ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (यूआरटीआई) - Upper Respiratory Tract Infection (URTI) in Hindi

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July 11, 2017

September 13, 2021

ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण
ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण
कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!

यूआरटीआई क्या है?

यूआरटीआई (URTI) का पूरा नाम ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (Upper Respiratory Tract Infection) है। श्वसन तंत्र या श्वसन पथ नाक से शुरू होकर एल्वियोली (मनुष्यों के फेफड़ों की सबसे छोटी क्रियात्मक इकाई) तक फैला होता है।

भ्रूणीय (embryologic) विकास के आधार पर श्वसन तंत्र को ऊपरी और निचले श्वसन तंत्रों में विभाजित किया गया है।

ऊपरी श्वसन तंत्र का विस्तार नाक से लेकर क्राइकोइड कार्टिलेज (गले में मौजूद स्वरतंत्री - वॉइस बॉक्स) तक होता है और निचला श्वसन तंत्र क्राइकोइड कार्टिलेज के नीचे से शुरू होकर एल्वियोली तक फैला होता है।

ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (यूआरटीआई) एक सामान्य शब्द है, जिसका इस्तेमाल नाक, नासिका सम्बन्धी साइनस, ग्रसिका (गला), कंठ (वॉइस बॉक्स), ट्रेकिआ (श्वास नली) और ब्रांकाई (bronchi) से संबंधित एक्यूट संक्रमणों के बारे में बताने के लिए किया जाता है।

फ्लू या इन्फ्लुएंजा एक वायरल प्रणालीगत बीमारी है, जो ऊपरी और निचले श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है, अतः यहाँ पर इसकी चर्चा नहीं की जाएगी। 

प्रसार (Prevalence)

भारत और दुनिया भर में सर्दी के महीनों के दौरान यूआरटीआई सबसे अधिक होता है। सर्दी के महीनों के बाद यूआरटीआई बरसात के मौसम में होना सबसे आम है। गर्म और शुष्क महीनों के दौरान यूआरटीआई की बहुत कम घटनायें देखी जाती हैं। सर्दी के मौसम में हम अपना ज़्यादातर समय घर के अंदर बिताते हैं और इस दौरान हम उन लोगों के अधिक संपर्क में रहते हैंजो संक्रमित हैं। आर्द्रता (humidity) भी सर्दी-जुकाम के प्रसार को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि अधिकांश वायरल यूआरआई एजेंट कम नमी में पनपते हैं जो सर्दियों के महीनों की विशेषता होती है। घर के अंदर की वायु में कम नमी होती है, जो नासिका म्यूकोसा (nasal mucosa) की कोमलता को बढ़ाती है, जिससे व्यक्ति की संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है।

श्वसन वायरस के निरंतर परिसंचरण का कारण हैं इन वायरस में निरंतर जेनेटिक बदलाव। हमारे देश में कोरीज़ा सिंड्रोम (सर्दी-ज़ुकाम) बीमारी के कारण ली जाने वाली छुट्टी का सबसे आम कारण है।

आयु और लिंग संबंधित जनसांख्यिकी (Age and sex related demographics)

  1. नासिकाशोथ (राइनाइटिस) – मासिक धर्म चक्र की मध्य स्थिति में और गर्भावस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल परिवर्तन नाक और साइनस म्यूकोसा में रक्त की मात्रा बढ़ा देते हैं जिससे नासिका स्राव बढ़ जाता है। अगर यूआरटीआई मासिक चक्र या गर्भावस्था के दौरान हो तो उससे कुछ महिलाओं में लक्षणों की तीव्रता में वृद्धि हो सकती है।
  2. क्रूप (croup) – यह बीमारी बच्चों में होती है और लड़कियों की तुलना में लड़कों में ज्यादा आम होती है।
  3. साधारण सर्दी की घटना उम्र के अनुसार भिन्न होती है – 5 साल से कम उम्र के बच्चों में दर सबसे ज्यादा है। बच्चों में प्रति वर्ष लगभग 3-8 वायरल श्वसन संबंधी बीमारियाँ होती हैं, जबकि किशोरों और वयस्कों को प्रति वर्ष लगभग 2-4 बार सर्दी होती है और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में प्रति वर्ष सर्दी की समस्या एक बार हो सकती है। 

ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (यूआरटीआई) के प्रकार - Types of Upper Respiratory Tract Infection (URTI) in Hindi

यूआरटीआई  के प्रकार

यूआरटीआई का सबसे सामान्य उदाहरण आम सर्दी (कोरीज़ा) है। इसके अन्य उदाहरण हैं – फ़ेरिन्जाइटिस (गले में खराश), टॉन्सिलाइटिस, साइनसाइटिस, एपिग्लोटाइटिस, लेरिन्जाइटिस (कंठ में सूजन) और ट्रेकिबोराँकाइटिस (tracheobronchitis)।

ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (यूआरटीआई) के लक्षण - Upper Respiratory Tract Infection (URTI) Symptoms in Hindi

यूआरटीआई  के लक्षण

अतिव्यापी नैदानिक अभिव्यक्तियों (overlapping clinical manifestations) के साथ यूआरटीआई के विभिन्न रूप मौजूद होते हैं। संक्रामक कारक के संपर्क में आने के 1 से 3 दिन बाद लक्षणों की शुरुआत होती है।

  1. बंद नाक, छींक और गले में खराश आम सर्दी की पहचान हैं।
  2. आँख आना (कंजंक्टिवाइटिस) एडीनोवायरस संक्रमण के दौरान विशेष रूप से देखा जाता है।
  3. अचानक शुरू होने वाली गले में खराश, बुखार, खाँसी की अनुपस्थिति और पूर्ववर्ती 2 हफ्तों में ज्ञात स्ट्रेप्टोकोकल ग्रसनीशोथ (फ़ेरिन्जाइटिस) के रोगी के संपर्क में आने वाले व्यक्ति को GABHS से संबंधित ग्रसनीशोथ (फ़ेरिन्जाइटिस) के निदान का सुझाव दिया जाता है।                                    
  4. एक्यूट बैक्टीरियल राइनो साइनसाइटिस (acute bacterial rhinosinusitis) से ग्रसित व्यक्ति चेहरे एक तरफ दर्द, उपरी दांतों में दर्द, सिरदर्द और नाक से अत्यधिक मवाद के स्राव की शिकायत कर सकते हैं। आम सर्दी के बाद 1 से 2 सप्ताह तक ये लक्षण ज़ारी रह सकते हैं।
  5. एक्यूट ट्रेकिबोराँकाइटिस (Acute tracheobronchitis) में बलगम वाली या सूखी खाँसी और सांस लेने में घरघराहट (wheezing) के लक्षण देखे जाते हैं, जो 1 से 3 सप्ताह तक रहते हैं।

यूआरटीआई के संकेत 

शारीरिक परीक्षण में दिखने होने वाले सबसे आम लक्षण नीचे दिए गए हैं –

  1. हल्का बुखार
  2. नाक से उच्चारण करना
  3. नाक की ऊपरी त्वचा का लाल होना
  4. बंद नाक

आमतौर पर कम पाए जाने वाले अन्य निष्कर्ष हैं –

  1. गलकोष संबंधी (Pharyngeal ) या तालु की पुटिका (palatal vesicles) और अल्सर।
  2. गलकोष संबंधी एरिथमा (Pharyngeal erythema) और एक्स्युडेट (रिसाव)।
  3. तालु पर लाल धब्बे (Palatal petechiae)।
  4. गर्दन के आगे वाले लिंफ नोड्स (lymph nodes) मे सूजन, विशेष रूप से बच्चों में।
  5. टॉन्सिल्स का बढ़ना या उनमें सूजन।
  6. छूने पर साइनस में दर्द होना। 
  7. सांस लेते समय घरघराहट की आवाज़ सुनाई देना। 

ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (यूआरटीआई) के कारण और जोकिहम कारक - Upper Respiratory Tract Infection (URTI) Causes and Risk Factors in Hindi

