myUpchar प्लस+ के साथ पूरेे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत

मांसपेशियों में खिंचाव क्या है?

मांसपेशियों में किसी प्रकार के छेद, दरार या तनाव आने की स्थिति को मांसपेशियों में खिंचाव कहा जाता है। यह तब होता है जब आप अपनी मांसपेशियों को सामान्य से अधिक फैला देते हैं या उनकी क्षमता से अधिक उनका इस्तेमाल करते हैं। सबसे अधिक खिंचाव अक्सर पैर की मांसपेशियों में आता है। मांसपेशियों में खिंचाव अक्सर खेल-कूद के दौरान, लंबे समय से किसी खराब मुद्रा में खड़े रहने या फिर किसी प्रकार की चोट लगने के कारण होता है। कुछ ऐसी भी स्थितियां हैं जिनसे मांसपेशियों में खिंचाव होने की संभावना बढ़ जाती है, जैसे वृद्धावस्था, मांसपेशियों में लचीलता की कमी, ताकत की कमी, थकान और पहले कभी चोट लगी होना आदि। 

(और पढ़ें - मांसपेशियों में ऐंठन)

मांसपेशियों में खिंचाव आने से प्रभावित त्वचा में सूजन, लालिमा या त्वचा नीली पड़ने जैसे लक्षण विकसित होते है। मांसपेशियों में खिंचाव की स्थिति से मांसपेशियों की शक्ति कम हो जाती है और यहां तक की प्रभावित मांसपेशी पूरी तरह से काम करना बंद कर देती है। 

मांसपेशियों में खिंचाव का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर आपसे आपकी पिछली मेडिकल स्थिति के बारे में पूछेंगे और आपका शारीरिक परीक्षण करेंगे। मांपेशियों में खिंचाव की पहचान के लिए कोई विशेष शारीरिक परीक्षण नहीं होता है। 

अधिक थकान होने से बचना और किसी जटिल एवं कठोर शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करने से पहले थोड़ा वॉर्म-अप करने से मांसपेशियों में खिंचाव आने से बचाव किया जा सकता है। यदि मांसपेशियों में खिंचाव की स्थिति अधिक गंभीर नहीं है तो इसका इलाज घर पर ही गर्म व ठंडी चीजों से सिंकाई करके और सूजन की रोकथाम करने वाली अन्य दवाएं देकर किया जाता है। यदि मांसपेशियों में गंभीर रूप से खिंचाव आ गया है या फिर मांसपेशी मे छेद या दरार बन गई है तो इसका इलाज करने के लिए मेडिकल उपचार की आवश्यकता पड़ती है। 

(और पढ़ें - मांसपेशियों में दर्द के लक्षण)

  1. मांसपेशियों में खिंचाव क्या है - What is Muscle Strain in Hindi
  2. मांसपेशियों में खिंचाव के प्रकार - Types of Muscle Strain in Hindi
  3. मांसपेशियों में खिंचाव के लक्षण - Muscle Strain Symptoms in Hindi
  4. मांसपेशियों में खिंचाव के कारण - Muscle Strain Causes & Risk Factors in Hindi
  5. मांसपेशियों में खिंचाव से बचाव - Prevention of Muscle Strain in Hindi
  6. मांसपेशियों में खिंचाव का परीक्षण - Diagnosis of Muscle Strain in Hindi
  7. मांसपेशियों में खिंचाव का इलाज - Muscle Strain Treatment in Hindi
  8. मांसपेशियों में खिंचाव की जटिलताएं - Muscle Strain Risks & Complications in Hindi
  9. मांसपेशियों में खिंचाव में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Muscle Strain in Hindi?
  10. मांसपेशियों में खिंचाव की दवा - Medicines for Muscle Strain in Hindi
  11. मांसपेशियों में खिंचाव के डॉक्टर

मांसपेशियों में खिंचाव क्या है - What is Muscle Strain in Hindi

मांसपेशियों में खिंचाव कब आता है?

