• हिं

बंदर बहुत ही उत्सुक प्रकार के जानवर होते हैं जो कोई भी वस्तु देखकर उत्साहित हो जाते हैं। अधिकतर बंदर नहीं काटते, लेकिन कुछ गतिविधियों के कारण ये काट भी सकते हैं। अगर बंदर आपके साथ मित्रता वाला स्वभाव करते हैं, तो डरे नहीं और शांत रहें। हो सकता है वे आपके कंधे पर आकर बैठ जाएं। ऐसी स्थिति में घबराहट में चिल्लाने और बंदर को भगाने के प्रयास करने से वे उत्तेजित हो सकते हैं और आपको काट सकते हैं, इसीलिए बंदर को भगाएं नहीं। वह अपने आप आपके कंधों से उतर कर चला जाएगा।

(और पढ़ें - घबराहट कम करने के उपाय)

इस लेख में बन्दर के काटने से क्या होता है, बंदर के काटने पर क्या करना चाहिए और बंदर के काटने पर कौन से इंजेक्शन लगते हैं के बारे में बताया गया है।

(और पढ़ें - डर लगने के कारण)

  1. बंदर के काटने से क्या होता है - Bandar ke katne par kya hota hai
  2. बंदर के काटने पर क्या करना चाहिए - Bandar ke katne par kya kare
  3. बंदर के काटने पर कौनसा इंजेक्शन लगता है - Bandar ke katne ka injection

कई अध्ययनों से पता चलता है कि भारत में जानवरों के काटने के मामलों में बंदर का काटना, कुत्ते के काटने के बाद दूसरे स्थान पर आता है। बंदर के काटने से चोट लगने के अलावा कई तरह की बीमारियां भी हो सकती हैं, जैसे -

रेबीज एक ऐसी बीमारी है जो सीधा व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र को नुक्सान पहुंचाती है, जिससे मौत भी हो जाती है। रेबीज के वायरस से संक्रमित जानवर के काटने का उसका थूक किसी घाव या कट के द्वारा व्यक्ति के शरीर में जाने से उस व्यक्ति को भी रेबीज हो सकता है।

(और पढ़ें - वायरल इन्फेक्शन के लक्षण)

भारत में मौजूद कई बंदरों में हर्पीस बी वायरस पाया जाता है। मनुष्यों में इस वायरस से मृत्यु भी हो सकती है या आजीवन शारीरिक विकलांगता भी हो सकती है।

बंदर के काटने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं ताकि वे आपके घाव की जांच कर सकें और आपको आवश्यक उपचार और इंजेक्शन दे सकें।

(और पढ़ें - घाव भरने के घरेलू उपाय)

बंदर के काटने की छोटी से छोटी घटना भी तेजी से खतरनाक बन सकती है। बंदरों में रेबीज का वायरस होता है जो मनुष्यों के लिए जानलेवा हो सकता है। अगर रेबीज न भी हो तब भी इनके काटने से गंभीर संक्रमण और बुखार हो सकता है। इसीलिए बंदर के काटने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। हालांकि, डॉक्टर के पास जाने से पहले आप निम्नलिखित तरीके से इसका प्राथमिक उपचार कर सकते हैं -

  • प्राथमिक उपचार करने या देने से पहले ये सुनिश्चित कर लें कि आप और घायल व्यक्ति सुरक्षित हैं, नहीं तो घायल व्यक्ति को बंदर से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाएं।
  • 15 मिनट तक घाव को पानी और साबुन से अच्छी तरह से धोएं।
  • अगर घाव में धूल-मिट्टी, बाल या दांत जैसी कोई वस्तु है, तो उसे सावधानी से निकालें या साफ़ करें।
  • अगर घाव छोटा है, तो उसे आस-पास से दबाकर उसमें से खून निकालने ताकि खून के साथ अंदर मौजूद कीटाणु भी निकल जाएं।
  • अगर घाव बड़ा है उसमें से ज़्यादा खून निकल रहा है, तो उसपर पट्टी या साफ़ कपड़ा रखकर कुछ देर तक दबाव बनाएं।
  • खून रुकने और घाव को साफ़ करने के बाद उसपर एंटी-बैक्टीरियल क्रीम लगाएं ताकि इन्फेक्शन न हो।
  • दवा या क्रीम लगाने के बाद घाव पर साफ बैंडेज या पट्टी बांध लें। ध्यान रहे कि पट्टी अधिक कसी हुई न हो।
  • दर्द के लिए आप मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली दर्द-निवारक दवा, जैसे आइबुप्रोफेन (Ibuprofen) या नेप्रोक्सेन (Naproxen) ले सकते हैं।