यूआरटीआई के​ कारण

अधिकांश यूआरटीआई वायरस के कारण होते हैं, जैसे –  राइनोवायरस, पैराइन्फ्लुएंज़ा वायरस, कोरोनावायरस, एडीनोवायरस, रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस (Respiratory Syncytial virus), कॉक्ससैकिए वायरस (Coxsackie virus), ह्यूमन मेटापन्यूमोवायरस (Human Metapneumovirus) और इन्फ्लुएंजा वायरस। 
 
बहुत कम यूआरटीआई की शुरुआत बैक्टीरिया के कारण होती है।
 
बैक्टीरियल कारणों में ग्रुप ए बीटा-हीमोलिटिक स्ट्रैपटोकोकी (जीएबीएचएस; GABHS) सबसे आम है, जो वयस्कों में ग्रसनीशोथ (pharyngitis) के 5% से 10% मामलों में पाया जाता है। बैक्टीरियल ग्रसनीशोथ के अन्य कम सामान्य कारण ग्रुप सी बीटा-हीमोलिटिक स्ट्रैपटोकोकी, कोरीनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया (Corynebacterium diphtheriae), नेइसेरिया गोनोरिया (Neisseria gonorrhoeae), आर्कानोबैक्टीरियम हेमोलीटिकम (Arcanobacterium haemolyticum), क्लैमिडोफिला निमोनिया (Chlamydophila pneumoniae) और माइकोप्लाज्मा निमोनिया हैं।
 
अधिकांश यूआरटीआई वायरल के रूप में शुरू होते हैं, लेकिन बाद में बैक्टीरियल संक्रमण भी विकसित हो जाता है।

सामान्य रूप से कम देखे जाने वाले कारक जीव (causative organisms) हर्पीज़ सिम्प्लेक्स वायरस (herpes simplex virus), बोर्डेटेला पर्टुसिस (Bordetella Pertussis) और बी पैरापर्टुसिस (B. Parapertussis) हैं।

स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया (Streptococcus pneumoniae), हेमोफिलस इन्फ्लूएंजा (Haemophilus influenzae) और मोरेक्सेला कैटरहिलिस (Moraxella catarrhalis) सबसे सामान्य जीव हैं, जो वायरल एक्यूट राइनोसाइनसाइटिस के बैक्टीरियल अतिसंक्रमण का कारण बनते हैं।

यूआरटीआई कैसे फैलता है (Modes of Transmission)

यूआरटीआई के लिए उत्तरदायी जीवों का प्रसार एयरोसोल, बूंदों, संक्रमित वस्तुओं या संक्रमित स्राव (नाक या आँखों के मार्ग से निकलने वाला) के सीधे संपर्क में आने से होता है। इस प्रकार, संचरण अधिकतर भीड़ वाली जगहों पर होता है। श्वसन एपिथेलियम (respiratory epithelium) पर प्रत्यक्ष रूप से आक्रमण के परिणामस्वरूप संक्रमित हिस्से में उसी के अनुसार लक्षण दिखाई देते हैं। 

इन वायरल संक्रमणों में से बहुत से स्कूलों और दैनिक देखभाल केन्द्र (Day Care center) में बच्चों द्वारा ग्रहण किये जाते हैं और यह माना जाता है कि संक्रमण स्कूली बच्चों से उनके परिवारों में फैलते हैं।