जब किसी मांसपेशी या टेंडन में मरोड़, दबाव या दरार आदि आ जाती है, तो इस स्थिति को मांसपेशियों में खिंचाव कहा जाता है। शरीर के किसी भी हिस्से की मांसपेशी में खिंचाव आ सकता है। हालांकि खिंचाव आने की ज्यादा संभावनाएं टांग की मांसपेशियों में होती है।

(और पढ़ें - पेट में मरोड़ के लक्षण)

मांसपेशियों में खिंचाव के प्रकार - Types of Muscle Strain in Hindi

मांसपेशियों में खिंचाव कितने प्रकार का हो सकता है?

यदि मांसपेशियों में हल्का सा खिंचाव आया है, तो इसे “प्रथम श्रेणी का खिंचाव” या “फर्स्ट डिग्री स्ट्रेन” (First-degree strain) भी कहा जाता है। इसमें मांसपेशियों की क्षमता में कोई क्षति नहीं होती या फिर बहुत ही कम क्षति हो पाती है। इसको ठीक करने के लिए 2 से 3 हफ्तों तक आराम करना जरूरी होता है। 

यदि मांसपेशियों में हल्का सा खिंचाव आया है, तो इसे “मध्यम श्रेणी का खिंचाव” या “सेकेंड डिग्री स्ट्रेन” (Second-degree strain) भी कहा जाता है। इस खिंचाव में मांसपेशियों में थोड़ी बहुत क्षति हो जाती है और यह मांसपेशियों को पहले से अधिक कमजोर बना देती है। इस स्थिति को जल्दी ठीक करने के लिए कम से कम 3 से 6 हफ्तों तक आराम करने की आवश्यकता होती है। 

यदि मांसपेशियों में गंभीर रूप से खिंचाव आ गया है तो उसे “तृतीय श्रेणी खिंचाव” या “थर्ड डिग्री स्ट्रेन” (Third-degree strain) भी कहा जाता है। इस स्थिति में प्रभावित मांसपेशी में छेद व दरारें विकसित हो जाती हैं और आप इस मांसपेशी को बिलकुल भी नहीं हिला पाते। इसको पूरी तरह से ठीक होने के लिए लगभग 3 महीनों का समय लगता है। 

(और पढ़ें - मोच के घरेलू उपाय)

मांसपेशियों में खिंचाव के लक्षण - Muscle Strain Symptoms in Hindi

मांसपेशियों में खिंचाव से कौन से लक्षण होते हैं?

मांसपेशियों में खिंचाव होने पर निम्न लक्षण विकसित हो सकते हैं:

  • मांसपेशी की गतिशीलता कम हो जाना (पूरी तरह से हिल ना पाना)
  • मांसपेशी को हिलाने के दौरान मांसपेशी के जिस क्षेत्र में अधिक तनाव होता है वहां पर दर्द होना
  • मांसपेशी में सूजन आना और प्रभावित त्वचा का रंग बिगड़ जाना
  • मांसपेशी में ऐंठन या मरोड़
  • मांसपेशी पूरी तरह से काम करना बंद कर देना या फिर उसकी क्षमता में कमी आना
  • प्रभावित मांसपेशी में दर्द होना और छूने पर तेज दर्द महसूस होना, 
  • मांसपेशी को हिलाने या इस्तेमाल करने से दर्द बढ़ जाना और आराम करने से दर्द कम होना
  • चोट लगने पर प्रभावित मांसपेशी में एक उभार दिखाई देना
  • मांसपेशी की सामान्य सतह पर किसी प्रकार का गड्ढा या अन्य असामान्यता दिखाई देना

(और पढ़ें - मोच आने पर क्या लगाएं)

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

निम्न में से कोई भी समस्या होने पर उसी समय डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए:

