कोई बीमारी हो या चोट, यह हमारे जीवन में आगे बढ़ने की रफ्तार पर ब्रेक लगा देते हैं। इस स्थिति में अचानक हेल्थ हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाती है। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जल्द से जल्द मेडिकल ट्रीटमेंट मिलना किसी उपलब्धि से कम नहीं। मेडिकल साइंस में लगातार हो रही प्रगति के कारण आज बहुत सी चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए एक दिन से ज्यादा अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती है। कुछ चिकित्सा प्रक्रियाएं 24 घंटे से पहले ही पूरी हो जाती हैं। ऐसे इलाज को डे-केयर ट्रीटमेंट या डे-केयर प्रोसेड्योर कहा जाता है।

स्वास्थ्य बीमा में निवेश यह सुनिश्चित करता है कि किसी मेडिकल इमरजेंसी के समय आपकी सेविंग्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हेल्थ इन्शुरन्स आपको डे-केयर ट्रीटमेंट की भी सुविधा उपलब्ध करवाता है। कोई भी हेल्थ इन्शुरन्स प्लान लेने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि उसमें डे-केयर ट्रीटमेंट को कवर किया जा रहा है। आपको यह भी जानना चाहिए कि उस पॉलिसी में कितनी बीमारियों के लिए डे-केयर ट्रीटमेंट की सुविधा उपलब्ध है और साथ ही अन्य सुविधाएं क्या-क्या मिल रही हैं। कुछ साल पहले तक जब हेल्थ इन्शुरन्स में डे-केयर ट्रीटमेंट की सुविधा नहीं मिलती थी, उसके मुकाबले इस सुविधा ने हमें काफी मदद पहुंचाई है।

(और पढ़ें - हेल्थ इन्शुरन्स में क्या-क्या कवर होता है)

  1. हेल्थ इन्शुरन्स में डे-केयर का क्या मतलब है - Day Care Treatment means in Hindi
  2. डे-केयर ट्रीटमेंट कवर के लाभ - Advantages of Day Care Treatments Cover in Hindi
  3. किन बीमारियो का डे-केयर ट्रीटमेंट हो सकता है - Day Care Procedures covered in Health Insurance in Hindi
  4. डे-केयर ट्रीटमेंट कवर चुनने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें - Things to Consider When Opting for Day Care Treatments Cover in Hindi
  5. डे-केयर क्लेम कैसे फाइल करें - Process of Filing Day Care Claims in Health Insurance in Hindi
  6. डे-केयर सेंटर क्या होते हैं - What are Day Care Centres in Hindi

डे-केयर ट्रीटमेंट का मतलब किसी इलाज के लिए भर्ती होने से है, लेकिन मेडिकल के क्षेत्र में प्रगति के कारण 24 घंटे से ज्यादा समय के लिए भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती। अब इलाज के लिए पहले के मुकाबले काफी कम समय लगता है। डे-केयर के अंतर्गत जनरल या लोकल एनेस्थीसिया का इस्तेमाल कर ट्रीटमेंट किया जाता है। यदि डे-केयर ट्रीटमेंट के उदाहरणों की बात करें तो इसमें मोतियाबिंद का ऑपरेशन, नेजल साइनस एस्पिरेशन, कैंसर कीमोथेरेपी, कैंसर रेडियोथेरेपी आदि शामिल हैं।

कैशलेस इलाज : आमतौर पर ज्यादातर डे-केयर ट्रीटमेंट या ऑपरेशन को एक योजना बनाकर किया जाता है। यदि आप कोई डे-केयर ट्रीटमेंट करवाना चाहते हैं तो आप अपनी इन्शुरन्स कंपनी को उसके नियम और शर्तों के अनुसार पहले से सूचित करके नेटवर्क अस्पताल में कैशलेस ट्रीटमेंट का लाभ उठा सकते हैं।

आसान दावा प्रक्रिया : आप चाहें तो नेटवर्क अस्पताल में कैशलेस ट्रीटमेंट का लाभ ले सकते हैं या इलाज का बिल स्वयं चुकाकर बाद में रि-इम्बर्समेंट क्लेम भी कर सकते हैं। क्लेम करने का तरीका लगभग वही होता है, जो इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन में होता है।

सुविधाजनक : किसी भी हेल्थ पॉलिसी में डे-केयर ट्रीटमेंट की सुविधा बिना किसी परेशानी के समय पर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करती है। इंशुरन्स कंपनी डे-केयर सेंटर या अस्पताल के साथ मिलकर आपके बिल का निपटान करती है, ताकि आप मेडिकल बिल की चिंता किए बगैर शांतिपूर्वक अपना इलाज करवा सकें।