यूआरटीआई के जोखिम कारक

  1. अक्सर झुंड में, जैसे स्कूल या  दैनिक देखभाल केन्द्र, रहने वाले छोटे बच्चों के साथ संपर्क में आना।
  2. नाक से सम्बन्धित एलर्जी (एलर्जी राइनाइटिस) या अस्थमा से उत्पन्न होने वाला अवरोध और सूजन संक्रमण की संभावना को बढ़ा सकते हैं।  
  3. सफर के दौरान बड़ी संख्या में व्यक्तियों के अधिक संपर्क में आने से यूआरटीआई की संभावना बढ़ जाती है।
  4. अधिक भीड़।
  5. धूम्रपान और सेकंड हैंड स्मोकिंग (किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा किये गए धूम्रपान का धुआं सांस द्वारा आपके अंदर जाना) के कारण।
  6. स्प्लेनेक्टोमी (splenectomy), एचआईवी संक्रमण, कोर्टिकोस्टेरोइड का उपयोग, प्रतिरक्षादमनकारी उपचार (immunosuppressive treatment), कई चिकित्सा समस्याओं, सिलिया डाइस्किनेशिया सिंड्रोम (cilia dyskinesia syndrome) और सिस्टिक फाइब्रोसिस (cystic fibrosis) के कारण प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है। साथ ही, व्यक्तियों में यूआरटीआई की सम्भावना पैदा हो सकती है।
  7. तनाव भी रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर बनाता है। 
  8. पहले हुए ऊपरी श्वसन मार्ग का आघात, नासिका झिल्ली का अपने स्थान से हट जाना, सिनो ऑस्टियल अवरोध (sino ostial blockade) और नासिका पोलीपोसिस (nasal polyposis) के कारण होने वाले शारीरिक परिवर्तन।
  9. हालाँकि कुछ लोग ग्रुप ए स्ट्रेप्टोकोक्की के क्रॉनिक वाहक होते हैं, लेकिन इस तरह के मरीज़ों में बार-बार होने वाले यूआरटीआई मूल रूप से वायरल हो सकते हैं।
  10. कोकीन का सेवन अक्सर यूआरटीआई की सम्भावना को बढ़ा देता है। 

ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (यूआरटीआई) से बचाव - Prevention of Upper Respiratory Tract Infection (URTI) in Hindi

यूआरटीआई की रोकथाम

यूआरटीआई की रोकथाम के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं –

  1. ज्यादातर यूआरटीआई के लिए अक्सर हाथ धोना सबसे महत्वपूर्ण निवारक उपाय है।
  2. खांसते या छींकते समय स्वच्छता का ध्यान रखने के लिए मुँह को रुमाल से ढकें या अपनी कोहनियों का इस्तेमाल करें।
  3. नींद की पर्याप्त अवधि और गुणवत्ता बहुत ज़रूरी है।
  4. बच्चों में होने वाले जिन यूआरटीआई का कारण एच इन्फ्लूएंजा टाइप बी है, उन्हे एच इन्फ्लूएंजा टाइप बी टीके के व्यापक उपयोग द्वारा खत्म कर दिया गया है।  
  5. नियमित व्यायाम से यूआरटीआई के बढ़ने की संभावना कम हो जाती है।
  6. योग, विशेष रूप से प्राणायाम प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करता है और इस प्रकार यूआरटीआई से सुरक्षा करता है।                                      
  7. धूम्रपान न करना।  
  8. तनाव को खुद पर हावी न होने दें और दैनिक रूप से आराम करें। 
  9. स्वस्थ और संतुलित आहार का सेवन करें। 
  10. यूआरटीआई के सामान्य प्रकार की रोकथाम के लिए विटामिन सी का सुझाव नहीं दिया जाता है।
  11. मल्टीविटामिन और मिनरल सप्लीमेंट का यूआरटीआई के होने और गंभीरता पर ज़्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है।

ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (यूआरटीआई) का परीक्षण - Diagnosis of Upper Respiratory Tract Infection (URTI) in Hindi

यूआरटीआई का परीक्षण कैसे किया जाता है?

निदान आमतौर पर रोगी के इतिहास और परीक्षण के आधार पर किया जाता है।

एपिग्लोटाइटिस (epiglottitis) का संदेह होने पर रोगियों की लरिंगोस्कोपिक जाँच (Laryngoscopic examination) ऑटोराइनोलॉजिस्ट (ईएनटी विशेषज्ञ) द्वारा की जानी चाहिए।

क्योंकि यह रोग ज़्यादातर अपने आप ठीक हो जाता है, इसलिए नैदानिक परीक्षणों की शायद ही कभी आवश्यकता होती है।

प्रयोगशाला परीक्षण

प्रयोगशाला में होने वाली जाँच और रेडियोलॉजिक अध्ययन की नैदानिक भूमिका सीमित है, क्योंकि अधिकांश यूआरटीआई वायरस के कारण होते हैं।