  • मांसपेशी में खिंचाव होने पर अत्यधिक सूजन हो जाना
  • मांसपेशी का प्रभावित क्षेत्र सुन्न हो जाना
  • चोट से ग्रस्त मांसपेशी से खून निकलना
  • जिस मांसपेशी में चोट लगी है वह कमजोर दिखाई देना या उसको हिलाने में दिक्कत होना (शरीर की दूसरी  तरफ उसी मांसपेशी से तुलना करने पर)
  • मांसपेशी में गंभीर दर्द होना, जिसके कारण आप रोजाना की गतिविधियां भी नहीं कर पा रहें हों।
  • प्रभावित मांसपेशी में आई हुई सूजन समय के साथ-साथ बढ़ रही हो

मांसपेशियों में खिंचाव के कारण - Muscle Strain Causes & Risk Factors in Hindi

मांसपेशियों में खिंचाव क्यों होता है?

मांसपेशियों में किसी प्रकार की चोट लगना ही मांसपेशियों में खिंचाव का मुख्य कारण होता है। मांसपेशियों में ये चोट किसी भी समय लग सकती है। नीचे कुछ संभावित कारणों के बारे में बताया गया है:

  • अधिक वजन उठाना
  • अधिक ऊंचाई से कूदना
  • अत्यधिक तेजी से दौड़ना
  • गेंद फेंकने जैसी प्रक्रियाएं
  • सही मुद्रा में खड़ा ना हो पाना
  • फिसलने और गिरने की दुर्घटनाएं
  • खेल-कूद जैसी गतिविधियों में उचित रूप से सुरक्षात्मक कपड़े व उपकरण ना पहनना

मांसपेशी में लंबे समय तक खिंचाव रहना एक ही गतिविधि को बार-बार करने से हो सकता है:

  • क्रिकेट और फुटबॉल जैसे खेल
  • शरीर की पॉजिशन ठीक ना होना
  • गर्दन या कमर को लंबे समय से किसी एक ही पॉजिशन में रखना, जैसे लंबे समय तक किसी डेस्क पर बैठना

(और पढ़ें - ज्यादा देर तक बैठने के नुकसान)

मांसपेशियों में खिंचाव का जोखिम कब बढ़ जाता है? 

  • अधिक उम्र
  • अत्यधिक व्यायाम करना
  • मांसपेशियों की थकान
  • पहले कभी मांसपेशी में चोट लगी होना या पहले की चोट से ठीक होने से पहले ही अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां शुरू कर देना
  • मांसपेशियां कठोर या कमजोर हो जाना
  • किसी दिन अपने रोजाना के समय से काफी अधिक समय तक कोई शारीरिक गतिविधि करना
  • व्यायाम करने से पहले वार्म-अप ना करना
  • पैरों या टांगों संबंधित कोई विकृति या अन्य समस्या जिससे दोनों टांगों की लंबाई में अंतर हो जाता है। 

(और पढ़ें - कमर दर्द का इलाज)

मांसपेशियों में खिंचाव से बचाव - Prevention of Muscle Strain in Hindi

मांसपेशियों में खिंचाव आने से कैसे रोकें?

मांसपेशियों में खिंचाव के कुछ प्रकारों की रोकथाम करना संभव नहीं है। लेकिन निम्न तरीके अपना  कर इनके विकसित होने की संभावनाओं को कम किया जा सकता है:

