हम हर चीज की गुणवत्ता में समझौता कर सकते हैं, लेकिन अच्छी स्वास्थ्य सेवा के बिना कोई समझौता नहीं कर सकता है। भारत में हेल्थ इन्शुरन्स प्लान की मांग लगातार बढ़ती जा रही है, जिसे देखते हुए देश में कई ऐसी कई इन्शुरन्स कंपनियां हैं, जो स्वास्थ्य बीमा योजनाएं प्रदान करती हैं। यदि आप भी हेल्थ इन्शुरन्स प्लान खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो सबसे पहले इस बारे में अच्छे से जानकारी ले लें। ऐसा इसलिए क्योंकि स्वास्थ्य बीमा के बारे में अधूरी जानकारी होना बाद में आपके लिए परेशानी का सबब बन सकती है।

चिकित्सा क्षेत्र व स्वास्थ्य बीमा में ऐसे कई फीचर होते हैं, जिनके बारे में हमें पता नहीं होता है या फिर बहुत ही कम जानकारी होती है। ऐसा ही कुछ डे केयर और आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) में होता है, क्योंकि अधिकतर लोग इन्हें एक ही समझ लेते हैं। हालांकि, वास्तव में इनमें काफी अंतर होता है। वैसे तो हमने हेल्थ इन्शुरन्स में डे केयर और ओपीडी कवरेज के बारे में आर्टिकल लिखे हुए हैं, लेकिन इस लेख में हम इन दोनों के बीच के अंतर की जानकारी देंगे। इस लेख का मुख्य उद्देश्य हेल्थ इन्शुरन्स में ओपीडी और डे केयर बीच का अंतर स्पष्ट करना है, ताकि आप हेल्थ इन्शुरन्स प्लान खरीदते समय उलझन में न पड़ें और अपने व परिवार के लिए एक अच्छा प्लान चुन सकें।

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  1. ओपीडी और डे केयर में क्या अंतर है
  2. ओपीडी और डे केयर क्या समानताएं हैं
  3. myUpchar बीमा प्लस देता है फ्री टेली ओपीडी की सुविधा

डे केयर ट्रीटमेंट और ओपीडी ट्रीटमेंट आमतौर पर एक जैसे ही प्रतीत होते हैं, क्योंकि इनमें मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ती है और साथ इलाज कराने में समय भी कम लगता है। हालांकि, जैसा कि हम बता चुके हैं, कि इन दोनों के बीच काफी अंतर हैं जिनमें से निम्न प्रमुख हैं -

हॉस्पिटलाइजेशन

इलाज के लिए अस्पताल में बिताया गया समय भी डे केयर और ओपीडी के बीच एक स्पष्ट अंतर दर्शाता है। डे केयर प्रोसीजर में आपको कुछ घंटे तक अस्पताल में रहना पड़ता है, भले ही इलाज में और भी कम समय लगे। डे केयर प्रोसीजर के दौरान हुए मेडिकल खर्च पर कवरेज प्राप्त करने के लिए इन्शुरन्स कंपनी में क्लेम रिकवेस्ट की जा सकती है। हालांकि, यदि डे केयर प्रोसीजर को आउट पेशेंट के आधार पर किया जा रहा है, तो उसमें डे केयर के रूप में क्लेम रिकवेस्ट मान्य नहीं होगी।

जैसा कि आप जानते हैं ओपीडी ट्रीटमेंट में भी अस्पातल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। आपको सिर्फ अपनी बीमा कंपनी के नेटवर्क में आने वाले अस्पताल या क्लिनिक जाना है और बिना भर्ती हुए इलाज कराना है। इसके बाद आपको अस्पताल का बिल भरना है और सभी बिल व रसीदें बीमा कंपनी में जमा करानी हैं। इन्शुरन्स कंपनी इन सभी बिलों व रसीदों की जांच करती है और बाद में क्लेम सेटलमेंट के रूप में आपको पैसा दे दिया जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो ओपीडी में डे केयर ट्रीटमेंट से काफी कम समय लगता है।

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कवरेज

हर हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में ओपीडी और डे केयर में मिलने वाली कवरेज अलग-अलग हो सकती है, जिसके बारे में नीचे बताया है -

  • डे केयर ट्रीटमेंट -
    एक सामान्य हेल्थ इन्शुरन्स में अधिकतम प्रकार के डे केयर ट्रीटमेंट हो जाते हैं और यह कवरेज सम इनश्योर्ड की कुल राशि तक मान्य होती है। हालांकि, डे केयर में कितनी प्रोसीजर कवर की जा रही हैं और किन्हें एक्सक्लूजन में रखा गया है, यह आपके द्वारा चुने गए हेल्थ इन्शुरन्स प्लान पर निर्भर करता है।
     