  • इएसआर, प्रोकैल्सिटोनिन (Procalcitonin), सीआरपी स्तर और एएसएलओ टाइटर्स सहायक नहीं हैं, इसलिए अधिकतर नहीं किये जाते।
  • जीवाणु कल्चर (Virus Culture), तेजी से एंटीजन का पता लगाने वाला टेस्ट (rapid antigen detection) या नासॉफिरिन्जियल स्वाब (nasopharyngeal swab) पर इन्फ्लूएंजा वायरस की पोलीमेरेस चैन रिएक्शन (पीसीआर; PCR) परख केवल उन मरीजों में होती है, जिनके लिए विशिष्ट एंटीवायरल थेरेपी की सिफारिश की जाती है।
  • स्ट्रेप थ्रोट (Strep Throat) का पता लगाने के लिए एक फिरिन्जियल स्वाब की सलाह दी जाती है ताकि तेजी से एंटीजन का पता लगाने वाला टेस्ट किया जा सके - लेकिन यह सिर्फ़ तब जब GABHS से संबंधित ग्रसनीशोथ का संदेह हो।
  • पर्नसल साइनस पंक्चर (paranasal sinus puncture) या साइनस एंडोस्कोपी द्वारा बनायीं गयी अनुकूल परिस्थितियां केवल एक्यूट साइनसाइटिस और इंट्राक्रेनियल या कक्षीय जटिलताओं वाले गंभीर रूप से बीमार रोगियों के लिए उपयोग की जाती हैं। 

इमेजिंग अध्ययन (Imaging Studies)

इमेजिंग अध्ययन की आवश्यकता नियमित रूप से नहीं है, हालाँकि निम्नलिखित टेस्ट किए जा सकते हैं – 

  • साइनस का एक्स-रे (साइनसाइटिस के मूल्यांकन के लिए)
  • साइनस की कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) (विशेष रूप से साइनसाइटिस वाले रोगी, जिनपर उपचार का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा हो, उनमें साइनसाइटिस के मूल्यांकन के लिए)
  • गर्दन के अंदरूनी हिस्सों को देखने के लिए एक्स-रे (वायुमार्ग का आकलन करने के लिए)
  • छाती का एक्स-रे (एक्यूट ट्रेचियोब्रोंकाइटिस (acute tracheobronchitis) वाले रोगियों के लिए जिनमें अन्य रोगों की भी स्थितियां हैं या जिनमें छाती के परीक्षण में असामान्य महत्वपूर्ण लक्षण या समेकन (consolidation) के संकेत हैं या जिनमें 3 सप्ताह से अधिक समय तक लगातार लक्षण देखे गए हैं।)

विभेदक निदान (Differential Diagnosis)

कुछ रोगों के लक्षण विभिन्न यूआरआइटी के जैसे ही होते हैं और इसलिए उनकी अलग-अलग पहचान करने की ज़रूरत होती है, क्योंकि उनका इलाज अलग-अलग है। य़े हैं –

  1. नाक से सम्बधित एलर्जी
  2. खसरा और चिकनपॉक्स के प्रारंभिक दौर के लक्षण जुकाम के जैसे हो सकते हैं।
  3. गले की खराश एक्यूट थायरॉइडिटिस (Acute Thyroiditis), लुडविग एनजाइना (Ludwig’s Angina) और गर्ड (Gastroesophageal Reflux Disease; GERD) का लक्षण हो सकती है। इन सभी को ग्रसनीशोथ (Pharyngitis) से अलग किया जाना चाहिए और सही बीमारी की पहचान की जानी चाहिए।
  4. ड्रग-प्रेरित म्यूकोसिटिस (Drug-induced mucositis) ग्रसनीशोथ के एक असंक्रामक रूप का कारण बन सकता है।
  5. यदि खाँसी 3 सप्ताह से अधिक समय तक रहती है, तो पोस्टनसल ड्रिप (Postnasal Drip), अस्थमा और गैस्ट्रोइफोफेगल रिफ्लक्स रोग होने की संभावना हो सकती है।
  6. अगर किसी रोगी को एक्यूट ट्रेचियोब्रोंकाइटिस (acute tracheobronchitis) है तो उन्हे निमोनिया होने की संभावना हो सकती है।

ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (यूआरटीआई) का इलाज - Upper Respiratory Tract Infection (URTI) Treatment in Hindi

यूआरटीआई का इलाज कैस करें?