  • नियमित रूप से स्ट्रेच एक्सरसाइज करने से मांसपेशियों में खिंचाव आने की आशंका कम हो जाती है। व्यायाम करने से पहले स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज अवश्य करनी चाहिए। (और पढ़ें - वार्म अप करने के फायदे)
  • यदि आपका वजन अधिक है तो वजन को कम करें, क्योंकि मोटापा आने से मांसपेशियों पर अधिक तनाव पड़ता है (खास कर टांगों और पीठ के क्षेत्र की मांसपेशियों पर)
  • सही फिटिंग वाले जूते पहनें
  • रोज़ाना नियमित रूप से व्यायाम करके अपनी मांसपेशियों को सामान्य अवस्था में बनाए रखें
  • किसी भी व्यायाम करने, खेल-कूद में जाने या कोई भी शारीरिक गतिविधि करने से पहले अपने शरीर को वॉर्म-अप कर लें। वार्म-अप करने पर शरीर और अधिक मेहनत से भरी हुई गतिविधियां करने के लिए तैयार हो जाता है। इस से मांसपेशियों में खून के बहाव में सुधार आता है और मांसपेशियों का तापमान भी बढ़ता है, साथ ही साथ इस से आपके सांस लेने की प्रक्रिया में भी सुधार आता है। वार्म अप करने से शरीर व्यायाम को ठीक तरीके से कर पाता है, क्योंकि इससे मांसपेशियों की अकड़न कम हो जाती है और अंग में फैलाव बढ़ जाता है। 
  • गिरने व फिसलने से बचें और सीढ़ियां चढ़ते समय हैंडल (हैंडरेल) को पकड़ कर रखें, फिसलन वाले फर्श पर बहुत ही ध्यान से चलें और अपने फर्श पर चीजों को अस्त-व्यस्त ना पड़ी रहने दें। 
  • एक ही पॉजिशन में लंबे समय तक ना रहें, बीच में उठकर थोड़ा बहुत चल फिर लें या फिर अपनी पॉजिशन को बदलते रहें। अपनी कमर को उचित सहारा देने के लिए एक अच्छी कुर्सी या तकिए का इस्तेमाल करें। बैठने की पॉजिशन में घुटनों को अपने कूल्हों के स्तर में रखें। 
  • वस्तुओं को ध्यान पूर्वक उठाएं। जब आप किसी भारी वजन को उठाते हैं तो उसको उठाने के लिए सही तकनीक का उपयोग करें। यदि आप कोई भारी वस्तु उठा रहें हैं, तो उस दौरान अपनी कमर को सीधा रखें और घुटनों को मोड़ लें। जितना हो सके वजन अपनी टांगों पर ही पड़ने दें। भारी वस्तु को जितना हो सके शरीर के पास ही रखें और उठाने के बाद उसको मोड़ने या घुमाने आदि की कोशिश ना करें। (और पढ़ें - घुटनों में दर्द का इलाज)
  • यदि आपकी मांसपेशियों में चोट आदि लगी हैं, फिर से सामान्य गतिविधियों या खेल आदि में शुरू करने से पहले मांसपेशियों को पूरी तरह से ठीक होने दें। जब तक आपकी मांसपेशियों में पहले के जैसी लचीलता और मजबूती ना आ जाए तब तक इंतजार करें। यदि मांसपेशियों में हल्का खिंचाव आया है तो उसको ठीक होने में 10 दिन से 3 हफ्ते तक लग सकते हैं और यदि खिंचाव गंभीर है तो ठीक होने में 6 महीने तक का समय भी लग सकता है। 
  • अपने शरीर की क्षमता की सीमाओं को समझना बहुत जरूरी है। यदि किसी प्रकार की शारीरिक गतिविधि करने के दौरान आपको ठीक महसूस ना हो तो उसको उसी समय छोड़ देना चाहिए।

(और पढ़ें - मोच के लक्षण)

मांसपेशियों में खिंचाव का परीक्षण - Diagnosis of Muscle Strain in Hindi

मांसपेशियों में खिंचाव का परीक्षण कैसे किया जाता है?

आपके डॉक्टर यह जानने की कोशिश करेंगे कि कौन शारीरिक गतिविधि के कारण आपकी मांसपेशियों में खिंचाव होता है और यह भी जांच करते हैं कि चोट के दौरान मांसपेशियों में किसी प्रकार का उभार तो नहीं है। डॉक्टर परीक्षण के दौरान आपसे पूछेंगे कि आपको कौन से लक्षण महसूस हो रहे हैं, क्या प्रभावित मांसपेशी में हिलाने में दिक्कत हो रही है या फिर क्या प्रभावित मांसपेशी की क्षमता कम हो गई है। 