  • ओपीडी -
    यदि आउट पेशेंट डिपार्टमेंट की बात की जाए तो हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में कुल बीमा राशि की एक सब-लिमिट तक ही आपको इलाज के खर्च पर कवरेज के रूप में मिलती है। इसका मतलब है कि यदि ओपीडी के दौरान हुआ मेडिकल खर्च सीमित सीमा से अधिक हो जाता है, तो बाकी का खर्च आपको अपनी जेब से भुगतान करना पड़ सकता है।

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क्लेम प्रोसेस

यदि ओपीडी ट्रीटमेंट और डे केयर प्रोसीजर दोनों इन्शुरन्स कंपनी द्वारा कवर किए जा रहे हैं, तो भी इनकी क्लेम प्रोसेस अलग-अलग हो सकती हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं -

  • आउट पेशेंट डिपार्टमेंट में क्लेम प्रोसेस -
    ओपीडी ट्रीटमेंट के मामलों में पहले इन्शुरन्स कंपनी में कुछ दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं, जिसके बाद मेडिकल खर्च पर कवरेज के लिए क्लेम रिकवेस्ट डाल सकते हैं। हालांकि, सभी बीमा प्रदाता कंपनियों की नियम व शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं और इस कारण से उनकी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन प्रोसेस भी एक दूसरे से अलग हो सकती है।
     
  • डे केयर प्रोसीजर में क्लेम प्रोसेस -
    यदि नेटवर्क अस्पताल में आपका इलाज डे केयर डिपार्टमेंट वार्ड में हो रहा है, तो इस पर क्लेम रिकवेस्ट की जा सकती है जो हॉस्पिटलाइजेशन के समान सरल है। हालांकि, इसमें भी बीमित व्यक्ति को अस्पताल में जाने से पहले बीमा कंपनी को सूचित करना पड़ता है और साथ ही सभी अनिवार्य दस्तावेज जमा कराने पड़ते हैं। कुछ कंपनियां नेटवर्क के बाहर वाले अस्पतालों में भी इलाज पर कवरेज दे देती हैं, जिसमें आपको इलाज होने के बाद 7 दिनों के भीतर ही सभी दस्तावेज बीमा कंपनी में जमा कराने पड़ते हैं।

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यह लेख पढ़ कर वैसे तो आप जान ही गए हैं, कि ओपीडी और डे केयर ट्रीटमेंट एक दूसरे से पूरी तरह से अलग हैं लेकिन फिर भी इनमें कुछ समानताएं हैं। इनके बीच प्रमुख समानता यह है कि ओपीडी और डे केयर में मरीज को अस्पताल में भर्ती नहीं होना पड़ता है और एक ही दिन में उनका इलाज हो जाता है।

उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति इलाज के लिए आउट पेशेंट डिपार्टमेंट में जाता है, तो उसका ट्रीटमेंट एक ही दिन में हो जाता है और उसी दिन उसको अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। ठीक ऐसा ही डे केयर ट्रीटमेंट में होता है, जिसका मतलब  है कि दोनों ट्रीटमेंंट डिपार्टमेंट में मरीज को कम समय तक ही अस्पताल में रुकने की आवश्यकता पड़ती है।

हालांकि, नोट करने वाली बात यह है कि हॉस्पिटलाइजेशन की जगह पर डे केयर या ओपीडी का विकल्प संभव नहीं है, क्योंकि यह आपकी बीमारी, इलाज प्रक्रिया और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है जिसे डॉक्टर निर्धारित करते हैं।

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ऊपर का लेख पढ़ कर आप जान ही चुके होंगे कि अधिकर हेल्थ इन्शुरन्स प्लान ओपीडी की तुलना में डे केयर प्रोसीजर पर ज्यादा कवरेज प्रदान करते हैं। myUpchar बीमा प्लस ऐसी स्थितियों के देखते हुए ही डिजाइन किया गया स्वास्थ्य बीमा प्लान है। myUpchar बीमा प्लस अपने ग्राहकों को 24×7 फ्री टेली ओपीडी की सुविधा प्रदान करता है, जिससे आप अस्पताल जाए बिना बिना ही डॉक्टर से फोन पर परामर्श कर सकते हैं जो कि पूरी तरह से फ्री है। आजकल कोरोना महामारी के चलते हुए अधिकतर व्यक्ति अस्पतालों में जाने से कतराते हैं, जिनके लिए यह बीमा योजना एक वरदान साबित हो सकती है। यदि आप भी हेल्थ इन्शुरन्स प्लान खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो myUpchar बीमा प्लस आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

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