जीवन शैली में बदलाव 

  1. यूआरटीआई के रोगियों को आराम करने की सलाह दी जाती है, जिससे वे अपनी बीमारी का डटकर सामना कर सकें। 
  2. जिन रोगियों का गला बैठ जाता है, उनके लिए कम बोलना ही उचित है।  
  3. नियमित व्यायाम सर्दी होने की संभावनाओं को कम कर सकता है और बीमारी को गंभीर होने से रोकता है।

चिकित्सकीय विकल्प

केमिस्ट पर बिना डॉक्टर के पर्चे के मिलनी वाली दवाएं (ओटीसी; OTC) बहुत सारे संयोजनों में उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से कोई भी दवा तुरंत रोग को दूर करने वाली साबित नहीं हुई है।

उचित उपचार के लिए चिकित्सक या ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ या बाल चिकित्सा विशेषज्ञ (बच्चों के मामले में) के पास जाने की सलाह दी जाती है।

यूआरटीआई के लिए उपचार का उद्देश्य सबसे प्रमुख लक्षणों से अधिक से अधिक राहत दिलाना है। iske liye, चिकित्सक इनमें से एक या अधिक निर्धारित कर सकते हैं –

  1. अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन।
  2. नाक में डाले जाने वाले ड्रॉप्स। 
  3. एंटीहिस्टामाइन दवा (Antihistamines)।
  4. डीकन्जेस्टन्ट (Decongestants)। 
  5. कफ सिरप (एंटी-टुसाइव (anti-tussives) या एक्सपेक्टोरैंट्स (expectorants))।
  6. नॉन स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडीएस) (Nonsteroidal anti-inflammatory drugs - NSAIDs)।
  7. नमक के गर्म पानी से गरारे करना और भाप लेना।
  8. एंटीबायोटिक्स का उपचार चिकित्सक द्वारा तब निर्धारित किया जाएगा, अगर बीमारी में अपेक्षित अवधि में सुधार नहीं हुआ हो या रोगी में अतिरिक्त अथवा समवर्ती बैक्टीरियल संक्रमण के प्रमाण देखे गए हों। 
  9. यदि रोगाणुरोधी चिकित्सा (Antimicrobial therapy) का सुझाव दिया गया है, तो 5 से 10 दिनों की अवधि के लिए इस चिकित्सा को करवाने की आवश्यकता होती है, जैसा कि चिकित्सक द्वारा सलाह दी गई है।
  10. यूआरटीआई के इलाज के लिए विटामिन सी की भूमिका विवादास्पद है, लेकिन फिर भी लाभकारी है।
  11. इसी तरह जस्ता लवण (zinc salts) की भूमिका विवादास्पद होती है, क्योंकि उनकी विशिष्ट कार्यप्रणाली अज्ञात है।

सर्जिकल विकल्प

बहुत कम रोगियों को जटिल यूआरटीआई के मामलों में सर्जरी की आवश्यकता होती है, जैसे कि पेरिटॉन्सिलर एब्सेस (peritonsillar abscess) या मास्टाइडिटिस (mastoiditis) और जो लोग रिफ्रैक्टरी साइनसाइटिस (refractory sinusitis; दवा से ठीक ना होने वाला साइनसाइटिस) से पीड़ित होते हैं, उन्हें उपचार के लिए ईएनटी सर्जन के पास भेजा जाना चाहिए।