मांसपेशी को चोट लगने के दौरान यदि आपको चटक, तड़क या अन्य किसी प्रकार की आवाज सुनाई दे तो उसके बारे में डॉक्टर को बता दें। क्योंकि चोट लगने के दौरान ऐसी आवाज आना किसी गंभीर स्थिति का संकेत देती है। इसके बारे में डॉक्टर को बताने से समस्या का परीक्षण करने में काफी मदद मिल सकती है और वे पता लगा सकते हैं कि वहीं आपका मांस फट तो नहीं गया है। 

(और पढ़ें - चोट लगने पर क्या करें)

आपके लक्षण और आपकी पिछली मेडिकल स्थिति की जांच करने के बाद डॉक्टर मांसपेशियों में कमजोरी, थकान, ऐंठन व हिलने-ढुलने में कमी की जांच करते हैं। यदि परीक्षण के दौरान मांसपेशियों में खिंचाव की स्थिति हल्की या मध्यम ही पाई जाती है तो आपको और अधिक टेस्ट करवाने की आवश्यकता पड़ सकती  है।

(और पढ़ें - नस चढ़ने का इलाज)

यदि डॉक्टर के पास कुछ ऐसे प्रमाण हैं जो बताते हैं कि मांसपेशियों में खिंचाव किसी चोट या संक्रमण के कारण नहीं हुआ है, तो अक्सर एक्स रे या अन्य लैब टेस्ट करवाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

हालांकि यदि परीक्षण में किसी प्रकार का संदेह रह जाता है, तो एक्स रे, एमआरआई और अल्ट्रासाउंड स्कैन जैसे टेस्ट किये जाते हैं।

मांसपेशियों में खिंचाव का इलाज - Muscle Strain Treatment in Hindi

मांसपेशियों में खिंचाव का उपचार कैसे किया जाता है?

मांसपेशियों में यदि थोड़ा बहुत खिंचाव आया है तो कुछ सामान्य और घरेलू देखभाल करते उसे छुटकारा पाया जा सकता है, जैसे आराम करना और बर्फ से सिकाई करना। 

  • ठेस लगने से बचाना:
    प्रभावित मांसपेशी में फिर से ठेस लगने आदि से बचाव रखना।
     
  • आराम करना:
    जब तक आप पूरी तरह से ठीक ना हो जाएं ऐसी शारीरिक गतिविधि ना करें, जिससे आपकी मांसपेशी में खिंचाव आएं। कई बार इस खिंचाव की स्थिति को टालने के लिए डॉक्टर आपको बैसाखी लेकर चलने का सुझाव दे सकते हैं, जिससे आपकी टांग की मांसपेशियों पर वजन नहीं पड़ता। 
     
  • बर्फ:
    अपनी त्वचा पर सीधे बर्फ लगाने से बचें, उसे किसी तौलिए या अन्य कपड़े में लपेट कर प्रभावित त्वचा को सेकें। बर्फ को एक बार में लगातार 20 मिनट तक प्रभावित क्षेत्र पर लगा कर रखें और दिन में कई बार यह प्रक्रिया करें। 
  • दबाव:  
    सूजन को बढ़ने से रोकने के लिए एक मुलायम पट्टी को प्रभावित क्षेत्र के चारों तरफ हल्के दबाव के साथ लपेट दें। (और पढ़ें - सूजन कम करने के घरेलू उपाय)

(और पढ़ें - सिकाई के लाभ

दवाएं - 

  • प्रभावित मांसपेशी के दर्द को कम करने के लिए और मांसपेशी को हिलाने व उसका उपयोग करने की क्षमता में सुधार करने के लिए एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी नॉन स्टेरॉयडल एंटी इंफ्लेमेटरी दवाएं लें।
  • दर्द को कम करने वाली क्रीम - डॉक्टर आपके लिए कुछ दर्द निवारक क्रीम लिख सकते हैं, जिनकी प्रभावित मांसपेशी के ऊपर हल्की मालिश की जाती है। ये क्रीम सिर्फ उसी क्षेत्र का दर्द व सूजन कम करती हैं जहां पर इनकी मालिश की जाती है। 

