट के ऑक्सीजन का प्रवाह होता है. यह ब्रीथिंग को रेगुलर करता है.

सिंघासन

सिंघासन में जीभ की एक्सरसाइज होती है. यह गर्दन की मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है. गले की खराश  को खत्म कर मांसपेशियों को एक्टिव करता है.

भ्रामरी प्राणायाम

भ्रामरी प्राणायाम हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है. फोकस बढ़ाता है, गुस्सा और तनाव को दूर करने में मदद करता है.

उज्जयी प्राणायाम

उज्जायी प्राणायाम गले और चेहरे की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है. दिमाग को शांत रखता है और नींद का पैटर्न रेगुलर करता है.

नाड़ी शोधन प्राणायाम

नाड़ी शोधन प्राणायाम ब्लड सर्कुलेशन नलियों को साफ करता है. गले के इन्फेक्शन को दूर करता है. स्लीप एपनिया और खर्राटा लेने की पेरशानी को भी खत्म करता है. 

कपालभाति प्राणायाम

कपालभाती प्राणायाम करने से अच्छी नींद आती है. इससे साइनस की समस्या से भी निजात मिलता है.

ओम् जाप

ओम् का जाप करने से खर्राटे रुक जाते हैं. इसके जाप से कॉन्सेंट्रेशन पावर भी बढ़ती है. ओम् के जाप के दौरान पूरे शरीर में वाइब्रेशन महसूस होती है.

क्या खर्राटे लेना बीमारी है? - Is snoring a disease in Hindi

हां, यूं तो हर कोई खर्राटे लेता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह एक पुरानी समस्या हो सकती है. कई बार खर्राटे किसी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति का भी संकेत देते हैं. खर्राटे अमूमन नींद की बीमारी से जुड़े होते हैं, जिन्हें ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया कहा जाता है. हालांकि, सभी खर्राटे लेने वालों को यह समस्या नहीं होती, लेकिन अगर खर्राटे के साथ निम्न लक्षण नजर आएं, तो उसे तुरंत ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, जैसे -

बच्चे खर्राटे क्यों लेते हैं?

बाल रोग विशेषज्ञ ब्रैंडन हॉपकिंस के मुताबिक, 10 में से 1 बच्चा खर्राटे जरूर लेता है, लेकिन यह हर बार किसी समस्या की ओर इशारा नहीं करता. बच्चों द्वारा खर्राटे लेने का मुख्य कारण गले में अतिरिक्त या अवरोधक टिश्यू का होना है. डॉक्टर के अनुसार, बच्चों के गले में बड़े टॉन्सिल और एडेनोइड्स का होना भारी टिशू का स्रोत होते हैं. इसके कारण ही बच्चे खर्राटे लेते हैं. इसके अलावा, निम्न समस्याओं के चलते भी बच्चे खर्राटे ले सकते हैं, जैसे -

वहीं, अगर बच्चे सप्ताह में ज्यादातर रातों को खर्राटे ले रहे हैं, उनके खर्राटों में अधिक शोर हो, बच्चा अपना मुंह खोलकर रोजाना सो रहा हो या सोने के दौरान बच्चा हांफ रहा हो, तो यह चिंता का विषय हो सकता है.



संदर्भ

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