बचत : डे-केयर ट्रीटमेंट जैसे कई कवरयुक्त हेल्थ इन्शुरन्स लेने का एक बड़ा लाभ टैक्स में छूट के रूप में भी मिलता है। इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 80डी के तहत आप प्रतिवर्ष दिए जाने वाले प्रीमियम पर टैक्स में छूट भी पा सकते हैं।

myUpchar बीमा प्लस जैसी अच्छी पॉलिसी लेने पर आपको कई तरह के डे-केयर ट्रीटमेंट का कवर मिल सकता है। इसके तहत कई तरह की सर्जरी का क्लेम मिल सकता है :

हार्ट : कोरोनरी एंजियोग्राफी

आंखें : मोतियाबिंद सर्जरी, आंख में गई किसी बाहरी चीज को हटाना, टीयर डक्ट ऑपरेशन और सुधारात्मक सर्जरी

ईएनटी : कान में गई किसी बाहरी चीज को हटाना, सेप्टोप्लास्टी, नेज़ल साइनस एस्पिरेशन, टॉन्सिल्लेक्टोमी, मायरिंगोटॉमी विद ग्रोमेट इंसर्शन, टिम्पेनोप्लास्टी और मध्य व भीतरी कान के अन्य ऑपरेशन

जीभ : जीभ के रोगग्रस्त ऊतक को काटना, छांटना, ग्लोसेक्टॉमी, जीभ का पुनर्निर्माण और अन्य सर्जरी

कैंसर का इलाज : रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी

अन्य सर्जरी : हीमोडायलिसिस, कोलोनोस्कोपी, लीसन रिमूवल, बवासीर, एपेंडिसेक्टॉमी, हाइड्रोसील ट्रीटमेंट, लिथोट्रिप्सी, स्क्लेरोथेरेपी, थोरैकोस्कोपी, स्किन सर्जरी, हड्डी का टूटना और जॉइंट से संबंधित सर्जरी, मुंह और चेहरे के ऑपरेशन, दांतों से संबंधित कुछ चोटों की सर्जरी आदि।

यहां ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि ऊपर बताए गए नाम, हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियों द्वारा कवर किए जाने वाले बहुत से प्रोसेड्योर्स में से कुछ ही हैं। पॉलिसी लेने के बाद आपको 15 दिन के फ्री लुक पीरियड में अपने पॉलिसी डॉक्यूमेंट को अच्छी तरह से पढ़ना चाहिए, ताकि आपको डे-केयर ट्रीटमेंट के बारे में सही जानकारी मिल सके। myUpchar बीमा प्लस में इन्शुरन्स पार्टनर केयर हेल्थ इन्शुरन्स में ही ऐसे 540 से ज्यादा प्रोसेड्योर्स की लिस्ट बनाई गई है, जिन्हें डे-केयर में कवर किया जाता है।

डे-केयर ट्रीटमेंट किसी भी हेल्थ इन्शुरन्स प्लान का बेहद अहम हिस्सा होता है। क्योंकि यह बीमित व्यक्ति को ऐसे महंगे मेडिकल ट्रीटमेंट जिनके लिए 24 घंटे से ज्यादा समय के लिए अस्पताल में भर्ती नहीं होना पड़ता, उन पर होने वाले खर्चे से बचाता है। डे-केयर ट्रीटमेंट में आमतौर पर सम-इनश्योर्ड राशि तक का क्लेम किया जा सकता है।

(और पढ़ें - सबसे सस्ता हेल्थ इन्शुरन्स कौन सा है)

यदि आपके पास मेडिक्लेम पॉलिसी है तो आपको डे-केयर ट्रीटमेंट पर होने वाले खर्चों के लिए पूरी तरह से आश्वस्त होना चाहिए। किसी भी मेडिकल पॉलिसी के लिए यह उसी तरह का जरूरी फीचर है, जिस तरह खाने में नमक। निम्न बातों का ध्यान रखें, आपको मदद ही मिलेगी।

सम-इनश्योर्ड राशि : अन्य क्षेत्रों की तरह ही स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी महंगाई काफी बढ़ गई है। मेडिकल इन्फ्लेशन के कारण इलाज महंगा हो गया है और इस बात को ध्यान में रखना चाहिए। इसलिए अपनी स्वास्थ्य जरूरतों के लिए एक बेहतर पॉलिसी चुनें, जिसका सम-इनश्योर्ड भी ज्यादा हो।

पॉलिसी का प्रकार : भले आप व्यक्तिगत बीमा पॉलिसी ले रहे हों या फैमिली फ्लोटर, आपको अपने लिए हमेशा एक अच्छा हेल्थ कवर चुनना चाहिए। इसमें आपको ध्यान रखना चाहिए कि यह प्लान आपको मेडिकल खर्चों के विस्तृत कवरेज के साथ ही डे-केयर ट्रीटमेंट का लाभ भी दे।

क्या शामिल नहीं है : आपको अपने हेल्थ इन्शुरन्स डॉक्यूमेंट को अच्छी तरह से पढ़ना चाहिए, ताकि आप समझ सकें कि वह कौन सी बीमारियां या स्थितियां हैं, जिनके लिए आपको क्लेम नहीं मिलेगा।