(और पढ़ें - मोच का इलाज)

ऑपरेशन - 

  • यदि आपकी मांसपेशी में काफी गंभीर रूप से खिंचाव आ गया है, तो क्षतिग्रस्त मांसपेशी या लिगामेंट की मरम्मत करने के लिए ऑपरेशन करना पड़ सकता है। ऑपरेशन होने के बाद डॉक्टर लंबे समय तक आराम करने का आदेश देते हैं। (दो हड्डियों को आपस में जोड़ने वाले मजबूत और लचीले ऊतकों को लिगामेंट कहा जाता है)

फिजियोथेरेपी - 

  • यदि मांसपेशियों में गंभीर रूप से खिंचाव आ गया है या फिर यह समस्या आपको बार-बार हो रही है, तो क्षतिग्रस्त मांसपेशियों और लिगामेंट्स को मजबूत बनाने के लिए फिजियोथेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

घरेलू देखभाल - 

मांसपेशी में खिंचाव आने के बाद पहले 72 तक ऐसी कोई भी गतिविधि करने से बचना चाहिए जो आपकी स्थिति को और बदतर बना सकती है। 

  • गर्म चीजों से सिकाई ना करें: गर्म पानी से ना नहाएं और ना ही किसी गर्म चीज से सिकाई करें।
  • शराब का सेवन ना करें: शराब व अन्य अल्कोहल उत्पादों का उपयोग ना करें क्योंकि इससे क्षतिग्रस्त मांसपेशी में सूजन आ सकती है और खून बहने लग सकता है। साथ ही इसके चलते आपकी चोट भरने में नहीं खासा लग सकता है। (और पढ़ें - शराब कैसे छुड़ाएं)
  • दौड़ें नहीं: कोई भी ऐसी शारीरिक गतिविधि ना करें जिसमें शारीरिक मेहनत करनी पड़ती है। ऐसी गतिविधियां मांसपेशियों में खिंचाव की स्थिति को और बदतर बना सकती है। (और पढ़ें - दौड़ने के लाभ)
  • क्षतिग्रस्त मांसपेशी की मालिश ना करें: क्षतिग्रस्त क्षेत्र की मसाज या मालिश करने से सूजन बढ़ने लग जाती हैं और खून भी आ सकता है।

(और पढ़ें - खून रोकने के तरीके)

मांसपेशियों में खिंचाव की जटिलताएं - Muscle Strain Risks & Complications in Hindi

मांसपेशियों में खिंचाव होने पर कौन सी जटिलताएँ विकसित होती हैं?

  • मांसपेशियों का खिंचाव कितने में समय में ठीक होगा, यह क्षति की गंभीरता पर निर्भर करता है। यदि उचित रूप से इलाज किया जाए तो ज्यादातर लोगों में यह स्थिति जल्द ही ठीक हो जाते हैं। 
  • यदि मांसपेशियों में हल्का सा खिंचाव आया है तो ऐसी स्थिति में आप सामान्य घरेलू देखभाल की मदद से तीन से छह हफ्तों के भीतर अपनी रोजाना की गतिविधियां वापस शुरू कर सकते हैं।
  • यदि मांसपेशियों में गंभीर रूप से खिंचाव आ गया है, तो ऐसी स्थिति को ठीक होने में कुछ महीने तक लग सकते हैं। ऐसी स्थिति में सर्जरी या अन्य शारीरिक थेरेपी करवानी पड़ सकती हैं। (और पढ़ें - सर्जरी से पहले की तैयारी)
  • मांसपेशियों का ठीक होने से पहले ही बहुत ज्यादा प्रयोग करने से मांसपेशियां फिर से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, क्योंकि उस समय तक स्कार ऊतक पूरी तरह से मजबूत नहीं हो पाते। 
  • स्कार ऊतक और एडिजन (Adhesions; मांसपेशियों में चोट लगने के बाद बनने वाला एक चिपचिपा पदार्थ) मांसपेशियों की लचीलता को कम कर देते हैं जिससे आपके हिलने-ढुलने की क्षमता भी कम हो जाती हैं। 

मांसपेशियों में खिंचाव में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Muscle Strain in Hindi?

