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शरीर के सामान्य तापमान का अर्थ होता है मानव शरीर में आमतौर पर पाया जाने वाला तापमान। इसे चिकित्सीय भाषा में नॉरमोथेरमिया (Normothermia) कहा जाता है, यानी "सामान्य तापमान"। 

हर व्यक्ति के शरीर का तापमान उसकी उम्र, शारीरिक गतिविधि, संक्रमण, लिंग, दिन का समय, शरीर की तापमान लेने की जगह, चेतना और भावनात्मक स्थिति पर निर्भर करता है।

इस लेख में शरीर के तापमान का मतलब, सामान्य तापमान क्या होता है, तापमान बढ़ना और कम होना के बारे में बताया गया है।

  1. शरीर के तापमान की परिभाषा - What is body temperature in hindi
  2. शरीर का सामान्य तापमान क्या होता है - Sharir ka normal temperature kitna hota hai
  3. शरीर का तापमान कम होना या गिरना - Sharir ka tapman kam hona
  4. शरीर का तापमान बढ़ना - Sharir ka tapman jyada adhik hona
शरीर के तापमान की परिभाषा - What is body temperature in hindi

हमारा शरीर एक भट्ठी के जैसा होता है जिसमें से लगातार गर्मी या हीट निकलती रहती है। यह गर्मी जीवित रहने के लिए शरीर द्वारा किए जाने वाले महवपूर्ण कार्यों से बनती है। अगर आपके शरीर में सामान्य से बहुत अधिक या बहुत कम हीट निकल रही है, इसका मतलब है आपके शरीर में कोई समस्या है।

शरीर का तापमान अंदर की गर्मी बाहर निकालने की शरीर की क्षमता का एक माप होता है। शरीर का तापमान मापने के चार तरीके होते हैं -

  • बगल से,
  • मुँह से,
  • कान से और
  • गुदा से

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शरीर का सामान्य तापमान क्या होता है - Sharir ka normal temperature kitna hota hai

एक व्यसक के शरीर का सामान्य तापमान 97 डिग्री फेरनहाइट (36.11 डिग्री सेल्सियस) से 99 डिग्री फेरनहाइट (37.22 डिग्री सेल्सियस) के बीच होता है।

बच्चों व नवजात शिशुओं के शरीर का तापमान बड़ों के मुकाबले थोड़ा अधिक होता है। उनके लिए सामान्य तापमान 97.9 डिग्री फेरनहाइट (36.61 डिग्री सेल्सियस) से 100.4 डिग्री फेरनहाइट (38 डिग्री सेल्सियस) के बीच होता है।

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हर व्यक्ति के शरीर का तापमान ‘सामान्य तापमान’ जितना नहीं होता। शरीर का तापमान दिन के समय के अनुसार और पूरे जीवन में बदलता रहता है। यह व्यक्ति की उम्र, शारीरिक गतिविधि, इन्फेक्शन, लिंग, दिन का समय, शरीर से तापमान लेने की जगह, चेतना और भावनात्मक स्थिति पर भी निर्भर करता है।

  • बगल से लिया हुआ तापमान मुंह से लिए हुए तापमान के मुकाबले कम होता है और गुदा से लिया हुआ तापमान, मुंह से लिए हुए तापमान से एक डिग्री तक ज़्यादा हो सकता है।
  • शरीर का तापमान हॉर्मोन के स्तर के अनुसार बहुत जल्दी बदलता है, इसीलिए ओवुलेशन और पीरियड्स (मासिक धर्म) के दौरान एक महिला के शरीर का तापमान कम या ज़्यादा हो सकता है।

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शरीर का तापमान कम होना या गिरना - Sharir ka tapman kam hona

अगर आपके शरीर की गर्मी बहुत कम हो रही है और शरीर ठंडा पड़ रहा है, तो यह एक गंभीर समस्या हो सकती है जिससे जान भी जा सकती है। इस स्थिति को हाइपोथर्मिया (Hypothermia) कहा जाता है।

आमतौर पर लोगों को यह लगता है कि ज़्यादा समय अधिक ठन्डे वातावरण में रहने के कारण हाइपोथर्मिया होता है, लेकिन यह घर के अंदर भी हो सकता है।

नवजात शिशुओं और बूढ़े लोगों के लिए हाइपोथर्मिया अधिक गंभीर समस्या हो सकती है क्योंकि उनका शरीर सामान्य तापमान बनाए रखने में अधिक सक्षम नहीं होता और अपनी गर्मी जल्द खो देता है। इसीलिए उनके लिए गर्म वातावरण में रहना आवश्यक होता है। नवजात शिशुओं और बूढ़े लोगों का शरीर का तापमान सामान्य से कम होना किसी समस्या का संकेत हो सकता है।

निम्नलिखित कारणों से हाइपोथर्मिया हो सकता है -

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शरीर का तापमान बढ़ना - Sharir ka tapman jyada adhik hona

शरीर का तापमान सामान्य से अधिक होने को बुखार कहा जाता है। यह वाइरस व बैक्टीरिया जैसे कीटाणुओं से लड़ने की प्रतिक्रिया के कारण भी हो सकता है और शरीर द्वारा बनाए गए पदार्थों के कारण भी हो सकता है।

100 डिग्री फेरनहाइट (38 डिग्री सेल्सियस) से अधिक तापमान को बुखार माना जाता है। 103.1 डिग्री फेरनहाइट (39.5 डिग्री सेल्सियस) से ज़्यादा तापमान को तेज बुखार बोलते हैं और 105.8 डिग्री फेरनहाइट (41 डिग्री सेल्सियस) को बहुत तेज बुखार मन जाता है।

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छोटे बच्चों का शरीर सामान्य तापमान बनाए रखने में बड़ों के मुकाबले कम सक्षम होता है, इसीलिए उन्हें बुखार होने की सम्भावना अधिक होती है।

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