(और पढ़ें - हेल्थ इन्शुरन्स में क्या कवर नहीं होता)

को-पेमेंट : सबसे पहले हमारा आपको यही सुझाव होगा कि आप को-पेमेंट के विकल्प वाली पॉलिसी न चुनें। इसके बावजूद यदि आपने पॉलिसी ले ली है तो डॉक्यूमेंट को ध्यानपूर्वक पढ़ें और किसी भी इलाज के दौरान बिल का कुछ हिस्सा चुकाने के लिए खुद को तैयार रखें।

नेटवर्क अस्पताल : जो हेल्थ इन्शुरन्स आपने अपने लिए चुना है, जरूर जांच करें कि उस कंपनी के नेटवर्क में कितने अस्पताल हैं। साथ ही यह भी जांच कर लें कि जहां आप रहते हैं, उसके आसपास के अस्पताल इस लिस्ट में हैं या नहीं। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि नेटवर्क अस्पतालों में ही आपको कैशलेस सुविधा मिलेगी। myUpchar बीमा प्लस पॉलिसी लेने पर आपको 8350 से अधिक अस्पतालों में कैशलेस सुविधा का लाभ मिलेगा।

हेल्थ इन्शुरन्स लेने तक तो ठीक है। लेकिन ज्यादातर लोगों के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह खड़ा होता है कि इन्शुरन्स कंपनी को इलाज के बारे में कैसे बताएं और कैसे क्लेम करें। यहां यह भी गौर करने वाली बात है कि एक तय समय के भीतर इन्शुरन्स कंपनी को अस्पताल में भर्ती होने के बारे में बताना भी जरूरी है। नीचे हम आपको कुछ जरूरी बातें बता रहे हैं, ताकि आपको अस्पताल में भर्ती होने पर परेशान न होना पड़े।

नियमित हेल्थ इन्शुरन्स के तहत आपको ठीक उसी तरह से डे-केयर ट्रीटमेंट के लिए भी क्लेम करना चाहिए, जिस तरह से आप अस्पताल में भर्ती होने के समय करते हैं। किसी भी तरह के नियोजित (प्लान किया हुआ) या इमरजेंसी इलाज के लिए नेटवर्क अस्पताल में ही जाना चाहिए, ताकि आपको कैशलेस सुविधा मिल सके। कैशलेस सुविधा एक बेहतरीन सुविधा है और इसके तहत आपको अस्पताल में भर्ती होने के लिए मोटी रकम की जरूरत नहीं होती। आपको चाहिए कि आप कंपनी ने नेटवर्क अस्पतालों के बारे में जानकारी रखें और जरूरत के समय उन्हीं अस्पतालों में जाएं। अस्पताल में जाने पर आपको टीपीए डेस्क से संपर्क करके प्री-ऑथराइजेशन फॉर्म भरने के साथ ही अपने हेल्थ कार्ड और अन्य आईडी प्रूफ की कॉपी जमा करनी चाहिए। यदि आप किसी ऐसे अस्पताल में पहुंच जाते हैं, जो कंपनी के कैशलेस नेटवर्क में नहीं है तो आपको पूरा बिल स्वयं चुकाना होगा। बाद में आप इन्शुरन्स कंपनी में डॉक्टर के पर्चे और सभी बिल सहित जरूरी डॉक्यूमेंट कंपनी में री-इम्बर्समेंट के लिए जमा करवाने चाहिए।

(और पढ़ें - मेडिकल पॉलिसी, मेडिकल लोन की तुलना में कैसे बेहतर है?)

डे-केयर ट्रीटमेंट, चोट या बीमारियों के इलाज के लिए जिन सेंटर की स्थापना होती है उन्हें डे-केयर सेंटर कहा जाता है। यह किसी अस्पताल के अंदर बनाया गया मेडिकल सेटअप भी हो सकता है, जिसे स्थानीय निकाय के साथ रजिस्टर किया गया हो। यह सेंटर किसी रजिस्टर्ड और क्वालिफाइड मेडिकल प्रैक्टिश्नर की देख-रेख में चलाया जाना चाहिए। किसी भी डे-केयर सेंटर के लिए निम्न मुख्य बातें जरूरी हैं - 

(और पढ़ें - कोरोना वायरस इन्शुरन्स क्या है)

  • सेंटर में योग्य नर्सिंग स्टाफ होना चाहिए।
  • सेंटर में योग्य मेडिकल प्रैक्टिश्नर या प्रभारी होना चाहिए।
  • सेंटर में अपना एक पूरी तरह से सुसज्जित ऑपरेशन थिएटर होना चाहिए, ताकि डे-केयर ट्रीटमेंट हो सकें।
  • सेंटर को अपने रोगियों का दैनिक रिकॉर्ड रखना होता है और इन्शुरन्स कंपनी के अधिकृत कर्मचारी के लिए इसे सुलभ बनाना होगा।
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