मांसपेशियों में खिंचाव आने पर क्या खाना चाहिए?

जिन खाद्य पदार्थों में भरपूर मात्रा में विटामिन ए, विटामिन सी, ओमेगा 3 फैटी एसिड, जिंक, एंटीऑक्सीडेंट और प्रोटीन पाया जाता है, ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। क्योंकि इन पोषक तत्वों वाले खाद्य पदार्थ ठीक हो की प्रक्रिया को बढ़ा देते हैं। कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ जो मांसपेशियों में खिंचाव आने पर सहायक हो सकते हैं:

(और पढ़ें - गाजर के जूस के फायदे)

Dr. Vivek Dahiya

Dr. Vivek Dahiya

ओर्थोपेडिक्स

Dr. Vipin Chand Tyagi

Dr. Vipin Chand Tyagi

ओर्थोपेडिक्स

Dr. Vineesh Mathur

Dr. Vineesh Mathur

ओर्थोपेडिक्स

मांसपेशियों में खिंचाव की दवा - Medicines for Muscle Strain in Hindi

मांसपेशियों में खिंचाव के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Oxalgin DpOxalgin Dp 50 Mg/325 Mg Tablet27
Diclogesic RrDiclogesic Rr 75 Mg Injection25
DivonDIVON GEL 10GM0
VoveranVOVERAN 1% EMULGEL 30GM105
EnzoflamEnzoflam 50 Mg/325 Mg/15 Mg Tablet91
DolserDolser 400 Mg/50 Mg Tablet Mr0
Renac SpRenac Sp Tablet51
Dicser PlusDicser Plus 50 Mg/10 Mg/500 Mg Tablet46
D P ZoxD P Zox 50 Mg/325 Mg/250 Mg Tablet20
Unofen KUnofen K 50 Mg Tablet0
ExflamExflam 1.16%W/W Gel48
Rid SRid S 50 Mg/10 Mg Capsule32
Diclonova PDiclonova P 25 Mg/500 Mg Tablet13
Dil Se PlusDil Se Plus 50 Mg/10 Mg/325 Mg Tablet44
Dynaford MrDynaford Mr 50 Mg/325 Mg/250 Mg Tablet29
ValfenValfen 100 Mg Injection10
FeganFegan Eye Drop16
RolosolRolosol 50 Mg/10 Mg Tablet67
DiclopalDiclopal 50 Mg/500 Mg Tablet16
DipseeDipsee Gel57
FlexicamFlexicam 50 Mg/325 Mg/250 Mg Tablet25
VivianVivian 1.16% Gel0
I GesicI Gesic 0.1% Eye Drop26
Rolosol ERolosol E 50 Mg/10 Mg Capsule51
DicloparaDiclopara 50 Mg/500 Mg Tablet0

क्या आप या आपके परिवार में किसी को यह बीमारी है? सर्वेक्षण करें और दूसरों की सहायता करें

References

  1. Health Harvard Publishing. Harvard Medical School [Internet]. Muscle Strain. Harvard University, Cambridge, Massachusetts.
  2. University of Rochester Medical Center Rochester, NY; Sprains, Strains, Breaks: What’s the Difference?.
  3. National Institute of Arthritis and Musculoskeletal and Skin Disease. [Internet]. U.S. Department of Health & Human Services; Sprains and Strains.
  4. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Muscle strain treatment.
  5. Noonan TJ,Garrett WE Jr. Muscle strain injury: diagnosis and treatment. J Am Acad Orthop Surg. 1999 Jul-Aug;7(4):262-9. PMID: 10434080
और पढ़ें ...