(और पढ़ें - कुत्ते के काटने पर क्या करे)

बंदर के काटने से गंभीर प्रतिक्रिया या रिएक्शन होने का खतरा होता है। इससे गंभीर संक्रमण और रेबीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं, इसीलिए बंदर के काटने पर टिटनस और रेबीज का टीका लगवाना चाहिए। अगर आपको या आपके आस-पास किसी व्यक्ति को बंदर ने काटा है, तो कोशिश करें तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। डॉक्टर आपको टिटनस और रेबीज के इंजेक्शन लगा सकते हैं -

  • टिटनस
    टिटनस एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है जो संक्रमित घाव के कारण हो सकता है, खासकर अगर घाव गहरा है। अगर आपको पिछले 10 सालों में टिटनस का इंजेक्शन नहीं लगा है और आपको बंदर ने काट लिया है, तो जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी अपने डॉक्टर से टिटनस का टीका लगवाएं।
     
  • रेबीज
    रेबीज एक ऐसा वायरल संक्रमण है जो सीधा केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को नुक्सान पहुंचाता है। बंदर के काटने के 48 घंटों के अंदर रेबीज लगवा लेना चाहिए। हालांकि, अगर बंदर को रेबीज का टीका पहले से ही लगा हुआ है, तो आपके लिए ये इंजेक्शन लगवाना अनिवार्य नहीं है, लेकिन फिर भी अपने डॉक्टर के पास जाएं और अपना चेक-अप कराएं। अगर रेबीज का टीका न लगवाया जाए, तो कुछ ही दिनों में व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है।

(और पढ़ें - वायरल संक्रमण के लक्षण)
 

नोट: प्राथमिक चिकित्सा या फर्स्ट ऐड देने से पहले आपको इसकी ट्रेनिंग लेनी चाहिए। अगर आपको या आपके आस-पास किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर या अस्पताल​ से तुरंत संपर्क करें। यह लेख केवल जानकारी के लिए है। 

संदर्भ

  1. Vodopija R, Vojvodić D, Sokol K, Racz A, Gregurić Beljak Ž, Baranj N, et al. MONKEY BITES AND INJURIES IN THE ZAGREB ANTIRABIES CLINIC IN 2014. Acta Clin Croat. 2018 Sep;57(3):593-601. PMID: 31168195.
  2. Newton F. Monkey bite exposure treatment protocol. United States Armed Forces., J Spec Oper Med. 2010 Winter;10(1):48-9. PMID: 20306415.
  3. Rasania SK, Bhalla S, Khandekar J, Pathi S, Matta S, Singh S. Post exposure management of animal bite cases attending a primary health center of Delhi. J Commun Dis. 2004 Sep;36(3):195-8. PMID: 16509257.
  4. Riesland NJ, Wilde H. Expert Review of Evidence Bases for Managing Monkey Bites in Travelers. J Travel Med. 2015 Jul-Aug;22(4):259-62. PMID: 26031198.
  5. Barkati S, Taher HB, Beauchamp E, Yansouni CP, Ward BJ, Libman MD. Decision Tool for Herpes B Virus Antiviral Prophylaxis after Macaque-Related Injuries in Research Laboratory Workers. Emerg Infect Dis. 2019 Sep;25(9):e190045. PMID: 31441751.
  6. Rothe K, Tsokos M, Handrick W. Animal and Human Bite Wounds. Dtsch Arztebl Int. 2015 Jun 19;112(25):433-42; quiz 443. PMID: 26179017.
cross
डॉक्टर से अपना सवाल पूछें और 10 मिनट में जवाब पाएँ