सहायक उपाय

  1. शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए गुनगुना पानी पीएं। यह जमे हुए बलगम को पिघलाकर बाहर निकालने में भी मदद करता है।  
  2. गले को आराम देने के लिए नमक के गुनगुना पानी से गरारे करें।  
  3. भाप लेना (Steam inhalation) फायदेमंद होता है। 
  4. गर्म पेय पदार्थों को पीने से नासिका मार्ग को राहत मिल सकती है।
  5. नमक के पानी से नाक की सफाई (nasal irrigation) करना।
  6. साइनसाइटिस मरीजों के अनुसार नासिका मार्ग को साफ़ करने के लिए योग की नेति क्रिया लाभदायक है।
  7. चेहरे पर लगाए जाने वाले गर्म फेशियल पैक शान्ति प्रदान कर सकते हैं, बंद नाक से राहत दिला सकते हैं व राइनोसाइनसाइटिस (rhinosinusitis) में तरल स्राव को बढ़ा सकते हैं। गर्म और मोड़े हुए कपडे या गर्म पानी की बोतल से 5-10 मिनट के लिए चेहरे और गाल को सेका जा सकता है। चेहरे पर लगाए जाने वाले पैक आवश्यकतानुसार दिन में 3-4 बार उपयोग किये जा सकते हैं। 
  8. शिशुओं के लिए एक बल्ब सिरिंज का उपयोग किया जाता है। बच्चे के कुछ भी खाने से पहले बल्ब सिरिंज द्वारा उसकी नाक मे जमे पदार्थो को खींचकर बाहर निकाला जाता है, जिससे शिशु आसानी से सांस ले सके। माता-पिता को हर उपयोग के बाद बल्ब को गर्म साबुन के पानी से साफ करना चाहिए। पुन: उपयोग से पहले बल्ब को अच्छे से सुखा लें।  
  9. सोते समय सिर और कन्धों को ऊँचा रखने से साइनस और नाक से तरल का बाहर निकलना बढ़ जाता है, तथा ग्रसनी स्राव (pharyngeal secretions) से संबंधित खाँसी भी कम हो जाती है।
  10. वेपराइज़र (vaporizer) का उपयोग कमरे में नमी को बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए, खासकर जब कड़ाके की सर्दियों के दौरान हीटर का उपयोग किया जा रहा हो।

उपचार के परिणाम

ज्यादातर यूआरटीआई केवल लक्षण सूचक चिकित्सा के साथ 3 से 10 दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। 

ऊपर लिखित जानकारी डॉ श्वेता गुप्ता द्वारा दी गई है। 

इसके आलावा यूआरटीआई के लिए दवाइयां जानने के लिए नीचे देखें।  (यह दवाइयां डॉ श्वेता गुप्ता द्वारा नहीं सुझाई गयी हैं।  कोई भी दवाई लेने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह करें। )

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संदर्भ

  1. Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Flu Symptoms & Complications.
  2. McGovern Medical School.Otorhinolaryngology – Head & Neck Surgery. University of Texas [Internet]
  3. Health Harvard Publishing. Harvard Medical School [Internet]. Respiratory tract infection - Is it contagious? Harvard University, Cambridge, Massachusetts.
  4. A.T. Still University of Health Sciences [Internet]. Kirksville,MO: Osteopathic Medical School; Infections Of The Upper Respiratory Tract.
  5. Am Fam Physician. [Internet] American Academy of Family Physicians; Respiratory Tract Infections.
  6. Johns Hopkins Medicine [Internet]. The Johns Hopkins University, The Johns Hopkins Hospital, and Johns Hopkins Health System; Upper Respiratory Infection (URI or Common Cold).

ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (यूआरटीआई) के डॉक्टर

Dr. Rajendra Bera Dr. Rajendra Bera श्वास रोग विज्ञान
16 वर्षों का अनुभव
Dr.Vikas Maurya Dr.Vikas Maurya श्वास रोग विज्ञान
20 वर्षों का अनुभव
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ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (यूआरटीआई) की दवा - Medicines for Upper Respiratory Tract Infection (URTI) in Hindi

ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (यूआरटीआई) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (यूआरटीआई) की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Upper Respiratory Tract Infection (URTI) in Hindi

ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (यूआरटीआई) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

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